Monday, 12 October 2026

 ✍️ *दीक्षाभुमी मोफत रोग निदान शिबिर विधायक - माजी मंत्री डाँ. नितिन राऊत इसके मसन्याउद राजनीति कारणवश इस साल दो भागों मे विभाजीत ! नितिन राऊत भोजनदान नाम पर दीक्षाभुमी परिसर में भिकारवाडा प्रकार - पात्र गंदगी ना फैलायें !*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


          धम्म चक्र प्रवर्तन दिन के उपलक्ष में दीक्षाभुमी चौक स्थित संत चोखामेला परिसर मे आयोजीत *"मोफत रोग निदान शिबिर"* को, *"५० साल के उपर* कालावधी का इतिहास है. सदर रोग निदान शिबिर की बुनियाद में, हम तिन डाँक्टर्स *डाँ. हरीश भिवगडे / डाँ. के. एस. उमरे / डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इसके प्रमुख सुत्रधार थे. सदर शिबिर आयोजन श्री आयुर्वेद काँलेज सलग्न *"डाँ. आंबेडकर आयुर्वेदिक मेडिकोज असोशिएशन"* द्वारा चोखामेला होस्टेल परिसर में  हमारा वह पहला शिबिर रहा था. वही शासकिय मेडिकल काँलेज / इंदिरा गांधी मेडिकल काँलेज सलग्न *"डाँ. आंबेडकर मेडिकोज असोसिएशन"* द्वारा दीक्षाभुमी परिसर - भिक्खु निवास के सामने मेन रोड पर शिबिर हुआ करता था. पिछले २० - २५ साल पहले मेडिकल काँलेज का शिबिर का हमारे चोखामेला परिसर में आयोजन होने के बाद *"चोखामेला परीसर - हेल्थ झोन"* रुप में परिचीत हो गया. तथा ९ - १० साल पहले *"सिव्हिल राईटस प्रोटेक्शन सेल - जीवक वेलफेयर सोसायटी - अश्वघोष बुध्दीस्ट फाऊंडेशन का संयुक्त उपक्रम / शासकिय आयुर्वेद काँलेज / डेंटल काँलेज / होमीओपँथी काँलेज / डाँ. बी आर आँबेडकर डाक्टर्स असोसिएशन"* आदि की भर होने से, हमने लगाया वह वृक्ष बहरते हुये हमे नजर आया. परंतु उत्तर नागपुर विधायक - मंत्री रहा *डाँ. नितिन राऊत* महाशय ने, *"मसन्याऊद राजनीति"* खेलकर हम डाँक्टर वर्ग टीम को चोखामेला परिसर से भगाने की चेष्टा की. जब की नितिन राऊत का भोजनदान *"अंध विद्यालय* शासकिय आय टी आय के सामने हुआ करता था. मुझे (डाँ. जीवने) हमारे मेडिकोज द्वारा चोखामेला परिसर से हटाने की सुचना मिलने पर, मै ५० - ६० डाँक्टर वर्ग को लेकर तत्कालिन समाज कल्याण विभाग उपायुक्त *डाँ. सिध्दार्थ गायकवाड* इसको दो खडे सुनाने के बाद, हमारा *"मेडिकल झोन"* दो भागोँ में विभाजीत हुआ. चोखामेला आधे परिसर में भोजनदान / आधे परिसर में मेडिकल कँम्प. नितिन राऊत प्रणित *"संकल्प"* संघटन द्वारा सन्मानजनक भोजनदान व्यवस्था नही की जाती थी / है. रास्ते पर पात्र में भोजन देने से *"श्रध्दालु वर्ग"* मेन रास्तों पर ही खाना खाने बैठ जाते थे. तो कभी भोजन पात्र लेकर इधर उधर घुमते फिरते थे. हमारे मेडिकल शिबिर मे भी भोजन पात्र लाकर खाना खाते थे. खाना पात्र हमारे शिबिर में फेकर / रास्तों में फेकर *"दीक्षाभुमी परिसर में गंदगी"* फैलाते थे. इस कारणवश हमे रोगी की जाँच करना / हमारे एंबुलंस का हमारे शिबिर परिसर में आना कठिण हो गया. परंतु निर्लज्ज - बेशरम मानसिकतावादी नितिन राऊत को इसका क्या ? शायद नितिन राऊत के *"पिताजी मिल मजुर"* होने के कारण नितीन राऊत को *"भिकारवाडा संस्कार"* परिवार से मिला हो तो, वह नितिन राऊत का व्यक्तिगत विषय है. वह हमारा विषय नही है. बाबासाहेब डाँ. आंबेडकर इन्होने तो हमे *"स्वाभिमान"* शिक्षा दी है. अत: नितिन राऊत यह समाज को *"भिकारवाडा प्रकार - दीक्षाभुमी गंदगी"* प्रकार ना सिखायें. नितिन राऊत को भिकारवाडा बनने का शौक हो तो, *"नितिन राऊत स्वयं अपने हाथ में भोजनपात्र लेकर रास्तों पर घुमें !* जिसको नितिन राऊत को भोजनपात्र लेकर घुमना अच्छा लगे तो, वे नितिन राऊत का स्वागत करे !!!

          इस साल के धम्म चक्र प्रवर्तन दिन के अवसर पर विधायक *डाँ. नितिन राऊत* द्वारा चोखामेला होस्टेल परिसर की आधे जमिन अतिक्रमण कारण हमारे समस्त *"डाँक्टर वर्ग को जगह ही कमी"* होने के कारण, हम डाँक्टर वर्ग *नितिन राऊत* के समान निर्लज्ज - बेशरम नही है. अत: कुछ डाँक्टर वर्गयश ये *"चोखामेला होस्टेल परिसर"* में, तो कुछ डाँक्टर वर्ग ये *"माता कचेरी परिसर"* में इस साल *"मुफ्त रोग निदान शिबिर"*:का आयोजन करने जा रहा है. *मैं स्वयं* सदर पर्यायी मेडिकल व्यवस्था को करने हेतु *"आरोग्य उपसंचालक डाँ. शंभरकर"* इनसे चर्चा कर चुका हुँ. अगले साल *डाँ. नितिन राऊत* तथा *"दो माह"* पहले शासन विभिन्न विभाग में *"मेरी शिकायत"* करने के उपरांत भी, अगर शासन विभाग *डाँ. नितिन राऊत* समान निर्लज्ज - बेशरम हुआ तो, अगले साल *"मै स्वयं उच्च न्यायालय"* मे याचिका दायर करुंगा. यह बात महाराष्ट्र शासन तथा डाँ. नितिन राऊत भी अच्छे से नोट करे. आज *सोमवार दिनांक १२ अक्तुबर २०२६* को समाज कल्याण उपायुक्त *श्री कुलकर्णी* / सहा. आयुक्त *सुकेशिनी तेलगोटे* इनके साध मेरे ही (*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*) नेतृत्व में मेरी *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* इस राष्ट्रीय संघटन के *सीमा बोधनकर / डाँ. अभिजीत बरुआ / डाँ. अमित नाईक / डाँ. राजेश नंदेश्वर / सुमिता झा / ज्युली चार्ली / बेला मरियम / राजेंद्र घोरपडे* / डाँ. बी आर आंबेडकर डाक्टर्स असोशिएशन के *डाँ. संजय मेश्राम / डाँ. विनोद गंभिर / डाँ. मच्छिंद्र चोरमारे / डाँ. अनिल पाटील / डाँ. अजय मसाने / डाँ. कुलदिप डोंगरे / डाँ. राजु कोसे* / शासकिय आयुर्वेद काँलेज सलग्न डाँ. आंबेडकर आयुर्वेदिक मेडिकोज असोशिएशन के *डाँ. सुशिल चवरे / डाँ. शील गाडले / डाँ. वाय एम. कुमक / डाँ. मिथिलेश मोहरे / डाँ. गोविंद नाईक / डाँ. अक्षय नागरवाडे* / श्री आयुर्वेद काँलेज सलग्न डाँ. आंबेडकर आयुर्वेदिक मेडिकोज असोशिएशन के *डाँ. शिल्पा वराडे / डाँ. रचना रामटेके / डाँ. वृशाली दाडके* आदि प्रतिनिधि मंडल सें चर्चा की गयी. तथा हमारे एकसंघ शक्ति प्रदर्शन का प्रभाव होकर *"संत चोखामेला होस्टेल परिसर"* का कुछ भाग की व्यवस्था करने का आश्वासन समाज कल्याण विभाग द्वारा दिया गया. बेशरम - निर्लज्ज विधायक *नितिन राऊत* इसकी *"मसन्याऊद राजनीति"* पर असर होगा या नही ? नितिन राऊत अगले साल *"सन्मानजनक"* भोजन व्यवस्था करने हेतु *"कुर्वेज न्यु माँडेल परिसर"*:में संकल्प का भोजनदान *"स्थानांतरण"* करता है या नही ? या हम डाँक्टर वर्ग  को *"पिछले पाच सालों"* से हो रही परेशानी भी पुर्ववत होगी या मुझे *"उच्च न्यायालय"* जाने बाध्य होना होगा ? यह वक्त ही बतायेगा. वैसे हरिजन विधायक *डाँ. नितिन राऊत* इसका इतिहास उत्तर  नागपुर *"रिपब्लिकन गड"* तोडने का भी रहा है. कमाल चौक स्थित *"डाँ. आंबेडकर सभगृह"* तोडकर भाजपा  के सांसद - केंद्रीय मंत्री *डाँ. नितिन गडकरी* इसके माँ के नाम अस्पताल बनाने में छुपी भुमिका रही है. कमाल चौक - गोलिबार चौक ओव्हर ब्रीज का नामकरण *"हम युवा वर्ग नेताओ"* ने तत्कालिन उपमहापौर / हमारे मित्र *धिरेंद्र चहांदे* इनके हाथो *"डाँ. आंबेडकर ओव्हर ब्रीज"*:किया था. आज वह पुराना ब्रीज तोडकर *"कमाल चौक - दिघोरी चौक"* ओव्हर ब्रीज का नामकरण देश विघातक संघवादी *डाँ केशव हेडगेवार"* इनके नाम होने पर, *नितिन राऊत* तो, किस गली में छुप गया, पता ही नही चला. नितिन राऊत का आका / कांग्रेस राजकुमार *राहुल गांधी*:ये भारतीय संविधान अनुच्छेद १ अनुसार *"इंडिया - भारत"* यह ना कहते हुये *"हिंदुस्तान"* अर्थात *"निच लोगों का देश / चोरो का देश"* कहता है. क्या करे राहुल गांधी की खानदान ये *"चोरो की या निच"* हो. शायद नितिन राऊत भी उसी वर्ग से संबधित हो, यह आज हमें पता नही. परंतु नितिन राऊत इसकी हरकते *"दीक्षाभुमी गंदगी शिल्पकार / दीक्षाभुमी भिकारवाडा जनक"* दिखाई देती है. हम नितिन राऊत के विचार परिवर्तन की आशा करते है.


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▪️*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक १२ अक्तुबर २०२६

Saturday, 10 October 2026

 👺 *दीक्षाभुमी चोखामेला होस्टेल परिसर से डाँक्टरों का मुफ्त मेडिकल रोग निदान शिबिर को हटाने - दीक्षाभुमी भोजनदान भिकारवाडा - गंदगी शिल्पकार डाँ. नितिन राऊत (Ex मंत्री) की मसन्याउद राजनीति !*

       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


          दीक्षाभुमी चौक संत चोखामेला होस्टेल परिसर में आज से *"५० साल पहले"* हम तिन डाक्टर्स - *डाँ. हरिश भिवगडे / डाँ. के. एस. उमरे / डाँ. मिलिन्द जीवने"* इन्होने धम्म चक्र प्रवर्तन दिन पर आनेवालें श्रध्दालु वर्ग के लिए *"मुफ्त रोग निदान शिबिर"* की बुनियाद रखी थी. तब हम केवल तिन डाँक्टर्स *"डाँ. आंबेडकर आयुर्वेदिक मेडिकोज असोशिएशन"* इसके प्रमुख सुत्रधार थे. और सदर शिबिर के लिए इकठ्ठा की गयी दवाईयांँ *"मेरे घर"* ही रखी थी. मुफ्त रोग निदान शिबिर की वह बुनियाद हम *"श्री आयुर्वेद काँलेज"* के तिन डाँक्टरों ने रचने के बाद, *"शासकीय आयुर्वेद काँलेज"*  के कुछ डाँक्टर्स वर्ग भी हमारे साथ जुड गये. और हमारे साथ फिर *"डाँ. माया कांबले / डाँ. इंदिरा सोमकुवर / डाँ. मंगला बनसोड"* रहा करती थी. *"शासकिय मेडिकल काँलेज / इंदिरा गांधी मेडिकल काँलेज"* के डाँ. आबेडकर मेडिकोज असोशिएशन का शिबिर दीक्षाभुमी स्थित भिक्खु निवास के सामने *"प्रमुख रोड"* पर हुआ करता था. चोखामेला होस्टेल परिसर में केवल हम डाँक्टर्स वर्ग का केवल *"अकेला मेडिकल शिबिर"* हुआ करता था. बाद में १० - १५ वर्षो बाद हमारे चोखामेला परिसर में *"शासकिय मेडिकल काँलेज / इंदिरा मेडिकल काँलेज / शासकिय आयुर्वेदीक काँलेज"* डाँक्टर्स वर्ग नें, अपने अपने काँलेज के कँम्प लगाना शुरु किया. और पिछले ८ - ९ सालों से *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल - जीवक वेलफेअर सोसायटी - अश्वघोष बुध्दीस्ट फाऊंडेशन का संयुक्त शिबिर / डेंटल काँलेज / होमिओपँथी काँलेज / डाँ. आंबेंडकर डाँक्टर्स असोसिएशन"* इन्होने भी अपनी आरोग्य सेवाएँ देना शुरु की. पहले डेटल काँलेज शिबिर का उदघाटन *"मेरे हस्ते"* ही किया गया था. डेंटल को जगह मिलानें में मेरी थोडी मदत भी रही थी. अर्थात संत चोखामेला होस्टल परिसर यह *"मेडिकल झोन"* रुप में परिचीत है. माजी मंत्री / विधायक *डाँ. नितिन राऊत"* सलग्न संकंल्प संघटना *"भोजनदान - अंध विद्यालय"* (शासकिय आय टी आय आगे) में २० - २५ साल पहले शुरु किया गया. परंतु पिछले ४ - ५ साल पहले *डाँ. नितिन राऊत"* इसके मंत्री पद काल में, हमारे डाँक्टर्स लोगों को *"चोखामेला परिसर से हटाने की चेष्टा"* की. तब हमारे तमाम डाँक्टर्स वर्ग का *"मुझे फोन"* आया कि, *"मंत्री - डाँ. नितिन राऊत"* इन्होने अपने डाँक्टर्स वर्ग को वहाँ से हटा दिया है. अर्थात मंत्री - नितिन राऊत ये *"मसन्याउद राजनीति"* खेल कर गया था. हमें वहां से हटाने में डाँ नितिन राऊत महाशय ने, तत्कालिन विभागीय समाज कल्याण आयुक्त *"डाँ. सिध्दार्थ गायकवाड"* इसकी मदत ली थी. *"मै स्वयं* तात्काल शिबिर घटना स्थल जाकर *"५० - ६० मेडिकोज डाँक्टर्स टीम"* लेकर, डाँ. सिध्दार्थ गायकवाड को कहाँ कि, *"आप ने हमारे पिछले ५० सालों से चल रहे मेडिकल झोन को ही हटाने की चेस्टा कैसे की ? डाँ नितिन राऊत ये भोमन जी है क्या? अगर आप ने हमारे मेडिकल शिबिर को हटाने की चेष्टा की तो, तुम्हारा समाज कल्याण विभाग में बैठना दुर्धर कर देंगे. "* हमारे तमाम डाँक्टर्स वर्ग के एकता ने रंग लाया. और वह परिसर *"संकल्प भोजनदान / डाँक्टर्स मेडिकल कँम्प"* दो भागों में विभाजीत हुआ. परंतु डाँ. नितिन राऊत प्रणित *"संकल्प भोजनदान"* के कारण हम डाँक्टर्स लोगों कों *"आरोग्य सेवा"* देना, बहुत ही कठिण हो गया. हमारी *"एम्बुलंस"* चोखामेला परिसर में प्रवेश नही कर पाती. नितिन राऊत के स्टाँल से *"हाथ मे भोजन पात्र"* लेकर  समस्त लोग *"मेन रोड"* पर ही खाना खाने बैठ जाते है. *"मेन रोड"* पर खाने की पत्रावली फेककर *"गंदगी"* करते है. तो कुछ लोग हमारे *"मेडिकल शिबिर कें स्टाल अंदर"* ही खाना खाने बैठ जाते है. खाना खाने के बाद *"खाने की पत्रावली"* हमारे मेडिकल स्टाल के बाहर फेक देते है. हो सकता है कि, *विधायक नितिन राऊत के पिताजी मिल मजुर होने के कारण, डाँ. नितिन राऊत को भिकारवाडा संस्कार उसके परिवार से ही मिले हो. यह डाँ. नितिन राऊत इसका खाजगी विषय है."* हमे डाँ. नितिन राऊत के खाजगी भिकारवाडा संस्कार पर कुछ भाष्य करना नही है. नितिन राऊत ने वह *"भिकारवाडा भोजन संस्कार"* यें आंबेडकरी समाज को देकर, *"डाँ. नितिन राऊत - दीक्षाभुमी भोजनदान भिकारवाडा / गंदगी शिल्पकार"* बन गया है. अर्थात नितिन राऊत के इस *"मसन्याउद राजनीति"* की चर्चा जोरों सें जहाँ वहाँ चल रही है. बाबासाहेब डाँ. आंबेडकर इन्होने हमे सन्मानपुर्व रहने स्वाभिमान मंत्र दिया है. *डाँ. नितिन राउत* ये हमारे समाज को, *"भिकारवाडा संस्कृति"* की ओर ले जा रहा है. इसका विरोध होना जरुरी है.

         *"भोजनदान"* यह पवित्र कार्य है. बुध्द धर्म में *"दान पारमिता"* को सर्वोच्च माना गया है. परंतु भोजनदान करते समय *"भिकारवाडा संस्कृति"* की ओर ना जाते हुये, भोजनदान *"सन्मानपुर्वक"* करना बहुत जरुरी है. विधायक नितिन राउत के संकल्प से जुडे हुये *"पिलांटु"* भोजन पात्र पर भोजन देते समय, आंबेडकर समाज को *"भिकारी समान व्यवहार"* करते हुये हमे दिखाई दिये है. ऐसा भी नही कि, नितिन राऊत ये *"भोजनदान"* अपने स्वयं के पैसे से कर रहा है. बल्की समाज से ही *'धान्य / पैसा"* इकठ्ठा कर भोजनदान करवाता है. *"बचे हुये अनाज आदि वस्तुओं"* का क्या किया जाता है ? हम इस विषय पर चर्चा नही कर रहे है. भोजनदान सन्मानपुर्वक कराना जरुरी है. किसी अन्य *"डाँक्टर्स संघटन"* को कष्ट ना हो, इसकी भी केयर करना जरुरी है. *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* संघटन द्वारा शासन / संबंधित सभी विभागों को *"डाँ. नितिन राऊत - भोजनदान की लिखित शिकायत"* करते हुये *"न्यु कुर्वेझ माँडल हायस्कुल परिसर"* मे समस्त संघटनो का *"भोजनदान - फुड झोन"* कराने का हम ने सुझाव दिया. परंतु नितिन राऊत की मानसिकता *"निर्लज्ज - बेशरम"* रही है. जमिन हडपना आदि कृत्य नितिन राऊत का इतिहास है. भोजनदान देते समय *"भोजन टेबल लगाना / पिने की पाणी - हाथ धोने के लिए पाणी की व्यवस्था / भोजनपात्र फेकने डस्टबिन व्यवस्था"*:आदी होना जरूरी है. शायद यह व्यवस्था कराने की *"डाँ. नितिन राऊत की हैसियत है या नही? "* यह संशोधन का विषय है. हम इस पर चर्चा नही करेंगे. परतु हमारे *"मेडिकल स्टाँल को नितिन राऊत द्वारा गंदगी"* फैलाई जा रही है, हम यह कदापी सहन नही करेंगे. हमारी एम्बुलंस हमारे चोखामेला परिसर में आने में परेशानी हो रही है. अभी हमारे *"चोखामेला होस्टेल मेडिकल झोन"* परिसर को ५० सालों का इतिहास है. हम डाँक्सर्स वह जगह कदापी नही छोडेंगे. नितिन राऊत बाजु के *"कुर्वेज न्य माँडेल हायस्कुल मैदान"* में फुड झोन व्यवस्था कर सकता है. नितिन राऊत को संत चोखामेला परिसर - *"मेडिकल झोन"* की जगह छोडनी होंगी. अन्यथा हमारे तमाम *"डाँक्टर्स - मेडिकोज वर्ग"* इसके विरोध में "*समाज कल्याण कार्यालय"* को निवेदन देकर आंदोलन करेंगे. *"सोमवार दिनांक १२ अक्तुबर २०२६ को दोपहर ४. ०० बजे"* तमाम डाँक्टर्स - मेडिकोज पदाधिकारी *"समाज कल्याण उपायुक्त श्री कुलकर्णी"* इनसे मिलने इकठ्ठा हो, यह आवाहन किया जाता है. और चोखामेला परिसर में *"मेडिकल झोन स्टाँल"* लगाने के लिए तैयार होना है. नितिन राऊत यह नही समझे उसकी *"मसन्याउद राजनीति"* हम डाँक्टर्स वर्ग पर चलेगी. नितिन राऊत की मसन्याउद राजनीति ने कमाल चौक स्थित *"डाँ आंबेडकर सभागृह""* गिराकर / भाजपा खासदार - केंंद्रीय मंत्री *डाँ नितिन गडकरी* इनके माँ के नाम पर *"सार्वजनिक दवाखाना"* खोला गया, तब आंबेडकरी समाज खामोश था. *"कमाल चौक - गोलिबार चौक पुल"* का नामकरण हम युवा नेताओं ने, तत्कालीन उपमहापौर *धिरेंद्र चहांदे* इनके हस्ते ही *"डाँ. आंबेडकर ओव्हरब्रीज"* करने के उपरांत भी / वह पुराना पुल गिराने के बाद *"कमाल चौक - दिघोरी चौक स्थित ओव्हर ब्रीज"* इसका नामकरण देश विघातक संघवादी विचारी *"डाँ. केशव हेडगेवार ओव्हर ब्रीज"* करने के बाद भी, हरीजन - विधायक *डाँ. नितिन राऊत* किस बील में छुप गया है ? हमें कही दिखाई नही दिया. यह *बाबासाहाब डाँ. आंबेडकर* इनके नाम का अपमान है. नितिन राऊत का आका - *"राहुल गांधी* ये भारतीय संविधान *अनुच्छेद १* - देश का नाम *"भारत - इंडिया"* होने पर भी, *"हिंदुस्तान"* - अस्तित्वहिन देश / *निच लोगों का देश,* कहता है. शायद *राहुल गांधी* ये निच परिवार से जुडा हो, हमे इस पर कुछ नही कहना. नितिन राऊत इसके *"समाज विघातक"* कार्यों की लंबी यादी हमारे पास मौजुद है. आज हम उस विषय पर चर्चा नही करना चाहते. *डाँ. नितिन राऊत* इसने हम डाँक्टर वर्ग से उलझने की चेष्टा ना करे. *"आंबेडकरी डाँक्टर वर्ग"* जब उठ खडा होता है, तब जमिन हिलने लगती है. नितिन राऊत इस संदर्भ को ध्यान रखे तो ही बेहतर है....!!!


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▪️*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर दिनांक १० अक्तुबर २०२६

Friday, 2 October 2026

 *डाँ. आंबेडकर सीआरपीसी राष्ट्रिय पुरस्कार एड. मोहन गवई / डाँ. प्रमोद चिंचखेडे / प्रा. डाँ. नितिन तागडे / सीमा बोधनकर / ज्युली चार्ली इन्हे घोषित. डाँ आंबेडकर आंतरराष्ट्रिय कन्व्हेंशन सेंटर मे ४ अक्तुबर सुबह ११. ३० बजे सन्मान समारोह !*

   *सिव्हिल राईट्स (अधिकार) वर्क्स शाँप*

🏆*माता सावित्रीबाई फुले - माता रमाई आंबेडकर इंसेटिव्ह अवार्ड* वर्क शाँप मे उत्कृष्ठ योगदान एवं मेरिट धारक (दस लोगों) को !


          सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल की डाँटर विं *"सीआरपीसी वुमेन विंग / सीआरपीसी फिनिक्स विंग"* इनकी संयुक्त तत्वधान में एक दिवसीय *"सिव्हिल राईट्स (मानवी अधिकार वर्क्स शाँप"* तथा *डा बाबासाहेब आंबेडकर  राष्ट्रिय पुरस्कार"* का आयोजन ४ अक्तुबर २०२६ को सुबह ११. ३० बजे होने जा रहा है.  सदर समारोह में राष्ट्रिय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' सर* अध्यक्षता करेंगें. तथा प्रमुख अतिधी *अपर पोलिस आयुक्त - विनिता शाहु / एक्स डेप्युटी डायरेक्ट आँफ हेल्थ - डाँ. गणेश रामटेके / जिल्हा परिषद असि. इंजिनियर - मनोज झोडापे*  तथा विशेष अतिथी *रुतुजा जयस्वाल / वर्षा श्यामकुले* मान्यवरों की उपस्थिती होंगी.  साथ ही *"तिन मान्यवर वकिल"* वर्ग *एड. डा मोहन गवई / डा राजेश लाख / एड. डाँली अग्रवाल* का कानुनी अधिकार पर मार्गदर्शन होगा. *डाँ. आंबेडकर सीआरपीसी राष्ट्रीय पुरस्कार* यह सामाजिक क्षेत्र से जुडे  हुये *एड. डाँ. मोहन गवई / डाँ. प्रमोद चिंचखेडे / प्रा. नितिन तागडे / सीमा बोधनकर / ज्युली चार्ली* इनको घोषित हुआ है. संविधान वर्क शाँप सफलता में *"योगदान देनेवाले एवं मेरिट धारक"* को सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* सर वर्क शाँप प्रशिक्षण लेनेवाले को *"माता सावित्रीबाई फुले - माता रमाई आंबेडकर इंसेटिव्ह अवार्ड २०२६"*  (दस प्रशिक्षणार्थी को ) की वर्क शाँप में घोषणा कर *"मेमेंटो / अवार्ड सर्टिफिकेट"* यह समारोप कार्यक्रम में प्रदान करने की घोषणा सेल के राष्ट्रिय सचिव *सुर्यभान शेंडे* इन्होने एक पत्रक में घोषित की है.


स्नेहांकित - सीआरपीसी - *डाँ. संजीव कांबले* (एक्स डायरेक्टर आँफ हेल्थ) /*सुर्यभान शेंडे /  इंजी. मनोज झोडापे / दिलिप तांदले / संजीवन वालदे / डाँ. राजेश नंदेश्वर / राजेंद्र घोरपडे / डाँ अभिजित बरुआ / विजय सहारे / मोजेश गौर / सुधाकर धुर्वे / संजय आवले / युसुफ उन्नबी खान* आदि पदाधिकारी 

वुमेन विंग - *जेनिफर पिल्ले कांबले / हेलन (बेला) मरियन / सुमिता झा / छाया (निशा) कुलकर्णी / डाँ. मनिषा घोष / डाँ. इंदिरा सोमकुवर / डा. भारती लांजेवार / सुमिता झा / संजीवनी कुमरे / राजश्री बावणे / शीला नैताम / एड. बबीता मेश्राय / बबीता सोमकुवर* तथा सी. आर. पी. सी. वुमेन विंग / सी. आर. पी. सी. फिनिक्स विंग एवं तमाम वुमेन पदाधिकारी

Sunday, 27 September 2026

 💐 *इंजी. मनोज झोडापे इनकी राष्ट्रिय उपाध्यक्ष एवं इंजी. मनोज गजभिये इनकी राष्ट्रिय सचिव पद पर सीआरपीसी इंजीनिअर्स विंग / सीआरपीसी एम्प्लाईज विंग में नियुक्ती  !*


      *सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल* की डाटर कंसर्न राष्ट्रिय संघटन सी.आर.पी.सी. इंजिनियर्स विंग  / सीआरपीसी एम्प्लाईज विंग के **राष्ट्रिय उपाध्यक्ष"* पद पर *इंजी. मनोज झोडापे* इनकी तथा *"राष्ट्रिय सचिव"* पद पर *इंजी. मनोज गजभिये* इनकी नियुक्ती सीआरपीसी के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इनके सुचना पर सीआरपीसी के राष्ट्रिय सचिव *सुर्यभान शेंडे* इन्होने घोषित की है. सदर नियुक्ती सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के *राष्ट्रिय अध्यक्ष* तथा सीआरपीसी वुमन्स विंग / सीआरपीसी एडव्होकेट विंग / सीआरपीसी एम्पाइज विंग / सीआरपीसी हेल्थ (डॉक्टर) विंग / सीआरपीसी बुध्द आंबेडकरी साहित्यिक (लिटररी) विंग / सीआरपीसी इंजीनियर्स विंग / सीआरपीसी ट्रेड्स एंड कॉमर्स विंग / सीआरपीसी ट्रायबल विंग / सीआरपीसी कल्चरल विंग / सीआरपीसी वुमन्स क्लब के "राष्ट्रिय पेट्रान" - *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इन्हे कर दी है. *इंजी. झोडापे / इंजी. गजभिये* ये सामाजिक क्षेत्र से जुडे है. उनके इस नियुक्ती पर सभी पदाधिकारी वर्ग ने उनका अभिनंदन किया है.

 💐 *डा. प्रमोद चिंचखेडे इनकी राष्ट्रिय संघटक एवं महेश झोडापे इनकी राष्ट्रिय उपाध्यक्ष पद पर सीआरपीसी ट्रेड एंड काँमर्स विंग में नियुक्ती  !*


      *सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल* की डाटर कंसर्न राष्ट्रिय संघटन सी.आर.पी.सी. काँमर्स विंग  के **राष्ट्रिय संघटक"* पद पर *डाँ. प्रमोद चिंचखेडे* इनकी तथा *"राष्ट्रिय उपाध्यक्ष "* पद पर *महेश झोडापे* इनकी नियुक्ती सीआरपीसी के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इनके सुचना पर सीआरपीसी के राष्ट्रिय सचिव कवि - *सुर्यभान शेंडे* इन्होने घोषित की है. सदर नियुक्ती सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के *राष्ट्रिय अध्यक्ष* तथा सीआरपीसी वुमन्स विंग / सीआरपीसी एडव्होकेट विंग / सीआरपीसी एम्पाइज विंग / सीआरपीसी हेल्थ (डॉक्टर) विंग / सीआरपीसी बुध्द आंबेडकरी साहित्यिक (लिटररी) विंग / सीआरपीसी इंजीनियर्स विंग / सीआरपीसी ट्रेड्स एंड कॉमर्स विंग / सीआरपीसी ट्रायबल विंग / सीआरपीसी कल्चरल विंग / सीआरपीसी वुमन्स क्लब के "राष्ट्रिय पेट्रान" - *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*  इन्हे कर दी है. *डाँ. चिंचखेडे / झोडापे* ये सामाजिक क्षेत्र से जुडे है. उनके इस नियुक्ती पर सभी पदाधिकारी वर्ग ने उनका अभिनंदन किया है.

Tuesday, 22 September 2026

 ✍️ *प्रा. डा. प्रदिप आगलावे इनके नागपुर विद्यापीठ आर्थिक भ्रष्टाचार प्रकरण (?) पर पँथर प्रकाश बनसोड - डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इन पर डाले गये डिफेमेशन केस में बनसोड - डा. जीवने इनका रिप्लाय सादर !*


            *प्रा. डा. प्रदीप ना. आगलावे* ये जब नागपुर विद्यापीठ डा. विचारधारा विभाग तथा डा आंबेडकर चेयर के प्रमुख रहे थे, तब प्रा. आगलावे इन्होने *"डा आंबेडकर अध्यासन"* विभाग मे *"आर्थिक भ्रष्टाचार"* करने का आरोप हुआ. तथा उस संदर्भ मे कुछ गंभिर शिकायतें भी नागपुर विद्यापीठ के कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनके पास की गयी. सदर शिकायत के आधार पर, तत्कालीन प्र-कुलगुरु *डा. राजेंद्र काकडे* इनकी अध्यक्षता में *प्रा. डा. विजया उइके / प्रा. डा. निरज बोधी* यह तिन सदस्यीय समिती गठीत की गयी तथा प्रा आगलावे इन पर लगे आर्थिक भ्रष्टाचार की जाँच की गयी. सदर तिन सदस्यीय समितीने ११ मार्च २०२५ को अपना चौकशी अहवाल तत्कालीन कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनको सादर किया. सदर समितीने *"कुलगुरु इनके अनुमती के बिना कामकाज करना / ज्यादा राशी के व्यवहार रोख से करना / किये गये खर्च की उचित जाँच ना करना / निकर (चड्डी) खरेदी का बील / डा आंबेडकर आँन नेशन एंड नँशनालिझम की ५०० प्रति छपाई का कोई भी प्रमाण ना दिखना या कुलगुरु की अनुमती ना लेना / लंडन दौरा का ५० हजार खर्च बील / हिस्ट्री आँफ आंबेडकराईट मुव्हमेंट यह संशोधन डा आंबेडकर फाऊंडेशन को सादर करते दिखाई ना देना"* आदि विषयों का जिक्र किया गया. प्रा डा प्रदिप आगलावे इन्होने सदर *"तिन सदस्यीय समिती"* के चौकशी अहवाल को, किसी भी न्यायालय में चुनौती नही दी गयी. *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने डा बाबासाहेब अध्यासन विभाग मे हुये नागपुर विद्यापीठ *"समस्त शिकायते / तिन सदस्यीय समिती अहवाल"* को जनता को जाणने हेतु एक *"पुस्तिका"* रुप में प्रकाशीत किया. जब वह *"पुस्तिका"* मुझे भेट की गयी थी, तब वह किताब पढने के उपरांत मे, मै बडा चिंतित हुआ. *प्रा प्रदिप आगलावे*:ये मेरा बहुत ही अच्छा जिवलग मित्र है. प्रदिप के बहुत से *"सुख दुख"* का मै साथी भी रहा हुँ. प्रदिप के शादी का भी मै *"मध्यस्थ"* था. प्रदिप की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण, प्रदिप का जीवन *"सेवाग्राम गांधी आश्रम"* में गुजरा था. गांधी आश्रम में प्रदिप को एक रुम दी गयी थी. प्रदिप के मेहनत के कारण ही उसने उचाँई भी हासिल की. प्रदिप को *"आंबेडकरी विचारों"* मे जोडने / लाने में *प्रा. डा. ज्योती लांजेवार / मेरे (डा जीवने) / एड.  मिलिन्द बनसोड* इन मित्र वर्ग का बडा योगदान रहा है.

           *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने केवल नागपुर विद्यापीठ में किये गये सभी शिकायते / चौकशी अहवाल को प्रकाशित किया. चौकशी अहवाल में *"तिन सदस्यीय समिती"* ने प्रदिप आगलावे इन पर गंभिर आरोप लगाये है. और मैने उस किताब पर केवल *"समिक्षा"* लिखी है. अत: इस विषय को *"प्रा प्रदीप आगलावे* इनकी बदनामी कैसे कह सकते है ? प्रदिप आगलावे इनका व्यवहार / चरित्र शुध्द होना चाहिये. प्रदीप पर हुये आरोपों को *"तिन सदस्यीय समिती"*:ने सही माना है. यह विषय अलग है कि, नागपुर विद्यापीठ द्वारा *"फौजदारी केस"* (Criminal Offence) यह प्रदिप आगलावे इनके विरोध में दायर नही की गयी. अत: *"प्रदिप आगलावे इन्होने डा आंबेडकर दीक्षाभुमी स्मारक समिती"* में सदस्य रहना चाहिये या नही ? यह प्रदिप का तथा स्मारक समिती का विषय क्षेत्र है. परंतु प्रदिप आगलावे इन्होने *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* इनके मार्फत *"सह दिवाणी न्यायाधीश, वरिष्ठ स्तर, नागपुर"* इनके कोर्ट में *पँथर प्रकाश बनसोड / डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके विरोध में *"Spl. C. S. No. 1286/2025"* डिफेमेशन केस दायर की है. सदर केस दायर करने के पहले, एड सिध्दार्थ कांबले द्वारा हमे *"रु. ७५ लाख"* डिफेमेशन नोटीस भेजी थी. परंतु *"कोर्ट फी"* कारणवश अब *"रु. १० लाख"* डिफेमेशन केस प्रदीप आगलावे द्वारा डाली गयी. प्रकाश बनसोड इनकी ओर से वकिल *एड प्रमोद एन. कांबले* तथा डा मिलिन्द जीवने इनके वकिल *एड. सी एफ. भागवानी* यह केस की पैरवी कर रहे है. तथा प्रदिप आगलावे इनकी ओर से *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* पैरवी कर रहे है. बनसोड - डा जीवने इनके वकिल द्वारा कोर्ट में *"रिप्लाय"* दायर किया गया था. परंतु प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने *"रिप्लाय प्रति"* ना मिलने का जिक्र कर *"Ext. 11"* दायर की. परंतु २२ सितंबर को प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने अपनी वह अर्जी वापस ली. अब केस Issue हेतु कोर्ट के सामने प्रलंबित है. शायद भविष्य मे नागपुर विद्यापीठ के *"तिन सदस्यीय समिती"* को भी बयान देणे कोर्ट आना पड सकता है.


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नागपुर दिनांक २२ सितंबर २०२६

Monday, 21 September 2026

 🚩 *नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में गणपती को बिठाकर न्यायालय यह ब्राह्मण हिंदु देव मंदिर का स्वरुप मिला !* न्यायाधीश वर्ग की लायकी न्यायाधीश बनने की नही मंदिर पंडे बनने की है.

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


        पिछले साल मै व्यक्तिगत काम से *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तथा भंडारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* गया था. और भंडारा - तथा नागपुर कोर्ट में गणपति बैठे देखकर उसकी मैने व्हिडिओ बनाकर यु ट्युब मे. / तथा फोटो खिचकर मिडिया में प्रकाशीत कर *"न्यायाधीश"* वर्ग की लायकी *"पंडे"* वर्ग से जोडकर, न्यायाधीश पद से इस्तिफा देकर / हिंदु मंदिर का पंडे होने की बात कही थी. मेरी यह पोस्ट पढकर कोर्ट से दुसरे दिन ही गणपति हटाया गया. इस साल भी *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* में गणपति बिठाये जाने पर, मेरे उस न्युज की दखल लेकर कुछ वकिल वर्ग ने *"प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज"* इनके नाम एक निवेदन देने का प्रयास किया है. *"मुंबई उच्च न्यायालय"*  के न्यायाधीश की लायकी न्यायाधीश बनने की नही तो पंडै बनने की है. न्यायदान को उचित रुप में देने की लायकी उन न्यायाधीश वर्ग में कितनी है, इह पर संशोधन करना होगा. *"सर्वोच्च न्यायालय"* एक भुतपुर्व सरन्यायाधी *धनंजय चंद्रचुड* के पास न्याय लिखने की बुध्दी ना होने  के कारण *"राम मंदिर जन्मभुमी प्रकरण"* मेंं न्याय लिखने वो गणपति शरण गया था. ऐसे एक भुतपुर्व सरन्यायाधीश *शरद बोबडे* वो महाशय भी रामजमभुमी प्रकरण से जुडा था, वो महाशय तो *"सरन्यायाधीश गरिमा - प्रोटोकाल भुलकर* भगवान के सामने पुर्णत: सो गया था. ऐसे ना-लायक (Not Qualified) न्यायाधीश की नियुक्ति होती हो तो, भारत देश का भविष्य क्या होगा ? यह देखकर भारत विकास की चिंता होती है. और *"घुटने अंधभक्त वकिलों* के बारे में क्या कहे ? उन्हे यह पता नही की शासकीय कार्यालय मे *", देवपुजा"*:करना / देव - देवी को बिठाना संविधान विरोधी है. धर्म यह व्यक्तिगत विषय है. आप को पुजा करना हो तो अपने घर करे. शासकिय कार्यालय नही.


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