👌 *सम्राट अशोक धम्म शासन...!*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो.न. ९३७०९८४१३८
मौर्य साम्राज्य की बुनियाद
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने रचकर
पाटलिपुत्र को केंद्रस्थान बनाया
सत्ता के महान संगर की
फिर सम्राट बिंदुसार ने
पिता की गद्दी संभाल रखी थी
राणी शुभद्रांगी वा धर्मा ने
इ. पु. ३०४ कालखंड में
राजकुमार अशोक को जन्म दिया
और अखंड भारत का इतिहास
स्वर्णमय विकास भारत लिखा गया....
मौर्य वंश के राजकुमार अशोक
विद्रोह को शांत करने
निकल पडे सांची की ओर
श्रेष्ठी कन्या देवी की प्रथम भेट में
निस्सिम प्रेम में बंध गये
और श्रेष्ठी कन्या देवी तो
बुध्द शाक्य कुल से जुडी थी
राजकुमार अशोक के मन में
बुध्द भाव अंकुर की बुनियाद
देवी (वेदिसा) के सच्चे प्यार ने
उस समय ही रोपन कर दी थी
विद्रोह पुर्णत: शांत हुआ
देवी - अशोक का निस्सिम प्रेम
विवाह बंधन में बंध गया ....
दिन महिने वर्ष बितते गये
आगे जाकर राजकुमार अशोक
मौर्य वंश के सम्राट बन गये
सम्राट अशोक के जीवन में
राणी देवी (वेदिसा) के साथ साथ ही
राणी कारुवाकी - राणी पद्मावती
राणी असंघिमित्रा
राणी तिष्यरक्षिता का भी प्रवेश हुआ
उन महाराणीओंं के संताने हुयी
महेंद्र - संघमित्रा - कुणाल
तिवला - जलौक - चारुमति
परंतु राणी देवी के सच्चे प्यार मे
कभी द्वेष को जगह नही ली
वही राणी तिष्यरक्षिता तो
नफरत - द्वेष - हिंसा की ज्वाला में
मन ही मन जलती रही थी
उसी मन के तिव्र ज्वाला में
उसने बुध्दगया बोधीवृक्ष को
बहुत ही हानी पहुंचायी
बोधीवृक्ष नष्ट करने का प्रयास किया
सम्राट अशोक - राणी देवी के मन को
बहुत गहरी पिडा पहुंची
उन्होने उसी बोधीवृक्ष की सिंचायी कर
उसे पुर्ववत जीवित कर दिया...
सबसे छोटी राणी तिष्यरक्षिता
बहुत सुंदर और बुध्दीमान होने से
सम्राट अशोक की प्रिय राणी भी थी
वह अशोक की चतुर्थ राणी पद्मावती पुत्र
कुणाल से एकतरफा प्यार करने लगी
सौतेले पुत्र राजकुमार कुणाल ने
छोटी राणी तिष्यरक्षिता को
अपनी सौतेली मां होने का बोध कराया
राणी तिष्यरक्षिता तिलमिला उठी
और सम्राट अशोक की मोहर लगाकर
राजकुमार कुणाल को
दोनो आँखे निकालने की क्रुर सजा दी
जब चक्रवर्ती सम्राट अशोक को
इस अनैतिक आदेश का पता चला तो
छोटी राणी तिष्यरक्षिता को
मृत्युदंड देने की सजा सुनायी गयी
परंतु राजकुमार कुणाल
राजकुमार महेँद्र - संघमित्रा की तरह
बौध्द भिक्खु बनने के कारण
राणी तिष्यरक्षिता को क्षमा किया गया
और छोटी राणी तिष्यरक्षिता
अपनी शील का दर्जा खोने से
विश्वासघात - विनासकारी वासना से
इतिहास में बदनामी का पात्र रही
वही राजकुमारी चारुमिता
नेपाल के राजकुमार देवपाल से
विवाह बंधन में बंध गयी
परंतु पिता सम्राट अशोक का वारसा
उसने भी नेपाल में जतन किया
नेपाल काठमांडु में
चाबहिल बुध्द विहार या चारुमति बुध्द विहार
तथा पशुपतिनाथ बुध्द विहार
इसकी विधिवत स्थापना कर
पिता का वारसा कायम रखा...
कलिंग (ओरिसा) युध्द धरती पर
इ. पु. २६१ में लढा गया
कलिंग राज्य भौगोलिक स्थिति
व्यापारिक स्थिती - सैन्य दृष्टी से
बहुत महत्वपूर्ण प्रदेश था
अत: आर्थिक - राजनैतिक विस्तार के लिए
उस प्रदेश पर अधिपत्य जरुरी था
पर इस भयाण कलिंग युध्द में
भयंकर विनाश - जनहानि भी हुयी
रक्त सडा - लाशों का बिखरना - चिल्हाहट ने
चक्रवर्ति सम्राट अशोक को
अंतर्मन से पुर्णत: झकझोर दिया
अशोक सैन्य विजय को छोडकर
धम्म विजय की ओर निकल पडे
वैसे तो सम्राट अशोक ने
कलिंग युध्द के दो वर्ष पहले ही
बुध्द भंते उपगुप्त से
बुध्द धर्म की दीक्षा धारण की थी
परंतु कलिंग युध्द के बाद तो
चक्रवर्ति सम्राट अशोक ने
भंते निग्रोध
एवं मोगलिपुत्र तिस्स इनके हाथों
बुध्द धर्म की दीक्षा ग्रहण कर ली
साम्राज्य के सैन्य संसाधनो का उपयोग
मानव एवं पशु कल्याण मे करने लगे
जानवर वध पर रोक लगायी गयी
सडक बाजुं मे कुएं खोदवायें गयें
सडके बनवाई गयी
चिकित्सालयों की स्थापना की गयी
स्तंभ - शिलालेख आदी की
बुनियाद भी रची गयी
चक्रवर्ति सम्राट अशोक
देवानामपिय
प्रियदर्शी राजा बन गये
आज भी भारत की राजमुद्रा
तिरंगे पर का अशोक चक्र
सम्राट अशोक के महान राज्य
अखंड विशाल - विकास राज्य
अफगानीस्तान - बलुचिस्थान
पाकिस्तान - नेपाल - भुतान - बर्मा
भारत - बांगला देश तक फैला हुआ
अखंड विशाल विकास भारत देखकर
आज हम याद कर जाते है
चक्रवर्ति सम्राट अशोक धम्म शासन !
चक्रवर्ति सम्राट अशोक धम्म शासन !!
चक्रवर्ति सम्राट अशोक धम्म शासन !!!
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✍️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक ५ जुन २०२६
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