🎓*सुप्रिम कोर्ट निर्णय अनुसुचित जाति उपवर्गिकरण / क्रिमिलेयर विरोध में सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल द्वारा दिनांक २२ अप्रेल २०२६ गुगल आँनलाईन मिटिंग मे भविष्य रणनीती तथा निवेदन / आपत्ती सुझाव देने की मुदत ३० अप्रेल तक बढने के कारण इ मेल भेजने की अपिल !*
सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल सलग्न *"सीआरपीसी एडव्होकेट्स विंग"* के राज्य अध्यक्ष *एड. प्रभाकर रणशुर* इन्होने *"गुगल आँनलाईन मिटिंग"* का आयोजन, बुधवार दिनांक २२ अप्रेल २०२६ को दोपहर ७. ०० बजे, सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनकी प्रमुख उपस्थिति में आयोजित की थी. सदर गुगल मिट मे माजी विधायक *प्रकाश गजभिये* इन्होने अपने विचार रखे. तथा *इंजी. संजय सनमाडीटर* आदी लोगोँ ने अपनी भुमिका रखी. संयोजक *एड. प्रभाकर रणशुर* इन्होने शासन को केवल *"३० हजार तक इमेल"* मिलने की जानकारी दी. अत: यह आकडे सही या गलत है? यह संशोधन का विषय है. शासन ने आपत्ती / सुझाव देने की मुदत *३० अप्रेल* तक बढाई है. अत: ज्यादा से ज्यादा मात्रा मे, इमेल भेजने की अपिल की जाती है. समस्त महाराष्ट्र के विभिन्न जिलो में *"कृति समिती"* बनी है. और *"आंदोलन"* खडा करने को अंतिम रुप दे रहे है. मिटिंग में संविधान अनुच्छेद ३३५ तथा ३४१ संदर्भ में चर्चा हुयी. सदर अनुच्छेद में कही भी *"सर्वोच्च न्यायालय को ओव्हर रुल करने का अधिकार"* दिखाई नही दिया. *"सर्वोच्च न्यायालय केवल संविधान की वाँच डाँग है. "* कानुन बनाने का अधिकार यह संसद को है. तो फिर सरन्यायाधीश *धनंजय चंद्रचुड* इनकी अध्यक्षता में, *सात न्यायाधीश* खंडपीठ ने, *दविंदर सिंग केस* मे, *"अनुसुचित जाती वर्ग का उपवर्गिकरण / क्रिमिलेयर"* निर्णय देकर, संविधान अनुच्छेद ३३५, ३४१ का उल्लंघन किया है. केवल एक न्यायाधीश *बेला त्रिवेदी* इन्होने उसका विरोध किया. *न्यायाधीश भुषण गवई* ने उन न्यायाधीशों के साथ जुडकर, बहुत मुर्खपणे निर्णय दिया है. उसके भविष्य मे दुरगामी परिणाम होंगे. *"अनुसुचित जाति"* समुह यह *"अहिंदु एकसंघ समुह"* वर्ग है. इनमे उपवर्गिकरण कर एकसंघ समुह को तोडने का / देश की एकात्मता को आघात करने का कार्य सर्वोच्च न्यायालय ने किया है. और *संसद ने भी उस निर्णय विरोध में कोई बिल नही लाया गया,* यह चिंता का विषय है. अत: हमे सचेत होने की जरुरत है.
*एड. प्रभाकर रणशुर*
राज्य अध्यक्ष
सीआरपीसी एडव्होकेट विंग
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