✍️ *द्वितिय महायुध्द : क्रुर तानाशाह हिटलर - मुसोलिनी - एवं डाँ. बाबासाहेब आँबेडकर - मोहनदास गांधी - पंडित जवाहरलाल नेहरु - सुभाषचंद्र बोस इनसे लेकर आजाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का सफरनामा एवं भाजपा संघवादी पुंजीवाद - तानाशाही बनाम जेन झी का (सत्याग्रह) आंदोलन !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
द्वितीय महायुध्द (१ सितंबर १९३९ से २ सितंबर १९४५) खलनायक जर्मनी के क्रुर तानाशाह *एडाल्फ हिटलर* तथा इटली के क्रुर तानाशाह *बेनिटो मुसोलिनी* इनकी तुलना भारत के प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / केंद्रीय गृहमंत्री *अमित शहा* इनसे करे या नही ??? यह तो एक संशोधनात्मक प्रश्न है. तत्कालीन प्रधानमंत्री *इंदिरा गांधी* इन्होने भारत मे जो *"आपातकाल"* (Emergency) लगाई थी, उसका संदर्भ *"भारतीय संविधान अनुच्छेद ३५२ से लेकर ३६०"* से जुडा है. भारत के राष्ट्रपति इनके सही से *"आपातकाल"* वह घोषित किया गया था. परंतु नरेंद्र मोदी सरकार ने *"अघोषित आपातकाल"* (Undeclared Emergency) भारत पर लादी है, उसका क्या ? भारत मे *"स्पर्धा परिक्षा"* पेपर लिक कारण *"२२ छात्रों की आत्महत्या"* / किसान आंदोलन मे *"६०० के उपर किसान वर्ग की मृत्यु"* / मणीपुर राज्य की *"बर्बरता"* और ऐसे अनगिणत संदर्भ दिये जा सकते है. नयी दिल्ली जंतर मंंतर *छात्र जेन झी काँकरोच आंदोलन"* (सत्याग्रह) २०२६ ने दिल्ली पुलिस / सीआरपीएफ जवान (सरकारी गुंडे) / संघवाद के बिन-सरकारी गुंडो की बर्बरता - *"लाठीचार्ज - अश्रुगोले - छांत्रों के कपडे फाडना - छात्रों के उपरी भाग पर स्पर्श करना - छात्रों के पिछवाडों दंडा घुसाना"* इसके बारे मे सुनकर / देखकर, सरकार के प्रति कोई भी संवेदनशील व्यक्ति *"घृणा / नफरत"* भाव प्रदर्शीत करेगा. हिटलर / मुसोलिनी काल मे *"द्वितीय महायुध्द"* चल रहा था. नरेंद्र मोदी काल में *"कोरोना महायुध्द"* से बाहर निकलते हुये हम *'आर्थिक महायुध्द"* से जुझ रहे है. अमेरिका *"एप्स्टीन फाईल - लडकीयों से कृष्णलीला"* इसमे नरेंद्र मोदी इनका नाम है या नही ? या *"चायना - अमेरिका"* इन देशों के शासकों के पास *"नरेंद्र मोदी कृष्णलीला फोटो"* उपलब्ध है या नही ? यह भी सँशोधनात्मक विषय है. परंतु नरेंद्र मोदी उन देशों के शासक समक्ष *"नतमस्तक"* होना / आजाद भारत की *"आर्थिक व्यवस्था खस्तहाल"* होना / भारत की अर्थव्यवस्था डामाडोल होने पर भी, *"सत्तावाद खामोशी"* / आजाद (?) भारत की *"गरिबी - बेरोजगारी"* / सरकारीकरण का *"खाजगीकरण"* हो जाना / भारत *"पुंजीवाद - तानाशाह"* (Capitalism - Dictatorship) दिशा की ओर बढ जाना / *"प्रजातंत्र"* (Democracy) की कबर ?दिखना और बडी लंबी यादी है. भारत के *'प्रादेशिक राजनितिक दल शक्ति"* खत्म हो चुकी है. *"विरोधी दल - काँग्रेस"* भी उतना प्रभावी ना होना / कांग्रेस राजकुमार *राहुल गांधी* इनका संविधानिक *"भारत राष्ट्रवाद"* यह भी एक प्रश्न है. राहुल तो देश को *"हिंदु धर्मवाद"* से जोडकर *"हिंदुस्तान"* कह रहा है. जब कि मा. सर्वोच्च न्यायालय अपने निर्णय में *"हिंदु यह धर्म नही. जीवन जीने की कला है"* कहता है. वैसे तो *"सर्वोच्च न्यायालय सत्ता रखेल"* हो जाना / *"सर्वोच्च न्यायालय*" द्वारा भारतीय *"संविधान वाँचडाँग"* से दुर भागना / संघववाद नायक *डाँ मोहन भागवत* इन्होने, कर्नाटक राज्य गृहमंत्री *प्रियांक खडगे* इनके दिये उत्तर में, *"हिंदु धर्म पंजीकृत नही"* है तो, *"RSS"* पंजीकृत होना आवश्यक नही, यह कहा है. अर्थात भारत की *"दिशा - दशा - अवदशा"* यह संदर्भ बहुत कुछ कथन कर गया है.
हिटलर (जर्मनी) द्वारा *"पोलंड"* देश पर आक्रमण में, *रशिया* (जोसेफ स्टलिन) हिटलर के साथ साथ ही सहभागी था. परंतु हिटलर की *"सत्ता भुभाग विस्तारीकरण भुख"* ने, हिटलर द्वारा *"रशिया"* देश पर आक्रमण ने, *"द्वितीय महायुध्द"* दो भागों में बट गया. *"मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र. "* मित्र राष्ट्र पक्ष में *"रुस (जोसेफ स्टँलिन) / अमेरिका (फँकलिन डेलोनो रुझवेल्ट) / ब्रिटिश (विस्टन चर्चील) / चायना (चियांग काई शेक - माओ)"* और अन्य कुछ देश एक साथ खडे थे. तो धुरी राष्ट्र पक्ष में *"हिटलर (जर्मनी) / मुसोलीनी (इटली) / हिराहितो (जापान)"* यह तिन देश एकसाथ खडे थे. हिटलर - मुसोलीनी - हिराहितो ये *"नाजीवाद / फासीवाद / झारशाही"* के प्रतिक रहे है. द्वितीय महायुध्द मे *"धुरी राष्ट्र"* की हार हुयी तो *"मित्र राष्ट्र"* की जीत हुयी. द्वितीय महायुध्द में हिटलर की प्रेमिका *इव्हा ब्राऊन* / मुसोलीनी की प्रेमिका *क्लारा पेटाची* उनका साथ उनके मृत्यु तक रहा. इटली के विद्रोही द्वारा *मुसोलीनी - क्लारा पेटाची* इनको (२८ अप्रेल १९४५) गोली से छलनी कर, उनका *"शव चौराह पर लटका"* दिया. यह दुर्दर खबर सुनने के बाद *हिटलर - इव्हा ब्राऊन* इन्होने, जमिन के निचे खंदक मे ही *"स्वयं को गोली मारकर"* (३० अप्रेल १९४५) आत्महत्या की. और क्रुर तानाशाह का अंत ऐसा भयानक हुआ. उधर द्वितीय महायुध्द मे *अमेरिका* द्वारा जापान के *"हिरोशिमा*" (६ अगस्त १९४५) तथा *"नागासाकी*" (९ अगस्त १९४५) पर *"अणुबांब"* डालकर जापान के *"झारशाही"* को झुका दिया. हमें द्वितीय महायुध्द का यह इतिहास समझना बहुत जरुरी है. तब ही हम *"डाँ. बाबासाहेब आंबेडकर / मोहनदास गांधी / जवाहरलाल नेहरु / सुभाषचंद्र बोस* इनकी राजनीति - भारतीय स्वातंत्रता इतिहास - युध्द कालखंड और *"कौन नेता सही"* - कौन गलत है तथा *"नेता की दुरदृष्टी"* ? इसे समज सकते है.
*सुभाषचंद्र बोस* इनको सन १९३८ को, हरीपुरा कांग्रेस अधिवेशन मे कांग्रेस दल का *"निर्विरोध अध्यक्ष"* चुना गया था. दोबारा सन १९३९ को, त्रिपुरी अधिवेशन में उन्होने मोहनदास गांधी के उम्मीदवार *डाँ पट्टाभी सितारामय्या* इनको हराकर, कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुने गये. वह हार *मोहनदास गांधी* की ही हार थी. कुछ दिन बाद मोहनदास गांधी से वैचारिक मतभेद / कार्यकारीणी सदस्यों के इस्तिफे (जवाहरलाल नेहरु को छोडकर) के कारण, सुभाषचंद्र बोस इन्होने, २९ अप्रेल १९३९ को *"कांग्रेस अध्यक्ष"* पद से इस्तीफा दिया. फिर ३ मई १९३९ को सुभाषचंद्र बोस ने *"आँल इंडिया फारवर्ड ब्लाँक"* (औपचारिक घोषना २२ जुन १९३९) का गठण किया. आगे जाकर सुभाषचंद्र बोस *"जापान"* जाकर, झारशाही शासक *हिराहितो* से मिलकर, भारत आजादी के लिए सहकार्य मांगा. सुभाषचंद्र फिर जापान से सुत्र चलाते रहे. सुभाषचंद्र इन्होने २८ दिसंबर १९३७ को आस्ट्रिया महिला *एमिली शेंकल* इनसे गुपचुप विवाह किया था. जो राजनीतिक कारणवश छुपाया गया. उनको *अनिता बोस फाफ* नामक पुत्री भी हुयी. *रास बिहारी बोस* इन्होने १ सितंबर १९४२ को, *"आजाद हिंद फौज"* (Indian Independence Army) की स्थापना *टोकियो* (जापान) में की थी. उस फौज के *मोहनसिंग* पहले प्रमुख बने थे. परंतु उनके निष्क्रिय होने से, *सुभाषचंद्र बोस* इनके हाथो वह कमान दी गयी. सुभाषचंद्र बोस इन्होने फिर आजाद हिंद फौज में, *"नेहरु ब्रिगेड / गांधी ब्रिगेड / मौलाना ब्रिगेड / राणी झाशी ब्रिगेड"* की स्थापना की. परंतु सुभाषचंद्र बोस की कार्यपध्दति *"अधिनायक वाद"* अर्थात *"तानाशाह"* रही थी तो *जवाहरलाल नेहरु* ये *"आधुनिकवाद - प्रजातंत्र"* (Democracy) के पक्षधर थे. सुभाषचंद्र बोस ये जर्मनी के हुकुमशहा *हिटलर* से, भारत आजादी के लिए मिले (२९ मई १९४२) थे. परंतु हिटलर ने सुभाषचंद्र को सहकार्य करने को मना किया. परंतु जर्मनी से जापान जाने के लिए *"पनडुब्बी"* की व्यवस्था की थी. सुभाषचंद्र ये इटली के शासक *मुसोलीनी* इनसे भी मिले थे. जापान के *झार शासक* ने सुभाषचंद्र के साथ भारत *"नार्थन क्षेत्र"* से चढाई की. भयानक नरसंहार किया. परंतु सुभाषचंद्र की आजाद हिंद सेना उस नरसंहार को रोक नही पायी. परंतू *"महार रेजीमेंट"* ने जापान के उस हल्ले को रोककर, *'फतह"* हासिल की थी. अगर जापान के *"झार शोषको"* की विजय हुयी होती तो, *"कोरिया"* समान भारत पर भी, *"जापान झारशाही"* का अधिपत्य हुआ होता. अर्थात *"अंग्रेज गुलामी"* के बदले, भारत पुनश्च *"जापान झारशाही का गुलाम"* रहा होता. *मैने स्वयं* मेरे *"साऊथ कोरीया"* भेट में, मै कोरिया में द्वितिय महायुध्द उन *"स्मृति स्थलों"* को भेट दी थी. सुभाषचंद्र की मृत्यु १८ अगस्त १९४५ को तत्कालीन *"फार्मोसा (तायवान) विमान दुर्घटना"* में गंभिर रुप जलने से हुयी थी. उनकी अस्थिया जापान के *"रेनकोजी बुध्द विहार"* रखी है. परंतु उस मृत्यु पर प्रश्न चिन्ह लगने पर, भारत सरकार द्वारा *"जाँच आयोग"* भी बनाये गये. प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* सरकार ने, *"बोस मृत्यु अहवाल"* घोषित करने की बात कही. परंतु अभी भी वह अहवाल घोषित नही किया गया. वही फैजाबाद के *"गुमनाम बाबा"* और अन्य बाबा के रुप में, *सुभाषचंद्र बोस* इनकी नाम चर्चा होती रही.
कांग्रेस दल राष्ट्रपिता *मोहनदास क. गांधी / पंडित जवाहरलाल नेहरु / सरदार वल्लभभाई पटेल* इनका *"आजादी नायक"* रुप में संदर्भ है. फिर *भगतसिंह / राजगुरु / चंद्रशेखर आजाद"* आदि कांतिकारकों का क्या ? द्वितिय महायुध्द (१९३९ - १९४५) में, *"किस पक्ष में साथ दे ?"* (मित्र राष्ट्र / धुरी राष्ट्र) यह कांग्रेस की भुमिका, बिलकुल ही स्पष्ट नही थी. वे कभी *"ब्रिटिश सरकार"* से चर्चा करते रहे तो, कभी क्रुर तानाशाह *"हिटलर"* से भी ! मोहनदास गांधी इनका जर्मनी तानाशाह *हिटलर"* इनको लिखा पत्र भी चर्चा का केंद्र रहा. *मोहनदास गांधी* सन १९३१ को, इटली के क्रुर तानाशाह *मुसोलीनी* से मिल चुके थे. सन १९४२ का *"चले जाव कांग्रेस सत्याग्रह"* यह द्वितीय युध्द काल में, गांधी - कांग्रेस की बडी ही मुर्खता थी. वह आंदोलन सफल नही हुआ. मार्च १९४२ को *"क्रिप्स कमीशन"* भारत आजादी चर्चा करने भारत आया था. *"संपुर्ण स्वराज या डोमेनियन स्टेट"* इस विषयों पर चर्चा से भी समाधान निकाला जा सकता था. *"गुलाम भारत"* में मुस्लिम लिग नेता *मोहम्मद अली जिना* और अस्पृश्य वर्ग नेता *डाँ. बाबासाहेब आंबेडकर* इनका कांग्रेस के साथ संघर्ष भी जोरों पर था. द्वितिय महायुध्द में *"विश्व की अर्थव्यवस्था"* चरमरा गयी थी. इंग्रज आर्थिक चरमारा स्थिती में *"भारत पर शासन करने के अनुकुल"* नही थे. परंतु अंतर्गत *"मुस्लिम - अस्पृश्य - कांग्रेस संघर्ष"* यह अधिकारों का भी संघर्ष रहा था. *"अखिल भारतीय हिंदु महासभा"* की स्थापना सन १९१५ में ब्राह्मण्य नायक *मदन मोहन मालविय* कर चुके थे. हिंदु महासभा के पहले अध्यक्ष *महाराजा मनिंद्र चंद्र नंदी* थे. बाद में *परमानंद / डाँ बी. एस. मुंजे (१९२०) / विनायक दा. सावरकर (१९३७)"* ये बन गये. *RSS* (Royal Secret Service) इन पर, ब्रिटिशों से जुडे रहने के साथ साथ ही, *"तानाशाह - फासीवाद - नाजीवाद"* विचार पक्षधर होनें का आरोप लगता रहा. RSS का नामकरण फिर *"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ"* किया गया. संघ - हिंदु महासभा ये भारत आजादी से कोसो दुर रही. *विनायक दामोधर सावरकर* इन्होने अंग्रेज जेल से छुटने के लिए, *"१० माफिनामे"* लिखे थे, जिसके परिणाम स्वरुप वि दा सावरकर को, प्रति माह रु. ६०/_ पेंशन अंग्रेजो से मिलती थी. अत: *"हिंदु"* यह शब्द मुस्लिम शासक - अंग्रेज काल की उपज दिखाई देती है. *"सर्वोच्च न्यायालय ने भी हिंदु यह धर्म ना मानकर जीवन जीने की कला"* कहा है. *डां बाबासाहेब आंबेडकर* इन्होने जुलाई १९४१ को, द्वितीय महायुध्द में *"मित्र राष्ट्र"* पक्ष में समर्थन घोषित किया. ता कि *"नाजीवाद - फासीवाद - झारशाही"* की गुलामी (हिटलर - मुसोलीनी - हिराहितो) भारत पर ना आये. *डाँ. आंबेडकर* ये ब्रिटिश मंत्रीमंडल में *"श्रम मंत्री"* (१९४२ - ४६) बन गये. कांग्रेस ने डाँ आंबेडकर इनको *" देशद्रोही - गद्दार"* कहा था. फिर उसी *काँग्रेस* ने सन १९४२ के बाद, द्वितीय महायुध्द में *"मित्र राष्ट्र"* पक्ष मे, अपना समर्थन घोषित किया. इसे हम क्या कहे ? *कांग्रेस की मुर्खता या अ-दुरदर्शिता ?* सुभाषचंद्र बोस ये डाँ बाबासाहेब आंबेडकर इनसे २ जुलाई १९४० को, मुंबई राजगृह में मिलने आये. परंतु *"अस्पृश्य अधिकार"* संदर्भ में, सुभाषचंद्र बोस इनकी भुमिका स्पष्ट ना होने से, डॉ आंबेडकर इन्होने सहकार्य करने से मना किया. डाँ. आंबेडकर इनके आवाहन पर, *"महार रेजीमेंट"* द्वितीय महायुध्द में कुद चुकी थी. अगर *"मुस्लिम - अस्पृश्य - कांग्रेस"* अंतर्गत संघर्ष ना होता तो, *"भारत को आजादी सन १९४२"* के बाद ही मिली होती. *"१५ अगस्त १९४७ की राह"* (४ - ५ साल देरी) हमे देखना ही ना पडता. भारत देश २६ जनवरी १९५० को *"गणराज्य"* (Republic) हुआ. अर्थात भारत *"प्रजातंत्र व्यवस्था"* (Democracy) की निव रची गयी. *सरदार वल्लभभाई पटेल* इनके बडे भाई *विठ्ठलभाई पटेल* अपने इलाज के लिए विदेश (आस्ट्रिया / स्वित्झरलँड) गये थे. तब *सुभाषचंद्र बोस* इन्होने उनकी मदत की थी. अत: विठ्ठलभाई पटेल ने अपनी 3/4 संपत्ती *सुभाषचंद्र बोस* इनके नाम करने की वसीयत बनायी थी. विदेश में विठ्ठलभाई का निधन हुआ. तब सरदार पटेल ने *सुभाषचंद्र बोस* इनके खिलाफ *"वसियत"* मुकदमा डाला था. अत: सरदार पटेल इनकी *"संपत्ति की भुख"* हमे यहां दिखाई देती है. प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* इन्होने *"प्रजातंत्र"* को पुरा कमजोर करते हुये, *"पुंजीवाद और हुकुमशाही"* (Capitalism - Dictatorship) की जडे मजबुत ही किये है. अर्थात *पुंजीवाद गुलामी"* तथा विदेशी ताकते *"अमेरिका - चायना"* की गुलामी को स्वीकृति दी है. सरन्यायाधीश *सुर्यकांत शर्मा* ये महाशय *"संविधान रक्षक"* (Constitution Watch Dog) दायित्व निभाने में, *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"* में हमे *"ना-लायक"* (Not Qualified) दिखाई देते है. वही भारत भुतपुर्व न्यायाधीश *रंजन गोगाई* इनके राज्यसभा सदस्य पदासिन होने कथन पर, सर्वोच्च न्यायाधीश के न्यायाधीश *उज्वल भुयान* इनके यह शब्द बहुत कुछ कह जाते है, *"Former Chief Justice said - I am going to Rajyasabha to breach the gap between Judiciary & Executive. It is Fundamentally wrong. It is comletely wrong Fundamentally. Those organizing the Separation of Power...."* जय भीम ! जय संविधान !!!
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▪️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक ३० जुलै २०२६
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