Saturday, 25 July 2026

 ✍️ *मा. सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश सुर्यकांत शर्मा क्या भारत के द्वितिय नंबर के तानाशाह है ? भारतीय संविधान के सरंक्षक (वाँच डाँग) दायित्व निभाने की योग्य क्षमता सरन्यायाधीश सुर्यकांत इनमे विराजीत है ?* (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तानाशाह बनने की चेष्टा ना करे. जनता विद्रोह बिगुल बजाती है.)

         *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.

एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन

बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक

अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५

आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक

मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२

          

           भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति हो, या प्रधानमंत्री हो, या सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश भी क्यौ ना हो, *"आम जनता के मालक"* आप बिलकुल ही नही हो. भारत की आम आवाम आप की *"गुलाम"* नही है, ना ही आप *"तानाशाह"* (Dictator) हो. हमारा संविधान *"प्रजातंत्र"* (Democracy) की सही पहचान है. भारतीय *"संविधान अनुच्छेद १४ - समानता अधिकार"* (Right to Equality) प्रदान करता है. और वह संदर्भ हमे राजकिय अधिकार *"एक व्यक्ति - एक मत - एक मुल्य"* (One Man, One Vote, One Value) में भी दिखाई देता है. *"संविधान अनुच्छेद १९ - आजादी का अधिकार"* (Right to Freedom) प्रदान करता है. अत: *"चुनाव आयोग"* (Election Commission of India) आप भी अपनी मर्यादा को मत लांघे. भारत की आवाम को *"गुलाम"* बनाने की चेष्टा ना करे. *संविधान अनुच्छेद २५ - धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार"* (Riight to Freedom of Religion) प्रदान करता है. *"मुस्लिम - शिख - ईसाई"* यह अवंडबर बंद करो. बहुत हुयी है *"धर्मांध मनमानी!!!"* अत: प्रधानमंत्री हो या सरन्यायाधीश इन्होने *"संविधान"* के इस संदर्भ को समझना बहुत जरुरी है. नही तो *"नेपाल - बांगला देश - श्रीलंका"* आंदोलन चेतना का संदर्भ, मैने मेरे एक लेख में पहले ही दिया था. परंतु *"खुर्ची अधिकार की तुम्हारी मग्रुरी"* को, हमारी *"काँकरोच युवा जेन झी"* अब जता चुकी है. उनका आंदोलन *"सत्याग्रह"* का था. परंतु *"मद सत्याधीश"* इन्होने स्वयं को सर्वोच्च *"तानाशाह"* (Dictator) समझकर, जेन झी काँकरोचों पर जो *"निर्गम पोलिस बर्बरता"* (पोलिस लाठी चार्ज / अश्रु गोले / लडकी के कपडे फाडना / लडकी के उपरी भाग पर स्पर्श / लडकी के पिछवाडे में दंडा घुसाना) करने से, उसके लिए शब्द भी कम है. हमारे *"वकिल वर्ग संविधान अनुच्छेद ३२"* अंतर्गत याचिका दायर करता है तो, *सरन्यायाधीश सुर्यकांत शर्मा* अगर यह कहता है कि, *"उसके पास याचिका सुनने तथा व्हिडीयो देखने के लिए समय नही है"* तो, उस खुर्ची के लिए तुम *"ना-लायक"* (Not Qualified) हो. सुर्यकांत इन्होने *"कोर्ट व्हिडिओ"* शेयर करने पर पाबंदी लगाई है. पारदर्शिता रखना तो उनका विशेष दायित्व बना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केवल *"रखेल न्यायाधीश"* हो. अत: आप खुर्ची खाली करो. *'"न्यायाधीश शपथ"* से आप ने *"गद्दारी"* की है. आप *"देशद्रोही"* हो. पहले ही आप पर *"अनैतिक संपत्ती"* जमाने का एक आरोप भी है. अत: आप सभी *"मद सत्ताधीश केवल और केवल जल्लाद"* दिखाई देते हो.

          प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / सरन्यायाधीश *सुर्यकांत शर्मा* आप का *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (अंग्रेल काल संघटन - RSS - Royal Secret Service) इनसे आज कितना निकट संबंध है, वह उन पर ही हम छोडते है. परंतु *"RSS"* संघटन का आदर्श तो, इटली का क्रुर तानाशाह *बेनितो मुसोलिनी* तथा जर्मनी का क्रुर हुकुमशहा *एडाल्फ हिटलर* इनसे रहने का संदर्भ है. और हिटलर - मुसोलीनी उन्होने *"प्रजातंत्र"*(Democracy) को धत्ता बताते हुये, *"तानाशाही"* (Dictatorship) व्यवस्था को रुजा दिया था. और प्रजा का दमन करके, *"प्रजा को गुलाम"* बनाने का इतिहास है. परंतु *"मुसोलीनी - हिटलर इनका अंत""* बहुत ही भयावह हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने *"हिटलर - मुसोलीनी* की राह पर चलते हुये, भारत में *"पुंजीवाद"* (Capitalism) को स्थापित कर, *"तानाशाही"* (Dictatorship) शासन व्यवस्था बना ली. भारत में *"प्रजातंत्र"* (Democracy) को खत्म किया. अगला कदम *"प्रजा गुलामी"* का था. *"जेन झी काँकरोचो"* ने मोदी - शहा के इस षड्यंत्र को चकनाचुर किया. परंतु *"विरोधी दलों"* का *"अंतर्फाड विवाद"* यह हमारे लिए बडा चिंता का विषय है. अब उन्हे एकसाथ आना बहुत जरुरी है. अत: विरोधी दलों को *"ऐल्गार"* करना होगा. काँकरोच आंदोलन यह धर्मेंद्र प्रधान इस्तिफे से भले ही २५ जुलै को खत्म हुआ हो. परंतु उनके सामाजिक - राजकिय आंदोलन अज्ञानता से बाहर निकलने पर फिरसे नयी क्रांती उभर सकती है. और प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* / सर्वोच्च न्यायालय के सरन्यायाधीश *सुर्यकांत* / तब उन्हे चुनाव आयुक्त *ज्ञानेश कुमार* इन्हे खुर्ची खाली करने करने के लिए दबाव लाना होगा. चुनाव प्रक्रिया *"बँलेट पेपर"* से करनी होगी. तब ही भारत में सही अर्थ में *"प्रजातंत्र"* की बहाली होगी. जय भीम ! जय संविधान !!!


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▪️ *डाँ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      नागपुर दिनाक २६ जुलै २०२६

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