Friday, 10 July 2026

 ✍️ *मा. सर्वोच्च न्यायालय यह अब संविधान की रक्षक (Watch Dog) ना होकर /निरपेक्ष सही न्यायदान की क्षमता खोकर / क्या जुते - फाईले खानेवाली फँक्टरी एवं गाली गलौच स्थली हो गयी है ?*

           *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


             मा. सर्वोच्च न्यायालय *"संविधान रक्षक"* (Watch Dog) / *"निरपेक्ष - उचित न्यायदान"* (Right Justice) की अहं भुमिका पालन करने की पात्रता यह एक बहुत बडी पहेली बन गयी है. *"अयोध्या रामजन्मभुमी निर्णय / नागरीकत्व प्रश्न / चुनाव पध्दती / विभिन्न भ्रष्टाचार केसेस / कुछ विवादपुर्ण निर्णय"* आदी का उदाहरण दिया जा सकता है. अगर *"कोलोजीयम पध्दति"* ना होती तो, न्याय व्यवस्था के न्यायाधीश *"चपराशी स्पर्धा परिक्षा"* पास होते या नही होते ? यह संशोधन का विषय है. इसलिए न्यायदान व्यवस्था में *"संघ लोक सेवा आयोग"* (UPSC)  के सदृश्य *"न्यायिक लोक सेवा आयोग"* (Judiciary Public Service कमीशन - JPSC) का गठण होकर, मेरिट आधार पर *"न्यायाधीश नियुक्ति "* होना, बहुत जरुरी हो गया है. यह प्रश्न *"न्यायाधीश मेरिट"* का है. नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारीत *"संविधान अनुच्छेद 124 A - National Judicial Appintment Commission"* (NJAC) की मै बात नही कर रहा हुं. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वर्ग पर *"बुट फेकना / फाईल फेकना / न्यायाधीशों पर अभद्र टिप्पणी वा गाली गलौच करना"* यह आम विषय हो गया है. क्या यही *"न्याय व्यवस्था"* पात्रता रही है ? न्याय व्यवस्था की *"गरिमा"* क्यौ धुमिल हो रही है ? इस पर संशोधन होना बहुत जरुरी है. अनुसुचित जाति समुह से जुडे मद्रास उच्च न्यायालय के *न्या. कर्णन* इन्होने न्यायव्यवस्था में *"२० भ्रष्ट न्यायाधीश"* होने की शिकायत प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* इन्हे की थी. नरेंद्र मोदी इन्होने वह शिकायत तत्कालिन सरन्यायाधीश *जे एस केहर* इन्हे भेजी थी. और सर्वोच्च न्यायालय के *"सात बेंच खंडपीठ - जे एस केहर / दिपक मिश्रा / जे चेलमेश्वर / रंजन गोगाई / मदन लोकुर / पी सी घोष / कुरियन जोसेफ* इनके द्वारा न्या कर्णन को छ माह की सजा सुनाई थी. उन सात न्यायाधीश वर्ग से भ्रष्टाचारी न्यायाधीश कौन है ? इस विषय को छोडकर *"स्त्री लंपट / शोषक - रंजन गोगाई* सरन्यायाधीश पद से रिटायरमेंट होने के बाद, अब राज्यसभा मे विराजीत है. अत: हम न्याय व्यवस्था की कुछ धुमिल घटनाओं पर चर्चा करेंगे.

           तत्कालिन सरन्यायाधीश *ए एस आनंद* इनके खंडपीठ में *एड. नंदलाल बालवानी* इन्होने सरन्यायाधीश इन पर २६ फरवरी १९९९ को *"जुता"* फेककर मारने से, तत्कालिन खंडपीठ ने उस वकिल की *"याचिका निरस्त"* करते हुये / अवमानना का दोषी मानकर *"४ माह की सजा, रु २००० जुर्माना, वकिल सुची"* से बरखास्त किया था. फिर २६ साल के बाद वही घटना तत्कालीन सरन्यायाधीश *भुषण गवई* इनके खंडपीठ मे घटीत हुयी. उच्च जाती के *एड. राकेश किशोर* इन्होने भुषण गवई इन पर *"बुट* फेकने के बाद भी, उसकी *"FIR दर्ज नही"* कराई गयी ना ही उस वकिल को कोई शिक्षा मिली. कारण एक *"वकिल लाबी"* बुट फेकनेवाले वकिल के साथ खडी होने से, *भुषण गवई* वह हिम्मत नही जुटा पाये. उत्तर प्रदेश के सत्ताधारी भाजप सांसद *निशिकांत दुबे* इन्होने १९ अप्रेल २०२५ को, तत्कालीन सरन्यायाधीश *संजीव खन्ना* इन्हे भारत मे *"गृह कलह"*(Civil War) करनेवाला कहने पर भी, सांसद निशिकांत दुबे इन पर कोई कारवाई नही हुयी. आज दिनांक १० जुलै २०२६ को, सर्वोच्च न्यायालय के *न्या. विश्वनाथन / न्या. आलोक आराधे* इनके खंडपीठ मे न्यायाधीश को *एड. भानुप्रताप सिंग* इस वकिल द्वारा *"Judicial Servant"* इस अपमानजनक शब्द से सुरुवात कर / लखनौ के ACP को *"अरेस्ट करने"* आदेश दे, यह कहने पर / न्यायाधीश ने हमे *"आदेश देने"* का जिक्र करने पर / एड भानुप्रताप सिंग ने अपने *"हाथ की फाईल"* न्यायाधीश पर फेकते हुये / *सरन्यायाधीश सुर्यकांत* इनको *"माँ - बहन की गाली गलौच"* की. अत: एड सिंग को न्यायालय के सुरक्षा रक्षको ने पकडकर वहा के *"पोलिस चौकी"* ले गये. परंतु *"FIR दर्ज नही"* की गयी. सर्वोच्च न्यायालय की यह घटनाएं क्या *"संदेश"* दे रही है ? क्या सर्वोच्च न्यायालय अपनी *"गरिमा - विश्वास खो चुकी"* है ? ऐसे बहुत सारे प्रश्न खडे होना तो लाजमी है.

           उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के *न्या. राम मनोहर नारायण मिश्रा* इन्होने १७ मार्च २०२५ को एक *"गंभिर यौन पिडन केस"* के निर्णय मे, *"नाबालिग लडकी के स्तन को पकडना / पायजामा का नाडा खोलना / पुल के निचे ले जाना"* इन तमाम घटना को *"बलात्कार का प्रयास"* ना मानकर / आरोपी को बरी किया. अत: उस *"न्यायाधीश के पत्नी - लडकी"* पर यह प्रयोग होना बलात्कार नही माना जाएगा ? प्रकरण की गंभिरता देखकर सर्वोच्च न्यायालय ने उस निर्णय को *"खारीज"* किया, यह अलग विषय है. उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के और एक *न्या. शेखर यादव* यह विश्व हिंदु परिषद के मंच पर ८ दिसंबर २०२४ को जाकर / *"बहुत विवादपुर्ण जातियवादी टिप्पणी"* कर गये. वही दिल्ली उच्च न्यायालय के *न्या. यशवंत वर्मा* इनके बंगले पर, १४ मार्च २०२५ को *"लाखो की करंसी"* मिली थी.  राजस्थान उच्च न्यायालय मे कुछ ब्राम्हण न्यायाधीश - वकिलो द्वारा *"मनु का पुतला"*:बिठाया गया. और ऐसे बहुत सारे विवादपुर्ण न्यायाधीश के निर्णय बताये जा सकते है. इन तमाम केस में उन *"न्यायाधीशो को जेल की शिक्षा - दंड"* नही मिला, जेसे अनुसुचित जाति के न्यायाधीश *सी. एस. कर्णन* को बगैर किसी अपराध से मिला था. शब्द मर्यादा के कारण शब्द को विराम दे रहा हु. प्रश्न हमारे *"न्याय व्यवस्था मेरिट"* का है. *"निरपेक्ष उचित न्याय"* का है. एवं *"भारतीय संविधान रक्षा"* का भी है. क्या *"न्यायाधीशों का Code of Conduct"* यही शिक्षा पढाता है. अत: भारत के भविष्य के बारे मे हम क्या कहे ??? इसलिए ब्रिटिश अंग्रेज काल *"ब्राम्हण्य न्यायाधीश"* बनने पर पाबंदी लगाई गयी थी. कांग्रेस पितामह *मोहनदास गांधी* / संघवाद के *सुदर्शन* / प्राचिन भारत के विचारविद *भर्तुहरी* इनके शब्दों में, भारत की राजनीति *"वेश्यालय"* है. आज वे होते तो, *"न्याय व्यवस्था को भी वेश्यालय"* कहते ? यह प्रश्न है...!!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपुर दिनांक १० जुलै २०२६

Friday, 3 July 2026

 .👌 *विपश्यना - फालुन दाफा साधना से लेकर फालुन गोंग साधना अभ्यास तक जुडे इन महायान - वज्रयान विचारों की उलझन में थेरवादी - नवयान समुह !* (ली होंंगजी लिखित फालुन गोंग / जुआन फालुन पुस्तक समिक्षा)

     *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


          चायना के *"फालुन दाफा'* साधना पध्दति का, बगिचे आदि जगहों पर सहजतासे अभ्यास करते दिखना, इस कारणवश बहुत से भारतीय लोक, जाति - पाति - पंथ - धर्म से उपर उठकरफालुन दाफा की ओर आकर्षित हो रहे है. बहुत से जगहों पर फालुन की प्रदर्शन लगना, प्रसार - प्रचार तंत्र भी होता हुआ, हमें दिखाई देता है. नागपुर के *"लोकमत भवन आर्टगॅलरी"* में भी *"फालुन दाफा"* प्रदर्शनी का आयोजन हो चुका है. मुझे आयोजन टीम से निमंत्रण होने से, मैं मेरी *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* टीम के साथ, फालुन दाफा प्रदर्शनी देखने गया था.वहां फालुन दाफा टीम के साथ मेरा परिचय भी हुआ.साथ ही चायना देश में *"फालुन दाफा"* टीम के साथ, चलनेवाला *"शोषण संघर्ष "* भी सामने आया है. फालुन दाफा साधना पध्दती के प्रायोजक - *ली होंगजी* इन्होने, *चीन* सत्ता शासन क*"शोषण नीति"* के कारण, चायना छोडकर *"अमेरिका"* होने की चर्चा है. *"फालुन दाफा"* इस शब्द का सहज अर्थ - फालुन = सिध्दांत चक्र / दाफा = विधाता का ज्ञान, विश्व का महान मार्ग सिध्दांत, साधना शक्ति - अभ्यास, इस अर्थ स देखा जाए तो, *"फालुन दाफा = सिध्दांत चक्र साधना शक्ति - अभ्यास "*(सिध्दांत चक्र विधाता का ज्ञान) भी कह सकते हैं. *"फालुन गोंग"* इसका अर्थ - *"शरीर + मन दोनों की साधना प्रणाली"* बतायी गयी है. इस साधना पध्दती के अभ्यास के कारण ही, *"शारिरीक - मानसिक"* रुप में *"स्वास्थ "* पर, सकारात्मक परिणाम होना बताया जाता है. अब हम उपरोक्त *"साधना पध्दती"* के इतिहास  - अभ्यास परिणाम, *"विपश्यना"* आदी विषयों पर भी हम चर्चा करेंगे.

     ‌       *"फालुन"* (सिध्दांत चक्र) संदर्भ की, *ली होंगजी* लिखित दो पुस्तके *"फालुन गोंग"* तथा *"जुआन फालुन"*  यह पुस्तके मैने पढ़ी है. साथ साथ ही *"विपश्यना"* साधना पध्दति पर भी वाचन किया है. *"विपश्यना"* का सरल अर्थ - *"अंतर्दृष्टी या स्पष्ट दृष्टी"* कह सकते हैं. विपश्यना में *"जो वस्तु जैसी है, उसे ठिक वैसे ही देखना है - समझना है"* यह भी कह सकते हैं. विपश्यना यह तो, *"आत्मनिरिक्षण"* एवं *आत्मशुध्दी"* की साधना पध्दति बतायी जाती है. इसे *"प्राणायाम"* और *"साक्षीभाव"* इसका मिलाजुला योग भी, कुछ मान्यवर कहते हैं. कुछ मान्यवर *"बुध्दीझम"* से इसका संबंध नकारते भी है. इस संदर्भ में सविस्तर चर्चा हम फिर कभी करेंगे. परंतु व्यक्ति के *"शारीरिक  - मानसिक स्वास्थ्य"* के लिये, *"साधना अभ्यास"* करना कुछ बुरा नहीं है. प्रश्न जब *"बुद्ध धम्म"* से जुडा हुआ होता है, तब *"विपश्यना / फालुन दाफा"* समान किसी भी साधना पध्दती का, कोई भी औचित्य नहीं होता, यह समझना भी जरूरी है. हम लोग *"धम्म और साधना पध्दति"* को एक साथ जोडकर, विवादों को जन्म देते है. *"धम्म"* यह बहुत बडा विषय है. *धम्म* यह आचरण का साधन है. *"साधना"* यह केवल शरिर शुध्दता का साधन है. इसलिए बुध्द हमें *"अष्टांग मार्ग"* पालन की सिख देते है. *"धम्म"* से बढकर कुछ भी नहीं है. *"धम्म"* यह व्यक्ती के साथ साथ, *"समुदाय सापेक्ष"* विषय है. जब कि *"साधना"* यह *"व्यक्ती सापेक्ष"* विषय है, यह समझना भी बहुत जरूरी है. इस लिये केवल *"बुध्द"* यह धर्म (धम्म) बना. ना कि, *"विपश्यना / फालुन दाफा"* यह साधना पध्दती - *"धर्म बना !!!"*

          *"फालुन"* (सिध्दांत चक्र) द्वारा संबंधित *"फालुन गोंग / जुआन फालुन"* यह दो पुस्तके *"ली होंगजी"* इनके *"चीनी भाषा"* में दिये गये, कुछ *"भाषणों का संकलन"* दिखाई देता है. दुसरा संदर्भ यह कि, *"भाषांतरण"* होने के बाद में *"अर्थ"* संदर्भ में बदलाव संभव हुआ हो. और *ली होंगजी* की वह पुस्तके, *"भाषण संकलन"* होने के कारण, *"विषय संदर्भ के अनुक्रम / विषय सादरीकरण"* भी जैसा चाहिए, वैसे हुआ दिखाई नहीं देता. साथ ही *"जी होंगजी"* इनका जुडाव *"महायान / वज्रयान / तंत्रयान"* रहा है. उसमें *"ताओ विचार"* की भर पड गयी. अत: *होंगजी* इनकी  *"वैचारिक स्पष्टता "* ना होने से, पुस्तक *"उद्देश लिखाण से भटकना"* यह दिखाई देता है. अगर उन्होने उद्देश लेकरं पुस्तक लिखी होती तो, वह *"पुस्तक लिखाण"* अलग होता. और उनके द्वारा *"संकलित बतायी गयी साधना पध्दती - एक उन्नत साधना प्रणाली है,"* यह बताने भी वे भुलें नहीं है. कही कही तो *ली होंगजी* इन्होने, *"बुध्द से भी बडा होने की स्वयं तारिफ"* भी की है. जब कि *युनो"* ने, विश्व का सर्वोत्तम शांती धर्म *"बुद्ध धर्म"* को माना है. *ली होंगजी* इन्होने तो, *"जन / शान / रेन"* (सत्य / करुणा / सहनशीलता)  इस त्रयी से ही, उनके *"साधना का मार्ग"* बताया हुआ है. *बुध्द* तो उसके आगे भी चले गये है. *"बुध्दत्व प्राप्ति"* को साधना, क्या *होंगजी* के साधना से संभव है ? यह भी प्रश्न है‌. *होंगंजी -  "चीगोंग* (प्राण शक्ति) / *गोंग* (साधना शक्ति) / *फाशन* > फा > सिध्दांत शरीर - ज्ञानप्राप्त व्यक्ती का शरीर/ *शिनपिंग* (मन या हृदय की प्रकृति) / *दान* (शक्ति पुंज) / *दिव्य नेत्र* (माथे का मध्य) आदि आदि शब्दों के बिच ही, उनकी *"साधना घुमती"* हुयी नज़र आती है. उन्होंने *"साधना और अभ्यास"* इसको अलग अलग माना है. *तथागत बुध्द* इनके महापरिनिर्वाण (इ. पु. ४८३ नये शोध अनुसार इ. पु. ५४३) के बाद, *पहिली शती* (इसवी ७२) में कश्मिर हुयी - *"चवथी बौध्द सांगिती"* में, बुद्ध धर्म यह *"हिनयान / महायान"* संप्रदाय में विभक्त हुआ. इतिहास में *"हिनयान"* यह १८ भागों में विभाजीत होने का संदर्भ है. साथ ही, *"थेरवाद (स्थविरवाद) / सर्वास्तिवाद (वैभाषिक) / सौतांत्रिक"* यह प्रमुख तिन संप्रदाय दिखाई दिये. यही नहीं तो, *"हिनयान / थेरवाद"* बौध्द संप्रदाय भी अलग अलग बताये गये. वही *"महायान "* (पहिली शती में उदय) ने *"वज्रयान (५ - ७ वी शती) / तंत्रयान संप्रदाय (८ वी शति)"* को जन्म दिया. वही वज्रयान / तंत्रयान ने, *"शैव पंथ / वैष्णव पंथ / शाक्त पंथ"* (९ - १० वी शति में) इनकी निव भी रखी. परंतु *होंगजी* इन्होने उन संदर्भ के प्रस्तुतीकरण को, समजा हुआ हमें दिखाई नहीं देता. महत्वपूर्ण यह कि, *"हिनयान / महायान / वज्रयान / तंत्रयान"* बौध्द संप्रदाय विचार तथा *"विपश्यना"* साधना विचार भी, यह सहजता से समझे जा सकते हैं. *बाबासाहेब डॉ आंबेडकर* इन्होने १४ अक्तुबर १९५६ को, हिनयान में कुछ सुधार कर *"नवयान बौध्द"* होने की बात कही. *"दि बुद्धा एंड हिज धम्मा"* यह ग्रंथ बहुत सरल सोपी भाषा में लिखा है. परंतु *ली होंगजी* द्वारा लिखित साधना संदर्भीत पुस्तके, सरल - सोपी भाषा में नहीं दिखाई देते. अत: सरल सोपी भाषा में ही *"फालुन साधना - अभ्यास"* लिखाण का प्रयास हो.

            *ली होंगजी* इन्होने "फालुन" संदर्भीत पुस्तक में, *"चीगोंग"* (प्राणशक्ती) का संदर्भ, *"प्राचिन काल"* से बताया है. बुध्द काल का संदर्भ देखे तो, *"भिक्खु संघ"* के भिक्खु लोग *"अर्हत / बोधिसत्व"* अवस्था तक जाने का संदर्भ है. उनकी साधना पध्दती यह *"शाक्यमुनी बुध्द"* इनके विचारों की रही है. प्राचिन काल में *"२८ बुध्द"* होने का संदर्भ है. ८४ हजार बुध्द नहीं. *अवलोकितेश्र्वर* इनको तो *"बोधिसत्व"* बताया गया है. *"बुद्ध नहीं."* तथा *नागार्जुन* इन्हे भी बोधिसत्व ही बताया गया है. उनका संदर्भ भी महायान से जोडा जाता है. महायान संप्रदाय में *"मंजुश्री / मैत्रेय"* आदि का संदर्भ आता है. *बाबासाहेब डॉ आंबेडकर* इन्हे भी, काठमांडू के "जागतिक बौध्द परिषद - १९५४" में, *"बोधिसत्व"* यह महान बौध्द पदवी, भिक्खु संघ द्वारा ही दी है. महायान / हिनयान बौध्द साहित्य पर, हम फिर कभी चर्चा करेंगे. *"फालुन गोंग"* (शरीर + मन दोनों की साधना प्रणाली) का संदर्भ बौध्द साधना प्रणाली से जुडा दिखाई देता है. बुध्द धर्म में *"आत्मा"* इस वस्तु को नकारा है. *बुध्दघोष* इन्होने *"विशुध्दीमग्ग"* ग्रंथ में आत्मा नकारते हुये कहा कि, *"कम्मस्स कारको नत्थि विपाकस्स च वेदको | सुध्दधम्मापवत्तन्ति एव ऐतं सम्मादस्सनं ||"* (अर्थात - कोई कर्ता नहीं है, जो कर्म को करता है, शरीर का अवयव घटक चक्र स्वयं ही अपने आप घुमते रहाता है. यही वस्तुस्थिती है.) *वेदांत दर्शन* ने भी  *"आत्मा"* संदर्भ में, *बुध्द* के विचारों की ही कॉपी की है. जैसे - *"नात्मा भावेषु ....!"*- (अष्टावक्र गीता ७:४) (अर्थात - शरीर में आत्मा नहीं रहती.) बुध्द ने विश्व का कर्ता नहीं माना. *"न हेत्थ देवो ब्रम्ह संसारस्य अत्थि कारको | बुध्दधम्मा पवत्तन्ति हेतुसंभारपच्चया ति ||"* (अर्थात - विश्व का कोई कर्ता नहीं है. सृष्टी के नियमानुसार सृष्टी चक्र अपने आप शुरु रहता है.) *"विपश्यना"* का उल्लेख *सुत्तपिटक* (दिघनिकाय) इसमें दिखाई देता है. *"अंगुत्तर निकाय"* (कालामसुत्त) में बुध्द ने, *"तंत्र - मंत्र - दैवी शक्ति"* को नकारा है. बुध्द ने *"चार भौतिक तत्व"* को ही माना है. - *"पृथ्वी / आप (जल) / तेज (अग्नि) / वायु"* तत्व. बुध्द ने *"आकाश"* तत्व को नहीं माना. *"मृत्यु"* के उपरांत शरीर भी, *"चार तत्वों"* में ही विलिन हो जाता है. अत:  *जी होंगजी* इन्होने बुध्द के इस विचार को समझना होगा. *"महायान का उदय"* पहिली शती में हुआ था. और *"त्रिपिटक"* का निर्माण तो, यह उसके ही पहले, *"तिन बुध्द सांगिती"* में हो चुकां था. *"फालुन गोंग अभ्यास पध्दति"* इस प्रकरण को छोडा जाए तो, समस्त पुस्तक *"सिर के उपर से"* जाती हुयी दिखाई देती है. *"फालुन गोंग"* में पांच क्रियाओं का संग्रह है. *"बुध्द सहस्त्र हस्त प्रदर्शन क्रिया / फालुन स्थिर मुद्रा क्रिया / विश्व के दो छोरों का भेदन क्रिया / फालुन अलौकिक परिपथ क्रिया / दिव्य शक्तियों को सुदृढ करने का मार्ग क्रिया."* अत: अन्य साधना पध्दति सरल पध्दति से कैसे हो ? इस प्रकार साधना पुस्तक की रचना कराकर,  *ताओ विचार* आदि अवांतर विषयों को समावेश ना करे तो, यह बहुत अच्छा होगा. साधना अभ्यास में *"शुद्ध बुद्ध विचार"* हो. मिलावट नहीं !!! अंत में *"साधना विचार"* यह हमारा अंतिम उद्देश (ध्येय) नहीं है. *"शुध्द मुल बुध्द धम्म"* पालन / प्रसार - प्रचार ही हमारा उद्देश होना, बहुत ही जरुरी है. हम केवल *"साधना"* की बीच ही उलझकर, हमारा *"मुल उद्देश"* को भुलं रहे है. *"विपश्यना / फालुन दाफा"* आदि साधना से बाहर निकलने में, वह साधक लोग उदासीन ही दिखाई देते है. जो भविष्य में हमें हमारे *"बौध्द धर्म"* (धम्म) के अस्तित्व की समस्या होगी !

         जय भीम ! नमो बुध्दाय !!!


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▪️ *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपुर दिनांक ३ जुलै २०२६

Wednesday, 1 July 2026

 👌 *बुध्द सत्याचा बोध...!!!*

       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       मो. न. ९३७०९८४१३८


निसर्ग चक्र संसारातील

प्रात: काल निर्मल मन

प्रेम मैत्री सत्य अहिंसा 

प्रज्ञा शील करुणा

स्वातंत्र समता बंधुता न्याय

हा जीवन बोध करतांना

कार्य कारण भाव - प्रतित्यसमुत्पाद

बुध्द सत्याची जाण देतो ....

मनातील दडप आवरण

घालवावे कसे हा अहं प्रश्न

असत्य - दगाबाज जग

रक्ताळलेले हिंसा तांडव

अ-शील भ्रष्टाचार पोखरण

नेहमी आ वाजुन उभे असतांना

तुझा प्रेम मैत्री करुणा हाथ

मनाला शांतीची अनुभुती देतो....

तुझ्या प्रेमाच्या पाशेत

मनाला येणारी शांत झोप

हवी हवीसी असणारी चेतना

परंतु वातावरणातील दुषितता

सर्व काही उध्वस्त करतांना

सुर्योदय किरण उत्सर्ग

माणसाला नित्य जागवतांना

बुध्द सत्याचा बोध करुन जातो ....


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नागपूर दिनांक २ जुलै २०२६

Monday, 29 June 2026

 .👌 *लखनौ स्थित डॉ बाबासाहेब आंबेडकर अस्थिकलश स्थल (डा आंबेडकर महासभा) (?) गोपनीय रुप से हटाने का मोदी - योगी सरकार की रणनीति ! बहुजन समाज नेता मायावती / सांसद रावण गहरी निंद मे ?*

       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


            अभी अभी कुछ दिन पहले बिहार के एक्स डीआयजी *आर एस कैथल* (IPS) इनके साथ बिहार के एक्स चिफ इंजिनियर *राजेंद्र प्रसाद* मान्यवर नागपुर तथा मेरे निवास आये थे. और *राजेंद्र प्रसाद* इन्होने मेरा संदर्भ भारत सरकार के एक्स सचिव *हरिश चंद्र* (IAS) इनको दिया था. आज ही मुझे मा. *हरिश चंद्र* जी इनका फोन आया. और उत्तर प्रदेश के 10, विधान सभा मार्ग लखनौ स्थित *"डॉ. आंबेडकर महासभा"* कार्यालय समेत *"बाबासाहाब डॉ. आंबेडकर इनकी अस्थि स्थल"* तथा *"बोधिवृक्ष"* हटाने  की जानकारी मुझे दी. इस संदर्भ मे एक्स सचिव भारत सरकार *हरि चंद्र* (IAS) तथा *एस. आर. आर. दारापुरी* (IPS) इन्होने डॉ. आंबेडकर महासभा के *"संस्थापक सदस्य"* होने के नाते, सदर *"गैरकृत्य का विरोध"* कर, इस गैरकृत्य को रोकने की मांग *'भारत के राष्ट्रपति / प्रधानमंत्री / विरोधी पक्षनेता / उत्तरप्रदेश मुख्यमंत्री"* से लेकर सन्मानिय पदाधिकारी वर्ग से की है.

        सन १९९१ को प. पु. *"डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जमशति"* मनाने के उद्देश से, लखनौ स्थित *"10, विधान सभा मार्ग"* स्थित सदर संस्थान को आबंटीत की गयी थी. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इनकी पत्नी स्मृतिशेष *सविता आंबेडकर* द्वारा डॉ बाबासाहेब का अस्थिकलश वहा स्थापित किया गया. तत्कालीन राष्ट्रपति *के आर नारायणन* इनके शुभ हाथो श्रावस्ति से *"बोधिवृक्ष शाखा"* वहां रोपित की गयी. भारत के प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोटी* इन्होने भी उस पावन स्थल पर भेट देकर, अपनी आदरांजली दी थी. अत: वह धरोहर कितनी महत्वपूर्ण है, इसका संदर्भ दिखाई देता है. परंतु अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री *योगी* तथा कुछ *"अवांछित तत्व गुपचुप तरीके से वह पावन स्थली को हटाने का प्रयास"* कर रही है. अत: इस संदर्भ मे विरोध करने हेतु दिनांक १६ जुन २०२६ को शाम ५. ०० बजे *"होटल प्रेमियर* लोक भवन गेट क् ९ के पास, बेल्लारी लेध, आंबेडकर महासभा की आवश्यक बैठक बुलायी गयी. तथा इसका पुर्णत: विरोध करने हेतु आंदोलन करने का निर्णय लिया गया. अत: आप के भी सहयोग की अपेक्षा है. बहुजन समाज पक्ष की *मायावती* तथा सांसद *रावण* भी अपनी भुमिका जाहिर करे.


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो. न. ९३७०९८४१३८

Wednesday, 24 June 2026

 🧜‍♂️ *हे विशाखा मिगार माते....!!!*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो.न. ९३७०९८४१३८


हे विशाखा मिगार माते

तुला मानवी नैतिक संस्कार 

अंग देश भद्दीय नगर व्यापारी 

तुझे पिता धनजय सेठ ह्यांच्याकडुन

जन्मजात मिळाले होते गं

तुझ्या पित्याने तुझा विवाह

श्रावस्ती धनवान सेठ निगण्ठ उपासक

मिगार पुत्र पुण्यवर्धन 

ह्याचे सोबत करुन दिल्यानंतर

तुला घरातुन निरोप देतांना

तुझ्या जन्मजात पित्यांनी

दहा गोष्टीची जाण करुन दिलेली होती

घरातील अग्नी बाहेर जावु न देणे

बाहेरचा अग्नी घरात येऊ न देणे

अग्नी अर्थात गृह गुपिते, भांडणे, विवाद

जो परत करणार असेल त्याला काही देणे

जो परत करणार नसेल त्याला न देणे

जो देईल त्याला देणे

जो ना देईल त्यालाही देणे

प्रसन्न चित्त बसणे

प्रसन्न चित्त खाणे पिणे

अग्नी प्रज्वलित राहील काळजी घेणे

येथे अग्नी अर्थात गृह प्रकाश होय

गृहदेवतांचा आदर सत्कार करणे

आणि तु सासुरवाडी श्रावस्ती येथे

नव्याने वास्तव्यास आली असतांना

नग्न निगण्ठ स्वागतास विरोध केल्याने

सासरे निगण्ठ उपासक मिगार

ह्यांच्या क्रोधाला सामोरा गेली होतीस

तुझे पिता सेठ धनंजय माता सुमना

सम्राट प्रसेनजीत ह्यांच्या विनंतीवर

सम्राट बिंबिसार ह्यांच्या आज्ञेवर 

कोशल देश साकेत नगर येथे

स्थानंतरीत झालेले होते

आणि तु सुध्दा पिता धनंजय सोबत

साकेत अर्थात अयोध्या येथे

तुझ्या विवाहाच्या आधी

गर्भ श्रीमंतीत वास्तव्यास होतीस

विवाहानंतर ही श्रीमंती कायम होती ....

तुझे सासरे मिगार हे नग्न निगण्ठ उपासक

आणि तु तर तथागत बुध्द उपासक

दोन परस्पर विरोधी विचार दिशा

मग वैचारिक विवाद हा असणारचं

तुझे सासरे भोजन करीत असतांना

एक बौध्द भिक्खु भिक्षाटनास घरी आला

तुझ्या सास-यांनी बुध्द भिक्खुकडे 

पुर्णत: दुर्लक्ष केलेले होते

तेव्हा तु भंतेना म्हणाली होतीसं

भंते कृपया तुम्ही पुढे जा

तुझे सासरे शिळे अन्न खात आहेत

तेव्हा विशाखाचे हे शब्द ऐकूण

तुझे सासरे तुला माहेरी साकेत नगरीला

सोडण्यास फर्माण सोडून देतात

तेव्हा तु पिता नियुक्त आठ पंचासमोर 

आपले निदोर्षत्व सिध्द करण्याची मागणी

आपल्या सासरच्यांना केली होतीस

तेव्हा तुझ्या कुशाग्र बुध्दीतुन

आठ पंचानी तुला निर्दोष निर्णय दिल्यावर

आपल्या माहेरी जाण्याचा तुझा निर्णय

तुझ्या सासरच्यांना दिला होता

सासरच्यांना त्यांची चुक लक्षात आली

तेव्हा तुझ्या सासरच्यांनी मागितलेली माफी

आणि तुझे सासरे मिगार ह्यांनी

पुढे बुध्द उपदेश ऐकुण

बुध्दाचे पुर्णत: उपासक होवुन

तुझे सासरे मिगार ह्यांनी

तु पुत्रवधु असतांनाही 

तुला मातेचा दर्जा दिला असल्याने

तु विशाखा मिगार माता म्हणुन

सर्वदुर परिचीत झाली होतीस

आणि हा तुझा इतिहास आहे ....

हे विशाखा मिगार माते

तथागत बुध्द ह्यांच्याकडुन सुध्दा

तु आठ वर मागुन घेलेलेले होते

पावसाळ्यात भिक्खु संघाला चिवर दान

विहारात दाखल होणा-या भिक्खुंना भोजन

विहारातुन बाहेर जाणा-या भिक्खुंना भोजन

आजारी भिक्खुंना भोजन

सुश्रुषा करणा-या भिक्खुंना भोजन

आजारी भिक्खुंना औषधी पुरविणे

भिक्खु संघाला खीर दान करणे

भिक्खुणीला स्नानाकरीता चीवर देणे

ह्या आठ वरांच्या बुध्द अनुमतीनंतर

बुध्दांना तु सांगितलेली कारणे

तुझी प्रसन्नता - तुझा आनंद 

तुझी शांती - तुझी सुख तृप्ती अनुभुती

हृदयाला मिळणारी शांती

श्रध्दा - बल नैतिक सामर्थ 

सप्त संबोधी अंग प्राप्ती

आठ वर मागण्याचा तुझा पावन उद्देश

आणि बुध्दानी केलेले पुण्यानुमोदन

हा एक इतिहास झालेला आहे....

हे विशाखा मिगार माते

श्रावस्ती नगरीतील तुझी दानशीलता

तुझ्या बुध्दीज्ञान कौशल्याची धार

तुझे घर प्रंपच सांभाळ कौशल्य

तु संघाला दिलेले पुर्वाराम विहार दान

उपासिकात दानशील होण्याचा पहिला मान

तुझा संघाला असलेला मदतीचा हात

तुझी करुणा - तुझे प्रेम वात्सल्य

तुझे धैर्य - चिकाटी - त्याग - समर्पण 

तुझे नैतिक चारित्र्य

ह्या संदर्भात शब्द ही अपुरे आहेत

बुध्द धम्म मिशन करीता

श्रावस्ती नगरी पासुन 

ब-याच ऐतिहासिक बुध्द स्थळांना

माझ्या बरेचदा भेटी झालेल्या आहेत

तेव्हा प्राचीन बुध्द इतिहास

आपले शब्द मला बयान करीत असतो

प्राचीन बुध्द इतिहासात मी रममाण होतो

तुझ्या गुणशीलतेचा आज शोध घेतो तेव्हा

मी पुर्णत: अबोल झालेला असतो

विशाखा मिगार माता पुन्हा होणे नाही

तुझ्या श्रावस्ती नगरीला

महान दानशील अनाथ पिंडक

डाकु अंगुलीमाल ह्यांचे अहिंसक होणे

राजकुमार जेत ह्यांचे जेतवन

जेतवनातील सुवर्ण मुद्रा व्यवहार

बुध्दांच्या पंचवीश भेटींचा

असा बराच मोठा इतिहास आहे

तेव्हा आता फक्त नतमस्तक होणेच

आमच्या हातामध्ये शेष आहे

तरी पण एकदा तु आमची आई व्हावी

तुझी करुणा शील मैत्री

तुझे प्रेम वात्सल्य मिळण्याची इच्छा 

आमची नेहमीचीचं राहाणार आहे

हे विशाखा मिगार माते !

हे विशाखा मिगार माते !!

हे विशाखा मिगार माते !!!


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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

       नागपूर दिनांक २४ जुन २०२६

Sunday, 21 June 2026

 ✍️ *जेन झी काँकरोच जंतर मंतर आंदोलन की भावी दिशा - दशा (?) एवं स्वच्छ आजाद भारत का सत्याग्रह ही अगला पडाव ! ब्रिटिश गोरे अंग्रेज शासन बनाम भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन व्यवस्था !!!*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२


         ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का शासन बहुत बुरा था यह कहना *"भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन"* में कहना जागति होगी. अगर ब्रिटिश गोरे अंग्रेज भारत में ना आये होते तो, भारत का विकास कभी हुआ ही नही होता. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९००) यह पहला पडाव / *"बुध्द कालखंड से लेकर बुध्द प्रभाव कालखंड"* (इ. पु. ६२४ से इसवी १० वी शति) यह दुसरा पडाव / महायान - वज्रयान - तंत्रयान बुध्द संप्रदाय द्वारा इसवी १० वी शति में *"शैव पंथ, वैष्णव पंथ, साक्त पंथ"* की स्थापना होना, शंकर नामक व्यक्ति का (इसवी ८५० मे जन्म) द्वारा स्वयं को इसवी दसवी शति में *"आदि शंकराचार्य"* घोषित कर महायान बुध्द विहारों पर अधिपत्य करना, इसवी ११ - १२ वी शति में *"वैदिक धर्म - ब्राह्मण धर्म"* की स्थापना होना, वेद उपनिषद मनुस्मृति आदि ग्रंथों की रचना कागदों पर होना, कागज का शोध इसवी १० वी शति में चायना मे लगना, बुध्द धर्म की अवनति यह *"तिसरा पाडाव"* / ब्राह्मण्य अतिरेक द्वारा देश की एकता एकात्मता की हानी तथा *"ब्रिटिशों गोरे अंग्रेज"* शासन व्यवस्था की गुलामी यह *"चवथा पाडाव"* / ब्राह्मण्य व्यवस्था बनाम ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का संघर्ष तथा *"भारत आजाद"* (१५ अगस्त १९४७) होना यह *"पाचवा पाडाव"* रहा है. ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो के काले में *"शिस्त - अभ्रष्टाचार"* होने से, भारत में विकास के रास्ते खुले थे. बहुतसी प्रथाएं, अ-रुढीओं पर बंदी लायी गयी. *'शिक्षा"* के दरवाजे खुले हुये थे. आज यह *"पाचवा पाडाव"* भारतीय ब्राह्मण्य *"काले अंग्रेजो"* के शासन व्यवस्था का राज बोलबाला है. जहां *"भ्रष्टाचार - पुंजीवाद - हुकुमशाही"* का बोलबाला है. *"लोकतंत्र"* हमें कही दिखाई नही देता. अत: *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"*  यह काले अंग्रेजो को भगाकर *"स्वच्छ भारत - सुंदर भारत - विकास भारत"* बना पाएगा ? यह प्रश्न है. अगर हां हो तो, हम इसे *"षटवा पाडाव"* भी कह सकेंगे. प्रश्न यहां जेन झी *"काँकरोच आंदोलन"* के दिशा और दशा का है. *'आंदोलन"* (Agitation) इस शब्द में हमे सत्य का बोध नही होता, जो *"सत्याग्रह"* (Satyagraha, Non-Violance Resistence, Passive Resistence, True Path Movement) इस शब्द में दिखाई देता है. बाबासाहेब डॉ आंबेडकर इन्होने *"कालाराम मंदिर सत्याग्रह / येवला पाणी सत्याग्रह"* तथा मोहनदास गांधी इन्होने *"नमक सत्याग्रह"* करने का संदर्भ है. अभी तक हम जेन झी *"काँकरोच आंदोलको"* द्वारा भावी दिशा ही तय नही की. केवल शिक्षा मंत्री *धर्मेंद्र प्रधान* का राजीनामा यही गुंज ही सुनायी देती है. अत: जेन झी आंदोलन को *"काले अंग्रेजो"* द्वारा दबाया जाएगा या नही, यह वक्त ही बतायेगा.

           मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* इन्होने युवा बेरोजगार को काँकरोच कहना बहुत महेंगा पडा. आँनलाईन बनी संघटन ने  आज *"वास्तव रूप"* तो लिया, परंतु वे अपनी भावी दिशा तय नही कर पाये है. आंदोलन करने को *"लाखों रुपयों की फंडिंग"* की आवश्यकता होती है. उन्हे यह फंडिग कैसे मिली? *"प्रशासन की मेहरबानी* होना, यह आरोप भी हो रहे है. हम उन आरोपों पर चर्चा नही करेंगे. काँकरोच आंदोलन जगह जगह सफल होते दिखाई देते है. परंतु वे *"भावी दिशा"* क्यौं तय नही पा रहे है ? यह अहं सवाल है. जंतर मंतर का २० जुन २०२६ का आंदोलन समय शाम ५ बजे तक था. उन्होने उस आंदोलन को जारी रखा. भारतीय संविधान यह अधिकार देता है. सवाल यह है कि, वह आंदोलन और आगे *"कितने दिनों तक जारी* रहता है? यह है. पोलिस प्रशासन या सत्ता प्रशासन इस आंदोलन को तोडने का भरपुर प्रयास भी करेगी. अत: सवाल तुम्हारे अंतर्मन शक्ति का है. जय भीम !!!


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▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

        नागपुर दिनांक २१ जुन २०२६

Friday, 19 June 2026

👌 *बिहार के एक्स डायरेक्टर जनरल आँफ पोलिस (DGP) एवं झारखण्ड लोक सेवा आयोग (ZPSC) के एक्स चेयरमन आर सी कैथल इनका सीआरपीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इनके साध दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रँगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक कामठी रोड इन एतिहासिक स्थलों पर सदिच्छा भेट !!!*
       बिहार राज्य एक्स डीजीपी तथा झारखंड लोक सेवा आयोग के एक्स चेयरमन *आर सी कैथल* साहाब दो दिवसीय दौरे पर, बिहार के एक्स चिफ इंजीनियर *राजेंद्र प्रसाद* इनके साथ नागपुर आये है. बोधगया के *भदंत प्रज्ञाशील महाथेरो* इन्होने इसकी सुचना सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनको तथा एक्स डीजीपी *मा. कैथल साहाब* इन्हे भी दी थी. शुक्रवार दिनांक १८ जुन २०२६ को *आयु कैथल साहाब* इन्होने सुबह १० बजे *आयु राजेंद्र प्रसाद* तथा *आदित्य कैथल* इनके समवेत सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष तथा बुध्द आंबेडकरी लेखक / कवि / चिंतक / समिक्षक *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके निवास जाकर सदिच्छा भेट की. तथा रमेशचंद्र कैथल लिखित *"डॉ. आंबेडकर सामाजिक क्रांती के प्रतिक जगजीवन राम / संघर्षों से निखरा एक तप: पुत व्यक्तित्व शिबु सोरेन"* यह दो किताबें भेट की. इसी के साथ इंजी. राजेंद्र प्रसाद इन्होने भी उनकी लिखी दो किताबे *"संत गाडगे बाबा और उनका जीवन संघर्ष / Life and Ideology of Jagjiwan Ram"* भेट की. सदर सदिच्छा भेट के बाद *"दीक्षाभुमी / चिचोली / ड्रगन पँलेस कामठी / बुध्द भुमी खैरी / नागलोक"* इन एतिहासिक स्थली को सदिच्छा भेट देने का कार्यक्रम बनाया गया. और सीआरपीसी ट्रेड एंड काँमर्स विंग के राष्ट्रिय अध्यक्ष *इंजी. विजय बागडे* इन्होने डाँ मिलिन्द जीवने इनके द्वारा बनाये प्लँनिंग को सफल बनाया. इंजी बागडे इनके साथ राजु ड्रायव्हर ने भी योगदान दिया. महत्वपुर्ण विषय यह की सीआरपीसी प्रमुख डॉ मिलिन्द जीवने इनसे संबधीत बिहार मे *"सामुहिक बुध्द धम्म दीक्षा समारोह"* लेनेवाले बिहार के डायरेक्टर जनरल पोलीस (DIG) *मैकुराम जी* (IPS) इनके वे छोटे भाई है. सदर बुध्द धम्म दीक्षा समारोह में दलित व्हाईस बंगलोर के संपादक *व्ही टी राजशेखर* इन्होने डॉ. जीवने इनके आग्रह पर बुध्द धम्म की दीक्षा ली थी. मैकुराम जी के परिवार के दो सदस्य विदेश सेवा मे *"एम्बेसँडर* (भारतीय राजदुत) तथा एक सदस्य महाराष्ट्र के *दादासाहाब रुपवते* परिवार मे ब्याही गये है.
        दीक्षाभुमी / डॉ. आंबेडकर मेमोरियल शांतीवन चिचोली को सदिच्छा भेट देने के बाद *ड्रँगन पँलेस कामठी* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. ड्रँगन पँलेस की प्रमुख / माजी मंत्री *एड. सुलेखा कुंभारे* इन्होने एक्स डीजीपी इनके साथ बहुत विषयों पर चर्चा की. ड्रँगन पँलेस का इतिहास बताया. विश्व की बाबासाहेब डाँ आँबेडकर की बडी प्रतिमा / विपश्यना केंद्र की जाणकारी देते हुये *"विश्व की सबसे बडी संविधान प्रत"* बनाने की भी जाणकारी दी. उसके पश्चात खैरी स्थित *"बुध्द भुमी"* तथा कामठी रोड स्थित *"नागलोक"* को भी सदिच्छा भेट दी गयी. अंत में गेस्ट हाऊस में बैठकर कुछ महत्वपुर्ण बिंदुओ पर चर्चा की गयी. आज १९ तारिख को वे अगले पडाव पर प्रस्थान करने जा रहे है. उनकें मंगल प्रवास की कामना करते है.

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नागपुर दिनांक १९ जुन २०२६