✍️ *भारत को हिंदुस्तान (= चोरों का देश) यें कहनेवाले देशद्रोही - देश गद्दार लोक है !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
भारत देश गुलामी का इतिहास बयाण करता है. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९०० से *"२८ वे बुध्द काल"* (इ. पु. सातवी - षटवी शति) तक तथा बाद में मौर्य - हरयक आदि वंश से लेकर *"बुध्द प्रभाव राजवंश ये अखंड विशाल भारत - समृध्द भारत"* (इसवी १० वी शति तक) का महान इतिहास रहा है. सिंधु घाटी में *"चक्राकार स्तुप / स्तुप सामने तरणताल / सिंह मुद्रा / कुबडाकार वृषभ / ज्ञानस्थ भिक्खु"* यह सभी प्रमाण *"पहिला बुध्द - ताण्हणकर बुध्द"* का बोध कराते है. *"विदेशी ब्राम्हण"* (आर्य) का भारत आगमण का इतिहास, *बाल गंगाधर तिलक - मोहनदास गांधी - जवाहरलाल नेहरु* से लेकर बहुत से ब्राह्मण लेखक - ग्रंथ बमाण कर गये है. *"बुध्द कालखंड हो या सम्राट अशोक शिलालेख"* यहां कही भी ब्राह्मण धर्म इतिहास - ब्राह्मण *चाणाक्य कौटिल्य* कथन दिखाई नही देता. अर्थात यह ब्राह्मण *"ग्लोबल्स कुटनीति"*:का रचा गया एक *"झुठा इतिहास"* है. बुध्द काल में *"बम्हन"* (ब्राह्मण शब्द नही) यह शब्द *"विद्वान - श्रमण - समन"*:अर्थ में प्रयोग होता था. पाली भाषा मे *"श / ऋ / ई / औ / क्ष / डः / र / त्र"* यह शब्द नही है. पाली भाषा में *"महायान"* संप्रदाय ने संस्कार कर *"हिब्रु संस्कृत"*:का अविष्कार किया. और इसवी बारावी शति में *वैदिक ब्राम्हणों* द्वारा *"क्लासिकल संस्कृत"* भाषा का अविष्कार किया. पाली भाषा - हिब्रु संस्कृत भाषा की लिपी *"ब्राम्ही - धम्म लिपी"* थी. वही क्लासिकल संस्कृत भाषा की लिपी *"देवनागरी लिपी"* है. देवनागरी लिपी का प्रारुप *"इसवी ११००"* में आने के बाद, वह व्यवहार में इसवी *"इसवी १७९६"* में प्रयोग में आयी. इसवी ८५० मे *शंकर* नामक व्यक्ति का जन्म होता है. वो आगे जाकर *"प्रछन्न बौध्द"*:कहलाता है. बुध्द धर्म का इ. पु. चवथी - तिसरी शति मे *"हिनयान - महायान"* विभाजन / इसवी पाचवी शति मे महायान द्वारा *"वज्रयान"* संप्रदाय और इसवी आठवी शति में वज्रयान द्वारा *"तंत्रयान"* संप्रदाय / और इसवी दसवी शति में वज्रयान - तंत्रयान द्वारा *"शैव पंथ - वैष्णव पंथ - साक्त पंथ"*:का निर्माण यह इतिहास समझना जरुरी है. इसवी दसवी शति मे *शंकर नामक व्यक्ति का स्वयं को आदि शंकराचार्य"* घोषित करना / *"महायान बुध्द विहारों पर"* अधिपत्य स्थापित करना / इसवी ग्यारहवी शति में *"वैदिक धर्म / ब्राम्हण धर्म"* की स्थापना / इसवी बारावी शति में *"वेद - उपनिषद - रामायण - महाभारत"* आदि ब्राह्मण्य ग्रंथ का *"कागद"* (शिलालेख / ताडपत्र / ताम्रपट पर नही) पर है / और *"कागज का शोध इसवी १० शति मे चायना"* में लगा है. और यही कारण *"बुध्द धर्म अवनति"* के दिखाई देते है. इसवी सातवी - आठवी शति *"मुस्लिम धर्म"* (मो. पेंगबर जन्म ६२२) शासन कालखंड / भारत में *"मुस्लिम आदि शासकों का भारत पर आक्रमण / अंग्रेजो का आक्रमण / "भारत गुलामी"* का इतिहास कथन करता है. अर्थात *"अंखड भारत ये गुलाम बनना ब्राह्मणशाही राजनिति"* का परिपाक है. *"वर्णव्यवस्था - जाताव्यवस्था"* का उत्पात / मुस्लिम शासकों द्वारा भारतीयों को *"हिनदु > हिंदु > चोर, काले मुहवाले, दस्यु"* यह गाली प्रयोग दिखाई देती है. *"हिंदु महासभा"* की स्थापना सन १९१५ में *मदन मोहन मालवीय* ने की. वही RSS -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Royal Secret Setvice) की स्थापना सन १९२५ को *डां केशव हेगडेवार* ने की. अस्पृश्य वर्ग *"हिंदु धर्मीय"*:ना होने से अंग्रेजो ने सन १९११ के जनगणना के बाद *"अनुसूचित जाति / जनजात"* यह दो शेड्युल (अनुसुचि) बनायी थी. *"ब्राम्हण"* हिंदु वर्ग से जुडे नही थे. ब्राह्मण ये *"हिंदु धर्म श्रेणी में कैसे आये ?"* इस विषय पर हम फिर कभी चर्चा करेंगे.
*"हिनदु > हिंदु"* यह शब्द ना मराठी भाषी / ना हिंदी भाषी / ना भारतीय भाषी शब्द है. वह *"फारशी भाषा"* (Persian) का शब्द है. हिंदु यह दो अक्षरी शब्द नही है. वह तिन अक्षरी शब्द है. *हिनदु = हिन + दु > हिन = निच, चोर, दस्यु, काले मुहवाले और दु = प्रजा > हिंनदु = हिंदु = चोर, काले मुहवाले लोग, निच लोक"* और हमारे भारत देश को *"हिंदुस्तान = चोरों का देश"* यह गाली देते थे. यही कारणवश *स्वामी दयानंद सरस्वति* इन्होने स्वयं को हिंदु ना कहने की, *"वैदिक"*:शब्द का प्रयोग करने की अपिल की थी. कांग्रेसी राजकुमार *राहुल गांधी* इनके सभी पुरखों का इतिहास *"चोरों"* का हो सकता है. अत: राहुल गांधी के लहु में *"चोरों का लहु"* होने से, वो भारतीय संविधान अनुच्छेद *"इंडिया दँड इज भारत"* यह संविधानिक शब्द प्रयोग ना करते हुये, *"हिंदुस्तान"* कहता है. उपर से राहुल गांधी *"धर्मवाद"* का सहारा ले रहा है. जब कि सर्वोच्च न्यायालय ने *"हिंदु यह धर्म नही माना. जीवन जीने का कला कहा है."* अतः जो लोग भारत को *"हिंदुस्तान"* कहते है, उनके सभी पुरखों का गंंदा लहु उनके शरीर में होने के कारण, वे लोग *"हिंदुस्तान"* शब्द प्रयोग करते है. उनके पुरखों का इतिहास *"चोरी का / गद्दारी का"* इतिहास है. अत: उन चोर / गद्दार / धर्मांध नेताओं से बचे !!! वे देशद्रोही लोग है. वे देश गद्दार लोक है. अत: *संत कबिरदास* इन्होने बिलकुल सही कहा है कि, *"गांडु भडवे रण चढे, मर्दो के हो बेहाल | पतिव्रता भुखी मरे, पेढे खाये छिनाल ||*
जय भीम ! जय संविधान !!!
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✍️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक ४ अगस्त २०२६