Monday, 2 February 2026

 👌*मेरी बुद्ध चित्र कविता !*

     (बुद्ध साहित्य में सौंदर्यशास्त्र से प्रेम तक)

    *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

     मो. न. ९३७०९८४१३८


हे करुणा सागर तुम ही करुणा के वो फुल हो 

सभी आवाम को प्रेम मैत्री बंधुता में बांधते हो 

युध्द से हटकर शांती अहिंसा की सिख देते हो 

केवल तुम ही विश्व के करुणा महानायक हो...


सिध्दार्थ यशोधरा प्रेम की वो सच्ची निवं है 

कल्याण हेतु शाक्य संघ से भी विरोध लिया 

नयी चेतना शोध हेतु राजगृह से निकल पडे 

यशोधरा ने ही राजगृह का दायित्व संभाला...


हे प्राचीन धरोहर की नीवं तुम ने ही तो रची है 

अशोक आदि सम्राट तुम से ही प्रभावित रहे थे 

वहीं प्राचीन भारत का इतिहास बयान करता है 

आज उस इतिहास की दिवारें बातें करती है...


हे कमल सुगंध की तितली भी प्रेमी है 

वो भी तुम्हारा संदेश फैलाते रहती है 

निसर्ग से तुम ने ही बहुत प्रेम किया है 

कार्यकारण भाव उसी का परिपाक है...


-------------------------------------

नागपुर दिनांक ३ फरवरी २०२६

No comments:

Post a Comment