Tuesday, 22 September 2026

 ✍️ *प्रा. डा. प्रदिप आगलावे इनके नागपुर विद्यापीठ आर्थिक भ्रष्टाचार प्रकरण (?) पर पँथर प्रकाश बनसोड - डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इन पर डाले गये डिफेमेशन केस में बनसोड - डा. जीवने इनका रिप्लाय सादर !*


            *प्रा. डा. प्रदीप ना. आगलावे* ये जब नागपुर विद्यापीठ डा. विचारधारा विभाग तथा डा आंबेडकर चेयर के प्रमुख रहे थे, तब प्रा. आगलावे इन्होने *"डा आंबेडकर अध्यासन"* विभाग मे *"आर्थिक भ्रष्टाचार"* करने का आरोप हुआ. तथा उस संदर्भ मे कुछ गंभिर शिकायतें भी नागपुर विद्यापीठ के कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनके पास की गयी. सदर शिकायत के आधार पर, तत्कालीन प्र-कुलगुरु *डा. राजेंद्र काकडे* इनकी अध्यक्षता में *प्रा. डा. विजया उइके / प्रा. डा. निरज बोधी* यह तिन सदस्यीय समिती गठीत की गयी तथा प्रा आगलावे इन पर लगे आर्थिक भ्रष्टाचार की जाँच की गयी. सदर तिन सदस्यीय समितीने ११ मार्च २०२५ को अपना चौकशी अहवाल तत्कालीन कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनको सादर किया. सदर समितीने *"कुलगुरु इनके अनुमती के बिना कामकाज करना / ज्यादा राशी के व्यवहार रोख से करना / किये गये खर्च की उचित जाँच ना करना / निकर (चड्डी) खरेदी का बील / डा आंबेडकर आँन नेशन एंड नँशनालिझम की ५०० प्रति छपाई का कोई भी प्रमाण ना दिखना या कुलगुरु की अनुमती ना लेना / लंडन दौरा का ५० हजार खर्च बील / हिस्ट्री आँफ आंबेडकराईट मुव्हमेंट यह संशोधन डा आंबेडकर फाऊंडेशन को सादर करते दिखाई ना देना"* आदि विषयों का जिक्र किया गया. प्रा डा प्रदिप आगलावे इन्होने सदर *"तिन सदस्यीय समिती"* के चौकशी अहवाल को, किसी भी न्यायालय में चुनौती नही दी गयी. *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने डा बाबासाहेब अध्यासन विभाग मे हुये नागपुर विद्यापीठ *"समस्त शिकायते / तिन सदस्यीय समिती अहवाल"* को जनता को जाणने हेतु एक *"पुस्तिका"* रुप में प्रकाशीत किया. जब वह *"पुस्तिका"* मुझे भेट की गयी थी, तब वह किताब पढने के उपरांत मे, मै बडा चिंतित हुआ. *प्रा प्रदिप आगलावे*:ये मेरा बहुत ही अच्छा जिवलग मित्र है. प्रदिप के बहुत से *"सुख दुख"* का मै साथी भी रहा हुँ. प्रदिप के शादी का भी मै *"मध्यस्थ"* था. प्रदिप की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण, प्रदिप का जीवन *"सेवाग्राम गांधी आश्रम"* में गुजरा था. गांधी आश्रम में प्रदिप को एक रुम दी गयी थी. प्रदिप के मेहनत के कारण ही उसने उचाँई भी हासिल की. प्रदिप को *"आंबेडकरी विचारों"* मे जोडने / लाने में *प्रा. डा. ज्योती लांजेवार / मेरे (डा जीवने) / एड.  मिलिन्द बनसोड* इन मित्र वर्ग का बडा योगदान रहा है.

           *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने केवल नागपुर विद्यापीठ में किये गये सभी शिकायते / चौकशी अहवाल को प्रकाशित किया. चौकशी अहवाल में *"तिन सदस्यीय समिती"* ने प्रदिप आगलावे इन पर गंभिर आरोप लगाये है. और मैने उस किताब पर केवल *"समिक्षा"* लिखी है. अत: इस विषय को *"प्रा प्रदीप आगलावे* इनकी बदनामी कैसे कह सकते है ? प्रदिप आगलावे इनका व्यवहार / चरित्र शुध्द होना चाहिये. प्रदीप पर हुये आरोपों को *"तिन सदस्यीय समिती"*:ने सही माना है. यह विषय अलग है कि, नागपुर विद्यापीठ द्वारा *"फौजदारी केस"* (Criminal Offence) यह प्रदिप आगलावे इनके विरोध में दायर नही की गयी. अत: *"प्रदिप आगलावे इन्होने डा आंबेडकर दीक्षाभुमी स्मारक समिती"* में सदस्य रहना चाहिये या नही ? यह प्रदिप का तथा स्मारक समिती का विषय क्षेत्र है. परंतु प्रदिप आगलावे इन्होने *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* इनके मार्फत *"सह दिवाणी न्यायाधीश, वरिष्ठ स्तर, नागपुर"* इनके कोर्ट में *पँथर प्रकाश बनसोड / डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके विरोध में *"Spl. C. S. No. 1286/2025"* डिफेमेशन केस दायर की है. सदर केस दायर करने के पहले, एड सिध्दार्थ कांबले द्वारा हमे *"रु. ७५ लाख"* डिफेमेशन नोटीस भेजी थी. परंतु *"कोर्ट फी"* कारणवश अब *"रु. १० लाख"* डिफेमेशन केस प्रदीप आगलावे द्वारा डाली गयी. प्रकाश बनसोड इनकी ओर से वकिल *एड प्रमोद एन. कांबले* तथा डा मिलिन्द जीवने इनके वकिल *एड. सी एफ. भागवानी* यह केस की पैरवी कर रहे है. तथा प्रदिप आगलावे इनकी ओर से *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* पैरवी कर रहे है. बनसोड - डा जीवने इनके वकिल द्वारा कोर्ट में *"रिप्लाय"* दायर किया गया था. परंतु प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने *"रिप्लाय प्रति"* ना मिलने का जिक्र कर *"Ext. 11"* दायर की. परंतु २२ सितंबर को प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने अपनी वह अर्जी वापस ली. अब केस Issue हेतु कोर्ट के सामने प्रलंबित है. शायद भविष्य मे नागपुर विद्यापीठ के *"तिन सदस्यीय समिती"* को भी बयान देणे कोर्ट आना पड सकता है.


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नागपुर दिनांक २२ सितंबर २०२६

Monday, 21 September 2026

 🚩 *नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में गणपती को बिठाकर न्यायालय यह ब्राह्मण हिंदु देव मंदिर का स्वरुप मिला !* न्यायाधीश वर्ग की लायकी न्यायाधीश बनने की नही मंदिर पंडे बनने की है.

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


        पिछले साल मै व्यक्तिगत काम से *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तथा भंडारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* गया था. और भंडारा - तथा नागपुर कोर्ट में गणपति बैठे देखकर उसकी मैने व्हिडिओ बनाकर यु ट्युब मे. / तथा फोटो खिचकर मिडिया में प्रकाशीत कर *"न्यायाधीश"* वर्ग की लायकी *"पंडे"* वर्ग से जोडकर, न्यायाधीश पद से इस्तिफा देकर / हिंदु मंदिर का पंडे होने की बात कही थी. मेरी यह पोस्ट पढकर कोर्ट से दुसरे दिन ही गणपति हटाया गया. इस साल भी *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* में गणपति बिठाये जाने पर, मेरे उस न्युज की दखल लेकर कुछ वकिल वर्ग ने *"प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज"* इनके नाम एक निवेदन देने का प्रयास किया है. *"मुंबई उच्च न्यायालय"*  के न्यायाधीश की लायकी न्यायाधीश बनने की नही तो पंडै बनने की है. न्यायदान को उचित रुप में देने की लायकी उन न्यायाधीश वर्ग में कितनी है, इह पर संशोधन करना होगा. *"सर्वोच्च न्यायालय"* एक भुतपुर्व सरन्यायाधी *धनंजय चंद्रचुड* के पास न्याय लिखने की बुध्दी ना होने  के कारण *"राम मंदिर जन्मभुमी प्रकरण"* मेंं न्याय लिखने वो गणपति शरण गया था. ऐसे एक भुतपुर्व सरन्यायाधीश *शरद बोबडे* वो महाशय भी रामजमभुमी प्रकरण से जुडा था, वो महाशय तो *"सरन्यायाधीश गरिमा - प्रोटोकाल भुलकर* भगवान के सामने पुर्णत: सो गया था. ऐसे ना-लायक (Not Qualified) न्यायाधीश की नियुक्ति होती हो तो, भारत देश का भविष्य क्या होगा ? यह देखकर भारत विकास की चिंता होती है. और *"घुटने अंधभक्त वकिलों* के बारे में क्या कहे ? उन्हे यह पता नही की शासकीय कार्यालय मे *", देवपुजा"*:करना / देव - देवी को बिठाना संविधान विरोधी है. धर्म यह व्यक्तिगत विषय है. आप को पुजा करना हो तो अपने घर करे. शासकिय कार्यालय नही.


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Monday, 14 September 2026

 🌹 *बुध्द वाणीचा नाद !*

       *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो.न. ९३७०९८४१३८


गोडवा साखरेचा शेष नाही तुझ्यात हे

बुध्द वाणीचा नाद नाही तो तुझ्यात रे....


फुलाची कोमलता शोधु या मनात हे

प्रेमाचा मधुर गंध नाही तो तुझ्यात रे

शब्दांचा जागर सुटला ह्या जगात हे

सांजेची शीतल छाया ना ती तुझ्यात रे....


भुंग्याचा गंध नाद फिरे ह्या फुलात हे

फुलांचे निस्सिम प्रेम दिसे निसर्गात रे

आसुसले नयन शोधी कवेची छाया हे

जीवनाचा सार दडला ह्या आसवात रे....


बुध्द मैत्रीचा पथ हा सा-या जगी हे

करुणा नाद फिरे ह्या मना मनात रे

सुर्य किरण छाया ती चंद्राचा ग्रहण हे

बुध्दाचे धम्म चक्र फिरे ह्या जगात रे....


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नागपूर दिनांक १४ सप्टेंबर २०२६

Friday, 11 September 2026

 👌*इंडोनेशिया बाली शहर के होटल ट्रांस में १० - ११ सितंबर २०२६ को दो दिवसीय ICOAH H.Q.: श्रीलंका द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन !*

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


           *श्रीलंका* इस विशाल समुद्री बेट देश मुख्यालय स्थित *TIIKM* संस्थान द्वारा *"13th International Conference on Arts & Humanities"* (ICOAH) का सफल आयोजन इस वर्ष १० - ११ सितंबर २०२६ को, इंडोनेशिया *"बाली"* राजधानी प्रमुख शहर के *"होटल ट्रांस"* में आयोजित किया गया था. परिषद की प्रमुख थिम थी - *"The AI Mirror : Reflecting Humanity, Reimaging the Future."* पिछले साल १२ वी आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन ये *"थायलंड"* इस बौध्द देश में हुआ था. विश्व के विभिन्न देशों में TIIKM संस्थान द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद आयोजन किया जाता है. विश्व के *"नामांकित विद्यापीठ के विद्वान / एक्सपर्ट / अन्य"* सदर परिषद में, *"वेलकम स्पिच / की नोट स्पिच / स्पिकर्स / सेशन चेयरपर्सन"* स्पिच देते है. तथा विश्व से विभिन्न विद्यापीठ के संशोधन छात्र सदर परिषद में, अपने *"संशोधन पेपर"* सादर करते है. सदर संशोधन पेपर विश्व के नामांकित मान्यवर द्वारा उसे *"Evaluation Panel"* द्वारा परिक्षण किया जाता है. सदर संशोधन पेपर जब *"Evaluation Panel"* तज्ञ के पास तपास हेतु जाता है, एक विशिष्ट फार्माट में उस *"संशोधन पेपर"* को जांच करनी होती है. सदर संशोधन पेपर किस संशोधन छात्र का है, उस की जानकारी तक *"Evaluaters"* को नही होती, इतनी गोपनियता *"परिषद आयोजन कर्ता"* इनकी होती है. और जाँच कर्ता *Evaluaters* को भी, सदर संशोधन पेपर *"क्यौं सादर करने उचित"* है, यह शेरा लिखना भी होता है. और आंतरराष्ट्रिय परिषद के *"सेशन चर्चा"* में भी वह Explain करना होता है. कभी कभी Evaluaters को भी *"Session Chairman"* का दायित्व निभाना होता है. *"मुझे स्वयं"* (डा. जीवने) भी सदर कुछ आंतरराष्ट्रिय परिषदों में *"Evaluation Pannel"* का हिस्सा होने का / *"संशोधन पेपर जाँच"* करने के कुछ अवसर मिले है. और मैने भी बहुत सें संशोधन पेपर को Examine किया है. संस्थान द्वारा हमे संशोधन पेपर की जाँच करने पर *"सन्मान प्रमाणपत्र"* प्रदान किया गया है. मुझे राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों में सहभाग लेने हेतु *"देश / विदेश"* में जाने का अवसर आया. कुछ परिषदों में *"मेरी कुछ व्यस्ततावश"* जाना भी संभव नही हूआ. तब मैने आयोजकों को केवल *"संशोधन पेपर"* जाँच करने की अपनी स्विकृति दी थी.

           TIIKM संस्थान द्वारा मान्यवर विद्वान एक्सपर्ट की व्यस्तता को देखते हुये, परिषद सेशन में *Physical Session / Virtual Session"* की भी व्यवस्था की है. जो एक उचित पहल है. पाच - छः साल पहले *"श्रीलंका सरकार"* (सांस्कृतिक मंत्रालय) द्वारा *"बुध्दीस्ट भिक्खु (मांक) विद्यापीठ अनुराधापुर"* में मुझे निमंत्रित किया गया था. तब श्रीलंका देश के *"कोलंबो एयरपोर्ट से लेकर समुचे श्रीलंका दौरें में हमे VVIP"* सन्मान के साथ / *श्रीलंका सेना* की पुर्ण सुरक्षा हमें दी गयी थी. *"HWPL H.Q. Korea"* संस्थान द्वारा दक्षिण कोरीया में हुये *"विश्व शांति परिषद"* का भी निमंत्रण दो - तिन साल पहले था. परंतु वहां *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण समान संदर्भ दिखाई नही दिया. विश्व के बहुत सें *"देशों के मान्यवर"* सदर शांति परिषद में सहभागी थे. परंतु *दक्षिण कोरीया* की आंतरराष्ट्रिय परिषद केवल *"सांस्कृतिक परिषद"* ही दिखाई दी थी. *नयी दिल्ली* में हुयी *"HWPL विश्व शांति परिषद"* के बारें में, *"ना कहे तो ही अच्छा है."* मैने कोरीया आयोजकों को मेरी नाराजगी बताते हुये, *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण / *"विश्व शांति"* के हेतु आऊट पुट हल शोधने की बात भी *लिखित* में कही. अगर यह संभव ना हो तो, *"कृपया मुझे निमंत्रीत ना करे,"* यह बात भी मैने कही थी. *HWPL HQ. Korea* तथा मेरी संघटन *CRPC HQ India* उनकी संयुक्त विद्यमान में आँनलाईन *"आंतरराष्ट्रिय शांती परिषद"* का आयोजन *मेरे गाईड लाईन"* मे किया गया था. जो उच्च कोटी की बडी सफल परिषद रही थी. क्यौं कि, जब अपना समय अंतरराष्ट्रिय परिषदों में देते है, तब *"आऊट पुट हल"* भी बहुत ही जरुरी विषय है. फरवरी २०१८ में *"आंध्र प्रदेश"* सरकार के मुख्यमंत्री *चंद्रबाबु नायडु* इनके मार्गदर्शन में, *"विश्व शांति अमरावती बुध्द महोत्सव"* का आयोजन किया गया था. तब आंध्र प्रदेश सरकार ने *"मुझे"* निमंत्रण के साथ साथ ही *"तिन बस"* की व्यवस्था कर, बुध्द भिक्खु वर्ग को लाने की भी जिम्मेदारी मुझे दी गयी थी. वह महोत्सव भी बडा ही सफल रहा था. मेरी राष्ट्रिय संघटन *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* द्वारा बहुत से राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों का आयोजन तथा *"विश्व शांति रँली"* का भी आयोजन किया गया है. *"राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषद"* इसका आयोजन करते समय, *आयोजकों के पास वह दृष्टी"* होना भी बहुत जरुरी है. विश्व के विभिन्न विद्यापीठों में विभिन्न विषयों पर भी *"संशोधन"* हो रहे है. और हम भविष्य में *"विश्व शांति"* की अपेक्षा करे तो, वह कोई अतिशयोक्ति नही होगी.


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▪️*डा. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक १२ सितंबर २०२६

Saturday, 5 September 2026

 🇮🇳 *RSS प्रमुख डा मोहन भागवत इनका बयाण भारत ये बुध्द का देश है इससे लेकर ओशो रजनीश का बुध्द पर बयाण - इस्लाम ख्रिस्तियन आदि अल्पसंख्याक धर्मीयों का भारत राष्ट्रवाद !*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


              *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) सरसंघचालक - संघनायक *डाँ. मोहन भागव* इनका न्युयार्क (अमेरिका) शहर में आयोजित *"Universal Oneness Celbration"* कार्यक्रम हो या टोरंटो (कँनडा) में आयोजित *"हिंदु विश्व बंधु"* कार्यक्रम हो या ब्रिटन (यु. के.) का कार्यक्रम हो, वहां के स्थानिय निवासींयों के अलावा अ-भारतीय नागरिक संघटनो नें *"कडा विरोध तथा आंदोलन"* किये हुये है. अभी यह विषय भी सुनने में आया है कि, RSS पर *"५५ देशों में बंदी लाने"* की भी चर्चा हो रही है. संघ पर *"आतंकवादी संघटन"* होने का गंभिर आरोप है. इस संदर्भ की चर्चा का जोर कम होने का नाम ही नही ले रहा है. *डाँ. मोहन भागवत* इन्होने न्युयार्क में बुध्द देश बयान देते हुये कहा कि, *"हिंदु राष्ट्र घोषित नही करना है. भारत बुध्द का देश है. हमारे देश में अपेक्षाकृत शांती है. और होनी भी चाहिये. बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है. "* और डा भागवत इनके इस बयान पर, समस्त विश्व में बडी चर्चा हो रही है. परंतु डा भागवत यह बयाण देते हुये एक गलती कर गये है कि, *"बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है."* शायद डाँ भागवत इनको यह पत्ता नही या अज्ञानता हो. *"कंबोडिया (९७%) / थायलंड (९४%) / म्यानमार (८९%) / भुतान (७५%) / श्रीलंका (७०%) / लाओस (६४)*" इन देशों के अलावा *"चायना / जापान / व्हिएतनाम / दक्षिण कोरीया / नेपाल / ब्रुनई / मलेशिया / सिंगापुर / मंगोलीया / हाँगकाँग /तिब्बत / उत्तर कोरीया"* आदि देश - दक्षिण एशिया / पुर्व एशिया / दक्षिण पुर्व एशिया *"आष्ट्रेलिया / रशिया"* इन बुध्द प्रभाव देशों का जिक्र किया जा सकता है. *"अमेरिका / रशिया / चायना / उत्तर कोरिया"* इन देशों को छोडा जाएँ तो, सभी *"बुध्द बहुल देशों में शांती"* दिखाई देती है. भारत के *"धर्म संघर्ष / जाति संघर्ष / संप्रदायवाद"* इन विषयों पर चर्चा ना करे तो, बेहतर है. *मेरे स्वयं* के (डाँ. जीवने) अध्यक्षता में हुये *"सर्व धर्म सभा कार्यक्रम"* में मैने *डां मोहन भागवत* इनको, *"बुध्द धर्म मे दीक्षीत"* होने का आवाहन करते हुये *"विश्व हिंदु परिषद"* का नामकरण *"विश्व बौध्द परिषद"* करने की बात कही थी. मेरा वह भाषण *डा मोहन भागवत* इनके अच्छे स्मरण में होगा ही. दुसरा अहं विषय महत्वपुर्ण है कि, *डाँ मोहन भागवत* इन्होने *"भारत बुध्द का देश है"* (३० अगस्त २०२६) यह बात अमेरिका विरोधपुर्ण आंदोलन के बाद कही है. वही *ओशो रजनीश* इन्होने भी तो, अमेरिका सरकार द्वारा इमेग्रेशन जुडे मामलों में *"अमेरिका देश"* (नवंबर १९८७) छोडने तथा *"२१ देशों द्वारा इंकार"* करने और विमान से भारत उतरने पर कहा था कि, *"बुध्द के देश में आया हुँ. "*  ओशो रजनीश ये *"तेरा पंथी जैन"* है, वही डा मोहन भागवत *"चित्पावन ब्राम्हण"* वर्ग से है. यह संदर्भ छोड दिया जाए तो, *मोहन भागवत और ओशो रजनीश* इनके घटना संदर्भ में बहुतसी साम्यता दिखाई देती है. *ओशो रजनीश*:इनका अमेरिका के ओरेगान रेगिस्तान में *"रजनीशपुरम्"* आधुनिक सुविधायुक्त शहर बसाना / ओशो की आशिशान जिंदगी विषर पर, एक अच्छी पुस्तक लिखी जा सकती है. ओशो रजनीश का *"विपश्यना"* विषय संदर्भ ये दार्शनिक रुप में हो, परंतु *ओशो रजनीश* हमेशा ही आंतरराष्ट्रिय विवाद के बडे पात्र रहे है. *मोहन भागवत* भी तो, आंतरराष्ट्रिय विवाद पात्र विषय हो गये है.

             *डा. मोहन भागवत* इनका *"भारत बुध्द का देश"* यह बयान हो या, *"मुस्लीम वर्ग का विरोध करनेवाला हिंदु नही हो सकता"* यह बयाण हो, आज समस्त विश्व में बडा चर्चा का / विवाद का विषय हो सकता है. भविष्य में द्वेषपुर्ण *"संघ की पाँलिसी"* बदली भी जा सकती है. परंतु संघ का *"नोंदणीकृत संस्था"* ना होना / संघ पर देश - विदेश में *बंदी* लाने की चर्चा / संघ द्वारा करोडो रुपये में बनाये गये *"संघ कार्यालय"* खडा होना / संघ की *"फाईव्ह स्टार संस्कृति"* / विदेशों से आनेवाली *फंडिंग - हिशोब* आदि विषय भविष्य में क्या राजकिय करवट लेंगे, इस विषय पर कुछ भी कहना बडा कठिण विषय है. आज का *"जेन झी / जेन वाय"* प्रक्टिकल / वैज्ञानिक मार्ग अपना रहा है. अत:  *"मंदिर का अर्थशास्त्र"* (Temple Economy) यह विषय रोजगार / उद्दोग / देश विकास का मार्ग ना होना, कल जेन झी *"मोर्चा उस विरोध"* में भी जाए तो, कोई अतिशयोक्ति नही होगी. *"ख्रिस्तियन - इस्लाम"* इन धर्म का ओरीजीन *"आदम - हनोक"* इन मुल नायक से जुडा है. आगे जाकर *इब्राहिम* इनके बाद, *"सारा"* इनकी वृक्ष छाया यह *येशु मसिहा* तक जाती है. वही *इब्राहिम* इनके बाद, *"हाजिरा"* इनकी वृक्ष छाया *हजरत मोहम्मद* (इसवी ६३२) तक जाती है. *"सारा - हाजिरा"* इनका आपसी संबध समजना भी खास जरुरी है. *सिध्दार्थ बुध्द* इनका इतिहास तो, येशु मसिहा से *"६२४ साल पुर्व"* (नया शोध) का रहा है. *येशु मसिहा* इनके *"१२ - ३० साल"* तक का जीवन इतिहास, यह *"अज्ञात"* (Unknown) बताया जाता है.*"बायबल"* में इस विषय पर कुछ भी वर्णन नही है. *निकोलस नोटोवीच* इन्होने लद्दाख के *"हेमिस बुध्द मठ* की प्राचिन पांडुलिपी का संदर्भ देकर, अपनी पुस्तक *"दि अननोन लाईफ आँफ जीसस क्राईस्ट"* पुस्तक में, येशु इन्होने तक्षशीला, लद्दाख, पुरी, राजगीर, सारनाथ, हिमालय जाने का / वहां अध्ययन करने का जिक्र किया है. इसके साथ ही *मिर्झा गुलाम अहमद* इनकी पुस्तक *"अहमदिया"* / तथा विदेशी लेखक *होलगर कर्सटन*:इनकी पुस्तक *"जीसस लिव्ह इन इंडिया"* इन पुस्तकों में, येशु इन्होने *मरियम* इस यहुदी लडकी से, लद्दाख मे शादी करने का / और येशु के *बशारत* या *इलियास* पुत्र का संदर्भ दिखाई देता है. येशु इनको *"सुली पर चढा"* देने के बाद, वे *"जीवित बच निकले"* और भारत के लद्दाख में रहने का संदर्भ है. येशु की कब्र यह श्रीनगर के *"रौजबल मजार"* होने का संदर्भ है. *मुसा* इनकी कब्र भी कश्मिर में बतायी गयी है. इन किताब ने समस्त विश्व में बहस छेड दी है. अगर यह बात सही हो तो, *"ख्रिस्तियन समुदाय को भारतीय"* माना जा सकता है. वही भारत में *"इस्लाम शासकों का शासन होने से, वे भी तो भारतीय"* हो गये है. अगर आप ख्रिस्तियन / इस्लाम समुदाय को, विदेशी मानते हो तो, *"ब्राह्मण वर्ग"* भी विदेश से भारत आकर बसा है. *"ब्राह्मण वर्ग ये किस देश"* सेे भारत आया है ? इन विषयों पर कुछ विवाद भी है. *"ब्राह्मण अल्पसंख्यक वर्ग"* ये हिंदु बहुसंख्यक कैसे बना है ? यह भी प्रश्न है. *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का माध्यम माना है."* हिंदु यह शब्द मुस्लिम शासकों द्वारा दी गयी गाली थी. *"हिंदु - हिनदु  = चोर, काले मुहवाला, नीच आदमी."*  और हिंदु यह शब्द *"ब्रिटीश काल"* में रुढ हुआ. अत: भारत में *"धर्म युध्द - धर्म संग्राम - धर्म संघर्ष"* जारी रखना है, या *"एकता - शांति - अहिंसा"* में पिरोये रहना है, इस पर विचार करे ! वही ब्राम्हण वर्ग *"विदेशी फंड"* किस प्रयोजन से लाता है ? कितने *"बुध्द राष्ट्र संप्रदाय"* ये ब्राह्मण वर्ग को फंडिंग करते है ? *"विश्व बुध्द परिषद / समिट"* में, कौन ब्राह्मण मान्यवर उपस्थित रहे है या रहते है ? विश्व के *"बुध्दीस्ट सेक्ट वर्ग"* इनसे कौन ब्राम्हण संघटन जुडी है ? *योगी आदित्यनाथ* इनकी जीवनी पुस्तक *"The Monk who became the Chief Minister"* में मांक शब्द है, *Saint* यह शब्द नही. Monk यह शब्द विशेषत: *"बुध्द भिक्खु"* के लिए प्रयोग होता है. अभी *"योगी"* इनको भावी प्रधानमंत्री रुप में, *"मोहन भागवत* जी विदेश यात्रा में बोल गये है. क्या योगी जी *"प्रधानमंत्री"* बनने के लिए, योग्य नेता है ? *"दि बुध्दीस्ट सोसाइटी आँफ इंडिया "* (TBSI)  पदाधिकारी वर्ग इस संदर्भ में, क्या कर रहे है ? TBSI संघटन का कोई भी *"संविधानिक पदाधिकारी"*  विद्यमान है क्या ? TBSI का *"सन २००९ से आर्थिक हिशोब"* धर्मादाय आयुक्त कार्यालय किसी ने भी सादर ना करने से, *TBSI मान्यता खतरे* मे है, उसका क्या ? *TBSI"* तमाम स्वयंघोषित नेताओं का लक्ष, *"सरकारी ट्रैझरी"* में जमा *"रु. १३ - १४ करोड"* TBSI राशी पर है ? *राजरत्न आंबेडकर / भीमराव आंबेडकर / चंद्रबोधी पाटील / इंजी. धम्मरतन सोमकुवर* इन्होने स्वयं को *"TBSI स्वयं घोषित अध्यक्ष"* घोषित करनेवाले इस प्रश्न का उत्तर, देश आवाम को देगे या नही ? यह भी प्रश्न है. क्यौं कि, उनकी वैचारिक पात्रता *"विभागीय अध्यक्ष"* तक बनने की है या नही, स्वयं आत्मपरिक्षण करे !!!


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▪️*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर, दिनांक ५ सितंबर २०२६

Monday, 31 August 2026

 🚩🇺🇾 *RSS सरसंघचालक मोहन भागवत की न्युयार्क - अमेरिका के युनिवर्सल वननेस सिलेब्रेशन / टोरंटो - कँनडा / ब्रिटन (यु. के.)  यात्रा की कुटिल राजनीति या कुनीति ?*

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


         *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) प्रमुख - सर्वेसर्वा *डाँ. मोहन भागवत* ये हिंदु धर्म (?) वा *"ब्राह्मण धर्म"* संघटन के *"शताब्दी वर्ष"* पर्व पर, *"अमेरिका (न्युयार्क) / कँनडा (टोरंटो) / युके (ब्रिटन)"*  इन देशों के विदेश यात्रा पर है. ब्राम्हण धर्म ग्रंथ में *"विदेश यात्रा"* निषिध्द है. फिर ब्राम्हण वर्ग यह *"विदेश यात्रा - विदेशी नागरिक"* होना, अहं बडा प्रश्न उत्पन्न करता है. संघ प्रमुख डाँ मोहन भागवत इनकी विदेश यात्रा का *"अमेरिका की ४०+ सघठणों ने  / कँनाडा की २६७ संघठणों"* ने सक्रिय विरोध किया है. संगठण एवं वहां के नागरिक रास्तों पर आकर *"No Platform for Hate"* यह नारा दे रहे थे. न्युयार्क के *"मेडिसन क्वेयर गार्डन"* में "अमेरिकन हिंदुज फाँर एंगेज्ड एंड डायलाँग" इस संगठण ने आयोजीत *"युनीवर्सल वननेस सिलेब्रेशन"* के प्रमुख अतिथी डाँ मोहन भागवत थे. बहुसंख्य स्थानिय संगठणों के विरोध बावजुद, *डा मोहन भागवत* भाषण कर गये है. मोहन भागवत को *"बेशरम, ना-लायक, निर्लज्ज"* यह गाली तक दी गयी. मोहन भागवत इनके *उस भाषण की समिक्षा करे या न करे ?* यह विवाद का विषय हो सकता है. क्यौं कि, *"ब्राह्मण्य नीति जो बोलती है,  विपरीत उलटा उसका विरोधी आचरण होता है. "* न्युयार्क सिटी के मेयर *जोहरान ममदानी* इन्होने विरोध करते हुये वे कह गये कि, *"I don't support the rally, but i don't know if the city has the jurisdiction on cancelling a private event."* परंतु भारत में *"आतंकवादी हिंदु आतंकवाद"* हम अनुभव देखते आये है. संघ से सक्रिय जुडे रहे *यशवंत शिंदे / भंवर मेघवंशी* इन्होने RSS संगठण को छोडते हुये कहा है कि, *"संघ यह आतंकवादी संगठण है."*  बाँम्ब बनाने का प्रशिक्षण देने का भी आरोप किया है. *मोहनदास गांधी हत्या* का आरोप भी संघ पर रहा है. संघ पर बहुत गंभिर आरोप होते रहे. *"संघ पंजीबध्द संस्था नही है."* संघ पर *"विदेशी फंड दुरुपयोग"* का भी आरोप है. मोहन भागवत का विदेश दौरा यह *"फंडिंग की व्यवस्था "* बताया जा रहा है. ब्राम्हण्य संघ पर *"सत्तावाद"* की आँचल छाया होने से, सब कुछ चंगा है.

           अमेरिका में *"विश्व शांती सम्मेलन"* का सफल आयोजन करनेवाली संस्थान *"United States Commission on International Religious Freedom"* (USCIRF) इसने भी डाँ. मोहन भागवत अमेरिका आगमन का विरोध किया. *स्वामी विवेकानंद* इस संस्थान के *"विश्व शांती परिषद"* में अमेरिका गये थे. तब किसी भी ब्राम्हण संघीय संघठन ने, *"विवेकानंद को शिफारस पत्र"* नही दिया था. बौध्द धर्म विद्वान *अनागरीक धम्मपाल* इन्हे सदर परिषद का निमंत्रण था. उन्होने ही *स्वामी विवेकानंद* को अपने साथ अमेरिका ले जाकर, *"अपने समय के पाच मिनट स्वामी विवेकानंद"* को दिये थे. यह एक इतिहास है. *अनागरिक धम्मपाल* के भाषण पर, समस्त श्रोता वर्ग यह मंत्रमुग्ध हो गया था. उनका वह भाषण सुनकर *"साक्षात प्रभु"* उनके सामने खडे हुये है, यह अभिप्राय लोगों का रहा है. मुझे गर्व है कि, *"अनागरिक धम्मपाल का वह एतिहासिक भाषण मेरे संग्रह"* मे है. *अमेरिका* देश में Universal Oneness Celbration का आयोजन *"American Hindus for Engagement & Dialogue"* (AHEAD Forum) इस ब्राम्हण संस्थान ने किया था. *कँनडा* में *"कँनेडियन हिंदुज फाँर आऊटरीच रिलेशन्स एंड डायलाँग"* (CHORD) इस ब्राह्मण संस्थान ने, ग्रेटर टोरंटो एरिया में, *"हिंदु विश्व बंधु"* समारोह का आयोजन किया है. सदर संस्थान यह RSS की घटक दल है, जो विघटनवादीता / नफरत को बढावा देती है. अत: तथाकथित ब्राह्मण वर्ग से *"Universal Oneness"* की बातें केवल पाखंड था.  दुसरा प्रश्न है कि, *"अल्पसंख्यक ब्राह्मण यह बहुसंख्यक हिंदु"* कैसे बना है ? इसके पिछे की राजनीति क्या है ? *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का एक माध्यम माना है. "* दुसरा प्रश्न यह भी है कि, *"हिंदु"* इस शब्द की उत्पत्ति कैसे और कब हुयी ? हिंदु यह भारतीय भाषा का शब्द नही है. वह *"विदेशी शब्द - फारसी भाषा"* (Persian Language) का शब्द है. हिंदु > हिनदु  > हिन + दु > हिन = चोर, निच, काले मुहंवाले... दु = प्रजा. *"हिंदु = चोर, निच लोग."* अत: मुगलो द्वारा दी गयी वह गाली है. और वह गाली संघीय लोगों की मानसिकता बनी है. निचता बनी है. अर्थात क्या *"मोहन भागवत समवेत अतिरेकी हिंदु ब्राम्हण चोर है ? निच लोग है ?"* यह संशोधन का विषय है. और *डाँ मोहन भागवत* आदि अतिरेकी ब्राम्हण की यह विदेश यात्रा *"विश्व मे अशांति"* संदेश लेकर आयी है. जय भीम ! जय संविधान !!!


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▪️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर, दिनांक ३१ अगस्त २०२६

Saturday, 29 August 2026

 🌹 *सी.आर. पी.सी. वुमेन विंग / सी. आर. पी. सी. फिनिक्स विंग की ओर से रक्षाबंधन पुर्णिमा अवसर पर - दिव्यांग छात्रों के लिए भोजनदान  !*


         सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल की वुमेन डाँटर विंग *"सी.आर. पी. सी. वुमेन विंग / सी. आर. पी. सी. फिनिक्स विंग"* की ओर से, *"शासकीय दिव्यांग कर्मशाला,"* सदर, नयी बस्ती, नागपुर के छात्रों को, शनिवार २९ अगस्त २०२६ को रक्षाबंधन कराकर *"भोजनदान"* का भी सफल आयोजन किया गया. साथ ही सदर वुमेन विंग द्वारा *"पांचपावली पोलिस स्टेशन"* जाकर, सभी स्टाँफ वर्ग को भी रक्षबंधन पुर्णिमा अवसर पर, राखी बांधी गयी. सदर कार्यक्रम सफलता में *सीमा बोधनकर / ज्युली (स्वाती) चार्ली / बेला मरिमम / सुमिता झा / जेनिफर पिल्ले कांबले / वैशाली फरकांडे / बबीता सोमकुवर / बबीता मेश्राम / मिसेस श्री बावणे / निशा कुलकर्णी / संजीवनी कुमरे / रुपा राऊत / शिल्पा नेताम / किर्ती राऊत / प्रिती नंदनवार* आदि महिला वर्ग का योगदान रहा. सदर वुमेन विंग के कार्यक्रम सफलता में सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' / दिलिप तांदले / सुनिल किटकुरे* इनका विशेष सहकार्य रहा.

Tuesday, 11 August 2026

 💐 *मिसेस राजेश्री बावने / मिसेस शीला नैताम ये सीआरपीसी वुमेन्स विंग की राष्ट्रिय सहसचिव नियुक्त !*


      *सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल* की डाटर कंसर्न राष्ट्रिय संघटन सी.आर.पी.सी. वुमेन्स विंग की *"राष्ट्रिय सहसचिव"* पद पर *मिसेस राजेश्री आकाश बावणे / मिसेस शीला अजय नैताम* इनकी नियुक्ती सीआरपीसी वुमेन्स विंग की राष्ट्रिय संघटक *सीमा बोधनकर / डॉ. मनिषा घोष* इन्होने सीआरपीसी वुमेन विंग के *ज्युली चार्ली / बेला मरियम / जेनीफर पिल्ले कांबले / डाँ भारती लांजेवार / सुरेखा खंडारे / सुमिता झा / इंजी. गीतांजली नगराले / डाँ. इंदिरा सोमकुवर / रेशमा आठवले / धनमाला गोंडाणे / ज्योती मुदलीवार* इनसे चर्चा कर घोषित की है. सदर नियुक्ती सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के *राष्ट्रिय अध्यक्ष* तथा सीआरपीसी वुमन्स विंग / सीआरपीसी एडव्होकेट विंग / सीआरपीसी एम्पाइज विंग / सीआरपीसी हेल्थ (डॉक्टर) विंग / सीआरपीसी बुध्द आंबेडकरी साहित्यिक (लिटररी) विंग / सीआरपीसी इंजीनियर्स विंग / सीआरपीसी ट्रेड्स एंड कॉमर्स विंग / सीआरपीसी ट्रायबल विंग / सीआरपीसी कल्चरल विंग / सीआरपीसी वुमन्स क्लब के "राष्ट्रिय पेट्रान" - *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इन्हे कर दी है. *राजेश्री / शीला* ये वुमन एमपावरमेंट क्षेत्र से जुडी है. उनके इस नियुक्ती पर सभी पदाधिकारी वर्ग ने उनका अभिनंदन किया है.

Friday, 7 August 2026

 💐 *मिसेस सुमिता झा / मिसेस वैशाली फरकांडे ये सीआरपीसी वुमेन्स विंग की राष्ट्रिय सहसचिव नियुक्त !*


      *सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल* की डाटर कंसर्न राष्ट्रिय संघटन सी.आर.पी.सी. वुमेन्स विंग की *"राष्ट्रिय सहसचिव"* पद पर *मिसेस सुमिता झा / मिसेस वैशाली राजकुमार फरकांडे* इनकी नियुक्ती सीआरपीसी वुमेन्स विंग की राष्ट्रिय संघटक *सीमा बोधनकर / डॉ. मनिषा घोष* इन्होने सीआरपीसी वुमेन विंग के *ज्युली चार्ली / बेला मरियम / जेनीफर पिल्ले कांबले / डाँ भारती लांजेवार / सुरेखा खंडारे / सीमा बोधनकर / इंजी. गीतांजली नगराले / डाँ. इंदिरा सोमकुवर / रेशमा आठवले / धनमाला गोंडाणे / ज्योती मुदलीवार* इनसे चर्चा कर घोषित की है. सदर नियुक्ती सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के *राष्ट्रिय अध्यक्ष* तथा सीआरपीसी वुमन्स विंग / सीआरपीसी एडव्होकेट विंग / सीआरपीसी एम्पाइज विंग / सीआरपीसी हेल्थ (डॉक्टर) विंग / सीआरपीसी बुध्द आंबेडकरी साहित्यिक (लिटररी) विंग / सीआरपीसी इंजीनियर्स विंग / सीआरपीसी ट्रेड्स एंड कॉमर्स विंग / सीआरपीसी ट्रायबल विंग / सीआरपीसी कल्चरल विंग / सीआरपीसी वुमन्स क्लब के "राष्ट्रिय पेट्रान" - *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इन्हे कर दी है. *सुमिता / वैशाली* ये वुमन एमपावरमेंट क्षेत्र से जुडी है. उनके इस नियुक्ती पर सभी पदाधिकारी वर्ग ने उनका अभिनंदन किया है.

Tuesday, 4 August 2026

 ✍️ *भारत को हिंदुस्तान (= चोरों का देश) यें कहनेवाले देशद्रोही - देश गद्दार लोक है !*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


            भारत देश गुलामी का इतिहास बयाण करता है. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९०० से *"२८ वे बुध्द काल"* (इ. पु. सातवी - षटवी शति) तक तथा बाद में मौर्य - हरयक आदि वंश से लेकर *"बुध्द प्रभाव राजवंश ये अखंड विशाल भारत - समृध्द भारत"* (इसवी १० वी शति तक) का महान इतिहास रहा है. सिंधु घाटी में *"चक्राकार स्तुप / स्तुप सामने तरणताल / सिंह मुद्रा / कुबडाकार वृषभ / ज्ञानस्थ भिक्खु"* यह सभी प्रमाण *"पहिला बुध्द - ताण्हणकर बुध्द"* का बोध कराते है. *"विदेशी ब्राम्हण"* (आर्य) का भारत आगमण का इतिहास, *बाल गंगाधर तिलक - मोहनदास गांधी - जवाहरलाल नेहरु* से लेकर बहुत से ब्राह्मण लेखक - ग्रंथ बमाण कर गये है. *"बुध्द कालखंड हो या सम्राट अशोक शिलालेख"* यहां कही भी ब्राह्मण धर्म इतिहास - ब्राह्मण *चाणाक्य कौटिल्य* कथन दिखाई नही देता. अर्थात यह ब्राह्मण *"ग्लोबल्स कुटनीति"*:का रचा गया एक *"झुठा इतिहास"* है. बुध्द काल में *"बम्हन"* (ब्राह्मण शब्द नही) यह शब्द *"विद्वान - श्रमण - समन"*:अर्थ में प्रयोग होता था. पाली भाषा मे *"श / ऋ / ई / औ / क्ष / डः / र / त्र"* यह शब्द नही है. पाली भाषा में *"महायान"* संप्रदाय ने संस्कार कर *"हिब्रु संस्कृत"*:का अविष्कार किया. और इसवी बारावी शति में *वैदिक ब्राम्हणों* द्वारा *"क्लासिकल संस्कृत"* भाषा का अविष्कार किया. पाली भाषा - हिब्रु संस्कृत भाषा की लिपी *"ब्राम्ही - धम्म लिपी"* थी. वही क्लासिकल संस्कृत भाषा की लिपी *"देवनागरी लिपी"* है. देवनागरी लिपी का प्रारुप *"इसवी ११००"* में आने के बाद, वह व्यवहार में इसवी *"इसवी १७९६"* में प्रयोग में आयी. इसवी ८५० मे *शंकर* नामक व्यक्ति का जन्म होता है. वो आगे जाकर *"प्रछन्न बौध्द"*:कहलाता है.  बुध्द धर्म का इ. पु. चवथी - तिसरी शति मे *"हिनयान - महायान"* विभाजन / इसवी पाचवी शति मे महायान द्वारा *"वज्रयान"* संप्रदाय और इसवी आठवी शति में वज्रयान द्वारा *"तंत्रयान"* संप्रदाय / और इसवी दसवी शति में वज्रयान - तंत्रयान द्वारा *"शैव पंथ - वैष्णव पंथ - साक्त पंथ"*:का निर्माण यह इतिहास समझना जरुरी है. इसवी दसवी शति मे *शंकर नामक व्यक्ति का स्वयं को आदि शंकराचार्य"* घोषित करना /  *"महायान बुध्द विहारों पर"* अधिपत्य स्थापित करना / इसवी ग्यारहवी शति में *"वैदिक धर्म / ब्राम्हण धर्म"* की स्थापना / इसवी बारावी शति में *"वेद - उपनिषद - रामायण - महाभारत"* आदि ब्राह्मण्य ग्रंथ का *"कागद"* (शिलालेख / ताडपत्र / ताम्रपट पर नही) पर है / और *"कागज का शोध इसवी १० शति मे चायना"* में लगा है. और यही कारण *"बुध्द धर्म अवनति"* के दिखाई देते है. इसवी सातवी - आठवी शति *"मुस्लिम धर्म"* (मो. पेंगबर जन्म ६२२) शासन कालखंड / भारत में *"मुस्लिम आदि शासकों का भारत पर आक्रमण / अंग्रेजो का आक्रमण / "भारत गुलामी"* का इतिहास कथन करता है. अर्थात *"अंखड भारत ये गुलाम बनना ब्राह्मणशाही राजनिति"* का परिपाक है. *"वर्णव्यवस्था - जाताव्यवस्था"* का उत्पात / मुस्लिम शासकों द्वारा भारतीयों को *"हिनदु > हिंदु > चोर, काले मुहवाले, दस्यु"*  यह गाली प्रयोग दिखाई देती है. *"हिंदु महासभा"* की स्थापना सन १९१५ में *मदन मोहन मालवीय* ने की. वही RSS -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Royal Secret Setvice) की स्थापना सन १९२५ को *डां केशव हेगडेवार* ने की. अस्पृश्य वर्ग *"हिंदु धर्मीय"*:ना होने से अंग्रेजो ने सन १९११ के जनगणना के बाद *"अनुसूचित जाति / जनजात"*  यह दो शेड्युल (अनुसुचि) बनायी थी. *"ब्राम्हण"* हिंदु वर्ग से जुडे नही थे. ब्राह्मण ये *"हिंदु धर्म श्रेणी में कैसे आये ?"* इस विषय पर हम फिर कभी चर्चा करेंगे.

            *"हिनदु > हिंदु"* यह शब्द ना मराठी भाषी / ना हिंदी भाषी / ना भारतीय भाषी शब्द है. वह *"फारशी भाषा"* (Persian) का शब्द है. हिंदु यह दो अक्षरी शब्द नही है. वह तिन अक्षरी शब्द है. *हिनदु = हिन + दु >  हिन = निच, चोर, दस्यु, काले मुहवाले और दु = प्रजा > हिंनदु = हिंदु = चोर, काले मुहवाले लोग, निच लोक"* और हमारे भारत देश को *"हिंदुस्तान = चोरों का देश"* यह गाली देते थे. यही कारणवश *स्वामी दयानंद सरस्वति* इन्होने स्वयं को हिंदु ना कहने की, *"वैदिक"*:शब्द का प्रयोग करने की अपिल की थी. कांग्रेसी राजकुमार *राहुल गांधी* इनके सभी पुरखों का इतिहास *"चोरों"* का हो सकता है. अत: राहुल गांधी के लहु में *"चोरों का लहु"* होने से, वो भारतीय संविधान अनुच्छेद *"इंडिया दँड इज भारत"* यह संविधानिक शब्द प्रयोग ना करते हुये, *"हिंदुस्तान"* कहता है. उपर से राहुल गांधी *"धर्मवाद"* का सहारा ले रहा है. जब कि सर्वोच्च न्यायालय ने *"हिंदु यह धर्म नही माना. जीवन जीने का कला कहा है."* अतः जो लोग भारत को *"हिंदुस्तान"* कहते है, उनके सभी पुरखों का गंंदा लहु उनके शरीर में होने के कारण, वे लोग *"हिंदुस्तान"* शब्द प्रयोग करते है. उनके पुरखों का इतिहास *"चोरी का / गद्दारी का"* इतिहास है. अत: उन चोर / गद्दार / धर्मांध नेताओं से बचे !!! वे देशद्रोही लोग है. वे देश गद्दार लोक है. अत: *संत कबिरदास* इन्होने बिलकुल सही कहा है कि, *"गांडु भडवे रण चढे, मर्दो के हो बेहाल | पतिव्रता भुखी मरे, पेढे खाये छिनाल  ||*

      जय भीम ! जय संविधान !!!


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✍️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपुर दिनांक ४ अगस्त २०२६

Thursday, 30 July 2026

 ✍️ *द्वितिय महायुध्द : क्रुर तानाशाह हिटलर - मुसोलिनी - एवं डाँ. बाबासाहेब आँबेडकर - मोहनदास गांधी - पंडित जवाहरलाल नेहरु - सुभाषचंद्र बोस इनसे लेकर आजाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का सफरनामा एवं भाजपा संघवादी पुंजीवाद - तानाशाही बनाम जेन झी का (सत्याग्रह) आंदोलन !*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


               द्वितीय महायुध्द (१ सितंबर १९३९ से २ सितंबर १९४५) खलनायक जर्मनी के क्रुर तानाशाह *एडाल्फ हिटलर* तथा इटली के क्रुर तानाशाह *बेनिटो मुसोलिनी* इनकी तुलना भारत के प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / केंद्रीय गृहमंत्री *अमित शहा* इनसे करे या नही ??? यह तो एक संशोधनात्मक प्रश्न है. तत्कालीन प्रधानमंत्री *इंदिरा गांधी* इन्होने भारत मे जो *"आपातकाल"* (Emergency) लगाई थी, उसका संदर्भ *"भारतीय संविधान अनुच्छेद ३५२ से लेकर ३६०"* से जुडा है. भारत के राष्ट्रपति इनके सही से *"आपातकाल"* वह घोषित किया गया था. परंतु नरेंद्र मोदी सरकार ने *"अघोषित आपातकाल"* (Undeclared Emergency) भारत पर लादी है, उसका क्या ? भारत मे *"स्पर्धा परिक्षा"* पेपर लिक कारण *"२२ छात्रों की आत्महत्या"* / किसान आंदोलन मे *"६०० के उपर किसान वर्ग की मृत्यु"* / मणीपुर राज्य की *"बर्बरता"* और ऐसे अनगिणत संदर्भ दिये जा सकते है. नयी दिल्ली  जंतर मंंतर *छात्र जेन झी काँकरोच आंदोलन"* (सत्याग्रह) २०२६ ने दिल्ली पुलिस / सीआरपीएफ जवान (सरकारी गुंडे) / संघवाद के बिन-सरकारी गुंडो की बर्बरता - *"लाठीचार्ज - अश्रुगोले - छांत्रों के कपडे फाडना - छात्रों के उपरी भाग पर स्पर्श करना - छात्रों के पिछवाडों दंडा घुसाना"* इसके बारे मे सुनकर / देखकर, सरकार के प्रति कोई भी संवेदनशील व्यक्ति *"घृणा / नफरत"* भाव प्रदर्शीत करेगा. हिटलर / मुसोलिनी काल मे *"द्वितीय महायुध्द"* चल रहा था. नरेंद्र मोदी काल में *"कोरोना महायुध्द"* से बाहर निकलते हुये हम *'आर्थिक महायुध्द"* से जुझ रहे है. अमेरिका *"एप्स्टीन फाईल - लडकीयों से कृष्णलीला"* इसमे नरेंद्र मोदी इनका नाम है या नही ? या *"चायना - अमेरिका"* इन देशों के शासकों के पास *"नरेंद्र मोदी कृष्णलीला फोटो"* उपलब्ध है या नही ? यह भी सँशोधनात्मक विषय है. परंतु नरेंद्र मोदी उन देशों के शासक समक्ष *"नतमस्तक"* होना / आजाद भारत की *"आर्थिक व्यवस्था खस्तहाल"* होना / भारत की अर्थव्यवस्था डामाडोल होने पर भी, *"सत्तावाद खामोशी"* / आजाद (?) भारत की *"गरिबी - बेरोजगारी"* / सरकारीकरण का *"खाजगीकरण"* हो जाना / भारत *"पुंजीवाद - तानाशाह"* (Capitalism - Dictatorship) दिशा की ओर बढ जाना / *"प्रजातंत्र"* (Democracy) की कबर ?दिखना और बडी लंबी यादी है. भारत के *'प्रादेशिक राजनितिक दल शक्ति"* खत्म हो चुकी है. *"विरोधी दल - काँग्रेस"* भी उतना प्रभावी ना होना / कांग्रेस राजकुमार *राहुल गांधी* इनका संविधानिक *"भारत राष्ट्रवाद"* यह भी एक प्रश्न है. राहुल तो देश को *"हिंदु धर्मवाद"* से जोडकर *"हिंदुस्तान"* कह रहा है. जब कि मा. सर्वोच्च न्यायालय अपने निर्णय में *"हिंदु यह धर्म नही. जीवन जीने की कला है"* कहता है. वैसे तो *"सर्वोच्च न्यायालय सत्ता रखेल"* हो जाना / *"सर्वोच्च न्यायालय*" द्वारा भारतीय *"संविधान वाँचडाँग"* से दुर भागना / संघववाद नायक *डाँ मोहन भागवत* इन्होने, कर्नाटक राज्य गृहमंत्री *प्रियांक खडगे* इनके दिये उत्तर में, *"हिंदु धर्म पंजीकृत नही"* है तो, *"RSS"* पंजीकृत होना आवश्यक नही, यह कहा है. अर्थात भारत की *"दिशा - दशा - अवदशा"* यह संदर्भ बहुत कुछ कथन कर गया है.

             हिटलर (जर्मनी) द्वारा *"पोलंड"* देश पर आक्रमण में, *रशिया* (जोसेफ स्टलिन) हिटलर के साथ साथ ही सहभागी था. परंतु हिटलर की *"सत्ता भुभाग विस्तारीकरण भुख"* ने, हिटलर द्वारा *"रशिया"* देश पर आक्रमण ने, *"द्वितीय महायुध्द"* दो भागों में बट गया. *"मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र. "* मित्र राष्ट्र पक्ष में *"रुस (जोसेफ स्टँलिन) / अमेरिका (फँकलिन डेलोनो रुझवेल्ट) / ब्रिटिश (विस्टन चर्चील) / चायना (चियांग काई शेक - माओ)"* और अन्य कुछ देश एक साथ खडे थे. तो धुरी राष्ट्र पक्ष में *"हिटलर (जर्मनी) / मुसोलीनी (इटली) / हिराहितो (जापान)"* यह तिन देश एकसाथ खडे थे. हिटलर - मुसोलीनी - हिराहितो ये *"नाजीवाद / फासीवाद / झारशाही"* के प्रतिक रहे है. द्वितीय महायुध्द मे *"धुरी राष्ट्र"* की हार हुयी तो *"मित्र राष्ट्र"* की जीत हुयी. द्वितीय महायुध्द में हिटलर की प्रेमिका *इव्हा ब्राऊन* / मुसोलीनी की प्रेमिका *क्लारा पेटाची* उनका साथ उनके मृत्यु तक रहा. इटली के विद्रोही द्वारा *मुसोलीनी - क्लारा पेटाची* इनको (२८ अप्रेल १९४५) गोली से छलनी कर, उनका *"शव चौराह पर लटका"* दिया. यह दुर्दर खबर सुनने के बाद *हिटलर - इव्हा ब्राऊन* इन्होने, जमिन के निचे खंदक मे ही *"स्वयं को गोली मारकर"* (३० अप्रेल १९४५) आत्महत्या की. और क्रुर तानाशाह का अंत ऐसा भयानक हुआ. उधर द्वितीय महायुध्द मे *अमेरिका* द्वारा जापान के *"हिरोशिमा*" (६ अगस्त १९४५) तथा *"नागासाकी*" (९ अगस्त १९४५) पर *"अणुबांब"* डालकर जापान के *"झारशाही"* को झुका दिया. हमें द्वितीय महायुध्द का यह इतिहास समझना बहुत जरुरी है. तब ही हम *"डाँ. बाबासाहेब आंबेडकर / मोहनदास गांधी / जवाहरलाल नेहरु / सुभाषचंद्र बोस* इनकी राजनीति - भारतीय स्वातंत्रता इतिहास - युध्द कालखंड और *"कौन नेता सही"* - कौन गलत है तथा *"नेता की दुरदृष्टी"* ? इसे समज सकते है.

             *सुभाषचंद्र बोस* इनको सन १९३८ को,  हरीपुरा कांग्रेस अधिवेशन मे कांग्रेस दल का *"निर्विरोध अध्यक्ष"* चुना गया था. दोबारा सन १९३९ को, त्रिपुरी अधिवेशन में उन्होने मोहनदास गांधी के उम्मीदवार *डाँ पट्टाभी सितारामय्या* इनको हराकर, कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुने गये. वह हार *मोहनदास गांधी* की ही हार थी. कुछ दिन बाद मोहनदास गांधी से वैचारिक मतभेद / कार्यकारीणी सदस्यों के इस्तिफे (जवाहरलाल नेहरु को छोडकर) के कारण, सुभाषचंद्र बोस इन्होने, २९ अप्रेल १९३९ को *"कांग्रेस अध्यक्ष"* पद से इस्तीफा दिया. फिर ३ मई १९३९ को सुभाषचंद्र बोस ने *"आँल इंडिया फारवर्ड ब्लाँक"* (औपचारिक घोषना २२ जुन १९३९) का गठण किया. आगे जाकर सुभाषचंद्र बोस *"जापान"* जाकर, झारशाही शासक *हिराहितो* से मिलकर, भारत आजादी के लिए सहकार्य मांगा. सुभाषचंद्र फिर जापान से सुत्र चलाते रहे. सुभाषचंद्र इन्होने २८ दिसंबर १९३७ को आस्ट्रिया महिला *एमिली शेंकल* इनसे गुपचुप विवाह किया था. जो राजनीतिक कारणवश छुपाया गया. उनको *अनिता बोस फाफ* नामक पुत्री भी हुयी. *रास बिहारी बोस* इन्होने १ सितंबर १९४२ को, *"आजाद हिंद फौज"* (Indian Independence Army) की स्थापना *टोकियो* (जापान) में की थी. उस फौज के *मोहनसिंग* पहले प्रमुख बने थे. परंतु उनके निष्क्रिय होने से, *सुभाषचंद्र बोस* इनके हाथो वह कमान दी गयी. सुभाषचंद्र बोस इन्होने फिर आजाद हिंद फौज में, *"नेहरु ब्रिगेड / गांधी ब्रिगेड / मौलाना ब्रिगेड / राणी झाशी ब्रिगेड"* की स्थापना की. परंतु सुभाषचंद्र बोस की कार्यपध्दति *"अधिनायक वाद"* अर्थात *"तानाशाह"* रही थी तो *जवाहरलाल नेहरु* ये *"आधुनिकवाद - प्रजातंत्र"* (Democracy)  के पक्षधर थे. सुभाषचंद्र बोस ये जर्मनी के हुकुमशहा *हिटलर* से, भारत आजादी के लिए मिले (२९ मई १९४२) थे. परंतु हिटलर ने सुभाषचंद्र को सहकार्य करने को मना किया. परंतु जर्मनी से जापान जाने के लिए *"पनडुब्बी"* की व्यवस्था की थी. सुभाषचंद्र ये इटली के शासक *मुसोलीनी* इनसे भी मिले थे. जापान के *झार शासक* ने सुभाषचंद्र के साथ भारत *"नार्थन क्षेत्र"* से चढाई की. भयानक नरसंहार किया. परंतु सुभाषचंद्र की आजाद हिंद सेना उस नरसंहार को रोक नही पायी. परंतू *"महार रेजीमेंट"* ने जापान के उस हल्ले को रोककर, *'फतह"* हासिल की थी. अगर जापान के *"झार शोषको"* की विजय हुयी होती तो, *"कोरिया"* समान भारत पर भी, *"जापान झारशाही"* का अधिपत्य हुआ होता. अर्थात *"अंग्रेज  गुलामी"* के बदले, भारत पुनश्च *"जापान झारशाही का गुलाम"* रहा होता. *मैने स्वयं* मेरे *"साऊथ कोरीया"* भेट में, मै कोरिया में द्वितिय महायुध्द उन *"स्मृति स्थलों"* को भेट दी थी. सुभाषचंद्र की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को तत्कालीन *"फार्मोसा (तायवान) विमान दुर्घटना"* में गंभिर रुप जलने से हुयी थी. उनकी अस्थिया जापान के *"रेनकोजी बुध्द विहार"* रखी है. परंतु उस मृत्यु पर प्रश्न चिन्ह लगने पर, भारत सरकार द्वारा *"जाँच आयोग"* भी बनाये गये. प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* सरकार ने, *"बोस मृत्यु अहवाल"* घोषित करने की बात कही. परंतु अभी भी वह अहवाल घोषित नही किया गया. वही फैजाबाद के *"गुमनाम बाबा"* और अन्य बाबा के रुप में, *सुभाषचंद्र बोस* इनकी नाम चर्चा होती रही.

             कांग्रेस दल राष्ट्रपिता *मोहनदास क. गांधी / पंडित  जवाहरलाल नेहरु / सरदार वल्लभभाई पटेल*  इनका *"आजादी नायक"* रुप में संदर्भ है. फिर *भगतसिंह / राजगुरु / चंद्रशेखर आजाद"* आदि कांतिकारकों का क्या ? द्वितिय महायुध्द (१९३९ - १९४५) में, *"किस पक्ष में साथ दे ?"* (मित्र राष्ट्र / धुरी राष्ट्र) यह कांग्रेस की भुमिका, बिलकुल ही स्पष्ट नही थी. वे कभी *"ब्रिटिश सरकार"* से चर्चा करते रहे तो, कभी क्रुर तानाशाह *"हिटलर"* से भी ! मोहनदास गांधी इनका जर्मनी तानाशाह *हिटलर"* इनको लिखा पत्र भी चर्चा का केंद्र रहा. *मोहनदास गांधी* सन १९३१ को, इटली के क्रुर तानाशाह *मुसोलीनी* से मिल चुके थे. सन १९४२ का *"चले जाव कांग्रेस सत्याग्रह"* यह द्वितीय युध्द काल में, गांधी - कांग्रेस की बडी ही मुर्खता थी. वह आंदोलन सफल नही हुआ. मार्च १९४२ को *"क्रिप्स कमीशन"* भारत आजादी चर्चा करने भारत आया था. *"संपुर्ण स्वराज या डोमेनियन स्टेट"* इस विषयों पर चर्चा से भी समाधान निकाला जा सकता था. *"गुलाम भारत"* में मुस्लिम लिग नेता *मोहम्मद अली जिना* और अस्पृश्य वर्ग नेता *डाँ. बाबासाहेब आंबेडकर* इनका कांग्रेस के साथ संघर्ष भी जोरों पर था. द्वितिय महायुध्द में *"विश्व की अर्थव्यवस्था"* चरमरा गयी थी. इंग्रज आर्थिक चरमारा स्थिती में *"भारत पर शासन करने के अनुकुल"* नही थे. परंतु अंतर्गत *"मुस्लिम - अस्पृश्य - कांग्रेस संघर्ष"* यह अधिकारों का भी संघर्ष रहा था. *"अखिल भारतीय हिंदु महासभा"* की स्थापना सन १९१५ में ब्राह्मण्य नायक *मदन मोहन मालविय* कर चुके थे. हिंदु महासभा के पहले अध्यक्ष *महाराजा मनिंद्र चंद्र नंदी* थे. बाद में *परमानंद / डाँ बी. एस. मुंजे (१९२०) / विनायक दा. सावरकर (१९३७)"* ये बन गये. *RSS* (Royal Secret Service) इन पर, ब्रिटिशों से जुडे रहने के साथ साथ ही, *"तानाशाह - फासीवाद - नाजीवाद"* विचार पक्षधर होनें का आरोप लगता रहा. RSS का नामकरण फिर *"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ"* किया गया. संघ - हिंदु महासभा ये भारत आजादी से कोसो दुर रही. *विनायक दामोधर सावरकर* इन्होने अंग्रेज जेल से छुटने के लिए, *"१० माफिनामे"* लिखे थे, जिसके परिणाम स्वरुप वि दा सावरकर को, प्रति माह रु. ६०/_ पेंशन अंग्रेजो से मिलती थी. अत: *"हिंदु"* यह शब्द मुस्लिम शासक - अंग्रेज काल की उपज दिखाई देती है. *"सर्वोच्च न्यायालय ने भी हिंदु यह धर्म ना मानकर जीवन जीने की कला"* कहा है. *डां बाबासाहेब आंबेडकर* इन्होने जुलाई १९४१ को, द्वितीय महायुध्द में *"मित्र राष्ट्र"* पक्ष में समर्थन घोषित किया. ता कि *"नाजीवाद - फासीवाद - झारशाही"* की गुलामी (हिटलर - मुसोलीनी - हिराहितो) भारत पर ना आये.  *डाँ. आंबेडकर* ये ब्रिटिश मंत्रीमंडल में *"श्रम मंत्री"* (१९४२ - ४६) बन गये. कांग्रेस ने डाँ आंबेडकर इनको *" देशद्रोही - गद्दार"* कहा था. फिर उसी *काँग्रेस* ने सन १९४२ के बाद, द्वितीय महायुध्द में *"मित्र राष्ट्र"* पक्ष मे, अपना समर्थन घोषित किया. इसे हम क्या कहे ? *कांग्रेस की मुर्खता या अ-दुरदर्शिता ?* सुभाषचंद्र बोस ये डाँ बाबासाहेब आंबेडकर इनसे २ जुलाई १९४० को, मुंबई राजगृह में मिलने आये. परंतु *"अस्पृश्य अधिकार"* संदर्भ में, सुभाषचंद्र बोस इनकी भुमिका स्पष्ट ना होने से, डॉ आंबेडकर इन्होने सहकार्य करने से मना किया. डाँ. आंबेडकर इनके आवाहन पर, *"महार रेजीमेंट"* द्वितीय महायुध्द में कुद चुकी थी. अगर *"मुस्लिम - अस्पृश्य - कांग्रेस"* अंतर्गत संघर्ष ना होता तो, *"भारत को आजादी सन १९४२"* के बाद ही मिली होती. *"१५ अगस्त १९४७ की राह"* (४ - ५ साल देरी) हमे देखना ही ना पडता. भारत देश २६ जनवरी १९५० को *"गणराज्य"* (Republic) हुआ. अर्थात भारत *"प्रजातंत्र व्यवस्था"* (Democracy) की निव रची गयी. *सरदार वल्लभभाई पटेल* इनके बडे भाई *विठ्ठलभाई पटेल* अपने इलाज के लिए विदेश (आस्ट्रिया / स्वित्झरलँड) गये थे. तब *सुभाषचंद्र बोस* इन्होने उनकी मदत की थी. अत: विठ्ठलभाई पटेल ने अपनी 3/4 संपत्ती *सुभाषचंद्र बोस* इनके नाम करने की वसीयत बनायी थी. विदेश में विठ्ठलभाई का निधन हुआ. तब सरदार पटेल ने *सुभाषचंद्र बोस* इनके खिलाफ *"वसियत"* मुकदमा डाला था. अत: सरदार पटेल इनकी *"संपत्ति की भुख"* हमे यहां दिखाई देती है. प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* इन्होने *"प्रजातंत्र"* को पुरा कमजोर करते हुये, *"पुंजीवाद और हुकुमशाही"* (Capitalism - Dictatorship) की जडे मजबुत ही किये है. अर्थात *पुंजीवाद गुलामी"* तथा विदेशी ताकते *"अमेरिका - चायना"* की गुलामी को स्वीकृति दी है. सरन्यायाधीश *सुर्यकांत शर्मा* ये महाशय *"संविधान रक्षक"* (Constitution Watch Dog) दायित्व निभाने में, *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"* में हमे *"ना-लायक"* (Not Qualified) दिखाई देते है. वही भारत भुतपुर्व न्यायाधीश *रंजन गोगाई* इनके राज्यसभा सदस्य पदासिन होने कथन पर, सर्वोच्च न्यायाधीश के न्यायाधीश *उज्वल भुयान* इनके यह शब्द बहुत कुछ कह जाते है, *"Former Chief Justice said - I am going to Rajyasabha to breach the gap between Judiciary & Executive. It is Fundamentally wrong. It is comletely wrong Fundamentally. Those organizing the Separation of Power...."* जय भीम ! जय संविधान !!!


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▪️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक ३० जुलै २०२६

Saturday, 25 July 2026

 ✍️ *मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश सुर्यकांत शर्मा क्या भारत के द्वितिय नंबर के तानाशाह है ? भारतीय संविधान के सरंक्षक (वाँच डाँग) दायित्व निभाने की योग्य क्षमता सरन्यायाधीश सुर्यकांत इनमे विराजीत है ?* (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तानाशाह बनने की चेष्टा ना करे. जनता विद्रोह बिगुल बजाती है.)

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२

          

           भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति हो, या प्रधानमंत्री हो, या सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश भी क्यौ ना हो, *"आम जनता के मालक"* आप बिलकुल ही नही हो. भारत की आम आवाम आप की *"गुलाम"* नही है, ना ही आप *"तानाशाह"* (Dictator) हो. हमारा संविधान *"प्रजातंत्र"* (Democracy) की सही पहचान है. भारतीय *"संविधान अनुच्छेद १४ - समानता अधिकार"* (Right to Equality) प्रदान करता है. और वह संदर्भ हमे राजकिय अधिकार *"एक व्यक्ति - एक मत - एक मुल्य"* (One Man, One Vote, One Value) में भी दिखाई देता है. *"संविधान अनुच्छेद १९ - आजादी का अधिकार"* (Right to Freedom) प्रदान करता है. अत: *"चुनाव आयोग"* (Election Commission of India) आप भी अपनी मर्यादा को मत लांघे. भारत की आवाम को *"गुलाम"* बनाने की चेष्टा ना करे. *संविधान अनुच्छेद २५ - धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार"* (Riight to Freedom of Religion) प्रदान करता है. *"मुस्लिम - शिख - ईसाई"* यह अवंडबर बंद करो. बहुत हुयी है *"धर्मांध मनमानी!!!"* अत: प्रधानमंत्री हो या सरन्यायाधीश इन्होने *"संविधान"* के इस संदर्भ को समझना बहुत जरुरी है. नही तो *"नेपाल - बांगला देश - श्रीलंका"* आंदोलन चेतना का संदर्भ, मैने मेरे एक लेख में पहले ही दिया था. परंतु *"खुर्ची अधिकार की तुम्हारी मग्रुरी"* को, हमारी *"काँकरोच युवा जेन झी"* अब जता चुकी है. उनका आंदोलन *"सत्याग्रह"* का था. परंतु *"मद सत्याधीश"* इन्होने स्वयं को सर्वोच्च *"तानाशाह"* (Dictator) समझकर, जेन झी काँकरोचों पर जो *"निर्गम पोलिस बर्बरता"* (पोलिस लाठी चार्ज / अश्रु गोले / लडकी के कपडे फाडना / लडकी के उपरी भाग पर स्पर्श / लडकी के पिछवाडे में दंडा घुसाना) करने से, उसके लिए शब्द भी कम है. हमारे *"वकिल वर्ग संविधान अनुच्छेद ३२"* अंतर्गत याचिका दायर करता है तो, *सरन्यायाधीश सुर्यकांत शर्मा* अगर यह कहता है कि, *"उसके पास याचिका सुनने तथा व्हिडीयो देखने के लिए समय नही है"* तो, उस खुर्ची के लिए तुम *"ना-लायक"* (Not Qualified) हो. सुर्यकांत इन्होने *"कोर्ट व्हिडिओ"* शेयर करने पर पाबंदी लगाई है. पारदर्शिता रखना तो उनका विशेष दायित्व बना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केवल *"रखेल न्यायाधीश"* हो. अत: आप खुर्ची खाली करो. *'"न्यायाधीश शपथ"* से आप ने *"गद्दारी"* की है. आप *"देशद्रोही"* हो. पहले ही आप पर *"अनैतिक संपत्ती"* जमाने का एक आरोप भी है. अत: आप सभी *"मद सत्ताधीश केवल और केवल जल्लाद"* दिखाई देते हो.

          प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / सरन्यायाधीश *सुर्यकांत शर्मा* आप का *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (अंग्रेल काल संघटन - RSS - Royal Secret Service) इनसे आज कितना निकट संबंध है, वह उन पर ही हम छोडते है. परंतु *"RSS"* संघटन का आदर्श तो, इटली का क्रुर तानाशाह *बेनितो मुसोलिनी* तथा जर्मनी का क्रुर हुकुमशहा *एडाल्फ हिटलर* इनसे रहने का संदर्भ है. और हिटलर - मुसोलीनी उन्होने *"प्रजातंत्र"*(Democracy) को धत्ता बताते हुये, *"तानाशाही"* (Dictatorship) व्यवस्था को रुजा दिया था. और प्रजा का दमन करके, *"प्रजा को गुलाम"* बनाने का इतिहास है. परंतु *"मुसोलीनी - हिटलर इनका अंत""* बहुत ही भयावह हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने *"हिटलर - मुसोलीनी* की राह पर चलते हुये, भारत में *"पुंजीवाद"* (Capitalism) को स्थापित कर, *"तानाशाही"* (Dictatorship) शासन व्यवस्था बना ली. भारत में *"प्रजातंत्र"* (Democracy) को खत्म किया. अगला कदम *"प्रजा गुलामी"* का था. *"जेन झी काँकरोचो"* ने मोदी - शहा के इस षड्यंत्र को चकनाचुर किया. परंतु *"विरोधी दलों"* का *"अंतर्फाड विवाद"* यह हमारे लिए बडा चिंता का विषय है. अब उन्हे एकसाथ आना बहुत जरुरी है. अत: विरोधी दलों को *"ऐल्गार"* करना होगा. काँकरोच आंदोलन यह धर्मेंद्र प्रधान इस्तिफे से भले ही २५ जुलै को खत्म हुआ हो. परंतु उनके सामाजिक - राजकिय आंदोलन अज्ञानता से बाहर निकलने पर फिरसे नयी क्रांती उभर सकती है. और प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* / तब उन्हे चुनाव आयुक्त *ज्ञानेश कुमार* इन्हे खुर्ची खाली करने करने के लिए दबाव लाना होगा. चुनाव प्रक्रिया *"बँलेट पेपर"* से करनी होगी. तब ही भारत में सही अर्थ में *"प्रजातंत्र"* की बहाली होगी. जय भीम ! जय संविधान !!!


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▪️ *डाँ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनाक २६ जुलै २०२६

Monday, 13 July 2026

 👌 *दीक्षाभुमी नागपुर ट्रस्टी विवाद : अत: क्या मध्यम मार्ग रुप मे - दोनो ही गट बुध्द समुदायों से आजिवन फी सदस्यता खुली कर हर पाच सालों ने चुनाव पध्दती का स्वीकार कराने को तैयार है  ?*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             दीक्षाभुमी नागपुर ट्रस्टी विवादो में *"गवई गट - फुलझेले गट"* आमने सामने खडे होकर, एकमेक पर आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप कर रहे है. वही *गवई गट* द्वारा ट्रस्टी अध्यक्ष *भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई* इन्हे अध्यक्ष पद से हटाने की / *विलास गजघाटे* इन्हे अध्यक्ष बनाये जाने की न्युज, हमे मिडिया में दिखाई दी थी. वही *फुलझेले गट* द्वारा आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई जी इनके द्वारा *डॉ. राजेंद्र गवई / विलास गजघाटे* इन्हे ट्रस्टी पद से बरखास्त करने की भी न्युज, हमे दिखाई दे रही है. हमें यह समझना जरुरी है कि, दिक्षाभुमी पर *"फुलझेले गट"* का बहुमत होते हुये, *विलास गजघाटे* फुलझेले गट से जुडे थे. उसी बिच दीक्षाभुमी ट्रस्टीओं की *"तिन जगह"* रिक्त होने से, *भंते नाग दीपांकर / डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम / प्रा. प्रदिप आगलावे* इन्हे फुलझेले गट के बहुमत से लिया गया. उसी दरम्यान किसी काम संदर्भ में, मेरी संघटन *'सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* का प्रतिनिधी मंडल दीक्षाभुमी ट्रस्टी सचिव *डॉ. सुधिर फुलझेले* से मिला था. दिक्षाभुमी ट्रस्टी *विलास गजघाटे* भी वही था. तब मैने सुधिर फुलझले से कहा था, *"सुधिर जी, दिक्षाभुमी ट्रस्टी अच्छे और दुरदर्शी मान्यवर होना चाहिये. आप ने वैसे लोगों का चयन नही किया. दीक्षाभुमी यह धम्म / डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रसार प्रचार केंद्र"* होना चाहिये. उन तिन ट्रस्टी में *डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम* ये नामांंकित न्युरो फिजीशियन ये. वे अपना समय दीक्षाभुमी कामों के लिए नही दे पायेंगे. *प्रा. प्रदिप आगलावे* इनका आंबेडकर विचारधारा विभाग से लेकर महाराष्ट्र शासन आंबेडकर ग्रंथ प्रकाशन समिती का इतिहास बहुत *"दागदार"* है. तब डॉ. सुधिर फुलझेले *मुझे* कहने लगे कि, *"भाऊ, हमारे अगले लिस्ट मे मेरा (डॉ. जीवने) भी नाम है. "* तब मै सुधिर फुलझेले को कहा कि, *"आप मुझे लो या मत लो. परंतु अच्छे तथा दुरदर्शी लोगो का चयन जरूरी है."* यही बात मैने *एड. आनंद फुलझेले* इन्हे भी कही थी. हमारी वह चर्चा खत्म हुयी. सवाल यह है कि, *"फुलझेले गट"* के वह चार ट्रस्टी *विलास गजघाटे / डॉ चंद्रशेखर मेश्राम / भंते नाग दीपांकर / प्रा प्रदिप आगलावे* इन्होने *"गवई गट"* मे पलटी क्यौं मारी ? यह पलटी इतनी सहज भी नही है. *"दीक्षाभुमी आर्थिक भ्रष्टाचार"* में हात कौन धो रहा है ? *भंदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई* इन्हे कोई भी आर्थिक लाभ लेने से, *"कोई औचित्य हमे दिखाई नही देता."* लेकिन अपने बुढापें मे. *"आर्य नागार्जुन ससाई"* जी पिसते नजर आ रहे है. वही भंते जी बदनाम करने का प्रयास *"गवई गट"* द्वारा होना, इतना सहज विषय नही है. वही कुछ महिला समुह द्वारा *"भिक्खुनी का चिवर उतारे जाने का प्रयास"* होना भी, इतना सहज विषय नही है. यहा प्रश्न है, *"हमाम में नंगे कौन है ?"* यह विवाद चल रहा था, तब मैने फोन पर *"दोनो गुट ट्रस्टीओँ से चर्चा करने का प्रयास"* किया. परंतु *"मध्यम मार्ग सफलता"* नही मिली. अत: बौध्द समुदाय के सामने एक *"मध्यम मार्ग"* सादर कर रहा हुं. *"ट्रस्टी"* का अर्थ होता है *"विश्वस्त !"* वे लोग *"दीक्षाभुमी के मालक"* नही है. आप का उन ट्रस्टीयों पर विश्वास है या नही ? यह भी प्रश्न है. अत: बुध्द समाज से *"आजिवन सभासद फी"* (रु  १०,००० से एक लाख तकं) खुली कर, उन आजिवन सभासद में से हर *"पाच साल मे चुनाव पध्दति"* से, *"ट्रस्टीओं का चुना"* जाना अब जरुरी हो गया है. दुसरी बात यह कि, तिन नये ट्रस्टी *भंते नाग दीपांकर / डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम / प्रा प्रदीप आगलावे* इनका चेज रिपोर्ट मा. धर्मादाय कार्यालय द्वारा स्वीकृत किया गया है या नही ?  अगर स्वीकृत नही हुआ हो तो, क्या उन्हे *"सभा में बैठकर प्रोसिडींग बुक"* में सही करने का अधिकार है ? यह भी कानुनी प्रश्न है.

             दीक्षाभुमी का यह विवाद बहुत ही शर्मसार है. दीक्षाभुमी ट्रस्टी गट ये *"दीक्षाभुमी मालक"* ना होने से, उन्होने इस नंगानाच को बंद करना जरुरी है. विश्व मे उस घटना से अच्छा संदेश नही जा रहा है. *"दीक्षाभुमी यह समाज की धरोहर है."* अत: उस पर निर्णय लेने का अधिकार *"बुध्द समाज"* है. धम्म चक्र प्रवर्तन दिन पर *विधायक डॉ नितिन राऊत* इनकी संघटन *"संकल्प"* द्वारा *"भोजन दान"* कराने से, कुछ लोक *"हात में खाने की पत्रावली"*  लेकर घुमते नजर आते है. रास्ते पर ही खाना खाने बैठते है. *"विधायक नितिन राऊत हात में खाने की पत्रावली लेकर, स्वयं घुमकर वह भी अनुभव ले. "* इस *"भिकारवाडा तथा दिक्षाभुमी गंदगी"* पर आवाज उठती हुयी, हमें दिखाई नही देती. उस कारणवश लोगों के कपडे भी गंदे हुये है / ट्राफिक जाम भी हुआ दिखाई देता है. निश्चित *"भोजन दान"* पवित्र कार्य है. लेकिन भोजनदान *कुर्वेज न्यु माँडेल या आय टी आय मैदान"* मे आयोजन कर, *"भोजन करने टेबल / पिने का पानी / हात साफ करने पानी व्यवस्था / भोजन पात्र फेकने डस्टबिन"* आदि व्यवस्था करना जरुरी है. *नितिन राऊत भिकारवाडा* कारणवश बुरा असर *" डाँक्टर्स द्वारा मोफत रोग शिबिर"* पर हो रहा है. मेडिकल अंम्बुलंस आने - जाने में परेशानी हो रहा है. अत: यह व्यवस्था करने की जिम्मेदारी *"दिक्षाभुमी ट्रस्टी"* की है. इस पर गवई गट / फुलझेले गट खामोश है. शायद इसमे *"आर्थिक लाभ"* विषय ना हो. दिक्षाभुमी बांधकाम प्रकरण भी चर्चा का विषय था. वही *"दिक्षाभुमी भुमी विस्तारीकरण"* अर्थात बाजु की *"आरोग्य विभाग / कृषी विभाग जमिन"* इतने सालों से हमें नही मिल पायी. वही उत्तर नागपुर के कमाल चौक स्थित *"समाज भवन - सांस्कृतिक हाँल*" को तोडकर / केंंद्रिय मंत्री *डाँ नितिन गडकरी* इनके माँ के नाम पर, वहा *"अस्पताल"* का निर्माण किया गया है. अत: विधायक *डाँ नितिन राऊत* इनके अनुमती बिना यह संभव नही था. वही सिताबल्डी रेल्वे स्टेशन सामने का पुल *"गणेश मंदिर"* के लिए, बाधा होने के कारण वह तोडा गया. अत: हमारे *"बुध्द समुदाय का विघटन"* ही इसके लिए कारक रहा है. उत्तर नागपुर *"रिपब्लिकन गड"* उध्वस्त करने के *"शुक्राचार्य / अस्तिन के साप"* कौन है ? यह भी जानना हमारे लिए जरुरी है.


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर, दिनांक १३ जुलै २०२६

Sunday, 12 July 2026

 💐 *संजय आवले ये सीआरपीसी ट्रेड्स एंड काँमर्स विंग के अध्यक्ष राष्ट्रिय उपाध्यक्ष नियुक्त !*


      *सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल* की डाटर कंसर्न राष्ट्रिय संघटन *"सी.आर.पी.सी. ट्रेड एंड काँमर्स विंग"* के *"राष्ट्रिय उपाध्यक्ष "* पद पर *संजय आवले* इनकी नियुक्ती सीआरपीसी ट्रेड एंड काँमर्स विंग के राष्ट्रिय अध्यक्ष *इंजी. विजय बागडे* इन्होने सीआरपीसी के *सुर्यभान शेंडे / दिलिप तांदले / संजीवन वालदे / एड डॉ मोहन गवई / डॉ सिध्दार्थ मोरे / एड राजेश लाख / इंजी शिलकुमार गोस्वामी / अश्विन गायकवाड /अभिजित बरुआ / मिलिन्द गाडेकर / डॉ. राजेश नंदेश्वर / सीमा बोधनकर / रेशमा आठवले / ज्युली चार्ली / डॉ मनिषा घोष / डॉ. भारती लांजेवार /सुरेखा खंडारे / डॉ. सीमा बोरकर / बेला मरियम / ज्योती मुदलीयार* इनसे चर्चा कर घोषित की है. सदर नियुक्ती सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के *राष्ट्रिय अध्यक्ष* तथा सीआरपीसी वुमन्स विंग / सीआरपीसी एडव्होकेट विंग / सीआरपीसी एम्पाइज विंग / सीआरपीसी हेल्थ (डॉक्टर) विंग / सीआरपीसी बुध्द आंबेडकरी साहित्यिक (लिटररी) विंग / सीआरपीसी इंजीनियर्स विंग / सीआरपीसी ट्रेड्स एंड कॉमर्स विंग / सीआरपीसी ट्रायबल विंग / सीआरपीसी कल्चरल विंग / सीआरपीसी वुमन्स क्लब के "राष्ट्रिय पेट्रान" - *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इन्हे कर दी है. *संजय* ये सामाजिक कामों से जुडे है. उनके इस नियुक्ती पर सभी पदाधिकारी वर्ग ने उनका अभिनंदन किया है.

Friday, 10 July 2026

 ✍️ *मा. सर्वोच्च न्यायालय यह अब संविधान की रक्षक (Watch Dog) ना होकर /निरपेक्ष सही न्यायदान की क्षमता खोकर / क्या जुते - फाईले खानेवाली फँक्टरी एवं गाली गलौच स्थली हो गयी है ?*

           *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             मा. सर्वोच्च न्यायालय *"संविधान रक्षक"* (Watch Dog) / *"निरपेक्ष - उचित न्यायदान"* (Right Justice) की अहं भुमिका पालन करने की पात्रता यह एक बहुत बडी पहेली बन गयी है. *"अयोध्या रामजन्मभुमी निर्णय / नागरीकत्व प्रश्न / चुनाव पध्दती / विभिन्न भ्रष्टाचार केसेस / कुछ विवादपुर्ण निर्णय"* आदी का उदाहरण दिया जा सकता है. अगर *"कोलोजीयम पध्दति"* ना होती तो, न्याय व्यवस्था के न्यायाधीश *"चपराशी स्पर्धा परिक्षा"* पास होते या नही होते ? यह संशोधन का विषय है. इसलिए न्यायदान व्यवस्था में *"संघ लोक सेवा आयोग"* (UPSC)  के सदृश्य *"न्यायिक लोक सेवा आयोग"* (Judiciary Public Service कमीशन - JPSC) का गठण होकर, मेरिट आधार पर *"न्यायाधीश नियुक्ति "* होना, बहुत जरुरी हो गया है. यह प्रश्न *"न्यायाधीश मेरिट"* का है. नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारीत *"संविधान अनुच्छेद 124 A - National Judicial Appintment Commission"* (NJAC) की मै बात नही कर रहा हुं. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वर्ग पर *"बुट फेकना / फाईल फेकना / न्यायाधीशों पर अभद्र टिप्पणी वा गाली गलौच करना"* यह आम विषय हो गया है. क्या यही *"न्याय व्यवस्था"* पात्रता रही है ? न्याय व्यवस्था की *"गरिमा"* क्यौ धुमिल हो रही है ? इस पर संशोधन होना बहुत जरुरी है. अनुसुचित जाति समुह से जुडे मद्रास उच्च न्यायालय के *न्या. कर्णन* इन्होने न्यायव्यवस्था में *"२० भ्रष्ट न्यायाधीश"* होने की शिकायत प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* इन्हे की थी. नरेंद्र मोदी इन्होने वह शिकायत तत्कालिन सरन्यायाधीश *जे एस केहर* इन्हे भेजी थी. और सर्वोच्च न्यायालय के *"सात बेंच खंडपीठ - जे एस केहर / दिपक मिश्रा / जे चेलमेश्वर / रंजन गोगाई / मदन लोकुर / पी सी घोष / कुरियन जोसेफ* इनके द्वारा न्या कर्णन को छ माह की सजा सुनाई थी. उन सात न्यायाधीश वर्ग से भ्रष्टाचारी न्यायाधीश कौन है ? इस विषय को छोडकर *"स्त्री लंपट / शोषक - रंजन गोगाई* सरन्यायाधीश पद से रिटायरमेंट होने के बाद, अब राज्यसभा मे विराजीत है. अत: हम न्याय व्यवस्था की कुछ धुमिल घटनाओं पर चर्चा करेंगे.

           तत्कालिन सरन्यायाधीश *ए एस आनंद* इनके खंडपीठ में *एड. नंदलाल बालवानी* इन्होने सरन्यायाधीश इन पर २६ फरवरी १९९९ को *"जुता"* फेककर मारने से, तत्कालिन खंडपीठ ने उस वकिल की *"याचिका निरस्त"* करते हुये / अवमानना का दोषी मानकर *"४ माह की सजा, रु २००० जुर्माना, वकिल सुची"* से बरखास्त किया था. फिर २६ साल के बाद वही घटना तत्कालीन सरन्यायाधीश *भुषण गवई* इनके खंडपीठ मे घटीत हुयी. उच्च जाती के *एड. राकेश किशोर* इन्होने भुषण गवई इन पर *"बुट* फेकने के बाद भी, उसकी *"FIR दर्ज नही"* कराई गयी ना ही उस वकिल को कोई शिक्षा मिली. कारण एक *"वकिल लाबी"* बुट फेकनेवाले वकिल के साथ खडी होने से, *भुषण गवई* वह हिम्मत नही जुटा पाये. उत्तर प्रदेश के सत्ताधारी भाजप सांसद *निशिकांत दुबे* इन्होने १९ अप्रेल २०२५ को, तत्कालीन सरन्यायाधीश *संजीव खन्ना* इन्हे भारत मे *"गृह कलह"*(Civil War) करनेवाला कहने पर भी, सांसद निशिकांत दुबे इन पर कोई कारवाई नही हुयी. आज दिनांक १० जुलै २०२६ को, सर्वोच्च न्यायालय के *न्या. विश्वनाथन / न्या. आलोक आराधे* इनके खंडपीठ मे न्यायाधीश को *एड. भानुप्रताप सिंग* इस वकिल द्वारा *"Judicial Servant"* इस अपमानजनक शब्द से सुरुवात कर / लखनौ के ACP को *"अरेस्ट करने"* आदेश दे, यह कहने पर / न्यायाधीश ने हमे *"आदेश देने"* का जिक्र करने पर / एड भानुप्रताप सिंग ने अपने *"हाथ की फाईल"* न्यायाधीश पर फेकते हुये / *सरन्यायाधीश सुर्यकांत* इनको *"माँ - बहन की गाली गलौच"* की. अत: एड सिंग को न्यायालय के सुरक्षा रक्षको ने पकडकर वहा के *"पोलिस चौकी"* ले गये. परंतु *"FIR दर्ज नही"* की गयी. सर्वोच्च न्यायालय की यह घटनाएं क्या *"संदेश"* दे रही है ? क्या सर्वोच्च न्यायालय अपनी *"गरिमा - विश्वास खो चुकी"* है ? ऐसे बहुत सारे प्रश्न खडे होना तो लाजमी है.

           उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के *न्या. राम मनोहर नारायण मिश्रा* इन्होने १७ मार्च २०२५ को एक *"गंभिर यौन पिडन केस"* के निर्णय मे, *"नाबालिग लडकी के स्तन को पकडना / पायजामा का नाडा खोलना / पुल के निचे ले जाना"* इन तमाम घटना को *"बलात्कार का प्रयास"* ना मानकर / आरोपी को बरी किया. अत: उस *"न्यायाधीश के पत्नी - लडकी"* पर यह प्रयोग होना बलात्कार नही माना जाएगा ? प्रकरण की गंभिरता देखकर सर्वोच्च न्यायालय ने उस निर्णय को *"खारीज"* किया, यह अलग विषय है. उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के और एक *न्या. शेखर यादव* यह विश्व हिंदु परिषद के मंच पर ८ दिसंबर २०२४ को जाकर / *"बहुत विवादपुर्ण जातियवादी टिप्पणी"* कर गये. वही दिल्ली उच्च न्यायालय के *न्या. यशवंत वर्मा* इनके बंगले पर, १४ मार्च २०२५ को *"लाखो की करंसी"* मिली थी.  राजस्थान उच्च न्यायालय मे कुछ ब्राम्हण न्यायाधीश - वकिलो द्वारा *"मनु का पुतला"*:बिठाया गया. और ऐसे बहुत सारे विवादपुर्ण न्यायाधीश के निर्णय बताये जा सकते है. इन तमाम केस में उन *"न्यायाधीशो को जेल की शिक्षा - दंड"* नही मिला, जेसे अनुसुचित जाति के न्यायाधीश *सी. एस. कर्णन* को बगैर किसी अपराध से मिला था. शब्द मर्यादा के कारण शब्द को विराम दे रहा हु. प्रश्न हमारे *"न्याय व्यवस्था मेरिट"* का है. *"निरपेक्ष उचित न्याय"* का है. एवं *"भारतीय संविधान रक्षा"* का भी है. क्या *"न्यायाधीशों का Code of Conduct"* यही शिक्षा पढाता है. अत: भारत के भविष्य के बारे मे हम क्या कहे ??? इसलिए ब्रिटिश अंग्रेज काल *"ब्राम्हण्य न्यायाधीश"* बनने पर पाबंदी लगाई गयी थी. कांग्रेस पितामह *मोहनदास गांधी* / संघवाद के *सुदर्शन* / प्राचिन भारत के विचारविद *भर्तुहरी* इनके शब्दों में, भारत की राजनीति *"वेश्यालय"* है. आज वे होते तो, *"न्याय व्यवस्था को भी वेश्यालय"* कहते ? यह प्रश्न है...!!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपुर दिनांक १० जुलै २०२६

Friday, 3 July 2026

 .👌 *विपश्यना - फालुन दाफा साधना से लेकर फालुन गोंग साधना अभ्यास तक जुडे इन महायान - वज्रयान विचारों की उलझन में थेरवादी - नवयान समुह !* (ली होंंगजी लिखित फालुन गोंग / जुआन फालुन पुस्तक समिक्षा)

     *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


          चायना के *"फालुन दाफा'* साधना पध्दति का, बगिचे आदि जगहों पर सहजतासे अभ्यास करते दिखना, इस कारणवश बहुत से भारतीय लोक, जाति - पाति - पंथ - धर्म से उपर उठकरफालुन दाफा की ओर आकर्षित हो रहे है. बहुत से जगहों पर फालुन की प्रदर्शन लगना, प्रसार - प्रचार तंत्र भी होता हुआ, हमें दिखाई देता है. नागपुर के *"लोकमत भवन आर्टगॅलरी"* में भी *"फालुन दाफा"* प्रदर्शनी का आयोजन हो चुका है. मुझे आयोजन टीम से निमंत्रण होने से, मैं मेरी *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* टीम के साथ, फालुन दाफा प्रदर्शनी देखने गया था.वहां फालुन दाफा टीम के साथ मेरा परिचय भी हुआ.साथ ही चायना देश में *"फालुन दाफा"* टीम के साथ, चलनेवाला *"शोषण संघर्ष "* भी सामने आया है. फालुन दाफा साधना पध्दती के प्रायोजक - *ली होंगजी* इन्होने, *चीन* सत्ता शासन क*"शोषण नीति"* के कारण, चायना छोडकर *"अमेरिका"* होने की चर्चा है. *"फालुन दाफा"* इस शब्द का सहज अर्थ - फालुन = सिध्दांत चक्र / दाफा = विधाता का ज्ञान, विश्व का महान मार्ग सिध्दांत, साधना शक्ति - अभ्यास, इस अर्थ स देखा जाए तो, *"फालुन दाफा = सिध्दांत चक्र साधना शक्ति - अभ्यास "*(सिध्दांत चक्र विधाता का ज्ञान) भी कह सकते हैं. *"फालुन गोंग"* इसका अर्थ - *"शरीर + मन दोनों की साधना प्रणाली"* बतायी गयी है. इस साधना पध्दती के अभ्यास के कारण ही, *"शारिरीक - मानसिक"* रुप में *"स्वास्थ "* पर, सकारात्मक परिणाम होना बताया जाता है. अब हम उपरोक्त *"साधना पध्दती"* के इतिहास  - अभ्यास परिणाम, *"विपश्यना"* आदी विषयों पर भी हम चर्चा करेंगे.

     ‌       *"फालुन"* (सिध्दांत चक्र) संदर्भ की, *ली होंगजी* लिखित दो पुस्तके *"फालुन गोंग"* तथा *"जुआन फालुन"*  यह पुस्तके मैने पढ़ी है. साथ साथ ही *"विपश्यना"* साधना पध्दति पर भी वाचन किया है. *"विपश्यना"* का सरल अर्थ - *"अंतर्दृष्टी या स्पष्ट दृष्टी"* कह सकते हैं. विपश्यना में *"जो वस्तु जैसी है, उसे ठिक वैसे ही देखना है - समझना है"* यह भी कह सकते हैं. विपश्यना यह तो, *"आत्मनिरिक्षण"* एवं *आत्मशुध्दी"* की साधना पध्दति बतायी जाती है. इसे *"प्राणायाम"* और *"साक्षीभाव"* इसका मिलाजुला योग भी, कुछ मान्यवर कहते हैं. कुछ मान्यवर *"बुध्दीझम"* से इसका संबंध नकारते भी है. इस संदर्भ में सविस्तर चर्चा हम फिर कभी करेंगे. परंतु व्यक्ति के *"शारीरिक  - मानसिक स्वास्थ्य"* के लिये, *"साधना अभ्यास"* करना कुछ बुरा नहीं है. प्रश्न जब *"बुद्ध धम्म"* से जुडा हुआ होता है, तब *"विपश्यना / फालुन दाफा"* समान किसी भी साधना पध्दती का, कोई भी औचित्य नहीं होता, यह समझना भी जरूरी है. हम लोग *"धम्म और साधना पध्दति"* को एक साथ जोडकर, विवादों को जन्म देते है. *"धम्म"* यह बहुत बडा विषय है. *धम्म* यह आचरण का साधन है. *"साधना"* यह केवल शरिर शुध्दता का साधन है. इसलिए बुध्द हमें *"अष्टांग मार्ग"* पालन की सिख देते है. *"धम्म"* से बढकर कुछ भी नहीं है. *"धम्म"* यह व्यक्ती के साथ साथ, *"समुदाय सापेक्ष"* विषय है. जब कि *"साधना"* यह *"व्यक्ती सापेक्ष"* विषय है, यह समझना भी बहुत जरूरी है. इस लिये केवल *"बुध्द"* यह धर्म (धम्म) बना. ना कि, *"विपश्यना / फालुन दाफा"* यह साधना पध्दती - *"धर्म बना !!!"*

          *"फालुन"* (सिध्दांत चक्र) द्वारा संबंधित *"फालुन गोंग / जुआन फालुन"* यह दो पुस्तके *"ली होंगजी"* इनके *"चीनी भाषा"* में दिये गये, कुछ *"भाषणों का संकलन"* दिखाई देता है. दुसरा संदर्भ यह कि, *"भाषांतरण"* होने के बाद में *"अर्थ"* संदर्भ में बदलाव संभव हुआ हो. और *ली होंगजी* की वह पुस्तके, *"भाषण संकलन"* होने के कारण, *"विषय संदर्भ के अनुक्रम / विषय सादरीकरण"* भी जैसा चाहिए, वैसे हुआ दिखाई नहीं देता. साथ ही *"जी होंगजी"* इनका जुडाव *"महायान / वज्रयान / तंत्रयान"* रहा है. उसमें *"ताओ विचार"* की भर पड गयी. अत: *होंगजी* इनकी  *"वैचारिक स्पष्टता "* ना होने से, पुस्तक *"उद्देश लिखाण से भटकना"* यह दिखाई देता है. अगर उन्होने उद्देश लेकरं पुस्तक लिखी होती तो, वह *"पुस्तक लिखाण"* अलग होता. और उनके द्वारा *"संकलित बतायी गयी साधना पध्दती - एक उन्नत साधना प्रणाली है,"* यह बताने भी वे भुलें नहीं है. कही कही तो *ली होंगजी* इन्होने, *"बुध्द से भी बडा होने की स्वयं तारिफ"* भी की है. जब कि *युनो"* ने, विश्व का सर्वोत्तम शांती धर्म *"बुद्ध धर्म"* को माना है. *ली होंगजी* इन्होने तो, *"जन / शान / रेन"* (सत्य / करुणा / सहनशीलता)  इस त्रयी से ही, उनके *"साधना का मार्ग"* बताया हुआ है. *बुध्द* तो उसके आगे भी चले गये है. *"बुध्दत्व प्राप्ति"* को साधना, क्या *होंगजी* के साधना से संभव है ? यह भी प्रश्न है‌. *होंगंजी -  "चीगोंग* (प्राण शक्ति) / *गोंग* (साधना शक्ति) / *फाशन* > फा > सिध्दांत शरीर - ज्ञानप्राप्त व्यक्ती का शरीर/ *शिनपिंग* (मन या हृदय की प्रकृति) / *दान* (शक्ति पुंज) / *दिव्य नेत्र* (माथे का मध्य) आदि आदि शब्दों के बिच ही, उनकी *"साधना घुमती"* हुयी नज़र आती है. उन्होंने *"साधना और अभ्यास"* इसको अलग अलग माना है. *तथागत बुध्द* इनके महापरिनिर्वाण (इ. पु. ४८३ नये शोध अनुसार इ. पु. ५४३) के बाद, *पहिली शती* (इसवी ७२) में कश्मिर हुयी - *"चवथी बौध्द सांगिती"* में, बुद्ध धर्म यह *"हिनयान / महायान"* संप्रदाय में विभक्त हुआ. इतिहास में *"हिनयान"* यह १८ भागों में विभाजीत होने का संदर्भ है. साथ ही, *"थेरवाद (स्थविरवाद) / सर्वास्तिवाद (वैभाषिक) / सौतांत्रिक"* यह प्रमुख तिन संप्रदाय दिखाई दिये. यही नहीं तो, *"हिनयान / थेरवाद"* बौध्द संप्रदाय भी अलग अलग बताये गये. वही *"महायान "* (पहिली शती में उदय) ने *"वज्रयान (५ - ७ वी शती) / तंत्रयान संप्रदाय (८ वी शति)"* को जन्म दिया. वही वज्रयान / तंत्रयान ने, *"शैव पंथ / वैष्णव पंथ / शाक्त पंथ"* (९ - १० वी शति में) इनकी निव भी रखी. परंतु *होंगजी* इन्होने उन संदर्भ के प्रस्तुतीकरण को, समजा हुआ हमें दिखाई नहीं देता. महत्वपूर्ण यह कि, *"हिनयान / महायान / वज्रयान / तंत्रयान"* बौध्द संप्रदाय विचार तथा *"विपश्यना"* साधना विचार भी, यह सहजता से समझे जा सकते हैं. *बाबासाहेब डॉ आंबेडकर* इन्होने १४ अक्तुबर १९५६ को, हिनयान में कुछ सुधार कर *"नवयान बौध्द"* होने की बात कही. *"दि बुद्धा एंड हिज धम्मा"* यह ग्रंथ बहुत सरल सोपी भाषा में लिखा है. परंतु *ली होंगजी* द्वारा लिखित साधना संदर्भीत पुस्तके, सरल - सोपी भाषा में नहीं दिखाई देते. अत: सरल सोपी भाषा में ही *"फालुन साधना - अभ्यास"* लिखाण का प्रयास हो.

            *ली होंगजी* इन्होने "फालुन" संदर्भीत पुस्तक में, *"चीगोंग"* (प्राणशक्ती) का संदर्भ, *"प्राचिन काल"* से बताया है. बुध्द काल का संदर्भ देखे तो, *"भिक्खु संघ"* के भिक्खु लोग *"अर्हत / बोधिसत्व"* अवस्था तक जाने का संदर्भ है. उनकी साधना पध्दती यह *"शाक्यमुनी बुध्द"* इनके विचारों की रही है. प्राचिन काल में *"२८ बुध्द"* होने का संदर्भ है. ८४ हजार बुध्द नहीं. *अवलोकितेश्र्वर* इनको तो *"बोधिसत्व"* बताया गया है. *"बुद्ध नहीं."* तथा *नागार्जुन* इन्हे भी बोधिसत्व ही बताया गया है. उनका संदर्भ भी महायान से जोडा जाता है. महायान संप्रदाय में *"मंजुश्री / मैत्रेय"* आदि का संदर्भ आता है. *बाबासाहेब डॉ आंबेडकर* इन्हे भी, काठमांडू के "जागतिक बौध्द परिषद - १९५४" में, *"बोधिसत्व"* यह महान बौध्द पदवी, भिक्खु संघ द्वारा ही दी है. महायान / हिनयान बौध्द साहित्य पर, हम फिर कभी चर्चा करेंगे. *"फालुन गोंग"* (शरीर + मन दोनों की साधना प्रणाली) का संदर्भ बौध्द साधना प्रणाली से जुडा दिखाई देता है. बुध्द धर्म में *"आत्मा"* इस वस्तु को नकारा है. *बुध्दघोष* इन्होने *"विशुध्दीमग्ग"* ग्रंथ में आत्मा नकारते हुये कहा कि, *"कम्मस्स कारको नत्थि विपाकस्स च वेदको | सुध्दधम्मापवत्तन्ति एव ऐतं सम्मादस्सनं ||"* (अर्थात - कोई कर्ता नहीं है, जो कर्म को करता है, शरीर का अवयव घटक चक्र स्वयं ही अपने आप घुमते रहाता है. यही वस्तुस्थिती है.) *वेदांत दर्शन* ने भी  *"आत्मा"* संदर्भ में, *बुध्द* के विचारों की ही कॉपी की है. जैसे - *"नात्मा भावेषु ....!"*- (अष्टावक्र गीता ७:४) (अर्थात - शरीर में आत्मा नहीं रहती.) बुध्द ने विश्व का कर्ता नहीं माना. *"न हेत्थ देवो ब्रम्ह संसारस्य अत्थि कारको | बुध्दधम्मा पवत्तन्ति हेतुसंभारपच्चया ति ||"* (अर्थात - विश्व का कोई कर्ता नहीं है. सृष्टी के नियमानुसार सृष्टी चक्र अपने आप शुरु रहता है.) *"विपश्यना"* का उल्लेख *सुत्तपिटक* (दिघनिकाय) इसमें दिखाई देता है. *"अंगुत्तर निकाय"* (कालामसुत्त) में बुध्द ने, *"तंत्र - मंत्र - दैवी शक्ति"* को नकारा है. बुध्द ने *"चार भौतिक तत्व"* को ही माना है. - *"पृथ्वी / आप (जल) / तेज (अग्नि) / वायु"* तत्व. बुध्द ने *"आकाश"* तत्व को नहीं माना. *"मृत्यु"* के उपरांत शरीर भी, *"चार तत्वों"* में ही विलिन हो जाता है. अत:  *जी होंगजी* इन्होने बुध्द के इस विचार को समझना होगा. *"महायान का उदय"* पहिली शती में हुआ था. और *"त्रिपिटक"* का निर्माण तो, यह उसके ही पहले, *"तिन बुध्द सांगिती"* में हो चुकां था. *"फालुन गोंग अभ्यास पध्दति"* इस प्रकरण को छोडा जाए तो, समस्त पुस्तक *"सिर के उपर से"* जाती हुयी दिखाई देती है. *"फालुन गोंग"* में पांच क्रियाओं का संग्रह है. *"बुध्द सहस्त्र हस्त प्रदर्शन क्रिया / फालुन स्थिर मुद्रा क्रिया / विश्व के दो छोरों का भेदन क्रिया / फालुन अलौकिक परिपथ क्रिया / दिव्य शक्तियों को सुदृढ करने का मार्ग क्रिया."* अत: अन्य साधना पध्दति सरल पध्दति से कैसे हो ? इस प्रकार साधना पुस्तक की रचना कराकर,  *ताओ विचार* आदि अवांतर विषयों को समावेश ना करे तो, यह बहुत अच्छा होगा. साधना अभ्यास में *"शुद्ध बुद्ध विचार"* हो. मिलावट नहीं !!! अंत में *"साधना विचार"* यह हमारा अंतिम उद्देश (ध्येय) नहीं है. *"शुध्द मुल बुध्द धम्म"* पालन / प्रसार - प्रचार ही हमारा उद्देश होना, बहुत ही जरुरी है. हम केवल *"साधना"* की बीच ही उलझकर, हमारा *"मुल उद्देश"* को भुलं रहे है. *"विपश्यना / फालुन दाफा"* आदि साधना से बाहर निकलने में, वह साधक लोग उदासीन ही दिखाई देते है. जो भविष्य में हमें हमारे *"बौध्द धर्म"* (धम्म) के अस्तित्व की समस्या होगी !

         जय भीम ! नमो बुध्दाय !!!


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▪️ *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपुर दिनांक ३ जुलै २०२६

Wednesday, 1 July 2026

 👌 *बुध्द सत्याचा बोध...!!!*

       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


निसर्ग चक्र संसारातील

प्रात: काल निर्मल मन

प्रेम मैत्री सत्य अहिंसा 

प्रज्ञा शील करुणा

स्वातंत्र समता बंधुता न्याय

हा जीवन बोध करतांना

कार्य कारण भाव - प्रतित्यसमुत्पाद

बुध्द सत्याची जाण देतो ....

मनातील दडप आवरण

घालवावे कसे हा अहं प्रश्न

असत्य - दगाबाज जग

रक्ताळलेले हिंसा तांडव

अ-शील भ्रष्टाचार पोखरण

नेहमी आ वाजुन उभे असतांना

तुझा प्रेम मैत्री करुणा हाथ

मनाला शांतीची अनुभुती देतो....

तुझ्या प्रेमाच्या पाशेत

मनाला येणारी शांत झोप

हवी हवीसी असणारी चेतना

परंतु वातावरणातील दुषितता

सर्व काही उध्वस्त करतांना

सुर्योदय किरण उत्सर्ग

माणसाला नित्य जागवतांना

बुध्द सत्याचा बोध करुन जातो ....


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नागपूर दिनांक २ जुलै २०२६

Monday, 29 June 2026

 .👌 *लखनौ स्थित डॉ बाबासाहेब आंबेडकर अस्थिकलश स्थल (डा आंबेडकर महासभा) (?) गोपनीय रुप से हटाने का मोदी - योगी सरकार की रणनीति ! बहुजन समाज नेता मायावती / सांसद रावण गहरी निंद मे ?*

       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


            अभी अभी कुछ दिन पहले बिहार के एक्स डीआयजी *आर एस कैथल* (IPS) इनके साथ बिहार के एक्स चिफ इंजिनियर *राजेंद्र प्रसाद* मान्यवर नागपुर तथा मेरे निवास आये थे. और *राजेंद्र प्रसाद* इन्होने मेरा संदर्भ भारत सरकार के एक्स सचिव *हरिश चंद्र* (IAS) इनको दिया था. आज ही मुझे मा. *हरिश चंद्र* जी इनका फोन आया. और उत्तर प्रदेश के 10, विधान सभा मार्ग लखनौ स्थित *"डॉ. आंबेडकर महासभा"* कार्यालय समेत *"बाबासाहाब डॉ. आंबेडकर इनकी अस्थि स्थल"* तथा *"बोधिवृक्ष"* हटाने  की जानकारी मुझे दी. इस संदर्भ मे एक्स सचिव भारत सरकार *हरि चंद्र* (IAS) तथा *एस. आर. आर. दारापुरी* (IPS) इन्होने डॉ. आंबेडकर महासभा के *"संस्थापक सदस्य"* होने के नाते, सदर *"गैरकृत्य का विरोध"* कर, इस गैरकृत्य को रोकने की मांग *'भारत के राष्ट्रपति / प्रधानमंत्री / विरोधी पक्षनेता / उत्तरप्रदेश मुख्यमंत्री"* से लेकर सन्मानिय पदाधिकारी वर्ग से की है.

        सन १९९१ को प. पु. *"डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जमशति"* मनाने के उद्देश से, लखनौ स्थित *"10, विधान सभा मार्ग"* स्थित सदर संस्थान को आबंटीत की गयी थी. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इनकी पत्नी स्मृतिशेष *सविता आंबेडकर* द्वारा डॉ बाबासाहेब का अस्थिकलश वहा स्थापित किया गया. तत्कालीन राष्ट्रपति *के आर नारायणन* इनके शुभ हाथो श्रावस्ति से *"बोधिवृक्ष शाखा"* वहां रोपित की गयी. भारत के प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोटी* इन्होने भी उस पावन स्थल पर भेट देकर, अपनी आदरांजली दी थी. अत: वह धरोहर कितनी महत्वपूर्ण है, इसका संदर्भ दिखाई देता है. परंतु अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री *योगी* तथा कुछ *"अवांछित तत्व गुपचुप तरीके से वह पावन स्थली को हटाने का प्रयास"* कर रही है. अत: इस संदर्भ मे विरोध करने हेतु दिनांक १६ जुन २०२६ को शाम ५. ०० बजे *"होटल प्रेमियर* लोक भवन गेट क् ९ के पास, बेल्लारी लेध, आंबेडकर महासभा की आवश्यक बैठक बुलायी गयी. तथा इसका पुर्णत: विरोध करने हेतु आंदोलन करने का निर्णय लिया गया. अत: आप के भी सहयोग की अपेक्षा है. बहुजन समाज पक्ष की *मायावती* तथा सांसद *रावण* भी अपनी भुमिका जाहिर करे.


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो. न. ९३७०९८४१३८

Wednesday, 24 June 2026

 🧜‍♂️ *हे विशाखा मिगार माते....!!!*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो.न. ९३७०९८४१३८


हे विशाखा मिगार माते

तुला मानवी नैतिक संस्कार 

अंग देश भद्दीय नगर व्यापारी 

तुझे पिता धनजय सेठ ह्यांच्याकडुन

जन्मजात मिळाले होते गं

तुझ्या पित्याने तुझा विवाह

श्रावस्ती धनवान सेठ निगण्ठ उपासक

मिगार पुत्र पुण्यवर्धन 

ह्याचे सोबत करुन दिल्यानंतर

तुला घरातुन निरोप देतांना

तुझ्या जन्मजात पित्यांनी

दहा गोष्टीची जाण करुन दिलेली होती

घरातील अग्नी बाहेर जावु न देणे

बाहेरचा अग्नी घरात येऊ न देणे

अग्नी अर्थात गृह गुपिते, भांडणे, विवाद

जो परत करणार असेल त्याला काही देणे

जो परत करणार नसेल त्याला न देणे

जो देईल त्याला देणे

जो ना देईल त्यालाही देणे

प्रसन्न चित्त बसणे

प्रसन्न चित्त खाणे पिणे

अग्नी प्रज्वलित राहील काळजी घेणे

येथे अग्नी अर्थात गृह प्रकाश होय

गृहदेवतांचा आदर सत्कार करणे

आणि तु सासुरवाडी श्रावस्ती येथे

नव्याने वास्तव्यास आली असतांना

नग्न निगण्ठ स्वागतास विरोध केल्याने

सासरे निगण्ठ उपासक मिगार

ह्यांच्या क्रोधाला सामोरा गेली होतीस

तुझे पिता सेठ धनंजय माता सुमना

सम्राट प्रसेनजीत ह्यांच्या विनंतीवर

सम्राट बिंबिसार ह्यांच्या आज्ञेवर 

कोशल देश साकेत नगर येथे

स्थानंतरीत झालेले होते

आणि तु सुध्दा पिता धनंजय सोबत

साकेत अर्थात अयोध्या येथे

तुझ्या विवाहाच्या आधी

गर्भ श्रीमंतीत वास्तव्यास होतीस

विवाहानंतर ही श्रीमंती कायम होती ....

तुझे सासरे मिगार हे नग्न निगण्ठ उपासक

आणि तु तर तथागत बुध्द उपासक

दोन परस्पर विरोधी विचार दिशा

मग वैचारिक विवाद हा असणारचं

तुझे सासरे भोजन करीत असतांना

एक बौध्द भिक्खु भिक्षाटनास घरी आला

तुझ्या सास-यांनी बुध्द भिक्खुकडे 

पुर्णत: दुर्लक्ष केलेले होते

तेव्हा तु भंतेना म्हणाली होतीसं

भंते कृपया तुम्ही पुढे जा

तुझे सासरे शिळे अन्न खात आहेत

तेव्हा विशाखाचे हे शब्द ऐकूण

तुझे सासरे तुला माहेरी साकेत नगरीला

सोडण्यास फर्माण सोडून देतात

तेव्हा तु पिता नियुक्त आठ पंचासमोर 

आपले निदोर्षत्व सिध्द करण्याची मागणी

आपल्या सासरच्यांना केली होतीस

तेव्हा तुझ्या कुशाग्र बुध्दीतुन

आठ पंचानी तुला निर्दोष निर्णय दिल्यावर

आपल्या माहेरी जाण्याचा तुझा निर्णय

तुझ्या सासरच्यांना दिला होता

सासरच्यांना त्यांची चुक लक्षात आली

तेव्हा तुझ्या सासरच्यांनी मागितलेली माफी

आणि तुझे सासरे मिगार ह्यांनी

पुढे बुध्द उपदेश ऐकुण

बुध्दाचे पुर्णत: उपासक होवुन

तुझे सासरे मिगार ह्यांनी

तु पुत्रवधु असतांनाही 

तुला मातेचा दर्जा दिला असल्याने

तु विशाखा मिगार माता म्हणुन

सर्वदुर परिचीत झाली होतीस

आणि हा तुझा इतिहास आहे ....

हे विशाखा मिगार माते

तथागत बुध्द ह्यांच्याकडुन सुध्दा

तु आठ वर मागुन घेलेलेले होते

पावसाळ्यात भिक्खु संघाला चिवर दान

विहारात दाखल होणा-या भिक्खुंना भोजन

विहारातुन बाहेर जाणा-या भिक्खुंना भोजन

आजारी भिक्खुंना भोजन

सुश्रुषा करणा-या भिक्खुंना भोजन

आजारी भिक्खुंना औषधी पुरविणे

भिक्खु संघाला खीर दान करणे

भिक्खुणीला स्नानाकरीता चीवर देणे

ह्या आठ वरांच्या बुध्द अनुमतीनंतर

बुध्दांना तु सांगितलेली कारणे

तुझी प्रसन्नता - तुझा आनंद 

तुझी शांती - तुझी सुख तृप्ती अनुभुती

हृदयाला मिळणारी शांती

श्रध्दा - बल नैतिक सामर्थ 

सप्त संबोधी अंग प्राप्ती

आठ वर मागण्याचा तुझा पावन उद्देश

आणि बुध्दानी केलेले पुण्यानुमोदन

हा एक इतिहास झालेला आहे....

हे विशाखा मिगार माते

श्रावस्ती नगरीतील तुझी दानशीलता

तुझ्या बुध्दीज्ञान कौशल्याची धार

तुझे घर प्रंपच सांभाळ कौशल्य

तु संघाला दिलेले पुर्वाराम विहार दान

उपासिकात दानशील होण्याचा पहिला मान

तुझा संघाला असलेला मदतीचा हात

तुझी करुणा - तुझे प्रेम वात्सल्य

तुझे धैर्य - चिकाटी - त्याग - समर्पण 

तुझे नैतिक चारित्र्य

ह्या संदर्भात शब्द ही अपुरे आहेत

बुध्द धम्म मिशन करीता

श्रावस्ती नगरी पासुन 

ब-याच ऐतिहासिक बुध्द स्थळांना

माझ्या बरेचदा भेटी झालेल्या आहेत

तेव्हा प्राचीन बुध्द इतिहास

आपले शब्द मला बयान करीत असतो

प्राचीन बुध्द इतिहासात मी रममाण होतो

तुझ्या गुणशीलतेचा आज शोध घेतो तेव्हा

मी पुर्णत: अबोल झालेला असतो

विशाखा मिगार माता पुन्हा होणे नाही

तुझ्या श्रावस्ती नगरीला

महान दानशील अनाथ पिंडक

डाकु अंगुलीमाल ह्यांचे अहिंसक होणे

राजकुमार जेत ह्यांचे जेतवन

जेतवनातील सुवर्ण मुद्रा व्यवहार

बुध्दांच्या पंचवीश भेटींचा

असा बराच मोठा इतिहास आहे

तेव्हा आता फक्त नतमस्तक होणेच

आमच्या हातामध्ये शेष आहे

तरी पण एकदा तु आमची आई व्हावी

तुझी करुणा शील मैत्री

तुझे प्रेम वात्सल्य मिळण्याची इच्छा 

आमची नेहमीचीचं राहाणार आहे

हे विशाखा मिगार माते !

हे विशाखा मिगार माते !!

हे विशाखा मिगार माते !!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपूर दिनांक २४ जुन २०२६

Sunday, 21 June 2026

 ✍️ *जेन झी काँकरोच जंतर मंतर आंदोलन की भावी दिशा - दशा (?) एवं स्वच्छ आजाद भारत का सत्याग्रह ही अगला पडाव ! ब्रिटिश गोरे अंग्रेज शासन बनाम भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन व्यवस्था !!!*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


         ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का शासन बहुत बुरा था यह कहना *"भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन"* में कहना जागति होगी. अगर ब्रिटिश गोरे अंग्रेज भारत में ना आये होते तो, भारत का विकास कभी हुआ ही नही होता. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९००) यह पहला पडाव / *"बुध्द कालखंड से लेकर बुध्द प्रभाव कालखंड"* (इ. पु. ६२४ से इसवी १० वी शति) यह दुसरा पडाव / महायान - वज्रयान - तंत्रयान बुध्द संप्रदाय द्वारा इसवी १० वी शति में *"शैव पंथ, वैष्णव पंथ, साक्त पंथ"* की स्थापना होना, शंकर नामक व्यक्ति का (इसवी ८५० मे जन्म) द्वारा स्वयं को इसवी दसवी शति में *"आदि शंकराचार्य"* घोषित कर महायान बुध्द विहारों पर अधिपत्य करना, इसवी ११ - १२ वी शति में *"वैदिक धर्म - ब्राह्मण धर्म"* की स्थापना होना, वेद उपनिषद मनुस्मृति आदि ग्रंथों की रचना कागदों पर होना, कागज का शोध इसवी १० वी शति में चायना मे लगना, बुध्द धर्म की अवनति यह *"तिसरा पाडाव"* / ब्राह्मण्य अतिरेक द्वारा देश की एकता एकात्मता की हानी तथा *"ब्रिटिशों गोरे अंग्रेज"* शासन व्यवस्था की गुलामी यह *"चवथा पाडाव"* / ब्राह्मण्य व्यवस्था बनाम ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का संघर्ष तथा *"भारत आजाद"* (१५ अगस्त १९४७) होना यह *"पाचवा पाडाव"* रहा है. ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो के काले में *"शिस्त - अभ्रष्टाचार"* होने से, भारत में विकास के रास्ते खुले थे. बहुतसी प्रथाएं, अ-रुढीओं पर बंदी लायी गयी. *'शिक्षा"* के दरवाजे खुले हुये थे. आज यह *"पाचवा पाडाव"* भारतीय ब्राह्मण्य *"काले अंग्रेजो"* के शासन व्यवस्था का राज बोलबाला है. जहां *"भ्रष्टाचार - पुंजीवाद - हुकुमशाही"* का बोलबाला है. *"लोकतंत्र"* हमें कही दिखाई नही देता. अत: *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"*  यह काले अंग्रेजो को भगाकर *"स्वच्छ भारत - सुंदर भारत - विकास भारत"* बना पाएगा ? यह प्रश्न है. अगर हां हो तो, हम इसे *"षटवा पाडाव"* भी कह सकेंगे. प्रश्न यहां जेन झी *"काँकरोच आंदोलन"* के दिशा और दशा का है. *'आंदोलन"* (Agitation) इस शब्द में हमे सत्य का बोध नही होता, जो *"सत्याग्रह"* (Satyagraha, Non-Violance Resistence, Passive Resistence, True Path Movement) इस शब्द में दिखाई देता है. बाबासाहेब डॉ आंबेडकर इन्होने *"कालाराम मंदिर सत्याग्रह / येवला पाणी सत्याग्रह"* तथा मोहनदास गांधी इन्होने *"नमक सत्याग्रह"* करने का संदर्भ है. अभी तक हम जेन झी *"काँकरोच आंदोलको"* द्वारा भावी दिशा ही तय नही की. केवल शिक्षा मंत्री *धर्मेंद्र प्रधान* का राजीनामा यही गुंज ही सुनायी देती है. अत: जेन झी आंदोलन को *"काले अंग्रेजो"* द्वारा दबाया जाएगा या नही, यह वक्त ही बतायेगा.

           मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* इन्होने युवा बेरोजगार को काँकरोच कहना बहुत महेंगा पडा. आँनलाईन बनी संघटन ने  आज *"वास्तव रूप"* तो लिया, परंतु वे अपनी भावी दिशा तय नही कर पाये है. आंदोलन करने को *"लाखों रुपयों की फंडिंग"* की आवश्यकता होती है. उन्हे यह फंडिग कैसे मिली? *"प्रशासन की मेहरबानी* होना, यह आरोप भी हो रहे है. हम उन आरोपों पर चर्चा नही करेंगे. काँकरोच आंदोलन जगह जगह सफल होते दिखाई देते है. परंतु वे *"भावी दिशा"* क्यौं तय नही पा रहे है ? यह अहं सवाल है. जंतर मंतर का २० जुन २०२६ का आंदोलन समय शाम ५ बजे तक था. उन्होने उस आंदोलन को जारी रखा. भारतीय संविधान यह अधिकार देता है. सवाल यह है कि, वह आंदोलन और आगे *"कितने दिनों तक जारी* रहता है? यह है. पोलिस प्रशासन या सत्ता प्रशासन इस आंदोलन को तोडने का भरपुर प्रयास भी करेगी. अत: सवाल तुम्हारे अंतर्मन शक्ति का है. जय भीम !!!


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

        नागपुर दिनांक २१ जुन २०२६

Friday, 19 June 2026

👌 *बिहार के एक्स डायरेक्टर जनरल आँफ पोलिस (DGP) एवं झारखण्ड लोक सेवा आयोग (ZPSC) के एक्स चेयरमन आर सी कैथल इनका सीआरपीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इनके साध दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रँगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक कामठी रोड इन एतिहासिक स्थलों पर सदिच्छा भेट !!!*
       बिहार राज्य एक्स डीजीपी तथा झारखंड लोक सेवा आयोग के एक्स चेयरमन *आर सी कैथल* साहाब दो दिवसीय दौरे पर, बिहार के एक्स चिफ इंजीनियर *राजेंद्र प्रसाद* इनके साथ नागपुर आये है. बोधगया के *भदंत प्रज्ञाशील महाथेरो* इन्होने इसकी सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनको तथा एक्स डीजीपी *मा. कैथल साहाब* इन्हे भी दी थी. शुक्रवार दिनांक १८ जुन २०२६ को *आयु कैथल साहाब* इन्होने सुबह १० बजे *आयु राजेंद्र प्रसाद* तथा *आदित्य कैथल* इनके समवेत सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष तथा बुध्द आंबेडकरी लेखक / कवि / चिंतक / समिक्षक *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके निवास जाकर सदिच्छा भेट की. तथा रमेशचंद्र कैथल लिखित *"डॉ. आंबेडकर सामाजिक क्रांती के प्रतिक जगजीवन राम / संघर्षों से निखरा एक तप: पुत व्यक्तित्व शिबु सोरेन"* यह दो किताबें भेट की. इसी के साथ इंजी. राजेंद्र प्रसाद इन्होने भी उनकी लिखी दो किताबे *"संत गाडगे बाबा और उनका जीवन संघर्ष / Life and Ideology of Jagjiwan Ram"* भेट की. सदर सदिच्छा भेट के बाद *"दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक"* इन एतिहासिक स्थली को सदिच्छा भेट देने का कार्यक्रम बनाया गया. और सीआरपीसी ट्रेड एंड काँमर्स विंग के राष्ट्रिय अध्यक्ष *इंजी. विजय बागडे* इन्होने डाँ मिलिन्द जीवने इनके द्वारा बनाये प्लँनिंग को सफल बनाया. इंजी बागडे इनके साथ राजु ड्रायव्हर ने भी योगदान दिया. महत्वपुर्ण विषय यह की सीआरपीसी प्रमुख डॉ मिलिन्द जीवने इनसे संबधीत बिहार मे *"सामुहिक बुध्द धम्म दीक्षा समारोह"* लेनेवाले बिहार के डायरेक्टर जनरल पोलीस (DIG) *मैकुराम जी* (IPS) इनके वे छोटे भाई है. सदर बुध्द धम्म दीक्षा समारोह में दलित व्हाईस बंगलोर के संपादक *व्ही टी राजशेखर* इन्होने डॉ. जीवने इनके आग्रह पर बुध्द धम्म की दीक्षा ली थी. मैकुराम जी के परिवार के दो सदस्य विदेश सेवा मे *"एम्बेसँडर* (भारतीय राजदुत) तथा एक सदस्य महाराष्ट्र के *दादासाहाब रुपवते* परिवार मे ब्याही गये है.
        दीक्षाभुमी / डॉ. आंबेडकर मेमोरियल शांतीवन चिचोली को सदिच्छा भेट देने के बाद *ड्रँगन पँलेस कामठी* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. ड्रँगन पँलेस की प्रमुख / माजी मंत्री *एड. सुलेखा कुंभारे* इन्होने एक्स डीजीपी इनके साथ बहुत विषयों पर चर्चा की. ड्रँगन पँलेस का इतिहास बताया. विश्व की बाबासाहेब डाँ आँबेडकर की बडी प्रतिमा / विपश्यना केंद्र की जाणकारी देते हुये *"विश्व की सबसे बडी संविधान प्रत"* बनाने की भी जाणकारी दी. उसके पश्चात खैरी स्थित *"बुध्द भुमी"* तथा कामठी रोड स्थित *"नागलोक"* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. अंत में गेस्ट हाऊस में बैठकर कुछ महत्वपुर्ण बिंदुओ पर चर्चा की गयी. आज १९ तारिख को वे अगले पडाव पर प्रस्थान करने जा रहे है. उनकें मंगल प्रवास की कामना करते है.

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नागपुर दिनांक १९ जुन २०२६

Monday, 15 June 2026

 👌 *अहिंसक अंगुलीमाल !!!*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो.न. ९३७०९८४१३८


हे अंगुलीमाल

तुझा जीवन इतिहास

एक वेगळाचं संदर्भ आहे

कोसल नरेश राजा प्रसेनजीत

ह्यांच्या राज दरबारातील

बम्हन म्हणजे ब्राम्हण वर्ग नव्हे

तेव्हा ब्राह्मण वर्ग हा अस्तित्वात नव्हताचं

बम्हन अर्थात विद्वत वर्ग होय

प्राचीन बुध्द कालखंडात

मौर्य दरबारातील युनानी इतिहासकार

मेगास्थनीज लिखीत इंडिका ग्रंथ

सात वर्ग हा संदर्भ सांगतो आहे

ब्राम्हणी वर्णव्यवस्थेचा उल्लेख नाही

विद्वत वर्ग - शेतकरी वर्ग 

पशुपालक आणि शिकारी वर्ग

कारागीर आणि व्यापारी वर्ग

सैनिक वर्ग - पर्यवेक्षक एवं गुप्तहेर वर्ग

सल्लागार आणि मंत्रीगण वर्ग

ही ती सात वर्गीय व्यवस्था होती

राजदरबारातील बम्हन पिता गग्ग 

आणि माता मंतानी ह्यांचा तु सुपुत्र

तुझे नाव अहिंसक ठेवले गेले

तुला शिक्षण घेण्याकरीता

तक्षशीला येथे दाखल करण्यात आले

तुझ्या शील आचरणाने

तु आचार्यांंचा प्रिय झाला होतास

परंतु तुझ्या द्वेषमुलक सहपाठींनी

एका सुविद्य आचार्यांना 

तुझे गुरुमातेसोबत (आचार्य पत्नी)

अनैतिक संबध असल्याची

खोटी माहिती ही पेरली होती

आणि त्या संशयी आचार्यांनी

तुला गुरु दान स्वरुपात

एक हजार मानवी शरीर बोटे

ही अनैतिक दान मागणी केली

आणि तु गुरु दान पुर्ण करण्यासं

तक्षशीला विद्यापीठाच्या बाहेर पडलासं

राहागीर लोकांची बोटे कापुन

कापलेल्या बोटांची माळ

तुझ्या गळ्यात घालत असल्याने

तु अहिंसक अंगुलीमाल म्हणुन

प्रजेमध्ये ओळखला जावु लागलासं

तुझ्या स्वत:च्या सुरक्षा कारणाने 

तु घोर जंगलात राहात होतासं

तुझा आतंक सर्वदुर पसरला गेला

संशयी विकृत आचार्याचा उद्देश तर

तुला राजा प्रसेनजीत ह्यांचेकडुन

मृत्युदंड शिक्षा व्हावी हाचं होता

तुझा आतंक हा विजयी झाला

परंतु तथागत बुध्द भेटीतुन

तु पुनश्च अहिंसक झालास

बुध्दाला शरण गेल्यावर

तुझ्या पुर्वीच्या अकुशल कर्माची

शिक्षासुध्दा तु मुकाट्याने सहन केली

अहिंसक ते अंगुलीमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक 

हा तुझा जीवन प्रवास

इतका सहज नाही रे

अहिंसक अंगुलीमाल...!!!

आज ही अंगुलीमाल विकृती

समाजात - देशामध्ये फोफावत आहे

कधी राजसत्ता व्यवस्थेतुन

कधी ह्या समाज व्यवस्थेतुन

कधी स्त्री - पुरुष दगाबाज भावनेतुन

तर कधी कधी प्रेम भंगातुन

अशी ही ब्राम्ह्ण्यवाद विकृती

भारतीय बहुसंख्य मनात पसरल्याने

अंगुलीमाल निर्माण झालेले आहेत

पुनश्च अंगुलीमाल निर्माण होणार आहेत

स्वरुप मात्र ते भिन्न राहाणार आहे

आणि हे वास्तव सत्य आहे

सत्य - अहिंसा - प्रामाणिकपणा

असा हा बुरखा पांघरणारे

देशद्रोही - समाजद्रोही करंटे

अजुनही उथळ मानेने 

ह्या समाजात फिरत आहेत

तुला हे कायमचे थांबवायचे आहे

आता पुनश्च बुध्द विचार प्रवाह

हा तुला पेरायचा आहे

अहिंसक अंगुलीमाल !

अहिंसक अंगुलीमाल !!

अहिंसक अंगुलीमाल  !!!


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर दिनांक १५ जुन २०२६

Friday, 12 June 2026

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

Saturday, 6 June 2026

 🐞*जेन झी काँकरोच (?) युवकों का नयी दिल्ली जंतर मंतर पर ६ जुन का धरना एवं भविष्य की रणनीति क्या ???*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             भारतीय राजनीति (?) में *"जेन झी"* अर्थात *"जनरेशन झेड"* (Generation Z) तथा *"काँकरोच"* (तिलचट्टा - Cockroach - Parasites) इस शब्द में बडा तुफान मचाया हुआ है. *"जेन झी"* वर्ग द्वारा सन २०२५ को *"नेपाल"* देश मे हिंसक आंदोलन होकर, *"सत्ता परिवर्तन"* भी दिखाई दिया है.और ऐसा ही सत्ता परिवर्तन आंदोलन *"श्रीलंका / बांगला देश"* मे भी दिखाई दिया. अगर फिर भी *"भारतीय राजनीति"* उससे बोध ना लेती हो तो, कांग्रेसी शहनशाह *मोहनदास गांधी* / संघवादी *के सुदर्शन* / प्राचीन भारत के विचारविध *भर्तुहरी* इन्होने *"राजनीति को वेश्यालय"* की उपमा क्यौ दी थी ? यह हमे समझना कठिण नही है. अब उन्ही के शब्दों में *"न्याय व्यवस्था को भी वेश्यालय"* इस अर्थ में लिया जाए या नही ? यह एक संशोधन का विषय है. *"क्या सर्वोच्च न्यायालय संविधान की वाँच डाँग भुमिका"* निभा पायी है ? क्या वह *"न्यायाधीश"* कहलाने मे लायक है या ना-लायक (Not liable) है ? न्यायालय के ऐसे बहुत सारे निर्णय है, जो न्याय के दृष्टी से परे है. वही *"सर्वोच्च न्यायालय"* के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* जी इन्होने बेरोजगार युवा एवं एक्टिविस्ट वर्ग को *"काँकरोच"* यह विवादित टिप्पणी की है. और *"काँकरोच जनता पार्टी"* का जन्म भी हुआ. भले ही वह शब्दार्थ - *"व्यंगात्मक"* (Satirical) राजनीतिक रुप रहा हो ! परंतु ६ जुन २०२६ यह दिन *"वास्तव आंदोलन"* स्वरुप ले चुका है. उनकी *"भविष्य की दिशा"* क्या होगी ? यह एक चिंता का भी विषय है. *अभिजीत दिपके* ये आंबेडकरी विचारधारी युवक आज *"भारतीय राजनीति"* को ललकार रहा है. आज *"करोडो की संख्या"* में युवक वर्ग काँकरोंच की वह एक आवाज है. *"जेन झी* यह शब्द सुनकर सन १९९७ - २०१२ दरम्यान की *"युवा पिढी"* की याद आती है. और वह युवा पिढी *"इंटरनेट एवं सोशल मिडिया"* के दौर की पिढी है. और उस नयी पिढी की विशेषता यह है कि - *"डिजिटल रुप में साक्षर / सामाजिक रुप से जागरुक / नयी कार्य संस्कृति / मानसिक स्वास्थ पर जोर."* अत: भारतीय राजनीति के लिए यह बहुत बडी सिख है. काँकरोच जनता पार्टी आंदोलन को लद्दाख के शिक्षाविद *सोनम वांगचुक* इन्होने ना केवल समर्थन देकर, वे प्रत्यक्ष आंदोलन में साथ खडे थे. तामिलनाडु के मूख्यमंत्री *विजय थलापती* / आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री *चंद्राबाबु नायडु* / फिल्म क्षेत्र के *प्रकाश राज* / कांग्रेस दल नेता *सोनिया गांधी* सहीत पश्चिम बंगाल के *ममता बँनर्जी* पार्टी के कुछ नेताओं का समर्थन बताया जाता है. अत: *"भविष्य की राजनीति"* कौनसी करवट लेती है, वह भविष्य में दिखाई देगा.

           सुप्रीम कोर्ट के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* का बेरोजगार युवा वर्ग / एक्टिविस्ट इन सभी को एक केस में *"काँकरोच"* यह विवादीत बयान से *"न्याय व्यवस्था के न्यायधीशों की वैचारिक पात्रता"* का बोध होता है. अगर *"कोलोजीयम पध्दति"* ना होती तो, वे न्यायाधीश *"चपराशी वर्ग की भी स्पर्धा परिक्षा"* पास होते या नही? यह संशोधन का विषय है. अत: *"संघ लोक सेवा आयोग"* (UPSC) पँटर्न पर *"संघ लोक सेवा न्यायिक आयोग"* (UPSJC) गठण होकर मेरिट आधार पर *"न्यायाधीश वर्ग"* की परिक्षा होना जरुरी है. नरेंद्र मोदी सरकार का संविधान *"अनुच्छेद १२४ - अ"* का NJAC आयोग नही *अभिजीत दिपके* इस युवक द्वारा व्यंगात्मक रुप में *"१६ मे २०२६ को काँकरोच जनता पार्टी"* यह बुनियाद रची गयी. और सोशल मिडिया मे, उस पार्टी १० - ११ दिनों मे *"करोडो की संख्या"* मे बेरोजगार युवक जुड गये. और उन्होने अपना *"मेनिफेस्टो"* भी घोषित किया. जैसे कि - *"सांसदो एवं विधायकों को पार्टी बदलने पर पाबंदी / न्यायपालिका की स्वतंत्रता / महिला आरक्षण / व्होट सुरक्षा / मिडिया सुधार"* आदि. *"चुनाव आयोग / इ. डी. / सी. बी. आय. "* इनको भी मेनिफेस्टो में जोडना चाहिये. और *"६ जुन २०२६ इस दिन को जंतर मंतर"* (२० दिनों के अंतराल में) पर हजारों की संख्या में *"धरना आंदोलन"* सफल होना, यह सहज विषय नही है.  सवाल आप के उपर *राहुल गांधी* इनको आंदोलन का श्रेय ना देते हुये *"काँकरोच जनता पार्टी"*  खडा करने की रणनीति मोदी - शाह की थी, यह आरोप हो रहा है. दुसरा आरोप भी है कि, पुलिस द्वारा आप को *"एयरपोर्ट आकर धरना अनुमती"* से भी, *मोदी - शाह* की कुटील रणनीति जोडी जा रही है. मोदी - शाह इनकी *"रणनीति - राजनीति"* जो भी हो, विषय आप के *"विश्वासनियता"* का है. आरोप हर किसी पर होते रहते है. आप की *"भविष्य की रणनीति"* क्या है ? यह भी प्रश्न है. अगर आप इसमे सफल होते हो तो, आप का *"काँरवा"* निश्चित ही बढेगा. बहुत से संघटन / राजनीतीक दलों की भी साथ मिलेगी. भारतीय संविधान से *"जनतंत्र"* (Democracy) खत्म हो चुका है. मोदी - शाह राज *"गुंडा राज"* का अवलंब कर / *"हुकुमशाही - पुंजीवाद"* सरकार चला रहे है. *"न्याय व्यवस्था"* भी मोदी - शहा इशारों पर चलने का आरोप है. अत: *"जेन झी"* से उम्मिद भी की जा रही है. *"काँकरोच जनता पार्टी"* उसी निवं स्वरुप देखी भी जा रही है. अगर यह सब ठिक रहेगा तो, हमारा भी *"साथ - हात"* आप को रहेगा. जय भीम !!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक ७ जुन २०२६