Tuesday, 19 June 2018

👌  *बुध्द शरण में...!*
          *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
           मो.न. ९३७०९८४१३८

तुम जीवन का मेरे, अंग भले ही ना हो
फिर भी हम चले साथ, बुध्द शरण में ...

तितली तुम तो, प्यारे सावन की याद हो
खुशबु भी तुम हो, उन फुल़ो के संग में
वैशाली के वधु की, त्याग मिसाल बनी हो
और भी उस गुंज को, जगाओं संसार में ...

दान भावो़ के दान में, सुदत्त का नाद हो
तुम ही मकरंद हो, ये फुलों के कण में
सुदत्त की वें याँदे, अब भी जिंदा रही हो
आदमी को तुम नें, नीति सिखाया जहाँ में ...

हर तन मन प्यार का, ये भुखा रहा हो
अहिंसक ही अंगुलीमाल, बना जाल में
गांधी भक्ती भाव मे, गोगावाद का साद हो
फिर आवाम नाद तो , चले ना विकास में ...

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      (भारत राष्ट्रवाद समर्थक)

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