Sunday, 15 February 2026

 👌*मेरी चित्र कविता !* (आम्रपाली)

     (बुद्ध साहित्य में प्रेम - सौंदर्यशास्त्र - 

     स्त्री वेदना - स्त्री स्वातंत्र्य)

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो. न. ९३७०९८४१३८


लावारीश होते भी युं पाया है गोद में 

कमल की कोमलता दिखी तेरे रुप में

लिच्छवी कानुन से तडपा रहा बाप युं 

आखिर वही तो बन गयी नगरवधु तु...


तेरा जलव़ा युं तो बिखरा रहा है आसमां में 

वो आते रहे थे बडे दिवाने युं तेरे दरबार में 

हुश्न की मल्लिका केवल तुम थी वैशाली में

तेरे प्यार की नशा तो हर किसी धडकन में...


अरें  युं तुम तो बंध गयी थी प्यार बंधन में 

प्यार का सावन तो युं ना था तेरे जीवन में 

सम्राट तो राणी देखना चाहता था मगध में

मगर गम की छाया वो आ गयी आसमां में...


युं तुम निकल पडी शांती की तलाश में 

बुद्ध की भेट थी तेरे ही उस आम्रवन में 

युं सब कुछ दान किया संघ के हाथों में 

तुम तो पहुंच गयी बुद्ध अर्हत श्रेणी में...


----------------------------------------

नागपुर दिनांक १६ फरवरी २०२६

No comments:

Post a Comment