Monday, 13 July 2026

 👌 *दीक्षाभुमी नागपुर ट्रस्टी विवाद : अत: क्या मध्यम मार्ग रुप मे - दोनो ही गट बुध्द समुदायों से आजिवन फी सदस्यता खुली कर हर पाच सालों ने चुनाव पध्दती का स्वीकार कराने को तैयार है  ?*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             दीक्षाभुमी नागपुर ट्रस्टी विवादो में *"गवई गट - फुलझेले गट"* आमने सामने खडे होकर, एकमेक पर आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप कर रहे है. वही *गवई गट* द्वारा ट्रस्टी अध्यक्ष *भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई* इन्हे अध्यक्ष पद से हटाने की / *विलास गजघाटे* इन्हे अध्यक्ष बनाये जाने की न्युज, हमे मिडिया में दिखाई दी थी. वही *फुलझेले गट* द्वारा आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई जी इनके द्वारा *डॉ. राजेंद्र गवई / विलास गजघाटे* इन्हे ट्रस्टी पद से बरखास्त करने की भी न्युज, हमे दिखाई दे रही है. हमें यह समझना जरुरी है कि, दिक्षाभुमी पर *"फुलझेले गट"* का बहुमत होते हुये, *विलास गजघाटे* फुलझेले गट से जुडे थे. उसी बिच दीक्षाभुमी ट्रस्टीओं की *"तिन जगह"* रिक्त होने से, *भंते नाग दीपांकर / डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम / प्रा. प्रदिप आगलावे* इन्हे फुलझेले गट के बहुमत से लिया गया. उसी दरम्यान किसी काम संदर्भ में, मेरी संघटन *'सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* का प्रतिनिधी मंडल दीक्षाभुमी ट्रस्टी सचिव *डॉ. सुधिर फुलझेले* से मिला था. दिक्षाभुमी ट्रस्टी *विलास गजघाटे* भी वही था. तब मैने सुधिर फुलझले से कहा था, *"सुधिर जी, दिक्षाभुमी ट्रस्टी अच्छे और दुरदर्शी मान्यवर होना चाहिये. आप ने वैसे लोगों का चयन नही किया. दीक्षाभुमी यह धम्म / डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रसार प्रचार केंद्र"* होना चाहिये. उन तिन ट्रस्टी में *डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम* ये नामांंकित न्युरो फिजीशियन ये. वे अपना समय दीक्षाभुमी कामों के लिए नही दे पायेंगे. *प्रा. प्रदिप आगलावे* इनका आंबेडकर विचारधारा विभाग से लेकर महाराष्ट्र शासन आंबेडकर ग्रंथ प्रकाशन समिती का इतिहास बहुत *"दागदार"* है. तब डॉ. सुधिर फुलझेले *मुझे* कहने लगे कि, *"भाऊ, हमारे अगले लिस्ट मे मेरा (डॉ. जीवने) भी नाम है. "* तब मै सुधिर फुलझेले को कहा कि, *"आप मुझे लो या मत लो. परंतु अच्छे तथा दुरदर्शी लोगो का चयन जरूरी है."* यही बात मैने *एड. आनंद फुलझेले* इन्हे भी कही थी. हमारी वह चर्चा खत्म हुयी. सवाल यह है कि, *"फुलझेले गट"* के वह चार ट्रस्टी *विलास गजघाटे / डॉ चंद्रशेखर मेश्राम / भंते नाग दीपांकर / प्रा प्रदिप आगलावे* इन्होने *"गवई गट"* मे पलटी क्यौं मारी ? यह पलटी इतनी सहज भी नही है. *"दीक्षाभुमी आर्थिक भ्रष्टाचार"* में हात कौन धो रहा है ? *भंदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई* इन्हे कोई भी आर्थिक लाभ लेने से, *"कोई औचित्य हमे दिखाई नही देता."* लेकिन अपने बुढापें मे. *"आर्य नागार्जुन ससाई"* जी पिसते नजर आ रहे है. वही भंते जी बदनाम करने का प्रयास *"गवई गट"* द्वारा होना, इतना सहज विषय नही है. वही कुछ महिला समुह द्वारा *"भिक्खुनी का चिवर उतारे जाने का प्रयास"* होना भी, इतना सहज विषय नही है. यहा प्रश्न है, *"हमाम में नंगे कौन है ?"* यह विवाद चल रहा था, तब मैने फोन पर *"दोनो गुट ट्रस्टीओँ से चर्चा करने का प्रयास"* किया. परंतु *"मध्यम मार्ग सफलता"* नही मिली. अत: बौध्द समुदाय के सामने एक *"मध्यम मार्ग"* सादर कर रहा हुं. *"ट्रस्टी"* का अर्थ होता है *"विश्वस्त !"* वे लोग *"दीक्षाभुमी के मालक"* नही है. आप का उन ट्रस्टीयों पर विश्वास है या नही ? यह भी प्रश्न है. अत: बुध्द समाज से *"आजिवन सभासद फी"* (रु  १०,००० से एक लाख तकं) खुली कर, उन आजिवन सभासद में से हर *"पाच साल मे चुनाव पध्दति"* से, *"ट्रस्टीओं का चुना"* जाना अब जरुरी हो गया है. दुसरी बात यह कि, तिन नये ट्रस्टी *भंते नाग दीपांकर / डॉ. चंद्रशेखर मेश्राम / प्रा प्रदीप आगलावे* इनका चेज रिपोर्ट मा. धर्मादाय कार्यालय द्वारा स्वीकृत किया गया है या नही ?  अगर स्वीकृत नही हुआ हो तो, क्या उन्हे *"सभा में बैठकर प्रोसिडींग बुक"* में सही करने का अधिकार है ? यह भी कानुनी प्रश्न है.

             दीक्षाभुमी का यह विवाद बहुत ही शर्मसार है. दीक्षाभुमी ट्रस्टी गट ये *"दीक्षाभुमी मालक"* ना होने से, उन्होने इस नंगानाच को बंद करना जरुरी है. विश्व मे उस घटना से अच्छा संदेश नही जा रहा है. *"दीक्षाभुमी यह समाज की धरोहर है."* अत: उस पर निर्णय लेने का अधिकार *"बुध्द समाज"* है. धम्म चक्र प्रवर्तन दिन पर *विधायक डॉ नितिन राऊत* इनकी संघटन *"संकल्प"* द्वारा *"भोजन दान"* कराने से, कुछ लोक *"हात में खाने की पत्रावली"*  लेकर घुमते नजर आते है. रास्ते पर ही खाना खाने बैठते है. *"विधायक नितिन राऊत हात में खाने की पत्रावली लेकर, स्वयं घुमकर वह भी अनुभव ले. "* इस *"भिकारवाडा तथा दिक्षाभुमी गंदगी"* पर आवाज उठती हुयी, हमें दिखाई नही देती. उस कारणवश लोगों के कपडे भी गंदे हुये है / ट्राफिक जाम भी हुआ दिखाई देता है. निश्चित *"भोजन दान"* पवित्र कार्य है. लेकिन भोजनदान *कुर्वेज न्यु माँडेल या आय टी आय मैदान"* मे आयोजन कर, *"भोजन करने टेबल / पिने का पानी / हात साफ करने पानी व्यवस्था / भोजन पात्र फेकने डस्टबिन"* आदि व्यवस्था करना जरुरी है. *नितिन राऊत भिकारवाडा* कारणवश बुरा असर *" डाँक्टर्स द्वारा मोफत रोग शिबिर"* पर हो रहा है. मेडिकल अंम्बुलंस आने - जाने में परेशानी हो रहा है. अत: यह व्यवस्था करने की जिम्मेदारी *"दिक्षाभुमी ट्रस्टी"* की है. इस पर गवई गट / फुलझेले गट खामोश है. शायद इसमे *"आर्थिक लाभ"* विषय ना हो. दिक्षाभुमी बांधकाम प्रकरण भी चर्चा का विषय था. वही *"दिक्षाभुमी भुमी विस्तारीकरण"* अर्थात बाजु की *"आरोग्य विभाग / कृषी विभाग जमिन"* इतने सालों से हमें नही मिल पायी. वही उत्तर नागपुर के कमाल चौक स्थित *"समाज भवन - सांस्कृतिक हाँल*" को तोडकर / केंंद्रिय मंत्री *डाँ नितिन गडकरी* इनके माँ के नाम पर, वहा *"अस्पताल"* का निर्माण किया गया है. अत: विधायक *डाँ नितिन राऊत* इनके अनुमती बिना यह संभव नही था. वही सिताबल्डी रेल्वे स्टेशन सामने का पुल *"गणेश मंदिर"* के लिए, बाधा होने के कारण वह तोडा गया. अत: हमारे *"बुध्द समुदाय का विघटन"* ही इसके लिए कारक रहा है. उत्तर नागपुर *"रिपब्लिकन गड"* उध्वस्त करने के *"शुक्राचार्य / अस्तिन के साप"* कौन है ? यह भी जानना हमारे लिए जरुरी है.


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर, दिनांक १३ जुलै २०२६

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