Thursday, 26 February 2026

 👌*बुद्ध सागर है...!*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर 

      मो. न. ९३७०९८४१३८


शीतल चंद्र किरण छाया करुणा बादल है

हमारे भीम बाबा के विचार बुध्द सागर है...


सुर्य का वलय यही भीम बाबा का साद है

चांदणी की कोमलता बुध्द का वो नाद है

ये प्रेम मैत्री बंधुता ही बुध्द आगाज वाद है

चार आर्य सत्य ही बुध्द विचार का सत्य है...


भीम का बुध्द ओर जाना कल्याण वाद है

पंचशील अष्टशील अष्टांग मार्ग वो साद है

शांती अहिंसा कारण ही सब कुछ मंगल है

समस्त विश्व बौद्धमय होने का वही नाद है


ये प्रज्ञा शील करुणा ही मानव का मुल्य है

बुद्ध शुण्यवाद से संसार का आरंभ रचा है

कार्यकारणभाव ही बुध्द का नीति शास्त्र है 

प्रतित्यसमुत्पाद बीना कुछ भी संभव नहीं है...


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नागपुर दिनांक २७ फरवरी २०२६

(बुद्ध साहित्य में प्रेम - मैत्री - सौंदर्यशास्त्र

-- नैतिकवाद - निसर्ग)

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