✍️ *जेन झी काँकरोच जंतर मंतर आंदोलन की भावी दिशा - दशा (?) एवं स्वच्छ आजाद भारत का सत्याग्रह ही अगला पडाव ! ब्रिटिश गोरे अंग्रेज शासन बनाम भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन व्यवस्था !!!*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का शासन बहुत बुरा था यह कहना *"भारतीय ब्राह्मण्य काले अंग्रेज शासन"* में कहना जागति होगी. अगर ब्रिटिश गोरे अंग्रेज भारत में ना आये होते तो, भारत का विकास कभी हुआ ही नही होता. *"सिंधु घाटी सभ्यता"* (इ. पु. ३३०० - १९००) यह पहला पडाव / *"बुध्द कालखंड से लेकर बुध्द प्रभाव कालखंड"* (इ. पु. ६२४ से इसवी १० वी शति) यह दुसरा पडाव / महायान - वज्रयान - तंत्रयान बुध्द संप्रदाय द्वारा इसवी १० वी शति में *"शैव पंथ, वैष्णव पंथ, साक्त पंथ"* की स्थापना होना, शंकर नामक व्यक्ति का (इसवी ८५० मे जन्म) द्वारा स्वयं को इसवी दसवी शति में *"आदि शंकराचार्य"* घोषित कर महायान बुध्द विहारों पर अधिपत्य करना, इसवी ११ - १२ वी शति में *"वैदिक धर्म - ब्राह्मण धर्म"* की स्थापना होना, वेद उपनिषद मनुस्मृति आदि ग्रंथों की रचना कागदों पर होना, कागज का शोध इसवी १० वी शति में चायना मे लगना, बुध्द धर्म की अवनति यह *"तिसरा पाडाव"* / ब्राह्मण्य अतिरेक द्वारा देश की एकता एकात्मता की हानी तथा *"ब्रिटिशों गोरे अंग्रेज"* शासन व्यवस्था की गुलामी यह *"चवथा पाडाव"* / ब्राह्मण्य व्यवस्था बनाम ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो का संघर्ष तथा *"भारत आजाद"* (१५ अगस्त १९४७) होना यह *"पाचवा पाडाव"* रहा है. ब्रिटिश गोरे अंग्रेजो के काले में *"शिस्त - अभ्रष्टाचार"* होने से, भारत में विकास के रास्ते खुले थे. बहुतसी प्रथाएं, अ-रुढीओं पर बंदी लायी गयी. *'शिक्षा"* के दरवाजे खुले हुये थे. आज यह *"पाचवा पाडाव"* भारतीय ब्राह्मण्य *"काले अंग्रेजो"* के शासन व्यवस्था का राज बोलबाला है. जहां *"भ्रष्टाचार - पुंजीवाद - हुकुमशाही"* का बोलबाला है. *"लोकतंत्र"* हमें कही दिखाई नही देता. अत: *"जेन झी काँकरोच आंदोलन"* यह काले अंग्रेजो को भगाकर *"स्वच्छ भारत - सुंदर भारत - विकास भारत"* बना पाएगा ? यह प्रश्न है. अगर हां हो तो, हम इसे *"षटवा पाडाव"* भी कह सकेंगे. प्रश्न यहां जेन झी *"काँकरोच आंदोलन"* के दिशा और दशा का है. *'आंदोलन"* (Agitation) इस शब्द में हमे सत्य का बोध नही होता, जो *"सत्याग्रह"* (Satyagraha, Non-Violance Resistence, Passive Resistence, True Path Movement) इस शब्द में दिखाई देता है. बाबासाहेब डॉ आंबेडकर इन्होने *"कालाराम मंदिर सत्याग्रह / येवला पाणी सत्याग्रह"* तथा मोहनदास गांधी इन्होने *"नमक सत्याग्रह"* करने का संदर्भ है. अभी तक हम जेन झी *"काँकरोच आंदोलको"* द्वारा भावी दिशा ही तय नही की. केवल शिक्षा मंत्री *धर्मेंद्र प्रधान* का राजीनामा यही गुंज ही सुनायी देती है. अत: जेन झी आंदोलन को *"काले अंग्रेजो"* द्वारा दबाया जाएगा या नही, यह वक्त ही बतायेगा.
मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* इन्होने युवा बेरोजगार को काँकरोच कहना बहुत महेंगा पडा. आँनलाईन बनी संघटन ने आज *"वास्तव रूप"* तो लिया, परंतु वे अपनी भावी दिशा तय नही कर पाये है. आंदोलन करने को *"लाखों रुपयों की फंडिंग"* की आवश्यकता होती है. उन्हे यह फंडिग कैसे मिली? *"प्रशासन की मेहरबानी* होना, यह आरोप भी हो रहे है. हम उन आरोपों पर चर्चा नही करेंगे. काँकरोच आंदोलन जगह जगह सफल होते दिखाई देते है. परंतु वे *"भावी दिशा"* क्यौं तय नही पा रहे है ? यह अहं सवाल है. जंतर मंतर का २० जुन २०२६ का आंदोलन समय शाम ५ बजे तक था. उन्होने उस आंदोलन को जारी रखा. भारतीय संविधान यह अधिकार देता है. सवाल यह है कि, वह आंदोलन और आगे *"कितने दिनों तक जारी* रहता है? यह है. पोलिस प्रशासन या सत्ता प्रशासन इस आंदोलन को तोडने का भरपुर प्रयास भी करेगी. अत: सवाल तुम्हारे अंतर्मन शक्ति का है. जय भीम !!!
---------------------------------------
▪️*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक २१ जुन २०२६
No comments:
Post a Comment