👌*औदुंबर पिपल की छा़व में !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो. न. ९३७०९८४१३८
मेरा रोज का बसेरा
औदुंबर पिपल की छा़व में
मुझे बहुत सुकून देता है
निसर्ग की अपनी छाया
उन दोनो बोधीवृक्षों पर
हमेशा से ही रही है
बुद्धत्व के महान प्राप्ती
अठ्ठावीस बुद्ध को
उन दो वृक्षों की छाया में
होने का एक इतिहास है
और मेरा बसेरा भी
उन वृक्षों की छाव में होना
वह एक प्रत्यक्ष साक्ष है
सुकुन की अनुभूती देता है ....
मेरे बगिचें में
अपने झुलें पर बैठकर
उन वृक्षों को न्हाहारता हुं
बगिचें के विभिन्न फुलों सें
विभिन्न फ़ल झाडों से
बातें भी करते रहता हुं
विभिन्न रंग बिरंगी पक्षी
विभिन्न तितलीयों से
सच्चे मन से प्यार करता हुं
वों भी प्यार करते है
बगिचें की सुंदर हरियाली
उनकी भी देखभाल करना
मुझे अच्छा लगता है
बडा आनंद भी आता है
उन निसर्ग के सानिध्य में
जो अन्य कहीं सें भी मिलना
परम पावन मन भाव में
इतना सहज भी नहीं हैं....
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नागपुर दिनांक २१ फरवरी २०२६
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