⚡ *वेनेझुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा गिरप्तारी एवं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी (?) क्या तृतीय महायुध्द की ओर जाने क आहट है ?*
*डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य',* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटिंग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ महु मप्र
एक्स मेडिकल ऑफिसर एवं हाऊस सर्जन
बुध्द आंबेडकरी लेखक, कवि, समिक्षक, चिंतक
आंतरराष्ट्रीय परिषद संशोधन पेपर परिक्षक
मो. न. ९३७०९८४१३८, ९८९०५८६८२२
दिनांक ३ जनवरी. *व्हेनेझुएला* देश के राष्ट्रपति *निकोलस मादुरो* इनको उनकी पत्नी *सिलीया फ्लोरेंस* इनके साथ ही, उनके निवास से (बेड रुम), डोनाल्ड ट्रम्प की *अमेरिका सेना* द्वारा उठाया जाना, वही ५ जनवरी २०२६ को उन्हे *न्युयार्क* (अमेरिका) में बंधक बनाया रखना, क्या यह सहज घटना है ? विश्व के समस्त देशों ने इस घटना का *"जाहिर निषेध"* भी किया है. यही नहीं स्वयं अमेरिका में भी, *व्हाइट हाऊस"* के सामने ही, न्युयार्क सिटी मेयर *मि. ममदानी* इनके नेतृत्व में, बहुत बडा प्रदर्शन किया गया. ममदानी इन्होने अमेरिकी इस कृती को, *"एक्ट ऑफ वॉर"* कहा है. वही *भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय* ओर से, सबसे अंत में प्रतिक्रिया तो दी है. परंतु ना उसमे *डोनाल्ड ट्रम्प* इनका कोई नाम लिखा है, ना ही *अमेरिका का खुला विरोध* भी है. यह भी एक चर्चा है कि, *"अमेरिका के पास नरेंद्र मोदी इनकी कोई सिक्रेट फाईल"* है. और नरेंद्र मोदी ये डोनाल्ड ट्रम्प विरोध में कोई जवाबी कारवाई नहीं करते है. या ट्रम्प से डरते है, भारत देश के सन्मान का सौदा करना, आदि आदि यह बहुत गंभीर आरोप भी हो रहे है. वही *कंबोडिया* इस छोटा देश के राष्ट्रपति *नोरोजोम सिहामोगी* अपने देश के *"सार्वभौम - सन्मान"* से कोई समझौता ना करते हुये, अमेरिका को ललकार रहा है. भाजपा नेता *डॉ सुब्रमण्यम स्वामी* इन्होने नरेंद्र मोदी विरोध में बयान देकरं, *"राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ"* तथा भाजपा दल की *"जनरल बॉडी मिटींग"* लेने की मांग भी की है. इसका मुख्य कारण अमेरिका राष्ट्राध्यक्ष *डोनाल्ड ट्रम्प* इनका *नरेंद्र मोदी* इनके संदर्भ का खुला बयान है. या कहे तो, *"डोनाल्ड ट्रम्प की नरेंद्र मोदी को दी गयी वह खुली धमकी है."* टेरीफ बढाने की बातें भी है. परंतु *"संघ या भाजपा"* नरेंद्र मोदी विरोध में, कोई कारवाई करने की हिंमत करेगा ? यह भी प्रश्न है. हम डॉ स्वामी के बयाण को कितना गंभीर ले, यह अलग विषय है. क्यौं कि, वे मुहंबोले नेता है. मैं पिछले दो - तिन दिन से, भारत के *"मोदी सरकार विदेश नीति* पर अध्ययन कर रहा था. वैसे व्हेनेझुएला में राष्ट्रपती *निकोलस मादुरो* इनकी बहुमत की सरकार ही नहीं है. व्हेनेझुएला में *"अत्याधिक मुद्रास्फीती / बढती भुखमरी / बिमारी / अपराध / मृत्यू दर बढना"* आदि समस्याएं है. वहां के लोग *"पलायन"* कर रहे है. *"खाद्य पदार्थ की कमी"* भी है. भारत में *नरेंद्र मोदी सरकार* सत्तानीति सदृश्य *"सत्तानीति व्हेनेझुएला"* में रही है. व्हेनेझुएला के राष्ट्रपति और उसकी पत्नी पर, *"सुरक्षा खतरा / ड्रग्स तस्करी करना / अमेरिका खिलाफ साजिस / प्रवासी संकट"* आदी गंभीर आरोप है. *"क्या भारत इन आरोंपों से अछुता रहा है ?"* यह भी विषय है. इसी बिच अमेरिका राष्ट्राध्यक्ष *डोनाल्ड ट्रम्प* इनके नियंत्रण में, *मिसेस रोड्रिग्ज* इनको वहां के *"अंतरीम राष्ट्रपति"* बनाया गया है. क्या *अमेरिका* यह गैर-पहल *"तृतीय महायुध्द"* की एक आहट है ? यह अहं प्रश्न है.
पत्रकार *अर्नव गोस्वामी* ये एक जमाने में *"मोदी भक्त"* था. उसने भी भाजपा नेता *डॉ सुब्रमण्यम स्वामी* समान नरेंद्र मोदी विरोधी रुख अपनाया है. वही *संघ* (RSS) खामोश है. *चायना"* देश भी अमेरिका समान *"मध्यस्थता"* की बात कर रहा है. पाकिस्तान - भारत *"सिंदुर ऑपरेशन"* में, अमेरिका ने वह *"युद्ध रुकवाने"* की बात कही थी. तब भी नरेंद्र मोदी बहुत कुछ खामोश थे. जब की चायना ये *पाकिस्तान"* को अंदरुनी मदत कर रहा था. *रशिया* देश से मिली युद्ध सामुग्री हमारे काम आयी थी. *रशिया* यह देश हमारा पारंपरिक अच्छा मित्र रहा है. और *"रिलायन्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड"* ने, अमेरिका की दबाव में, *"रशिया से कच्चा तैल लेना बंद किया है,"* यह एक बयान देकर, *अमेरिका* को *"खुश करने की कोशिश"* की है. भारत ये देश *रशिया* की तुलना में, *"महंगे दाम में अमेरिका से तैल खरीदी"* करने की चर्चा है. सवाल यह *"भारतीय अर्थव्यवस्था"* का है. उधर *चायना* भी भारतीय सिमा रेखा में घुसकर, *"भारतीय भुभागों"* पर कब्जा भी कर चुका है. और उस चायना - भारत मुडभेड में, *"भारतीय सैनिक शहीद"* हो गये है. फिर भी *"नरेंद्र मोदी सरकार"* खामोश है. ऐसी क्या मजबुरी है कि, *"नरेंद्र मोदी ये चायना से भी खामोश है और अमेरिका से भी."* नरेंद्र मोदी सरकार की यह *"विदेशी नीति हमारे समझ से परे"* है. अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष *डोनाल्ड ट्रम्प* इन्होने, नरेंद्र मोदी तथा भारत की जितनी साख गिरायी है, उतनी साख *"किसी भारतीय प्रधानमंत्री"* ने, भारत की नहीं गिरायी है. तत्कालीन प्रधानमंत्री *इंदिरा गांधी* इन्होने, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष *निक्सन* को मिले बिना ही, भारत लौट आयी थी. भारतीय *"बॅंको का राष्ट्रियकरण"* कर, भारतीय उद्दगों को चालना दी थी. भले ही तत्कालीन प्रधानमंत्री *जवाहरलाल नेहरू* इनकी विदेश नीति में, कुछ गलती हुयी है ( तिबेट को चायना अधिन होना आदि), परंतु उनके सत्ताकारण में *"भारतीय उद्योग / कार्पोरेशन"* खडा होने में, भारत को बहुत बल मिला है. नरेंद्र मोदी सरकार की *"ऐसी कोई भी उपलब्धी नहीं"* है, जिसका हम नाज़ करे. उलट भारतीय *"सरकारी संस्थानों का खाजगीकरण"* हुआ है. देश पर *"विदेशी कर्ज बोजा"* बढते गया है. *"बेकारी / भुखमरी"* आदि बढ गयी है. भारत के ८० % आबादी *"मोफत - स्वस्त रॅशन"* पर निर्भर हैं. ऐसे बहुत सारे प्रमाण दिये जा सकते हैं. वही *"महंगाई"* ये आसमान छुं रही है. नरेंद्र मोदी सरकार में वह हिंमत भी नहीं है कि, *"मंदिरो का राष्ट्रीयीकरण"* करते हुये, उन मंदिरों की *"डंब पडी हुयी संपत्ती,"* राष्ट्रविकास में लगायें. *"आवाम"* रहेगी तो देश बचेगा. यहां *"आवाम विरोधी - पुंजीवाद समर्थन"* नें, निर्णय लिये जा रहे है.
*"अमेरिका / रशिया / चायना"* यह शक्तिशाली देश, छोटे देशों के सार्वभौम पर बडा खतरा बन कर, उन देशों को *"अपने अधिन"* कर रहे है. वही कुछ देश उन महाशक्ति विरोध में आवाज उठा रहे है. तत्कालीन प्रधानमंत्री *इंदिरा गांधी* सत्ताकाल में, *"केशवानंद भारती केस"* बहुत चर्चा में रहा. सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन प्रमुख्य न्यायाधीश (CJ) *एम एम सिकरी* इनकी अध्यक्षता वाली तेरा बेंचवाली खंडपीठ में, *न्या. जे एम शेलत / न्या. के एस हेगडे / न्या. ए एन ग्रोवर / न्या. ए एन रे / न्या. पी जगमोहन रेड्डी / न्या. डी जी पालेकर / न्या. एच आर खन्ना / न्या. के के मैथ्यु / न्या. एम एच बेग / न्या. एस एन द्विवेदी / न्या. बी के मुखर्जी / न्या. वाय वी चंद्रचुड* इन्होने ७:६ इस अनुपात में, *"भारतीय संविधान"* की गरिमा बचाकर *"संसद भारत के संविधान के किसी भी भाग में, संशोधन कर सकती है. लेकिन कुछ मामलों में, विशेष बहुमत / राज्य सरकारों की सहमती आवश्यक है. हालाकि संसद भारतीय संविधान की मुलं संरचना (Basic Structure) में बदलाव नहीं कर सकती"* यह निर्णय देने से, नरेंद्र मोदी सरकार के हाथ बांधकर रखे है. नहीं तो भारतीय संविधान का क्या होता ? यह प्रश्न है. फिर भी भारत में *"अघोषित आपातकाल"* (Emergency) चल रहा है. सरकारीकरण का *"खाजगीकरण"* हो रहा है. *"भारतीय अर्थनीति"* का बेहाल है. और बहुत कुछ विषय है. *"विरोधी दल"* भी अपना दायित्व निभाने में सफल दिखाई नहीं देता. जो बडा चिंता का विषय है. *"भारतीय निर्वाचन आयोग"* (Election Commission) भी सत्ता का कुत्ता बना हुआ है. भारत का *"प्रजातंत्र"* यह समझ से परे है. *"भारत देशभक्ती का मंत्रालय और संचालनालय"* (भारत राष्ट्रवाद) पिछले ७५ साल में, कभी बना ही नहीं. *"धर्मांधवाद"* परोसा जा रहा है. *"सर्वोच्च न्यायालय"* भी अपना दायित्व नहीं निभा पा रहा है. भारतीय संविधान की रक्षा करना जबाबदेही *"सर्वोच्च न्यायालय"* की है. जब कि भारतीय संविधान की *"कस्टोडियन - वॉच डॉग"* है. क्या करे ? *"हमाम में सब नंगे है."*
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▪️ *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक ७ जनवरी २०२६
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