🎓*सुप्रिम कोर्ट निर्णय अनुसुचित जाति उपवर्गिकरण / क्रिमिलेयर विरोध में सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल द्वारा दिनांक १९ अप्रेल २०२६ गुगल आँनलाईन मिटिंग मे भविष्य रणनीति पर चर्चा !*
सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल सलग्न *"सीआरपीसी एडव्होकेट्स विंग"* के राज्य अध्यक्ष *एड. प्रभाकर रणशुर* इन्होने *"गुगल आँनलाईन मिटिंग"* का आयोजन, रविवार दिनांक १९ अप्रेल २०२६ को दोपहर २. ०० बजे, सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनकी प्रमुख उपस्थिति में आयोजित की थी. सदर मिटिंग में संविधान अनुच्छेद ३३५ तथा ३४१ संदर्भ में चर्चा हुयी. सदर अनुच्छेद में कही भी *"सर्वोच्च न्यायालय को, ओव्हर रुल करने का अधिकार"* दिखाई नही दिया. *"सर्वोच्च न्यायालय केवल संविधान की वाँच डाँग है. "* कानुन बनाने का अधिकार यह संसद को है. तो फिर सरन्यायाधीश *धनंजय चंद्रचुड* इनकी अध्यक्षता में, *सात न्यायाधीश* खंडपीठ ने, *दविंदर सिंग केस* मे, *"अनुसुचित जाती वर्ग का उपवर्गिकरण / क्रिमिलेयर"* निर्णय देकर, संविधान अनुच्छेद ३३५, ३४१ का उल्लंघन किया है. केवल एक न्यायाधीश *बेला त्रिवेदी* इन्होने उसका विरोध किया. *न्यायाधीश भुषण गवई* ने उन न्यायाधीशों के साथ जुडकर, बहुत मुर्खपणे निर्णय दिया है. उसके भविष्य मे दुरगामी परिणाम होंगे. *"अनुसुचित जाति"* समुह यह *"अहिंदु एकसंघ समुह"* वर्ग है. इनमे उपवर्गिकरण कर एकसंघ समुह को तोडने का / देश की एकात्मता को आघात करने का कार्य सर्वोच्च न्यायालय ने किया है. और *संसद ने भी उस निर्णय विरोध में कोई बिल नही लाया.* अत: हमे सचेत होने की जरुरत है. *"दुसरी आँनलाईन गुगल मिटिंग बुधवार दिनांक २२ अप्रेल २०२६ को शाम ७. ००"* आयोजित है. अत: आप के सुझाव आमंत्रित है. आप आँनलाईन मिटिंग मे जुडने की अपिल की जाती है.
*एड. प्रभाकर रणशुर*
राज्य अध्यक्ष
सीआरपीसी एडव्होकेट विंग
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