🐞*जेन झी काँकरोच (?) युवकों का नयी दिल्ली जंतर मंतर पर ६ जुन का धरना एवं भविष्य की रणनीति क्या ???*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
भारतीय राजनीति (?) में *"जेन झी"* अर्थात *"जनरेशन झेड"* (Generation Z) तथा *"काँकरोच"* (तिलचट्टा - Cockroach - Parasites) इस शब्द में बडा तुफान मचाया हुआ है. *"जेन झी"* वर्ग द्वारा सन २०२५ को *"नेपाल"* देश मे हिंसक आंदोलन होकर, *"सत्ता परिवर्तन"* भी दिखाई दिया है.और ऐसा ही सत्ता परिवर्तन आंदोलन *"श्रीलंका / बांगला देश"* मे भी दिखाई दिया. अगर फिर भी *"भारतीय राजनीति"* उससे बोध ना लेती हो तो, कांग्रेसी शहनशाह *मोहनदास गांधी* / संघवादी *के सुदर्शन* / प्राचीन भारत के विचारविध *भर्तुहरी* इन्होने *"राजनीति को वेश्यालय"* की उपमा क्यौ दी थी ? यह हमे समझना कठिण नही है. अब उन्ही के शब्दों में *"न्याय व्यवस्था को भी वेश्यालय"* इस अर्थ में लिया जाए या नही ? यह एक संशोधन का विषय है. *"क्या सर्वोच्च न्यायालय संविधान की वाँच डाँग भुमिका"* निभा पायी है ? क्या वह *"न्यायाधीश"* कहलाने मे लायक है या ना-लायक (Not liable) है ? न्यायालय के ऐसे बहुत सारे निर्णय है, जो न्याय के दृष्टी से परे है. वही *"सर्वोच्च न्यायालय"* के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* जी इन्होने बेरोजगार युवा एवं एक्टिविस्ट वर्ग को *"काँकरोच"* यह विवादित टिप्पणी की है. और *"काँकरोच जनता पार्टी"* का जन्म भी हुआ. भले ही वह शब्दार्थ - *"व्यंगात्मक"* (Satirical) राजनीतिक रुप रहा हो ! परंतु ६ जुन २०२६ यह दिन *"वास्तव आंदोलन"* स्वरुप ले चुका है. उनकी *"भविष्य की दिशा"* क्या होगी ? यह एक चिंता का भी विषय है. *अभिजीत दिपके* ये आंबेडकरी विचारधारी युवक आज *"भारतीय राजनीति"* को ललकार रहा है. आज *"करोडो की संख्या"* में युवक वर्ग काँकरोंच की वह एक आवाज है. *"जेन झी* यह शब्द सुनकर सन १९९७ - २०१२ दरम्यान की *"युवा पिढी"* की याद आती है. और वह युवा पिढी *"इंटरनेट एवं सोशल मिडिया"* के दौर की पिढी है. और उस नयी पिढी की विशेषता यह है कि - *"डिजिटल रुप में साक्षर / सामाजिक रुप से जागरुक / नयी कार्य संस्कृति / मानसिक स्वास्थ पर जोर."* अत: भारतीय राजनीति के लिए यह बहुत बडी सिख है. काँकरोच जनता पार्टी आंदोलन को लद्दाख के शिक्षाविद *सोनम वांगचुक* इन्होने ना केवल समर्थन देकर, वे प्रत्यक्ष आंदोलन में साथ खडे थे. तामिलनाडु के मूख्यमंत्री *विजय थलापती* / आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री *चंद्राबाबु नायडु* / फिल्म क्षेत्र के *प्रकाश राज* / कांग्रेस दल नेता *सोनिया गांधी* सहीत पश्चिम बंगाल के *ममता बँनर्जी* पार्टी के कुछ नेताओं का समर्थन बताया जाता है. अत: *"भविष्य की राजनीति"* कौनसी करवट लेती है, वह भविष्य में दिखाई देगा.
सुप्रीम कोर्ट के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* का बेरोजगार युवा वर्ग / एक्टिविस्ट इन सभी को एक केस में *"काँकरोच"* यह विवादीत बयान से *"न्याय व्यवस्था के न्यायधीशों की वैचारिक पात्रता"* का बोध होता है. अगर *"कोलोजीयम पध्दति"* ना होती तो, वे न्यायाधीश *"चपराशी वर्ग की भी स्पर्धा परिक्षा"* पास होते या नही? यह संशोधन का विषय है. अत: *"संघ लोक सेवा आयोग"* (UPSC) पँटर्न पर *"संघ लोक सेवा न्यायिक आयोग"* (UPSJC) गठण होकर मेरिट आधार पर *"न्यायाधीश वर्ग"* की परिक्षा होना जरुरी है. नरेंद्र मोदी सरकार का संविधान *"अनुच्छेद १२४ - अ"* का NJAC आयोग नही *अभिजीत दिपके* इस युवक द्वारा व्यंगात्मक रुप में *"१६ मे २०२६ को काँकरोच जनता पार्टी"* यह बुनियाद रची गयी. और सोशल मिडिया मे, उस पार्टी १० - ११ दिनों मे *"करोडो की संख्या"* मे बेरोजगार युवक जुड गये. और उन्होने अपना *"मेनिफेस्टो"* भी घोषित किया. जैसे कि - *"सांसदो एवं विधायकों को पार्टी बदलने पर पाबंदी / न्यायपालिका की स्वतंत्रता / महिला आरक्षण / व्होट सुरक्षा / मिडिया सुधार"* आदि. *"चुनाव आयोग / इ. डी. / सी. बी. आय. "* इनको भी मेनिफेस्टो में जोडना चाहिये. और *"६ जुन २०२६ इस दिन को जंतर मंतर"* (२० दिनों के अंतराल में) पर हजारों की संख्या में *"धरना आंदोलन"* सफल होना, यह सहज विषय नही है. सवाल आप के उपर *राहुल गांधी* इनको आंदोलन का श्रेय ना देते हुये *"काँकरोच जनता पार्टी"* खडा करने की रणनीति मोदी - शाह की थी, यह आरोप हो रहा है. दुसरा आरोप भी है कि, पुलिस द्वारा आप को *"एयरपोर्ट आकर धरना अनुमती"* से भी, *मोदी - शाह* की कुटील रणनीति जोडी जा रही है. मोदी - शाह इनकी *"रणनीति - राजनीति"* जो भी हो, विषय आप के *"विश्वासनियता"* का है. आरोप हर किसी पर होते रहते है. आप की *"भविष्य की रणनीति"* क्या है ? यह भी प्रश्न है. अगर आप इसमे सफल होते हो तो, आप का *"काँरवा"* निश्चित ही बढेगा. बहुत से संघटन / राजनीतीक दलों की भी साथ मिलेगी. भारतीय संविधान से *"जनतंत्र"* (Democracy) खत्म हो चुका है. मोदी - शाह राज *"गुंडा राज"* का अवलंब कर / *"हुकुमशाही - पुंजीवाद"* सरकार चला रहे है. *"न्याय व्यवस्था"* भी मोदी - शहा इशारों पर चलने का आरोप है. अत: *"जेन झी"* से उम्मिद भी की जा रही है. *"काँकरोच जनता पार्टी"* उसी निवं स्वरुप देखी भी जा रही है. अगर यह सब ठिक रहेगा तो, हमारा भी *"साथ - हात"* आप को रहेगा. जय भीम !!!
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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक ७ जुन २०२६
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