🚩🇺🇾 *RSS सरसंघचालक मोहन भागवत की न्युयार्क - अमेरिका के युनिवर्सल वननेस सिलेब्रेशन / टोरंटो - कँनडा / ब्रिटन (यु. के.) यात्रा की कुटिल राजनीति या कुनीति ?*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
*"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) प्रमुख - सर्वेसर्वा *डाँ. मोहन भागवत* ये हिंदु धर्म (?) वा *"ब्राह्मण धर्म"* संघटन के *"शताब्दी वर्ष"* पर्व पर, *"अमेरिका (न्युयार्क) / कँनडा (टोरंटो) / युके (ब्रिटन)"* इन देशों के विदेश यात्रा पर है. ब्राम्हण धर्म ग्रंथ में *"विदेश यात्रा"* निषिध्द है. फिर ब्राम्हण वर्ग यह *"विदेश यात्रा - विदेशी नागरिक"* होना, अहं बडा प्रश्न उत्पन्न करता है. संघ प्रमुख डाँ मोहन भागवत इनकी विदेश यात्रा का *"अमेरिका की ४०+ सघठणों ने / कँनाडा की २६७ संघठणों"* ने सक्रिय विरोध किया है. संगठण एवं वहां के नागरिक रास्तों पर आकर *"No Platform for Hate"* यह नारा दे रहे थे. न्युयार्क के *"मेडिसन क्वेयर गार्डन"* में "अमेरिकन हिंदुज फाँर एंगेज्ड एंड डायलाँग" इस संगठण ने आयोजीत *"युनीवर्सल वननेस सिलेब्रेशन"* के प्रमुख अतिथी डाँ मोहन भागवत थे. बहुसंख्य स्थानिय संगठणों के विरोध बावजुद, *डा मोहन भागवत* भाषण कर गये है. मोहन भागवत को *"बेशरम, ना-लायक, निर्लज्ज"* यह गाली तक दी गयी. मोहन भागवत इनके *उस भाषण की समिक्षा करे या न करे ?* यह विवाद का विषय हो सकता है. क्यौं कि, *"ब्राह्मण्य नीति जो बोलती है, विपरीत उलटा उसका विरोधी आचरण होता है. "* न्युयार्क सिटी के मेयर *जोहरान ममदानी* इन्होने विरोध करते हुये वे कह गये कि, *"I don't support the rally, but i don't know if the city has the jurisdiction on cancelling a private event."* परंतु भारत में *"आतंकवादी हिंदु आतंकवाद"* हम अनुभव देखते आये है. संघ से सक्रिय जुडे रहे *यशवंत शिंदे / भंवर मेघवंशी* इन्होने RSS संगठण को छोडते हुये कहा है कि, *"संघ यह आतंकवादी संगठण है."* बाँम्ब बनाने का प्रशिक्षण देने का भी आरोप किया है. *मोहनदास गांधी हत्या* का आरोप भी संघ पर रहा है. संघ पर बहुत गंभिर आरोप होते रहे. *"संघ पंजीबध्द संस्था नही है."* संघ पर *"विदेशी फंड दुरुपयोग"* का भी आरोप है. मोहन भागवत का विदेश दौरा यह *"फंडिंग की व्यवस्था "* बताया जा रहा है. ब्राम्हण्य संघ पर *"सत्तावाद"* की आँचल छाया होने से, सब कुछ चंगा है.
अमेरिका में *"विश्व शांती सम्मेलन"* का सफल आयोजन करनेवाली संस्थान *"United States Commission on International Religious Freedom"* (USCIRF) इसने भी डाँ. मोहन भागवत अमेरिका आगमन का विरोध किया. *स्वामी विवेकानंद* इस संस्थान के *"विश्व शांती परिषद"* में अमेरिका गये थे. तब किसी भी ब्राम्हण संघीय संघठन ने, *"विवेकानंद को शिफारस पत्र"* नही दिया था. बौध्द धर्म विद्वान *अनागरीक धम्मपाल* इन्हे सदर परिषद का निमंत्रण था. उन्होने ही *स्वामी विवेकानंद* को अपने साथ अमेरिका ले जाकर, *"अपने समय के पाच मिनट स्वामी विवेकानंद"* को दिये थे. यह एक इतिहास है. *अनागरिक धम्मपाल* के भाषण पर, समस्त श्रोता वर्ग यह मंत्रमुग्ध हो गया था. उनका वह भाषण सुनकर *"साक्षात प्रभु"* उनके सामने खडे हुये है, यह अभिप्राय लोगों का रहा है. मुझे गर्व है कि, *"अनागरिक धम्मपाल का वह एतिहासिक भाषण मेरे संग्रह"* मे है. *अमेरिका* देश में Universal Oneness Celbration का आयोजन *"American Hindus for Engagement & Dialogue"* (AHEAD Forum) इस ब्राम्हण संस्थान ने किया था. *कँनडा* में *"कँनेडियन हिंदुज फाँर आऊटरीच रिलेशन्स एंड डायलाँग"* (CHORD) इस ब्राह्मण संस्थान ने, ग्रेटर टोरंटो एरिया में, *"हिंदु विश्व बंधु"* समारोह का आयोजन किया है. सदर संस्थान यह RSS की घटक दल है, जो विघटनवादीता / नफरत को बढावा देती है. अत: तथाकथित ब्राह्मण वर्ग से *"Universal Oneness"* की बातें केवल पाखंड था. दुसरा प्रश्न है कि, *"अल्पसंख्यक ब्राह्मण यह बहुसंख्यक हिंदु"* कैसे बना है ? इसके पिछे की राजनीति क्या है ? *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का एक माध्यम माना है. "* दुसरा प्रश्न यह भी है कि, *"हिंदु"* इस शब्द की उत्पत्ति कैसे और कब हुयी ? हिंदु यह भारतीय भाषा का शब्द नही है. वह *"विदेशी शब्द - फारसी भाषा"* (Persian Language) का शब्द है. हिंदु > हिनदु > हिन + दु > हिन = चोर, निच, काले मुहंवाले... दु = प्रजा. *"हिंदु = चोर, निच लोग."* अत: मुगलो द्वारा दी गयी वह गाली है. और वह गाली संघीय लोगों की मानसिकता बनी है. निचता बनी है. अर्थात क्या *"मोहन भागवत समवेत अतिरेकी हिंदु ब्राम्हण चोर है ? निच लोग है ?"* यह संशोधन का विषय है. और *डाँ मोहन भागवत* आदि अतिरेकी ब्राम्हण की यह विदेश यात्रा *"विश्व मे अशांति"* संदेश लेकर आयी है. जय भीम ! जय संविधान !!!
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▪️ *डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर, दिनांक ३१ अगस्त २०२६
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