👌*इंडोनेशिया बाली शहर के होटल ट्रांस में १० - ११ सितंबर २०२६ को दो दिवसीय ICOAH H.Q.: श्रीलंका द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटींग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ, महु म.प्र.
एक्स मेडिकल आँफिसर एंड हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
अध्यक्ष - आयोजक, जागतिक बौध्द परिषद (नागपुर) वर्ष २००६, २०१३, २०१४, २०१५
आंतरराष्ट्रिय परिषदों के संशोधन पेपर परिक्षक
मो.न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
*श्रीलंका* इस विशाल समुद्री बेट देश मुख्यालय स्थित *TIIKM* संस्थान द्वारा *"13th International Conference on Arts & Humanities"* (ICOAH) का सफल आयोजन इस वर्ष १० - ११ सितंबर २०२६ को, इंडोनेशिया *"बाली"* राजधानी प्रमुख शहर के *"होटल ट्रांस"* में आयोजित किया गया था. परिषद की प्रमुख थिम थी - *"The AI Mirror : Reflecting Humanity, Reimaging the Future."* पिछले साल १२ वी आंतरराष्ट्रिय परिषद का सफल आयोजन ये *"थायलंड"* इस बौध्द देश में हुआ था. विश्व के विभिन्न देशों में TIIKM संस्थान द्वारा आंतरराष्ट्रिय परिषद आयोजन किया जाता है. विश्व के *"नामांकित विद्यापीठ के विद्वान / एक्सपर्ट / अन्य"* सदर परिषद में, *"वेलकम स्पिच / की नोट स्पिच / स्पिकर्स / सेशन चेयरपर्सन"* स्पिच देते है. तथा विश्व से विभिन्न विद्यापीठ के संशोधन छात्र सदर परिषद में, अपने *"संशोधन पेपर"* सादर करते है. सदर संशोधन पेपर विश्व के नामांकित मान्यवर द्वारा उसे *"Evaluation Panel"* द्वारा परिक्षण किया जाता है. सदर संशोधन पेपर जब *"Evaluation Panel"* तज्ञ के पास तपास हेतु जाता है, एक विशिष्ट फार्माट में उस *"संशोधन पेपर"* को जांच करनी होती है. सदर संशोधन पेपर किस संशोधन छात्र का है, उस की जानकारी तक *"Evaluaters"* को नही होती, इतनी गोपनियता *"परिषद आयोजन कर्ता"* इनकी होती है. और जाँच कर्ता *Evaluaters* को भी, सदर संशोधन पेपर *"क्यौं सादर करने उचित"* है, यह शेरा लिखना भी होता है. और आंतरराष्ट्रिय परिषद के *"सेशन चर्चा"* में भी वह Explain करना होता है. कभी कभी Evaluaters को भी *"Session Chairman"* का दायित्व निभाना होता है. *"मुझे स्वयं"* (डा. जीवने) भी सदर कुछ आंतरराष्ट्रिय परिषदों में *"Evaluation Pannel"* का हिस्सा होने का / *"संशोधन पेपर जाँच"* करने के कुछ अवसर मिले है. और मैने भी बहुत सें संशोधन पेपर को Examine किया है. संस्थान द्वारा हमे संशोधन पेपर की जाँच करने पर *"सन्मान प्रमाणपत्र"* प्रदान किया गया है. मुझे राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों में सहभाग लेने हेतु *"देश / विदेश"* में जाने का अवसर आया. कुछ परिषदों में *"मेरी कुछ व्यस्ततावश"* जाना भी संभव नही हूआ. तब मैने आयोजकों को केवल *"संशोधन पेपर"* जाँच करने की अपनी स्विकृति दी थी.
TIIKM संस्थान द्वारा मान्यवर विद्वान एक्सपर्ट की व्यस्तता को देखते हुये, परिषद सेशन में *Physical Session / Virtual Session"* की भी व्यवस्था की है. जो एक उचित पहल है. पाच - छः साल पहले *"श्रीलंका सरकार"* (सांस्कृतिक मंत्रालय) द्वारा *"बुध्दीस्ट भिक्खु (मांक) विद्यापीठ अनुराधापुर"* में मुझे निमंत्रित किया गया था. तब श्रीलंका देश के *"कोलंबो एयरपोर्ट से लेकर समुचे श्रीलंका दौरें में हमे VVIP"* सन्मान के साथ / *श्रीलंका सेना* की पुर्ण सुरक्षा हमें दी गयी थी. *"HWPL H.Q. Korea"* संस्थान द्वारा दक्षिण कोरीया में हुये *"विश्व शांति परिषद"* का भी निमंत्रण दो - तिन साल पहले था. परंतु वहां *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण समान संदर्भ दिखाई नही दिया. विश्व के बहुत सें *"देशों के मान्यवर"* सदर शांति परिषद में सहभागी थे. परंतु *दक्षिण कोरीया* की आंतरराष्ट्रिय परिषद केवल *"सांस्कृतिक परिषद"* ही दिखाई दी थी. *नयी दिल्ली* में हुयी *"HWPL विश्व शांति परिषद"* के बारें में, *"ना कहे तो ही अच्छा है."* मैने कोरीया आयोजकों को मेरी नाराजगी बताते हुये, *"संशोधन पेपर"* सादरीकरण / *"विश्व शांति"* के हेतु आऊट पुट हल शोधने की बात भी *लिखित* में कही. अगर यह संभव ना हो तो, *"कृपया मुझे निमंत्रीत ना करे,"* यह बात भी मैने कही थी. *HWPL HQ. Korea* तथा मेरी संघटन *CRPC HQ India* उनकी संयुक्त विद्यमान में आँनलाईन *"आंतरराष्ट्रिय शांती परिषद"* का आयोजन *मेरे गाईड लाईन"* मे किया गया था. जो उच्च कोटी की बडी सफल परिषद रही थी. क्यौं कि, जब अपना समय अंतरराष्ट्रिय परिषदों में देते है, तब *"आऊट पुट हल"* भी बहुत ही जरुरी विषय है. फरवरी २०१८ में *"आंध्र प्रदेश"* सरकार के मुख्यमंत्री *चंद्रबाबु नायडु* इनके मार्गदर्शन में, *"विश्व शांति अमरावती बुध्द महोत्सव"* का आयोजन किया गया था. तब आंध्र प्रदेश सरकार ने *"मुझे"* निमंत्रण के साथ साथ ही *"तिन बस"* की व्यवस्था कर, बुध्द भिक्खु वर्ग को लाने की भी जिम्मेदारी मुझे दी गयी थी. वह महोत्सव भी बडा ही सफल रहा था. मेरी राष्ट्रिय संघटन *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल"* द्वारा बहुत से राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषदों का आयोजन तथा *"विश्व शांति रँली"* का भी आयोजन किया गया है. *"राष्ट्रिय / आंतरराष्ट्रिय परिषद"* इसका आयोजन करते समय, *आयोजकों के पास वह दृष्टी"* होना भी बहुत जरुरी है. विश्व के विभिन्न विद्यापीठों में विभिन्न विषयों पर भी *"संशोधन"* हो रहे है. और हम भविष्य में *"विश्व शांति"* की अपेक्षा करे तो, वह कोई अतिशयोक्ति नही होगी.
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▪️*डा. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक १२ सितंबर २०२६
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