Monday, 4 May 2026

 👌*मेरी बुध्द चित्र कविता !*

      *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

      मो. न. ९३७०९८४१३८


तेरा साथ युं रहा तो

जिदंगी का बसेरा रहा

तुम छाता बने भिगती रही

निसर्ग की इन बारिशो में

पत्तों से यु अभय देती रही

अपने जीवन वारिशों पर

प्रेम की भी तुम मिसाल हो

तुम स्वार्थ से परे भी हो

झुट का सहारा तो बहुत दुर है

धोकादारी भ्रष्टाचार से परे हो

इंसान प्रवृत्ति से दुर हो

इसलिए बुध्द ने

पंचशील - अष्टांग मार्ग - दस पारमिता

इंसान को बताया तुम्हे नहीं

तुम सचमुच आजाद जीव हो !

तुम मुकनायक हो !!


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नागपुर, दिनांक ४ म ई २०२६

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