Tuesday, 22 September 2026

 ✍️ *प्रा. डा. प्रदिप आगलावे इनके नागपुर विद्यापीठ आर्थिक भ्रष्टाचार प्रकरण (?) पर पँथर प्रकाश बनसोड - डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इन पर डाले गये डिफेमेशन केस में बनसोड - डा. जीवने इनका रिप्लाय सादर !*


            *प्रा. डा. प्रदीप ना. आगलावे* ये जब नागपुर विद्यापीठ डा. विचारधारा विभाग तथा डा आंबेडकर चेयर के प्रमुख रहे थे, तब प्रा. आगलावे इन्होने *"डा आंबेडकर अध्यासन"* विभाग मे *"आर्थिक भ्रष्टाचार"* करने का आरोप हुआ. तथा उस संदर्भ मे कुछ गंभिर शिकायतें भी नागपुर विद्यापीठ के कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनके पास की गयी. सदर शिकायत के आधार पर, तत्कालीन प्र-कुलगुरु *डा. राजेंद्र काकडे* इनकी अध्यक्षता में *प्रा. डा. विजया उइके / प्रा. डा. निरज बोधी* यह तिन सदस्यीय समिती गठीत की गयी तथा प्रा आगलावे इन पर लगे आर्थिक भ्रष्टाचार की जाँच की गयी. सदर तिन सदस्यीय समितीने ११ मार्च २०२५ को अपना चौकशी अहवाल तत्कालीन कुलगुरु *डा सुभाष चौधरी* इनको सादर किया. सदर समितीने *"कुलगुरु इनके अनुमती के बिना कामकाज करना / ज्यादा राशी के व्यवहार रोख से करना / किये गये खर्च की उचित जाँच ना करना / निकर (चड्डी) खरेदी का बील / डा आंबेडकर आँन नेशन एंड नँशनालिझम की ५०० प्रति छपाई का कोई भी प्रमाण ना दिखना या कुलगुरु की अनुमती ना लेना / लंडन दौरा का ५० हजार खर्च बील / हिस्ट्री आँफ आंबेडकराईट मुव्हमेंट यह संशोधन डा आंबेडकर फाऊंडेशन को सादर करते दिखाई ना देना"* आदि विषयों का जिक्र किया गया. प्रा डा प्रदिप आगलावे इन्होने सदर *"तिन सदस्यीय समिती"* के चौकशी अहवाल को, किसी भी न्यायालय में चुनौती नही दी गयी. *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने डा बाबासाहेब अध्यासन विभाग मे हुये नागपुर विद्यापीठ *"समस्त शिकायते / तिन सदस्यीय समिती अहवाल"* को जनता को जाणने हेतु एक *"पुस्तिका"* रुप में प्रकाशीत किया. जब वह *"पुस्तिका"* मुझे भेट की गयी थी, तब वह किताब पढने के उपरांत मे, मै बडा चिंतित हुआ. *प्रा प्रदिप आगलावे*:ये मेरा बहुत ही अच्छा जिवलग मित्र है. प्रदिप के बहुत से *"सुख दुख"* का मै साथी भी रहा हुँ. प्रदिप के शादी का भी मै *"मध्यस्थ"* था. प्रदिप की आर्थिक स्थिती खराब होने के कारण, प्रदिप का जीवन *"सेवाग्राम गांधी आश्रम"* में गुजरा था. गांधी आश्रम में प्रदिप को एक रुम दी गयी थी. प्रदिप के मेहनत के कारण ही उसने उचाँई भी हासिल की. प्रदिप को *"आंबेडकरी विचारों"* मे जोडने / लाने में *प्रा. डा. ज्योती लांजेवार / मेरे (डा जीवने) / एड.  मिलिन्द बनसोड* इन मित्र वर्ग का बडा योगदान रहा है.

           *पँथर प्रकाश बनसोड* इन्होने केवल नागपुर विद्यापीठ में किये गये सभी शिकायते / चौकशी अहवाल को प्रकाशित किया. चौकशी अहवाल में *"तिन सदस्यीय समिती"* ने प्रदिप आगलावे इन पर गंभिर आरोप लगाये है. और मैने उस किताब पर केवल *"समिक्षा"* लिखी है. अत: इस विषय को *"प्रा प्रदीप आगलावे* इनकी बदनामी कैसे कह सकते है ? प्रदिप आगलावे इनका व्यवहार / चरित्र शुध्द होना चाहिये. प्रदीप पर हुये आरोपों को *"तिन सदस्यीय समिती"*:ने सही माना है. यह विषय अलग है कि, नागपुर विद्यापीठ द्वारा *"फौजदारी केस"* (Criminal Offence) यह प्रदिप आगलावे इनके विरोध में दायर नही की गयी. अत: *"प्रदिप आगलावे इन्होने डा आंबेडकर दीक्षाभुमी स्मारक समिती"* में सदस्य रहना चाहिये या नही ? यह प्रदिप का तथा स्मारक समिती का विषय क्षेत्र है. परंतु प्रदिप आगलावे इन्होने *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* इनके मार्फत *"सह दिवाणी न्यायाधीश, वरिष्ठ स्तर, नागपुर"* इनके कोर्ट में *पँथर प्रकाश बनसोड / डा मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके विरोध में *"Spl. C. S. No. 1286/2025"* डिफेमेशन केस दायर की है. सदर केस दायर करने के पहले, एड सिध्दार्थ कांबले द्वारा हमे *"रु. ७५ लाख"* डिफेमेशन नोटीस भेजी थी. परंतु *"कोर्ट फी"* कारणवश अब *"रु. १० लाख"* डिफेमेशन केस प्रदीप आगलावे द्वारा डाली गयी. प्रकाश बनसोड इनकी ओर से वकिल *एड प्रमोद एन. कांबले* तथा डा मिलिन्द जीवने इनके वकिल *एड. सी एफ. भागवानी* यह केस की पैरवी कर रहे है. तथा प्रदिप आगलावे इनकी ओर से *एड. डा सिध्दार्थ कांबले* पैरवी कर रहे है. बनसोड - डा जीवने इनके वकिल द्वारा कोर्ट में *"रिप्लाय"* दायर किया गया था. परंतु प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने *"रिप्लाय प्रति"* ना मिलने का जिक्र कर *"Ext. 11"* दायर की. परंतु २२ सितंबर को प्रदिप आगलावे इनके वकिल *एड सिध्दार्थ कांबले* इन्होने अपनी वह अर्जी वापस ली. अब केस Issue हेतु कोर्ट के सामने प्रलंबित है. शायद भविष्य मे नागपुर विद्यापीठ के *"तिन सदस्यीय समिती"* को भी बयान देणे कोर्ट आना पड सकता है.


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नागपुर दिनांक २२ सितंबर २०२६

Monday, 21 September 2026

 🚩 *नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में गणपती को बिठाकर न्यायालय यह ब्राह्मण हिंदु देव मंदिर का स्वरुप मिला !* न्यायाधीश वर्ग की लायकी न्यायाधीश बनने की नही मंदिर पंडे बनने की है.

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


        पिछले साल मै व्यक्तिगत काम से *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तथा भंडारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* गया था. और भंडारा - तथा नागपुर कोर्ट में गणपति बैठे देखकर उसकी मैने व्हिडिओ बनाकर यु ट्युब मे. / तथा फोटो खिचकर मिडिया में प्रकाशीत कर *"न्यायाधीश"* वर्ग की लायकी *"पंडे"* वर्ग से जोडकर, न्यायाधीश पद से इस्तिफा देकर / हिंदु मंदिर का पंडे होने की बात कही थी. मेरी यह पोस्ट पढकर कोर्ट से दुसरे दिन ही गणपति हटाया गया. इस साल भी *"नागपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट"* में गणपति बिठाये जाने पर, मेरे उस न्युज की दखल लेकर कुछ वकिल वर्ग ने *"प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज"* इनके नाम एक निवेदन देने का प्रयास किया है. *"मुंबई उच्च न्यायालय"*  के न्यायाधीश की लायकी न्यायाधीश बनने की नही तो पंडै बनने की है. न्यायदान को उचित रुप में देने की लायकी उन न्यायाधीश वर्ग में कितनी है, इह पर संशोधन करना होगा. *"सर्वोच्च न्यायालय"* एक भुतपुर्व सरन्यायाधी *धनंजय चंद्रचुड* के पास न्याय लिखने की बुध्दी ना होने  के कारण *"राम मंदिर जन्मभुमी प्रकरण"* मेंं न्याय लिखने वो गणपति शरण गया था. ऐसे एक भुतपुर्व सरन्यायाधीश *शरद बोबडे* वो महाशय भी रामजमभुमी प्रकरण से जुडा था, वो महाशय तो *"सरन्यायाधीश गरिमा - प्रोटोकाल भुलकर* भगवान के सामने पुर्णत: सो गया था. ऐसे ना-लायक (Not Qualified) न्यायाधीश की नियुक्ति होती हो तो, भारत देश का भविष्य क्या होगा ? यह देखकर भारत विकास की चिंता होती है. और *"घुटने अंधभक्त वकिलों* के बारे में क्या कहे ? उन्हे यह पता नही की शासकीय कार्यालय मे *", देवपुजा"*:करना / देव - देवी को बिठाना संविधान विरोधी है. धर्म यह व्यक्तिगत विषय है. आप को पुजा करना हो तो अपने घर करे. शासकिय कार्यालय नही.


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Monday, 14 September 2026

 🌹 *बुध्द वाणीचा नाद !*

       *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो.न. ९३७०९८४१३८


गोडवा साखरेचा शेष नाही तुझ्यात हे

बुध्द वाणीचा नाद नाही तो तुझ्यात रे....


फुलाची कोमलता शोधु या मनात हे

प्रेमाचा मधुर गंध नाही तो तुझ्यात रे

शब्दांचा जागर सुटला ह्या जगात हे

सांजेची शीतल छाया ना ती तुझ्यात रे....


भुंग्याचा गंध नाद फिरे ह्या फुलात हे

फुलांचे निस्सिम प्रेम दिसे निसर्गात रे

आसुसले नयन शोधी कवेची छाया हे

जीवनाचा सार दडला ह्या आसवात रे....


बुध्द मैत्रीचा पथ हा सा-या जगी हे

करुणा नाद फिरे ह्या मना मनात रे

सुर्य किरण छाया ती चंद्राचा ग्रहण हे

बुध्दाचे धम्म चक्र फिरे ह्या जगात रे....


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नागपूर दिनांक १४ सप्टेंबर २०२६

Friday, 11 September 2026

 👌*इंडोनेशिया बाली शहर के होटल ट्रांस में १० - ११ सितंबर २०२६ को दो दिवसीय ICOAH H.Q.: श्रीलंका द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन !*

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


           *श्रीलंका* इस विशाल समुद्री बेट देश मुख्यालय स्थित *TIIKM* संस्थान द्वारा *"13th International Conference on Arts & Humanities"* (ICOAH) का सफल आयोजन इस वर्ष १० - ११ सितंबर २०२६ को, इंडोनेशिया *"बाली"* राजधानी प्रमुख शहर के *"होटल ट्रांस"* में आयोजित किया गया था. परिषद की प्रमुख थिम थी - *"The AI Mirror : Reflecting Humanity, Reimaging the Future."* पिछले साल १२ वी आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन ये *"थायलंड"* इस बौध्द देश में हुआ था. विश्व के विभिन्न देशों में TIIKM संस्थान द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद आयोजन किया जाता है. विश्व के *"नामांकित विद्यापीठ के विद्वान / एक्सपर्ट / अन्य"* सदर परिषद में, *"वेलकम स्पिच / की नोट स्पिच / स्पिकर्स / सेशन चेयरपर्सन"* स्पिच देते है. तथा विश्व से विभिन्न विद्यापीठ के संशोधन छात्र सदर परिषद में, अपने *"संशोधन पेपर"* सादर करते है. सदर संशोधन पेपर विश्व के नामांकित मान्यवर द्वारा उसे *"Evaluation Panel"* द्वारा परिक्षण किया जाता है. सदर संशोधन पेपर जब *"Evaluation Panel"* तज्ञ के पास तपास हेतु जाता है, एक विशिष्ट फार्माट में उस *"संशोधन पेपर"* को जांच करनी होती है. सदर संशोधन पेपर किस संशोधन छात्र का है, उस की जानकारी तक *"Evaluaters"* को नही होती, इतनी गोपनियता *"परिषद आयोजन कर्ता"* इनकी होती है. और जाँच कर्ता *Evaluaters* को भी, सदर संशोधन पेपर *"क्यौं सादर करने उचित"* है, यह शेरा लिखना भी होता है. और आंतरराष्ट्रिय परिषद के *"सेशन चर्चा"* में भी वह Explain करना होता है. कभी कभी Evaluaters को भी *"Session Chairman"* का दायित्व निभाना होता है. *"मुझे स्वयं"* (डा. जीवने) भी सदर कुछ आंतरराष्ट्रिय परिषदों में *"Evaluation Pannel"* का हिस्सा होने का / *"संशोधन पेपर जाँच"* करने के कुछ अवसर मिले है. और मैने भी बहुत सें संशोधन पेपर को Examine किया है. संस्थान द्वारा हमे संशोधन पेपर की जाँच करने पर *"सन्मान प्रमाणपत्र"* प्रदान किया गया है. मुझे राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों में सहभाग लेने हेतु *"देश / विदेश"* में जाने का अवसर आया. कुछ परिषदों में *"मेरी कुछ व्यस्ततावश"* जाना भी संभव नही हूआ. तब मैने आयोजकों को केवल *"संशोधन पेपर"* जाँच करने की अपनी स्विकृति दी थी.

           TIIKM संस्थान द्वारा मान्यवर विद्वान एक्सपर्ट की व्यस्तता को देखते हुये, परिषद सेशन में *Physical Session / Virtual Session"* की भी व्यवस्था की है. जो एक उचित पहल है. पाच - छः साल पहले *"श्रीलंका सरकार"* (सांस्कृतिक मंत्रालय) द्वारा *"बुध्दीस्ट भिक्खु (मांक) विद्यापीठ अनुराधापुर"* में मुझे निमंत्रित किया गया था. तब श्रीलंका देश के *"कोलंबो एयरपोर्ट से लेकर समुचे श्रीलंका दौरें में हमे VVIP"* सन्मान के साथ / *श्रीलंका सेना* की पुर्ण सुरक्षा हमें दी गयी थी. *"HWPL H.Q. Korea"* संस्थान द्वारा दक्षिण कोरीया में हुये *"विश्व शांति परिषद"* का भी निमंत्रण दो - तिन साल पहले था. परंतु वहां *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण समान संदर्भ दिखाई नही दिया. विश्व के बहुत सें *"देशों के मान्यवर"* सदर शांति परिषद में सहभागी थे. परंतु *दक्षिण कोरीया* की आंतरराष्ट्रिय परिषद केवल *"सांस्कृतिक परिषद"* ही दिखाई दी थी. *नयी दिल्ली* में हुयी *"HWPL विश्व शांति परिषद"* के बारें में, *"ना कहे तो ही अच्छा है."* मैने कोरीया आयोजकों को मेरी नाराजगी बताते हुये, *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण / *"विश्व शांति"* के हेतु आऊट पुट हल शोधने की बात भी *लिखित* में कही. अगर यह संभव ना हो तो, *"कृपया मुझे निमंत्रीत ना करे,"* यह बात भी मैने कही थी. *HWPL HQ. Korea* तथा मेरी संघटन *CRPC HQ India* उनकी संयुक्त विद्यमान में आँनलाईन *"आंतरराष्ट्रिय शांती परिषद"* का आयोजन *मेरे गाईड लाईन"* मे किया गया था. जो उच्च कोटी की बडी सफल परिषद रही थी. क्यौं कि, जब अपना समय अंतरराष्ट्रिय परिषदों में देते है, तब *"आऊट पुट हल"* भी बहुत ही जरुरी विषय है. फरवरी २०१८ में *"आंध्र प्रदेश"* सरकार के मुख्यमंत्री *चंद्रबाबु नायडु* इनके मार्गदर्शन में, *"विश्व शांति अमरावती बुध्द महोत्सव"* का आयोजन किया गया था. तब आंध्र प्रदेश सरकार ने *"मुझे"* निमंत्रण के साथ साथ ही *"तिन बस"* की व्यवस्था कर, बुध्द भिक्खु वर्ग को लाने की भी जिम्मेदारी मुझे दी गयी थी. वह महोत्सव भी बडा ही सफल रहा था. मेरी राष्ट्रिय संघटन *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* द्वारा बहुत से राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों का आयोजन तथा *"विश्व शांति रँली"* का भी आयोजन किया गया है. *"राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषद"* इसका आयोजन करते समय, *आयोजकों के पास वह दृष्टी"* होना भी बहुत जरुरी है. विश्व के विभिन्न विद्यापीठों में विभिन्न विषयों पर भी *"संशोधन"* हो रहे है. और हम भविष्य में *"विश्व शांति"* की अपेक्षा करे तो, वह कोई अतिशयोक्ति नही होगी.


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▪️*डा. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक १२ सितंबर २०२६

Saturday, 5 September 2026

 🇮🇳 *RSS प्रमुख डा मोहन भागवत इनका बयाण भारत ये बुध्द का देश है इससे लेकर ओशो रजनीश का बुध्द पर बयाण - इस्लाम ख्रिस्तियन आदि अल्पसंख्याक धर्मीयों का भारत राष्ट्रवाद !*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


              *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) सरसंघचालक - संघनायक *डाँ. मोहन भागव* इनका न्युयार्क (अमेरिका) शहर में आयोजित *"Universal Oneness Celbration"* कार्यक्रम हो या टोरंटो (कँनडा) में आयोजित *"हिंदु विश्व बंधु"* कार्यक्रम हो या ब्रिटन (यु. के.) का कार्यक्रम हो, वहां के स्थानिय निवासींयों के अलावा अ-भारतीय नागरिक संघटनो नें *"कडा विरोध तथा आंदोलन"* किये हुये है. अभी यह विषय भी सुनने में आया है कि, RSS पर *"५५ देशों में बंदी लाने"* की भी चर्चा हो रही है. संघ पर *"आतंकवादी संघटन"* होने का गंभिर आरोप है. इस संदर्भ की चर्चा का जोर कम होने का नाम ही नही ले रहा है. *डाँ. मोहन भागवत* इन्होने न्युयार्क में बुध्द देश बयान देते हुये कहा कि, *"हिंदु राष्ट्र घोषित नही करना है. भारत बुध्द का देश है. हमारे देश में अपेक्षाकृत शांती है. और होनी भी चाहिये. बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है. "* और डा भागवत इनके इस बयान पर, समस्त विश्व में बडी चर्चा हो रही है. परंतु डा भागवत यह बयाण देते हुये एक गलती कर गये है कि, *"बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है."* शायद डाँ भागवत इनको यह पत्ता नही या अज्ञानता हो. *"कंबोडिया (९७%) / थायलंड (९४%) / म्यानमार (८९%) / भुतान (७५%) / श्रीलंका (७०%) / लाओस (६४)*" इन देशों के अलावा *"चायना / जापान / व्हिएतनाम / दक्षिण कोरीया / नेपाल / ब्रुनई / मलेशिया / सिंगापुर / मंगोलीया / हाँगकाँग /तिब्बत / उत्तर कोरीया"* आदि देश - दक्षिण एशिया / पुर्व एशिया / दक्षिण पुर्व एशिया *"आष्ट्रेलिया / रशिया"* इन बुध्द प्रभाव देशों का जिक्र किया जा सकता है. *"अमेरिका / रशिया / चायना / उत्तर कोरिया"* इन देशों को छोडा जाएँ तो, सभी *"बुध्द बहुल देशों में शांती"* दिखाई देती है. भारत के *"धर्म संघर्ष / जाति संघर्ष / संप्रदायवाद"* इन विषयों पर चर्चा ना करे तो, बेहतर है. *मेरे स्वयं* के (डाँ. जीवने) अध्यक्षता में हुये *"सर्व धर्म सभा कार्यक्रम"* में मैने *डां मोहन भागवत* इनको, *"बुध्द धर्म मे दीक्षीत"* होने का आवाहन करते हुये *"विश्व हिंदु परिषद"* का नामकरण *"विश्व बौध्द परिषद"* करने की बात कही थी. मेरा वह भाषण *डा मोहन भागवत* इनके अच्छे स्मरण में होगा ही. दुसरा अहं विषय महत्वपुर्ण है कि, *डाँ मोहन भागवत* इन्होने *"भारत बुध्द का देश है"* (३० अगस्त २०२६) यह बात अमेरिका विरोधपुर्ण आंदोलन के बाद कही है. वही *ओशो रजनीश* इन्होने भी तो, अमेरिका सरकार द्वारा इमेग्रेशन जुडे मामलों में *"अमेरिका देश"* (नवंबर १९८७) छोडने तथा *"२१ देशों द्वारा इंकार"* करने और विमान से भारत उतरने पर कहा था कि, *"बुध्द के देश में आया हुँ. "*  ओशो रजनीश ये *"तेरा पंथी जैन"* है, वही डा मोहन भागवत *"चित्पावन ब्राम्हण"* वर्ग से है. यह संदर्भ छोड दिया जाए तो, *मोहन भागवत और ओशो रजनीश* इनके घटना संदर्भ में बहुतसी साम्यता दिखाई देती है. *ओशो रजनीश*:इनका अमेरिका के ओरेगान रेगिस्तान में *"रजनीशपुरम्"* आधुनिक सुविधायुक्त शहर बसाना / ओशो की आशिशान जिंदगी विषर पर, एक अच्छी पुस्तक लिखी जा सकती है. ओशो रजनीश का *"विपश्यना"* विषय संदर्भ ये दार्शनिक रुप में हो, परंतु *ओशो रजनीश* हमेशा ही आंतरराष्ट्रिय विवाद के बडे पात्र रहे है. *मोहन भागवत* भी तो, आंतरराष्ट्रिय विवाद पात्र विषय हो गये है.

             *डा. मोहन भागवत* इनका *"भारत बुध्द का देश"* यह बयान हो या, *"मुस्लीम वर्ग का विरोध करनेवाला हिंदु नही हो सकता"* यह बयाण हो, आज समस्त विश्व में बडा चर्चा का / विवाद का विषय हो सकता है. भविष्य में द्वेषपुर्ण *"संघ की पाँलिसी"* बदली भी जा सकती है. परंतु संघ का *"नोंदणीकृत संस्था"* ना होना / संघ पर देश - विदेश में *बंदी* लाने की चर्चा / संघ द्वारा करोडो रुपये में बनाये गये *"संघ कार्यालय"* खडा होना / संघ की *"फाईव्ह स्टार संस्कृति"* / विदेशों से आनेवाली *फंडिंग - हिशोब* आदि विषय भविष्य में क्या राजकिय करवट लेंगे, इस विषय पर कुछ भी कहना बडा कठिण विषय है. आज का *"जेन झी / जेन वाय"* प्रक्टिकल / वैज्ञानिक मार्ग अपना रहा है. अत:  *"मंदिर का अर्थशास्त्र"* (Temple Economy) यह विषय रोजगार / उद्दोग / देश विकास का मार्ग ना होना, कल जेन झी *"मोर्चा उस विरोध"* में भी जाए तो, कोई अतिशयोक्ति नही होगी. *"ख्रिस्तियन - इस्लाम"* इन धर्म का ओरीजीन *"आदम - हनोक"* इन मुल नायक से जुडा है. आगे जाकर *इब्राहिम* इनके बाद, *"सारा"* इनकी वृक्ष छाया यह *येशु मसिहा* तक जाती है. वही *इब्राहिम* इनके बाद, *"हाजिरा"* इनकी वृक्ष छाया *हजरत मोहम्मद* (इसवी ६३२) तक जाती है. *"सारा - हाजिरा"* इनका आपसी संबध समजना भी खास जरुरी है. *सिध्दार्थ बुध्द* इनका इतिहास तो, येशु मसिहा से *"६२४ साल पुर्व"* (नया शोध) का रहा है. *येशु मसिहा* इनके *"१२ - ३० साल"* तक का जीवन इतिहास, यह *"अज्ञात"* (Unknown) बताया जाता है.*"बायबल"* में इस विषय पर कुछ भी वर्णन नही है. *निकोलस नोटोवीच* इन्होने लद्दाख के *"हेमिस बुध्द मठ* की प्राचिन पांडुलिपी का संदर्भ देकर, अपनी पुस्तक *"दि अननोन लाईफ आँफ जीसस क्राईस्ट"* पुस्तक में, येशु इन्होने तक्षशीला, लद्दाख, पुरी, राजगीर, सारनाथ, हिमालय जाने का / वहां अध्ययन करने का जिक्र किया है. इसके साथ ही *मिर्झा गुलाम अहमद* इनकी पुस्तक *"अहमदिया"* / तथा विदेशी लेखक *होलगर कर्सटन*:इनकी पुस्तक *"जीसस लिव्ह इन इंडिया"* इन पुस्तकों में, येशु इन्होने *मरियम* इस यहुदी लडकी से, लद्दाख मे शादी करने का / और येशु के *बशारत* या *इलियास* पुत्र का संदर्भ दिखाई देता है. येशु इनको *"सुली पर चढा"* देने के बाद, वे *"जीवित बच निकले"* और भारत के लद्दाख में रहने का संदर्भ है. येशु की कब्र यह श्रीनगर के *"रौजबल मजार"* होने का संदर्भ है. *मुसा* इनकी कब्र भी कश्मिर में बतायी गयी है. इन किताब ने समस्त विश्व में बहस छेड दी है. अगर यह बात सही हो तो, *"ख्रिस्तियन समुदाय को भारतीय"* माना जा सकता है. वही भारत में *"इस्लाम शासकों का शासन होने से, वे भी तो भारतीय"* हो गये है. अगर आप ख्रिस्तियन / इस्लाम समुदाय को, विदेशी मानते हो तो, *"ब्राह्मण वर्ग"* भी विदेश से भारत आकर बसा है. *"ब्राह्मण वर्ग ये किस देश"* सेे भारत आया है ? इन विषयों पर कुछ विवाद भी है. *"ब्राह्मण अल्पसंख्यक वर्ग"* ये हिंदु बहुसंख्यक कैसे बना है ? यह भी प्रश्न है. *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का माध्यम माना है."* हिंदु यह शब्द मुस्लिम शासकों द्वारा दी गयी गाली थी. *"हिंदु - हिनदु  = चोर, काले मुहवाला, नीच आदमी."*  और हिंदु यह शब्द *"ब्रिटीश काल"* में रुढ हुआ. अत: भारत में *"धर्म युध्द - धर्म संग्राम - धर्म संघर्ष"* जारी रखना है, या *"एकता - शांति - अहिंसा"* में पिरोये रहना है, इस पर विचार करे ! वही ब्राम्हण वर्ग *"विदेशी फंड"* किस प्रयोजन से लाता है ? कितने *"बुध्द राष्ट्र संप्रदाय"* ये ब्राह्मण वर्ग को फंडिंग करते है ? *"विश्व बुध्द परिषद / समिट"* में, कौन ब्राह्मण मान्यवर उपस्थित रहे है या रहते है ? विश्व के *"बुध्दीस्ट सेक्ट वर्ग"* इनसे कौन ब्राम्हण संघटन जुडी है ? *योगी आदित्यनाथ* इनकी जीवनी पुस्तक *"The Monk who became the Chief Minister"* में मांक शब्द है, *Saint* यह शब्द नही. Monk यह शब्द विशेषत: *"बुध्द भिक्खु"* के लिए प्रयोग होता है. अभी *"योगी"* इनको भावी प्रधानमंत्री रुप में, *"मोहन भागवत* जी विदेश यात्रा में बोल गये है. क्या योगी जी *"प्रधानमंत्री"* बनने के लिए, योग्य नेता है ? *"दि बुध्दीस्ट सोसाइटी आँफ इंडिया "* (TBSI)  पदाधिकारी वर्ग इस संदर्भ में, क्या कर रहे है ? TBSI संघटन का कोई भी *"संविधानिक पदाधिकारी"*  विद्यमान है क्या ? TBSI का *"सन २००९ से आर्थिक हिशोब"* धर्मादाय आयुक्त कार्यालय किसी ने भी सादर ना करने से, *TBSI मान्यता खतरे* मे है, उसका क्या ? *TBSI"* तमाम स्वयंघोषित नेताओं का लक्ष, *"सरकारी ट्रैझरी"* में जमा *"रु. १३ - १४ करोड"* TBSI राशी पर है ? *राजरत्न आंबेडकर / भीमराव आंबेडकर / चंद्रबोधी पाटील / इंजी. धम्मरतन सोमकुवर* इन्होने स्वयं को *"TBSI स्वयं घोषित अध्यक्ष"* घोषित करनेवाले इस प्रश्न का उत्तर, देश आवाम को देगे या नही ? यह भी प्रश्न है. क्यौं कि, उनकी वैचारिक पात्रता *"विभागीय अध्यक्ष"* तक बनने की है या नही, स्वयं आत्मपरिक्षण करे !!!


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▪️*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर, दिनांक ५ सितंबर २०२६

Monday, 31 August 2026

 🚩🇺🇾 *RSS सरसंघचालक मोहन भागवत की न्युयार्क - अमेरिका के युनिवर्सल वननेस सिलेब्रेशन / टोरंटो - कँनडा / ब्रिटन (यु. के.)  यात्रा की कुटिल राजनीति या कुनीति ?*

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


         *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) प्रमुख - सर्वेसर्वा *डाँ. मोहन भागवत* ये हिंदु धर्म (?) वा *"ब्राह्मण धर्म"* संघटन के *"शताब्दी वर्ष"* पर्व पर, *"अमेरिका (न्युयार्क) / कँनडा (टोरंटो) / युके (ब्रिटन)"*  इन देशों के विदेश यात्रा पर है. ब्राम्हण धर्म ग्रंथ में *"विदेश यात्रा"* निषिध्द है. फिर ब्राम्हण वर्ग यह *"विदेश यात्रा - विदेशी नागरिक"* होना, अहं बडा प्रश्न उत्पन्न करता है. संघ प्रमुख डाँ मोहन भागवत इनकी विदेश यात्रा का *"अमेरिका की ४०+ सघठणों ने  / कँनाडा की २६७ संघठणों"* ने सक्रिय विरोध किया है. संगठण एवं वहां के नागरिक रास्तों पर आकर *"No Platform for Hate"* यह नारा दे रहे थे. न्युयार्क के *"मेडिसन क्वेयर गार्डन"* में "अमेरिकन हिंदुज फाँर एंगेज्ड एंड डायलाँग" इस संगठण ने आयोजीत *"युनीवर्सल वननेस सिलेब्रेशन"* के प्रमुख अतिथी डाँ मोहन भागवत थे. बहुसंख्य स्थानिय संगठणों के विरोध बावजुद, *डा मोहन भागवत* भाषण कर गये है. मोहन भागवत को *"बेशरम, ना-लायक, निर्लज्ज"* यह गाली तक दी गयी. मोहन भागवत इनके *उस भाषण की समिक्षा करे या न करे ?* यह विवाद का विषय हो सकता है. क्यौं कि, *"ब्राह्मण्य नीति जो बोलती है,  विपरीत उलटा उसका विरोधी आचरण होता है. "* न्युयार्क सिटी के मेयर *जोहरान ममदानी* इन्होने विरोध करते हुये वे कह गये कि, *"I don't support the rally, but i don't know if the city has the jurisdiction on cancelling a private event."* परंतु भारत में *"आतंकवादी हिंदु आतंकवाद"* हम अनुभव देखते आये है. संघ से सक्रिय जुडे रहे *यशवंत शिंदे / भंवर मेघवंशी* इन्होने RSS संगठण को छोडते हुये कहा है कि, *"संघ यह आतंकवादी संगठण है."*  बाँम्ब बनाने का प्रशिक्षण देने का भी आरोप किया है. *मोहनदास गांधी हत्या* का आरोप भी संघ पर रहा है. संघ पर बहुत गंभिर आरोप होते रहे. *"संघ पंजीबध्द संस्था नही है."* संघ पर *"विदेशी फंड दुरुपयोग"* का भी आरोप है. मोहन भागवत का विदेश दौरा यह *"फंडिंग की व्यवस्था "* बताया जा रहा है. ब्राम्हण्य संघ पर *"सत्तावाद"* की आँचल छाया होने से, सब कुछ चंगा है.

           अमेरिका में *"विश्व शांती सम्मेलन"* का सफल आयोजन करनेवाली संस्थान *"United States Commission on International Religious Freedom"* (USCIRF) इसने भी डाँ. मोहन भागवत अमेरिका आगमन का विरोध किया. *स्वामी विवेकानंद* इस संस्थान के *"विश्व शांती परिषद"* में अमेरिका गये थे. तब किसी भी ब्राम्हण संघीय संघठन ने, *"विवेकानंद को शिफारस पत्र"* नही दिया था. बौध्द धर्म विद्वान *अनागरीक धम्मपाल* इन्हे सदर परिषद का निमंत्रण था. उन्होने ही *स्वामी विवेकानंद* को अपने साथ अमेरिका ले जाकर, *"अपने समय के पाच मिनट स्वामी विवेकानंद"* को दिये थे. यह एक इतिहास है. *अनागरिक धम्मपाल* के भाषण पर, समस्त श्रोता वर्ग यह मंत्रमुग्ध हो गया था. उनका वह भाषण सुनकर *"साक्षात प्रभु"* उनके सामने खडे हुये है, यह अभिप्राय लोगों का रहा है. मुझे गर्व है कि, *"अनागरिक धम्मपाल का वह एतिहासिक भाषण मेरे संग्रह"* मे है. *अमेरिका* देश में Universal Oneness Celbration का आयोजन *"American Hindus for Engagement & Dialogue"* (AHEAD Forum) इस ब्राम्हण संस्थान ने किया था. *कँनडा* में *"कँनेडियन हिंदुज फाँर आऊटरीच रिलेशन्स एंड डायलाँग"* (CHORD) इस ब्राह्मण संस्थान ने, ग्रेटर टोरंटो एरिया में, *"हिंदु विश्व बंधु"* समारोह का आयोजन किया है. सदर संस्थान यह RSS की घटक दल है, जो विघटनवादीता / नफरत को बढावा देती है. अत: तथाकथित ब्राह्मण वर्ग से *"Universal Oneness"* की बातें केवल पाखंड था.  दुसरा प्रश्न है कि, *"अल्पसंख्यक ब्राह्मण यह बहुसंख्यक हिंदु"* कैसे बना है ? इसके पिछे की राजनीति क्या है ? *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का एक माध्यम माना है. "* दुसरा प्रश्न यह भी है कि, *"हिंदु"* इस शब्द की उत्पत्ति कैसे और कब हुयी ? हिंदु यह भारतीय भाषा का शब्द नही है. वह *"विदेशी शब्द - फारसी भाषा"* (Persian Language) का शब्द है. हिंदु > हिनदु  > हिन + दु > हिन = चोर, निच, काले मुहंवाले... दु = प्रजा. *"हिंदु = चोर, निच लोग."* अत: मुगलो द्वारा दी गयी वह गाली है. और वह गाली संघीय लोगों की मानसिकता बनी है. निचता बनी है. अर्थात क्या *"मोहन भागवत समवेत अतिरेकी हिंदु ब्राम्हण चोर है ? निच लोग है ?"* यह संशोधन का विषय है. और *डाँ मोहन भागवत* आदि अतिरेकी ब्राम्हण की यह विदेश यात्रा *"विश्व मे अशांति"* संदेश लेकर आयी है. जय भीम ! जय संविधान !!!


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▪️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर, दिनांक ३१ अगस्त २०२६

Saturday, 29 August 2026

 🌹 *सी.आर. पी.सी. वुमेन विंग / सी. आर. पी. सी. फिनिक्स विंग की ओर से रक्षाबंधन पुर्णिमा अवसर पर - दिव्यांग छात्रों के लिए भोजनदान  !*


         सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल की वुमेन डाँटर विंग *"सी.आर. पी. सी. वुमेन विंग / सी. आर. पी. सी. फिनिक्स विंग"* की ओर से, *"शासकीय दिव्यांग कर्मशाला,"* सदर, नयी बस्ती, नागपुर के छात्रों को, शनिवार २९ अगस्त २०२६ को रक्षाबंधन कराकर *"भोजनदान"* का भी सफल आयोजन किया गया. साथ ही सदर वुमेन विंग द्वारा *"पांचपावली पोलिस स्टेशन"* जाकर, सभी स्टाँफ वर्ग को भी रक्षबंधन पुर्णिमा अवसर पर, राखी बांधी गयी. सदर कार्यक्रम सफलता में *सीमा बोधनकर / ज्युली (स्वाती) चार्ली / बेला मरिमम / सुमिता झा / जेनिफर पिल्ले कांबले / वैशाली फरकांडे / बबीता सोमकुवर / बबीता मेश्राम / मिसेस श्री बावणे / निशा कुलकर्णी / संजीवनी कुमरे / रुपा राऊत / शिल्पा नेताम / किर्ती राऊत / प्रिती नंदनवार* आदि महिला वर्ग का योगदान रहा. सदर वुमेन विंग के कार्यक्रम सफलता में सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' / दिलिप तांदले / सुनिल किटकुरे* इनका विशेष सहकार्य रहा.