Thursday, 7 June 2018

🐬 *हे विशाल बुध्द सागर का...!*
         *  *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
           मो.न. ९३७०९८४१३८

हे विशाल बुध्द सागर का
भीमजी ही बडा किनारा है ...

धर्म नशा इस तुफान का
ना तो कोई विचार धारा है
बह गये उस नादानी का
एक अंत ही दर्द वारा है ...

आदमी यहा कोई मोल का
गाय भी देवी बन जाती है
इंसान की हत्या करने का
ना भुमी पर पुण्य मिला है ...

धरती पर बुध्द आने का
शांती मैत्री प्रेम आगाज है
भीम अशोक-मय काल का
विश्व शांती पाना ही दारा है ...

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