Sunday, 21 June 2026

 ✍️ *जेन झी काँकरोच जंतर मंतर आंदोलन की भावी दिशा - दशा (?) एवं स्वच्छ आजाद भारत का सत्याग्रह ही अगला पडाव ! ब्रिटिश गोरे अंग्रेज शासन बनाम भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन व्यवस्था !!!*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


         ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का शासन बहुत बुरा था यह कहना *"भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन"* में कहना जागति होगी. अगर ब्रिटिश गोरे अंग्रेज भारत में ना आये होते तो, भारत का विकास कभी हुआ ही नही होता. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९००) यह पहला पडाव / *"बुध्द कालखंड से लेकर बुध्द प्रभाव कालखंड"* (इ. पु. ६२४ से इसवी १० वी शति) यह दुसरा पडाव / महायान - वज्रयान - तंत्रयान बुध्द संप्रदाय द्वारा इसवी १० वी शति में *"शैव पंथ, वैष्णव पंथ, साक्त पंथ"* की स्थापना होना, शंकर नामक व्यक्ति का (इसवी ८५० मे जन्म) द्वारा स्वयं को इसवी दसवी शति में *"आदि शंकराचार्य"* घोषित कर महायान बुध्द विहारों पर अधिपत्य करना, इसवी ११ - १२ वी शति में *"वैदिक धर्म - ब्राह्मण धर्म"* की स्थापना होना, वेद उपनिषद मनुस्मृति आदि ग्रंथों की रचना कागदों पर होना, कागज का शोध इसवी १० वी शति में चायना मे लगना, बुध्द धर्म की अवनति यह *"तिसरा पाडाव"* / ब्राह्मण्य अतिरेक द्वारा देश की एकता एकात्मता की हानी तथा *"ब्रिटिशों गोरे अंग्रेज"* शासन व्यवस्था की गुलामी यह *"चवथा पाडाव"* / ब्राह्मण्य व्यवस्था बनाम ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का संघर्ष तथा *"भारत आजाद"* (१५ अगस्त १९४७) होना यह *"पाचवा पाडाव"* रहा है. ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो के काले में *"शिस्त - अभ्रष्टाचार"* होने से, भारत में विकास के रास्ते खुले थे. बहुतसी प्रथाएं, अ-रुढीओं पर बंदी लायी गयी. *'शिक्षा"* के दरवाजे खुले हुये थे. आज यह *"पाचवा पाडाव"* भारतीय ब्राह्मण्य *"काले अंग्रेजो"* के शासन व्यवस्था का राज बोलबाला है. जहां *"भ्रष्टाचार - पुंजीवाद - हुकुमशाही"* का बोलबाला है. *"लोकतंत्र"* हमें कही दिखाई नही देता. अत: *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"*  यह काले अंग्रेजो को भगाकर *"स्वच्छ भारत - सुंदर भारत - विकास भारत"* बना पाएगा ? यह प्रश्न है. अगर हां हो तो, हम इसे *"षटवा पाडाव"* भी कह सकेंगे. प्रश्न यहां जेन झी *"काँकरोच आंदोलन"* के दिशा और दशा का है. *'आंदोलन"* (Agitation) इस शब्द में हमे सत्य का बोध नही होता, जो *"सत्याग्रह"* (Satyagraha, Non-Violance Resistence, Passive Resistence, True Path Movement) इस शब्द में दिखाई देता है. बाबासाहेब डॉ आंबेडकर इन्होने *"कालाराम मंदिर सत्याग्रह / येवला पाणी सत्याग्रह"* तथा मोहनदास गांधी इन्होने *"नमक सत्याग्रह"* करने का संदर्भ है. अभी तक हम जेन झी *"काँकरोच आंदोलको"* द्वारा भावी दिशा ही तय नही की. केवल शिक्षा मंत्री *धर्मेंद्र प्रधान* का राजीनामा यही गुंज ही सुनायी देती है. अत: जेन झी आंदोलन को *"काले अंग्रेजो"* द्वारा दबाया जाएगा या नही, यह वक्त ही बतायेगा.

           मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* इन्होने युवा बेरोजगार को काँकरोच कहना बहुत महेंगा पडा. आँनलाईन बनी संघटन ने  आज *"वास्तव रूप"* तो लिया, परंतु वे अपनी भावी दिशा तय नही कर पाये है. आंदोलन करने को *"लाखों रुपयों की फंडिंग"* की आवश्यकता होती है. उन्हे यह फंडिग कैसे मिली? *"प्रशासन की मेहरबानी* होना, यह आरोप भी हो रहे है. हम उन आरोपों पर चर्चा नही करेंगे. काँकरोच आंदोलन जगह जगह सफल होते दिखाई देते है. परंतु वे *"भावी दिशा"* क्यौं तय नही पा रहे है ? यह अहं सवाल है. जंतर मंतर का २० जुन २०२६ का आंदोलन समय शाम ५ बजे तक था. उन्होने उस आंदोलन को जारी रखा. भारतीय संविधान यह अधिकार देता है. सवाल यह है कि, वह आंदोलन और आगे *"कितने दिनों तक जारी* रहता है? यह है. पोलिस प्रशासन या सत्ता प्रशासन इस आंदोलन को तोडने का भरपुर प्रयास भी करेगी. अत: सवाल तुम्हारे अंतर्मन शक्ति का है. जय भीम !!!


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

        नागपुर दिनांक २१ जुन २०२६

Friday, 19 June 2026

👌 *बिहार के एक्स डायरेक्टर जनरल आँफ पोलिस (DGP) एवं झारखण्ड लोक सेवा आयोग (ZPSC) के एक्स चेयरमन आर सी कैथल इनका सीआरपीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इनके साध दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रँगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक कामठी रोड इन एतिहासिक स्थलों पर सदिच्छा भेट !!!*
       बिहार राज्य एक्स डीजीपी तथा झारखंड लोक सेवा आयोग के एक्स चेयरमन *आर सी कैथल* साहाब दो दिवसीय दौरे पर, बिहार के एक्स चिफ इंजीनियर *राजेंद्र प्रसाद* इनके साथ नागपुर आये है. बोधगया के *भदंत प्रज्ञाशील महाथेरो* इन्होने इसकी सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनको तथा एक्स डीजीपी *मा. कैथल साहाब* इन्हे भी दी थी. शुक्रवार दिनांक १८ जुन २०२६ को *आयु कैथल साहाब* इन्होने सुबह १० बजे *आयु राजेंद्र प्रसाद* तथा *आदित्य कैथल* इनके समवेत सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष तथा बुध्द आंबेडकरी लेखक / कवि / चिंतक / समिक्षक *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके निवास जाकर सदिच्छा भेट की. तथा रमेशचंद्र कैथल लिखित *"डॉ. आंबेडकर सामाजिक क्रांती के प्रतिक जगजीवन राम / संघर्षों से निखरा एक तप: पुत व्यक्तित्व शिबु सोरेन"* यह दो किताबें भेट की. इसी के साथ इंजी. राजेंद्र प्रसाद इन्होने भी उनकी लिखी दो किताबे *"संत गाडगे बाबा और उनका जीवन संघर्ष / Life and Ideology of Jagjiwan Ram"* भेट की. सदर सदिच्छा भेट के बाद *"दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक"* इन एतिहासिक स्थली को सदिच्छा भेट देने का कार्यक्रम बनाया गया. और सीआरपीसी ट्रेड एंड काँमर्स विंग के राष्ट्रिय अध्यक्ष *इंजी. विजय बागडे* इन्होने डाँ मिलिन्द जीवने इनके द्वारा बनाये प्लँनिंग को सफल बनाया. इंजी बागडे इनके साथ राजु ड्रायव्हर ने भी योगदान दिया. महत्वपुर्ण विषय यह की सीआरपीसी प्रमुख डॉ मिलिन्द जीवने इनसे संबधीत बिहार मे *"सामुहिक बुध्द धम्म दीक्षा समारोह"* लेनेवाले बिहार के डायरेक्टर जनरल पोलीस (DIG) *मैकुराम जी* (IPS) इनके वे छोटे भाई है. सदर बुध्द धम्म दीक्षा समारोह में दलित व्हाईस बंगलोर के संपादक *व्ही टी राजशेखर* इन्होने डॉ. जीवने इनके आग्रह पर बुध्द धम्म की दीक्षा ली थी. मैकुराम जी के परिवार के दो सदस्य विदेश सेवा मे *"एम्बेसँडर* (भारतीय राजदुत) तथा एक सदस्य महाराष्ट्र के *दादासाहाब रुपवते* परिवार मे ब्याही गये है.
        दीक्षाभुमी / डॉ. आंबेडकर मेमोरियल शांतीवन चिचोली को सदिच्छा भेट देने के बाद *ड्रँगन पँलेस कामठी* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. ड्रँगन पँलेस की प्रमुख / माजी मंत्री *एड. सुलेखा कुंभारे* इन्होने एक्स डीजीपी इनके साथ बहुत विषयों पर चर्चा की. ड्रँगन पँलेस का इतिहास बताया. विश्व की बाबासाहेब डाँ आँबेडकर की बडी प्रतिमा / विपश्यना केंद्र की जाणकारी देते हुये *"विश्व की सबसे बडी संविधान प्रत"* बनाने की भी जाणकारी दी. उसके पश्चात खैरी स्थित *"बुध्द भुमी"* तथा कामठी रोड स्थित *"नागलोक"* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. अंत में गेस्ट हाऊस में बैठकर कुछ महत्वपुर्ण बिंदुओ पर चर्चा की गयी. आज १९ तारिख को वे अगले पडाव पर प्रस्थान करने जा रहे है. उनकें मंगल प्रवास की कामना करते है.

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नागपुर दिनांक १९ जुन २०२६

Monday, 15 June 2026

 👌 *अहिंसक अंगुलीमाल !!!*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो.न. ९३७०९८४१३८


हे अंगुलीमाल

तुझा जीवन इतिहास

एक वेगळाचं संदर्भ आहे

कोसल नरेश राजा प्रसेनजीत

ह्यांच्या राज दरबारातील

बम्हन म्हणजे ब्राम्हण वर्ग नव्हे

तेव्हा ब्राह्मण वर्ग हा अस्तित्वात नव्हताचं

बम्हन अर्थात विद्वत वर्ग होय

प्राचीन बुध्द कालखंडात

मौर्य दरबारातील युनानी इतिहासकार

मेगास्थनीज लिखीत इंडिका ग्रंथ

सात वर्ग हा संदर्भ सांगतो आहे

ब्राम्हणी वर्णव्यवस्थेचा उल्लेख नाही

विद्वत वर्ग - शेतकरी वर्ग 

पशुपालक आणि शिकारी वर्ग

कारागीर आणि व्यापारी वर्ग

सैनिक वर्ग - पर्यवेक्षक एवं गुप्तहेर वर्ग

सल्लागार आणि मंत्रीगण वर्ग

ही ती सात वर्गीय व्यवस्था होती

राजदरबारातील बम्हन पिता गग्ग 

आणि माता मंतानी ह्यांचा तु सुपुत्र

तुझे नाव अहिंसक ठेवले गेले

तुला शिक्षण घेण्याकरीता

तक्षशीला येथे दाखल करण्यात आले

तुझ्या शील आचरणाने

तु आचार्यांंचा प्रिय झाला होतास

परंतु तुझ्या द्वेषमुलक सहपाठींनी

एका सुविद्य आचार्यांना 

तुझे गुरुमातेसोबत (आचार्य पत्नी)

अनैतिक संबध असल्याची

खोटी माहिती ही पेरली होती

आणि त्या संशयी आचार्यांनी

तुला गुरु दान स्वरुपात

एक हजार मानवी शरीर बोटे

ही अनैतिक दान मागणी केली

आणि तु गुरु दान पुर्ण करण्यासं

तक्षशीला विद्यापीठाच्या बाहेर पडलासं

राहागीर लोकांची बोटे कापुन

कापलेल्या बोटांची माळ

तुझ्या गळ्यात घालत असल्याने

तु अहिंसक अंगुलीमाल म्हणुन

प्रजेमध्ये ओळखला जावु लागलासं

तुझ्या स्वत:च्या सुरक्षा कारणाने 

तु घोर जंगलात राहात होतासं

तुझा आतंक सर्वदुर पसरला गेला

संशयी विकृत आचार्याचा उद्देश तर

तुला राजा प्रसेनजीत ह्यांचेकडुन

मृत्युदंड शिक्षा व्हावी हाचं होता

तुझा आतंक हा विजयी झाला

परंतु तथागत बुध्द भेटीतुन

तु पुनश्च अहिंसक झालास

बुध्दाला शरण गेल्यावर

तुझ्या पुर्वीच्या अकुशल कर्माची

शिक्षासुध्दा तु मुकाट्याने सहन केली

अहिंसक ते अंगुलीमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक 

हा तुझा जीवन प्रवास

इतका सहज नाही रे

अहिंसक अंगुलीमाल...!!!

आज ही अंगुलीमाल विकृती

समाजात - देशामध्ये फोफावत आहे

कधी राजसत्ता व्यवस्थेतुन

कधी ह्या समाज व्यवस्थेतुन

कधी स्त्री - पुरुष दगाबाज भावनेतुन

तर कधी कधी प्रेम भंगातुन

अशी ही ब्राम्ह्ण्यवाद विकृती

भारतीय बहुसंख्य मनात पसरल्याने

अंगुलीमाल निर्माण झालेले आहेत

पुनश्च अंगुलीमाल निर्माण होणार आहेत

स्वरुप मात्र ते भिन्न राहाणार आहे

आणि हे वास्तव सत्य आहे

सत्य - अहिंसा - प्रामाणिकपणा

असा हा बुरखा पांघरणारे

देशद्रोही - समाजद्रोही करंटे

अजुनही उथळ मानेने 

ह्या समाजात फिरत आहेत

तुला हे कायमचे थांबवायचे आहे

आता पुनश्च बुध्द विचार प्रवाह

हा तुला पेरायचा आहे

अहिंसक अंगुलीमाल !

अहिंसक अंगुलीमाल !!

अहिंसक अंगुलीमाल  !!!


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     नागपुर दिनांक १५ जुन २०२६

Friday, 12 June 2026

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

 👌 *एकदाचं तु सांगुन दे !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


मन बंध शब्दांची

प्रेम गंध असणारी वाचा 

कधीच वैरता सांगत नाही

बुध्दाचा मैत्रीवत भाव 

शरीर रक्तभिसरण प्रक्रिया

ही निरंतर सुरु असतांना

दुरत्वपणा कां बरे असावे ?

करुणामय प्रज्ञा शील

न्यायगत स्वातंत्र समता बंधुता 

शांती अहिंसा हा बुध्द मंत्र

हे सहज नाही रे मित्रा !!!

ह्या सृष्टी चक्रात

निसर्ग गीत गायन असतांना

तुडवत जाणारे मानवी पाद

हिंसक बनविणारे हे हात

अहिंसक ते अंगुलमाल

अंगुलीमाल ते अहिंसक

असा हा प्राचीन प्रवास

ह्या संसार पथातील काटे

रक्तबंबाळ मन वलय

आज इतिहास सांगतो आहे

मित्रा तुला ही तो इतिहास

पुनश्च लिहायचा आहे काय ???

आजचे आधुनिक जग

युध्द की बुध्द

ह्या गंभिर विवादात

गुरफटले जात असतांना

तुझे प्रामाणिक दायित्व

तुझी ती प्रामाणिक मन निष्ठा

उचित निर्णय घेण्यास

कां टालमटोल करते आहे

कदाचीत तुझ्या अंतर्मनातील

दडलेला तो अहमं स्वार्थ

तुझ्यात आलेला तो देशद्रोह

एकदाचं तु सांगुन दे रे मित्रा 

तुझा दगाबाज इतिहास

आता लिहिण्याकरीता !!!


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नागपूर दिनांक ११ जुन २०२६

Saturday, 6 June 2026

 🐞*जेन झी काँकरोच (?) युवकों का नयी दिल्ली जंतर मंतर पर ६ जुन का धरना एवं भविष्य की रणनीति क्या ???*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             भारतीय राजनीति (?) में *"जेन झी"* अर्थात *"जनरेशन झेड"* (Generation Z) तथा *"काँकरोच"* (तिलचट्टा - Cockroach - Parasites) इस शब्द में बडा तुफान मचाया हुआ है. *"जेन झी"* वर्ग द्वारा सन २०२५ को *"नेपाल"* देश मे हिंसक आंदोलन होकर, *"सत्ता परिवर्तन"* भी दिखाई दिया है.और ऐसा ही सत्ता परिवर्तन आंदोलन *"श्रीलंका / बांगला देश"* मे भी दिखाई दिया. अगर फिर भी *"भारतीय राजनीति"* उससे बोध ना लेती हो तो, कांग्रेसी शहनशाह *मोहनदास गांधी* / संघवादी *के सुदर्शन* / प्राचीन भारत के विचारविध *भर्तुहरी* इन्होने *"राजनीति को वेश्यालय"* की उपमा क्यौ दी थी ? यह हमे समझना कठिण नही है. अब उन्ही के शब्दों में *"न्याय व्यवस्था को भी वेश्यालय"* इस अर्थ में लिया जाए या नही ? यह एक संशोधन का विषय है. *"क्या सर्वोच्च न्यायालय संविधान की वाँच डाँग भुमिका"* निभा पायी है ? क्या वह *"न्यायाधीश"* कहलाने मे लायक है या ना-लायक (Not liable) है ? न्यायालय के ऐसे बहुत सारे निर्णय है, जो न्याय के दृष्टी से परे है. वही *"सर्वोच्च न्यायालय"* के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* जी इन्होने बेरोजगार युवा एवं एक्टिविस्ट वर्ग को *"काँकरोच"* यह विवादित टिप्पणी की है. और *"काँकरोच जनता पार्टी"* का जन्म भी हुआ. भले ही वह शब्दार्थ - *"व्यंगात्मक"* (Satirical) राजनीतिक रुप रहा हो ! परंतु ६ जुन २०२६ यह दिन *"वास्तव आंदोलन"* स्वरुप ले चुका है. उनकी *"भविष्य की दिशा"* क्या होगी ? यह एक चिंता का भी विषय है. *अभिजीत दिपके* ये आंबेडकरी विचारधारी युवक आज *"भारतीय राजनीति"* को ललकार रहा है. आज *"करोडो की संख्या"* में युवक वर्ग काँकरोंच की वह एक आवाज है. *"जेन झी* यह शब्द सुनकर सन १९९७ - २०१२ दरम्यान की *"युवा पिढी"* की याद आती है. और वह युवा पिढी *"इंटरनेट एवं सोशल मिडिया"* के दौर की पिढी है. और उस नयी पिढी की विशेषता यह है कि - *"डिजिटल रुप में साक्षर / सामाजिक रुप से जागरुक / नयी कार्य संस्कृति / मानसिक स्वास्थ पर जोर."* अत: भारतीय राजनीति के लिए यह बहुत बडी सिख है. काँकरोच जनता पार्टी आंदोलन को लद्दाख के शिक्षाविद *सोनम वांगचुक* इन्होने ना केवल समर्थन देकर, वे प्रत्यक्ष आंदोलन में साथ खडे थे. तामिलनाडु के मूख्यमंत्री *विजय थलापती* / आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री *चंद्राबाबु नायडु* / फिल्म क्षेत्र के *प्रकाश राज* / कांग्रेस दल नेता *सोनिया गांधी* सहीत पश्चिम बंगाल के *ममता बँनर्जी* पार्टी के कुछ नेताओं का समर्थन बताया जाता है. अत: *"भविष्य की राजनीति"* कौनसी करवट लेती है, वह भविष्य में दिखाई देगा.

           सुप्रीम कोर्ट के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* का बेरोजगार युवा वर्ग / एक्टिविस्ट इन सभी को एक केस में *"काँकरोच"* यह विवादीत बयान से *"न्याय व्यवस्था के न्यायधीशों की वैचारिक पात्रता"* का बोध होता है. अगर *"कोलोजीयम पध्दति"* ना होती तो, वे न्यायाधीश *"चपराशी वर्ग की भी स्पर्धा परिक्षा"* पास होते या नही? यह संशोधन का विषय है. अत: *"संघ लोक सेवा आयोग"* (UPSC) पँटर्न पर *"संघ लोक सेवा न्यायिक आयोग"* (UPSJC) गठण होकर मेरिट आधार पर *"न्यायाधीश वर्ग"* की परिक्षा होना जरुरी है. नरेंद्र मोदी सरकार का संविधान *"अनुच्छेद १२४ - अ"* का NJAC आयोग नही *अभिजीत दिपके* इस युवक द्वारा व्यंगात्मक रुप में *"१६ मे २०२६ को काँकरोच जनता पार्टी"* यह बुनियाद रची गयी. और सोशल मिडिया मे, उस पार्टी १० - ११ दिनों मे *"करोडो की संख्या"* मे बेरोजगार युवक जुड गये. और उन्होने अपना *"मेनिफेस्टो"* भी घोषित किया. जैसे कि - *"सांसदो एवं विधायकों को पार्टी बदलने पर पाबंदी / न्यायपालिका की स्वतंत्रता / महिला आरक्षण / व्होट सुरक्षा / मिडिया सुधार"* आदि. *"चुनाव आयोग / इ. डी. / सी. बी. आय. "* इनको भी मेनिफेस्टो में जोडना चाहिये. और *"६ जुन २०२६ इस दिन को जंतर मंतर"* (२० दिनों के अंतराल में) पर हजारों की संख्या में *"धरना आंदोलन"* सफल होना, यह सहज विषय नही है.  सवाल आप के उपर *राहुल गांधी* इनको आंदोलन का श्रेय ना देते हुये *"काँकरोच जनता पार्टी"*  खडा करने की रणनीति मोदी - शाह की थी, यह आरोप हो रहा है. दुसरा आरोप भी है कि, पुलिस द्वारा आप को *"एयरपोर्ट आकर धरना अनुमती"* से भी, *मोदी - शाह* की कुटील रणनीति जोडी जा रही है. मोदी - शाह इनकी *"रणनीति - राजनीति"* जो भी हो, विषय आप के *"विश्वासनियता"* का है. आरोप हर किसी पर होते रहते है. आप की *"भविष्य की रणनीति"* क्या है ? यह भी प्रश्न है. अगर आप इसमे सफल होते हो तो, आप का *"काँरवा"* निश्चित ही बढेगा. बहुत से संघटन / राजनीतीक दलों की भी साथ मिलेगी. भारतीय संविधान से *"जनतंत्र"* (Democracy) खत्म हो चुका है. मोदी - शाह राज *"गुंडा राज"* का अवलंब कर / *"हुकुमशाही - पुंजीवाद"* सरकार चला रहे है. *"न्याय व्यवस्था"* भी मोदी - शहा इशारों पर चलने का आरोप है. अत: *"जेन झी"* से उम्मिद भी की जा रही है. *"काँकरोच जनता पार्टी"* उसी निवं स्वरुप देखी भी जा रही है. अगर यह सब ठिक रहेगा तो, हमारा भी *"साथ - हात"* आप को रहेगा. जय भीम !!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनांक ७ जुन २०२६