🇮🇳 *RSS प्रमुख डा मोहन भागवत इनका बयाण भारत ये बुध्द का देश है इससे लेकर ओशो रजनीश का बुध्द पर बयाण - इस्लाम ख्रिस्तियन आदि अल्पसंख्याक धर्मीयों का भारत राष्ट्रवाद !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
*"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* (RSS) सरसंघचालक - संघनायक *डाँ. मोहन भागव* इनका न्युयार्क (अमेरिका) शहर में आयोजित *"Universal Oneness Celbration"* कार्यक्रम हो या टोरंटो (कँनडा) में आयोजित *"हिंदु विश्व बंधु"* कार्यक्रम हो या ब्रिटन (यु. के.) का कार्यक्रम हो, वहां के स्थानिय निवासींयों के अलावा अ-भारतीय नागरिक संघटनो नें *"कडा विरोध तथा आंदोलन"* किये हुये है. अभी यह विषय भी सुनने में आया है कि, RSS पर *"५५ देशों में बंदी लाने"* की भी चर्चा हो रही है. संघ पर *"आतंकवादी संघटन"* होने का गंभिर आरोप है. इस संदर्भ की चर्चा का जोर कम होने का नाम ही नही ले रहा है. *डाँ. मोहन भागवत* इन्होने न्युयार्क में बुध्द देश बयान देते हुये कहा कि, *"हिंदु राष्ट्र घोषित नही करना है. भारत बुध्द का देश है. हमारे देश में अपेक्षाकृत शांती है. और होनी भी चाहिये. बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है. "* और डा भागवत इनके इस बयान पर, समस्त विश्व में बडी चर्चा हो रही है. परंतु डा भागवत यह बयाण देते हुये एक गलती कर गये है कि, *"बाकी देश बुध्द के देश नही है. वो युध्द की भाषा बोलते है."* शायद डाँ भागवत इनको यह पत्ता नही या अज्ञानता हो. *"कंबोडिया (९७%) / थायलंड (९४%) / म्यानमार (८९%) / भुतान (७५%) / श्रीलंका (७०%) / लाओस (६४)*" इन देशों के अलावा *"चायना / जापान / व्हिएतनाम / दक्षिण कोरीया / नेपाल / ब्रुनई / मलेशिया / सिंगापुर / मंगोलीया / हाँगकाँग /तिब्बत / उत्तर कोरीया"* आदि देश - दक्षिण एशिया / पुर्व एशिया / दक्षिण पुर्व एशिया *"आष्ट्रेलिया / रशिया"* इन बुध्द प्रभाव देशों का जिक्र किया जा सकता है. *"अमेरिका / रशिया / चायना / उत्तर कोरिया"* इन देशों को छोडा जाएँ तो, सभी *"बुध्द बहुल देशों में शांती"* दिखाई देती है. भारत के *"धर्म संघर्ष / जाति संघर्ष / संप्रदायवाद"* इन विषयों पर चर्चा ना करे तो, बेहतर है. *मेरे स्वयं* के (डाँ. जीवने) अध्यक्षता में हुये *"सर्व धर्म सभा कार्यक्रम"* में मैने *डां मोहन भागवत* इनको, *"बुध्द धर्म मे दीक्षीत"* होने का आवाहन करते हुये *"विश्व हिंदु परिषद"* का नामकरण *"विश्व बौध्द परिषद"* करने की बात कही थी. मेरा वह भाषण *डा मोहन भागवत* इनके अच्छे स्मरण में होगा ही. दुसरा अहं विषय महत्वपुर्ण है कि, *डाँ मोहन भागवत* इन्होने *"भारत बुध्द का देश है"* (३० अगस्त २०२६) यह बात अमेरिका विरोधपुर्ण आंदोलन के बाद कही है. वही *ओशो रजनीश* इन्होने भी तो, अमेरिका सरकार द्वारा इमेग्रेशन जुडे मामलों में *"अमेरिका देश"* (नवंबर १९८७) छोडने तथा *"२१ देशों द्वारा इंकार"* करने और विमान से भारत उतरने पर कहा था कि, *"बुध्द के देश में आया हुँ. "* ओशो रजनीश ये *"तेरा पंथी जैन"* है, वही डा मोहन भागवत *"चित्पावन ब्राम्हण"* वर्ग से है. यह संदर्भ छोड दिया जाए तो, *मोहन भागवत और ओशो रजनीश* इनके घटना संदर्भ में बहुतसी साम्यता दिखाई देती है. *ओशो रजनीश*:इनका अमेरिका के ओरेगान रेगिस्तान में *"रजनीशपुरम्"* आधुनिक सुविधायुक्त शहर बसाना / ओशो की आशिशान जिंदगी विषर पर, एक अच्छी पुस्तक लिखी जा सकती है. ओशो रजनीश का *"विपश्यना"* विषय संदर्भ ये दार्शनिक रुप में हो, परंतु *ओशो रजनीश* हमेशा ही आंतरराष्ट्रिय विवाद के बडे पात्र रहे है. *मोहन भागवत* भी तो, आंतरराष्ट्रिय विवाद पात्र विषय हो गये है.
*डा. मोहन भागवत* इनका *"भारत बुध्द का देश"* यह बयान हो या, *"मुस्लीम वर्ग का विरोध करनेवाला हिंदु नही हो सकता"* यह बयाण हो, आज समस्त विश्व में बडा चर्चा का / विवाद का विषय हो सकता है. भविष्य में द्वेषपुर्ण *"संघ की पाँलिसी"* बदली भी जा सकती है. परंतु संघ का *"नोंदणीकृत संस्था"* ना होना / संघ पर देश - विदेश में *बंदी* लाने की चर्चा / संघ द्वारा करोडो रुपये में बनाये गये *"संघ कार्यालय"* खडा होना / संघ की *"फाईव्ह स्टार संस्कृति"* / विदेशों से आनेवाली *फंडिंग - हिशोब* आदि विषय भविष्य में क्या राजकिय करवट लेंगे, इस विषय पर कुछ भी कहना बडा कठिण विषय है. आज का *"जेन झी / जेन वाय"* प्रक्टिकल / वैज्ञानिक मार्ग अपना रहा है. अत: *"मंदिर का अर्थशास्त्र"* (Temple Economy) यह विषय रोजगार / उद्दोग / देश विकास का मार्ग ना होना, कल जेन झी *"मोर्चा उस विरोध"* में भी जाए तो, कोई अतिशयोक्ति नही होगी. *"ख्रिस्तियन - इस्लाम"* इन धर्म का ओरीजीन *"आदम - हनोक"* इन मुल नायक से जुडा है. आगे जाकर *इब्राहिम* इनके बाद, *"सारा"* इनकी वृक्ष छाया यह *येशु मसिहा* तक जाती है. वही *इब्राहिम* इनके बाद, *"हाजिरा"* इनकी वृक्ष छाया *हजरत मोहम्मद* (इसवी ६३२) तक जाती है. *"सारा - हाजिरा"* इनका आपसी संबध समजना भी खास जरुरी है. *सिध्दार्थ बुध्द* इनका इतिहास तो, येशु मसिहा से *"६२४ साल पुर्व"* (नया शोध) का रहा है. *येशु मसिहा* इनके *"१२ - ३० साल"* तक का जीवन इतिहास, यह *"अज्ञात"* (Unknown) बताया जाता है.*"बायबल"* में इस विषय पर कुछ भी वर्णन नही है. *निकोलस नोटोवीच* इन्होने लद्दाख के *"हेमिस बुध्द मठ* की प्राचिन पांडुलिपी का संदर्भ देकर, अपनी पुस्तक *"दि अननोन लाईफ आँफ जीसस क्राईस्ट"* पुस्तक में, येशु इन्होने तक्षशीला, लद्दाख, पुरी, राजगीर, सारनाथ, हिमालय जाने का / वहां अध्ययन करने का जिक्र किया है. इसके साथ ही *मिर्झा गुलाम अहमद* इनकी पुस्तक *"अहमदिया"* / तथा विदेशी लेखक *होलगर कर्सटन*:इनकी पुस्तक *"जीसस लिव्ह इन इंडिया"* इन पुस्तकों में, येशु इन्होने *मरियम* इस यहुदी लडकी से, लद्दाख मे शादी करने का / और येशु के *बशारत* या *इलियास* पुत्र का संदर्भ दिखाई देता है. येशु इनको *"सुली पर चढा"* देने के बाद, वे *"जीवित बच निकले"* और भारत के लद्दाख में रहने का संदर्भ है. येशु की कब्र यह श्रीनगर के *"रौजबल मजार"* होने का संदर्भ है. *मुसा* इनकी कब्र भी कश्मिर में बतायी गयी है. इन किताब ने समस्त विश्व में बहस छेड दी है. अगर यह बात सही हो तो, *"ख्रिस्तियन समुदाय को भारतीय"* माना जा सकता है. वही भारत में *"इस्लाम शासकों का शासन होने से, वे भी तो भारतीय"* हो गये है. अगर आप ख्रिस्तियन / इस्लाम समुदाय को, विदेशी मानते हो तो, *"ब्राह्मण वर्ग"* भी विदेश से भारत आकर बसा है. *"ब्राह्मण वर्ग ये किस देश"* सेे भारत आया है ? इन विषयों पर कुछ विवाद भी है. *"ब्राह्मण अल्पसंख्यक वर्ग"* ये हिंदु बहुसंख्यक कैसे बना है ? यह भी प्रश्न है. *सर्वोच्च न्यायालय* के पाच न्यायाधीश खंडपीठ ने, *"हिंदु यह धर्म नही माना. वह जीवन जीने का माध्यम माना है."* हिंदु यह शब्द मुस्लिम शासकों द्वारा दी गयी गाली थी. *"हिंदु - हिनदु = चोर, काले मुहवाला, नीच आदमी."* और हिंदु यह शब्द *"ब्रिटीश काल"* में रुढ हुआ. अत: भारत में *"धर्म युध्द - धर्म संग्राम - धर्म संघर्ष"* जारी रखना है, या *"एकता - शांति - अहिंसा"* में पिरोये रहना है, इस पर विचार करे ! वही ब्राम्हण वर्ग *"विदेशी फंड"* किस प्रयोजन से लाता है ? कितने *"बुध्द राष्ट्र संप्रदाय"* ये ब्राह्मण वर्ग को फंडिंग करते है ? *"विश्व बुध्द परिषद / समिट"* में, कौन ब्राह्मण मान्यवर उपस्थित रहे है या रहते है ? विश्व के *"बुध्दीस्ट सेक्ट वर्ग"* इनसे कौन ब्राम्हण संघटन जुडी है ? *योगी आदित्यनाथ* इनकी जीवनी पुस्तक *"The Monk who became the Chief Minister"* में मांक शब्द है, *Saint* यह शब्द नही. Monk यह शब्द विशेषत: *"बुध्द भिक्खु"* के लिए प्रयोग होता है. अभी *"योगी"* इनको भावी प्रधानमंत्री रुप में, *"मोहन भागवत* जी विदेश यात्रा में बोल गये है. क्या योगी जी *"प्रधानमंत्री"* बनने के लिए, योग्य नेता है ? *"दि बुध्दीस्ट सोसाइटी आँफ इंडिया "* (TBSI) पदाधिकारी वर्ग इस संदर्भ में, क्या कर रहे है ? TBSI संघटन का कोई भी *"संविधानिक पदाधिकारी"* विद्यमान है क्या ? TBSI का *"सन २००९ से आर्थिक हिशोब"* धर्मादाय आयुक्त कार्यालय किसी ने भी सादर ना करने से, *TBSI मान्यता खतरे* मे है, उसका क्या ? *TBSI"* तमाम स्वयंघोषित नेताओं का लक्ष, *"सरकारी ट्रैझरी"* में जमा *"रु. १३ - १४ करोड"* TBSI राशी पर है ? *राजरत्न आंबेडकर / भीमराव आंबेडकर / चंद्रबोधी पाटील / इंजी. धम्मरतन सोमकुवर* इन्होने स्वयं को *"TBSI स्वयं घोषित अध्यक्ष"* घोषित करनेवाले इस प्रश्न का उत्तर, देश आवाम को देगे या नही ? यह भी प्रश्न है. क्यौं कि, उनकी वैचारिक पात्रता *"विभागीय अध्यक्ष"* तक बनने की है या नही, स्वयं आत्मपरिक्षण करे !!!
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▪️*डाँ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर, दिनांक ५ सितंबर २०२६
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