🌹 *लीन होकर बुध्द छाया में !*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो.न. ९३७०९८४१३८
युं ही लीन होकर बुध्द छाया मे
तुम हर पल मेरे साथ रहती हो ...
फुलों के उन हसिन वादीयों में
कभी कभी युं ही छुप जाती हो
धुंडे कहा उन घने कोहरे वन में
बुध्द किरण रोशनी ले आती हो ...
आसमान के कालें गहराई में
ना डरे ही आगे चले जाती हो
संसार के अशांत मन धारा में
बुध्द चेतना रंग भर आती हो ...
आवाम के नफरत चिंगारी में
राजसत्ता को चुनौती देती हो
बिखरे पडे उन खुशी दामन में
बुध्द शांती से जोड दे आती हो ...
* * * * * * * * * * * * * * * * *
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो.न. ९३७०९८४१३८
युं ही लीन होकर बुध्द छाया मे
तुम हर पल मेरे साथ रहती हो ...
फुलों के उन हसिन वादीयों में
कभी कभी युं ही छुप जाती हो
धुंडे कहा उन घने कोहरे वन में
बुध्द किरण रोशनी ले आती हो ...
आसमान के कालें गहराई में
ना डरे ही आगे चले जाती हो
संसार के अशांत मन धारा में
बुध्द चेतना रंग भर आती हो ...
आवाम के नफरत चिंगारी में
राजसत्ता को चुनौती देती हो
बिखरे पडे उन खुशी दामन में
बुध्द शांती से जोड दे आती हो ...
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