Wednesday, 12 October 2022

 ✍️ *यहां आंबेडकर मिशन का...!*

     *डॉ. मिलिन्द जीवने  'शाक्य'* नागपुर

      मो.न. ९३७०९८४१३८


यहां विश्वास पाना कम, खोना ही जादा है

वही ईमान बहुत कम, धोकादारी जादा है

अपना वफादार कौन, प्रश्नों पर प्रश्न उठे है

यहां आंबेडकर मिशन का, हे वाली नही है...


यहां सच्चे वादों की, बडी बरसात होती है

बस अगले ही मौसम में, सब उजाड देती है

हवा का रुख बदले, युं ही आदमी बदलते है

यहां मन का ज़मिर, खरिदा- बेचां जाता है...


संभालो अपने आप को, मिज़ाज जादा है

यें बड़ा मिठापण भी, जहर दिखाई देता है

कडु निम की मात्रा, अब वो बहुत जरुरी है

हे रोग निवारण का, वही तो सही पाला है...


* * * * * * * * * * * * * * * *

Thursday, 6 October 2022

 ‌👌 *नागपुर में ३ अक्तुबर २०२२ को हुयी आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद नहीं बल्की था गगन - पुरण मेला...!!!*

   *डॉ.  मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

अध्यक्ष, जागतिक बौध्द परिषद २००६ 

राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल 

मो. न. ९३७०९८४१३८ / ९२२५२२६९२२


   अभी अभी नागपुर में ३ अक्तुबर  २०२२ को, "होटल सेंटर पाईंट" में सफल (?) हुयी, *"आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद"* (?) नामक वह परिषद नही, बल्की *"गगन - पुरण मेला"* होने की, आम चर्चा वहां सहभागी कुछ लोगों ने व्यक्त की है. और संदर्भित बौध्द परिषद का अध्यक्ष - रा. तु.‌ म. नागपुर विद्यापीठ का उपकुलपती  *डॉ.  सुभाष चौधरी*  यह सचमुच *"परिषद में बांधे गये खुटे का गधा"* साबित हो गया. आंतरराष्ट्रिय परिषद अध्यक्षीय भाषण वह भी केवल *"दो मिनिट"* का होने से, उपस्थित कुछ मान्यवर अचंबित हो गये. और अध्यक्षीय भाषण का सार क्या तो, *"मुझे इस बौध्द परिषद की अध्यक्षता क्यौ दी गयी, यह मुझे ही नही पता ? क्यौं कि, बौध्द धर्म में बहुत सारे विचारविद उपलब्ध है."* इस अध्यक्षीय भाषण के उपर, हमें क्या टिप्पणी करना चाहिये ? यह बड़ी हसीं का विषय है. अर्थात *डॉ. सुभाष चौधरी* ने स्वयं गधा होने की बातें, अदृश्य रुप से स्विकारी है. परंतु डॉ. चौधरी ने उस बडे पद को स्वयं स्विकारना (नकार भी सकते थे), और बौध्द परिषद में सहभाग लेकर यह बातें भाषण में बोलना, और अपनी हसीं कर लेना, यह दुसरी बडी गधेगिरी थी. रातुम नागपुर विद्यापीठ का उपकुलपती बनना, यह तो कोई मेरिट का आधार नही था, बल्की वसिलाबाजी एवं पायालागु का वो बडा नमुना है. खैर छोडो, वह *"आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद"* कहें तो, परिषद की गरिमा को खंडित करने जैसा विषय है. और आयोजक यह तो *"झुट के तिन बंदर"* थे. उन तिन झुट बोले बंदरों को नचानेवाला,‌ डमरु कौन बजा रहा या ? यह संशोधन का विषय है.‌ शायद वह डमरु (?) बजानेवाला कोई बडा  *"जादुगर"* भी हो !

     *"झुट बोलने"* की भी एक सीमा होती है.‌ उन तिन बंदरों ने, वह झुट की सीमा ही पुरी लांध दी...! पहला झुट - *"कविवर्य सुरेश भट सभागृह"* यह नागपुर का सबसे बहुत बडा, २००० कैपेसिटी का वातानुकुलित / सुविधायुक्त सर्वोत्तम ऐसा सभागृह है. और आयोंजकों ने वर्षा के कारण असुविधा होने की झुटीं बातें कहकर, ३०० - ४०० लोगं कैपेसिटी के थ्री स्टार *"होटेल सेंटर पाईंट"* में वह कार्यक्रम लेना, यह सदर परिषद हलाने का मुख्य कारण बना है. दो हजार लोगों को सहभाग होना, उनके लिए यह असंभव था. इसलिये छोटा सभागृह...! अब दुसरा झुट - *"हॉल खचाखच भरा"* होना. सदर परिषद के लिए, अपने कॉलेज को लडक़ों को जबरन लाकर, फुकट में थ्री स्टार होटेल में खाना खाने का लालच. दुसरे बुध्द मुर्ती वाटप लोगों का जबरन सहभाग. अरे भाई, इज्जत का सवाल था. *लोगों की भीड इकठ्ठा करना, क्या परिषद का उद्देश है ?* बल्की परिषद प्रमुख आयोजन तो, *"परिषद का आऊट पुट क्या है ?"* यह महत्तवपूर्ण विषय होता है. *"मेला हो तो,"* यह विषय मायने नही रखता. क्यौं कि, मेला का कोई विशेष उद्देश नही होता. वह केवल *"व्यापार व्यवसायिक केंद्रबिंदु "* होता है...!

   अब हम उनके तिसरे झुट पर - *"किसी भी राजकिय नेता को, बौध्द परिषद में ना बुलाना."* फिर दैनिक लोकमत दिनांक ११ सितंबर की बहुत बडी खबर - मुख्यमंत्री  एकनाथ शिंदे, साथ में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीयमंत्री नितिन गडकरी एवं अन्य राजकिय नेता आदी...! चवथा झुट - नागपुर विद्यापीठ (?) द्वारा सदर परिषद का आयोजन होने से, *प्रोटोकाल* के अनुसार उपकुलपति /अबौध्द *डॉ. सुभाष चौधरी* को, आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद का अध्यक्ष पद पर बिठाना...! महत्वपूर्ण विषय यह कि, उस परिषद का आयोजन *" गगन मलिक फाऊंडेशन"* द्वारा किया गया. रातुम नागपुर विद्यापीठ द्वारा नहीं. ना ही, रातुम नागपुर विद्यापीठ ने कोई इस तरह का ठराव पारित किया था, ना ही बजेट में कोई प्रावधान ! डॉ सुभाष चौधरी नामक उपकुलपति महाशय का अध्यक्षीय भाषण तो, उपर बताया है. अब पाचवा झुट - इस वर्ष में *"छ: लाख लोगों को बुध्द धम्म की दीक्षा देना"* यह उस मेले में, मेरे मित्र - फिल्मी हिरो अर्थात मि. नटवरलाल उर्फ फिल्मी नाचा - *गगन मलिक* की घोषणा...! क्या गगन मलिक, हमारे दुसरे बाबासाहेब आंबेडकर तो नही है ? यह प्रश्न है. छ: लाख लोग क्या, *गगन मलिक ने "छ: हजार लोगों" को, बौध्द धम्म की दीक्षा दिया तो भी बहुत है...!* इतनी बडी बातें गगन मलिक बोल रहा है. और हम तालियां बजा रहे है. *गगन मलिक विदेश की मुफ्त आयी हुयी मेटल के बुध्द मुर्ती का, महाठग - नितिन गजभिये के माध्यम से अवैध व्यापार कर रहा है.* और हम केवल खामोश बने है. और कोई हमारे अपने ही, इस *"अवैध प्रकरणों"* की, बडी सी वकालत भी कर रहे है. क्या बात है ?

    मेरे अच्छे मित्र एवं नागपुर विद्यापीठ के भुतपुर्व कुलसचिव *डॉ. पुरणचंद मेश्राम*  तथा फिल्मी नायक *गगन मलिक*  इन्होने अपने भाषण में, मेरा नाम का जिक्र न करते हुये,  *"कुछ लोग कोई काम नही करते, और विरोध करने की बातें कही थी."* मै उन मेरे मित्र को बताना चाहुंगा कि, धम्म के क्षेत्र हें, आज जो कुछ लोग काम कर रहे है, वो मेरे से जुडें हुये ही लोग है. *"जागतिक बौध्द परिषद २००६ / २०१३ / २०१४ / २०१५ तथा जागतिक बौध्द महिला परिषद २०१५"* इसके साथ ही HWPL H.Q. Korea समन्वय से *"आंतरराष्ट्रिय शांती परिषद २०२२"* इन सभी का, मैने स्वयं आयोजन किया है. *"प्रथम / द्वितिय डॉ आंबेडकर विचारविद परिषद २०१७ / २०२० तथा महिला परिषद २०२१"* का आयोजन भी, मेरे द्वारा किया गया है. इसके पहले मैने स्वयं *"मेटल के बुध्द मुर्ती का वितरण"* भी किया है. तायवान से प्राप्त *"लाखों रुपयों के धम्म पुस्तकों का मुफ्त वितरण"* भी किया है. और *"मैने किसी से भी कोई पैसे नहीं लिये है / थे."* उस समय, आप का धम्म क्षेत्र में, कोई अस्तित्व भी नही था. और मै यह स्वयं के पैसों से किया है. आप को देखना हो तो, यह सभी कुछ मै दिखा सकता हुं. मै आप लोगों के समान *"झुट के बुनियाद पर, मिशन का काम"* नही करता. मेरे साथ जुड़े हुये सभी लोग बतायेंगे की, मुझे झुट बोलनेवाले लोग पसंद नही है. ना ही, मै किसी को धोका देता हुं. खैर छोडो, बुध्द के दो वचन कहकर, मै अपने शब्द को विराम देता हु.

*न भजे पापके मित्ते न भजे पुरिसाधमे |*

*भजेथ मित्ते कल्याणे भजेथ पुरिसुत्तमे ||*

(अर्थात - बुरे मित्र का साथ ना करे, ना अधम पुरुषों का सेवन करे, अच्छे मित्र की संगति करे, उत्तम पुरुषों की संगति करे.)

*न त कम्मं कतं साधु यं कत्वा अनुतप्पति |*

*यस्स अस्सुमुखो रोदं विपाकं पटिसेवति ||*

(अर्थात - उस कार्य को कभी नही करना चाहिये, जिसे करके पछताना पडे. और जिस के फल (दुष्परिणाम) को रोते हुये भोगना पडे.)


* * * * * * * * * * * * * * * * *

Wednesday, 5 October 2022

Thailand Team visited Dr. Mikind Jiwane'd Camp at Deekshabhoomi Nagpur on 5th October 2022

 🏥 *दीक्षाभूमी पर डॉ. मिलिन्द जीवने इनके रोग निदान शिबिर को थायलंड सदिच्छा टीम की भेट..!*


      *"धम्मचक्र प्रवर्तन दिन"* के उपलक्ष में, *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल / जीवक वेलफेयर सोसायटी / अश्वघोष बुध्दीस्ट फाऊंडेशन"* इनकी सयुंक्त तत्वाधान में, *"मुफ्त रोग निदान शिबिर"* का आयोजन, दिनांक ४ - ५ - ६ अक्तुंबर २०२२ को दिन - रात २४ घंटे *"संत चोखामेला होस्टेल परिसर"* में किया गया है. सदर परिषद का उदघाटन *मंगलवार दिनांक ४ अक्तुंबर २०२२* को *दोपहर १.०० बजे* "संत चोखामेला होस्टेल परिसर" में सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके हाथों संपन्न हुआ. उस अवसर पर *इंजी. विजय बागडे / इंजी. श्रीकांत तुपकर /  सूर्यभान शेंडे / शंकरराव ढेंगरे* यह मान्यवर " प्रमुख अतिथी" थे. थायलंड मिडिया टिम के *वारापोंग साकोन किटखा जोहा* इनके नेतृत्व मे, डॉ. जीवने इनके शिबिर को भेट दी. सदर शिबिर में सोलापुर से सीआरपीसी के प्रदेश महासचिव *सत्यजीत जानराव* उनके नेतृत्व मे, कुछ पदाधिकारी वर्ग तथा यवतमाळ सीआरपीसी के *मिलिन्द धनवीज* तथा चंद्रपुर सीआरपीसी के *धनराज उपरे* उपस्थित थे. उस शिबिर में *डॉ. पी. एल. बनसोड. / डॉ. अमित नाईक / डॉ. प्रमोद चिंचखेडे / डॉ. मनिषा घोष / डॉ. भारती लांजेवार / डॉ. राजेश नंदेश्वर* इत्यादी डॉक्टर अपनी सेवाएं दें रहे है. सदर शिबिर की सफलता मे *रेशमा सहारे / कल्याणी इंदुरकर* इनके साथ टिम काम कर रही है. अत: उस शिबिर का लाभ उठाने की अपिल की गयी है.

Tuesday, 4 October 2022

Free Medical Camp at Deekshabhoomi Nagpur on 4-:5 Octo 2022

 🏥 *दीक्षाभूमी पर डॉ. मिलिन्द जीवने इनकी उपस्थिति मे मुफ्त रोग निदान शिबिर का उदघाटन संपन्न..!*


      *"धम्मचक्र प्रवर्तन दिन"* के उपलक्ष में, हर साल की तरह इस साल भी *"सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल / जीवक वेलफेयर सोसायटी / अश्वघोष बुध्दीस्ट फाऊंडेशन"* इनकी सयुंक्त तत्वाधान में, *"मुफ्त रोग निदान शिबिर"* का आयोजन, दिनांक ४ - ५ - ६ अक्तुंबर २०२२ को दिन - रात २४ घंटे *"संत चोखामेला होस्टेल परिसर"* में किया गया है. सदर परिषद का उदघाटन *मंगलवार दिनांक ४ अक्तुंबर २०२२* को *दोपहर १.०० बजे* "संत चोखामेला होस्टेल परिसर" में सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रिय अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इनके हाथों संपन्न हुआ. उस अवसर पर *इंजी. विजय बागडे / इंजी. श्रीकांत तुपकर /  सूर्यभान शेंडे / शंकरराव ढेंगरे* यह मान्यवर " प्रमुख अतिथी" थे. सदर शिबिर में सोलापुर से सीआरपीसी के प्रदेश महासचिव *सत्यजीत जानराव* उनके नेतृत्व मे, कुछ पदाधिकारी वर्ग उपस्थित था. उस शिबिर में *डॉ. पी. एल. बनसोड. / डॉ. अमित नाईक / डॉ. प्रमोद चिंचखेडे / डॉ. मनिषा घोष / डॉ. भारती लांजेवार / डॉ. राजेश नंदेश्वर* इत्यादी डॉक्टर अपनी सेवाएं दें रहे है. सदर शिबिर की सफलता मे *रेशमा सहारे* इनके साथ टिम काम कर यही है. अत: उस शिबिर का लाभ उठाने की अपिल की गयी है.

Monday, 3 October 2022

 🌹 *हे आम्रे, काश तु मेरा प्रेम होती...!*

     *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर

     मो. न. ९३७०९८४१३८


हे आम्रपाली,

तुम्हारा इतिहास रहा है

सच्चे प्यार का, समर्पण का

त्याग का, इमानदारी का

और देशभक्ति का भी...!

तुम्हे व्यवस्था की हालात ने

वैशाली की नगरवधु बना डाला

और तुम वह दायित्व निभाते चली

वही तुम्हारे वास्तव जिंदगी में

राजा अजातशत्रु का आ जाना

और तुम उस के अच्छे गुणों पर

पुरे मन से आशिक हो गयी

और सब कुछ दे गयी उसके नाम...!

परंतु तुम जब समज गयी की

जो तुम्हारा समर्पित प्यार है

वो तुम्हारे दुश्मन देश का राजा है

तुम पुर्णत: तुट सी गयी 

और द्वंद्वता मे पुरी फस गयी 

इधर सच्चा प्यार और उधर देश प्रेम ...!

वही राजा अजातशत्रु भी 

सच्चा प्यार कर बैठा था तुम पर

वैशाली नगरी को पाने की लालसा

बस, राजा के सामने प्रश्न चिन्ह आ गये

इधर सच्चा प्यार और उधर देश विस्तार !

वही बुध्द का आगमन

वैशाली नगरी के आम्रवन में होता है

आम्रे, तुम दौडकर चली जाती हो

बुध्द का उपदेश पाने के लिए

उन्हे संघ सहित भोजन निमंत्रण देकर

अपनी मस्ती में रथ से चली जाती हो

वैशाली राजा वह समाचार सुनते ही

आम्रे, राजा तुम्हे बडी ऑफर देता है

बुध्द के भोजन दान का श्रेय उसे दे

तुम राजा का वो ऑफर ठुकराती हो

बुध्द को अपना प्रिय आम्रवन भी

तुम दान में दे जाती हो

धन्य हो तुम, हे आम्रपाली...!

वही मै भारत का दुसरा इतिहास

वेश्या नामक दुर्गा का देखता हुं

दोनो का भी चरित्र एक सा है

परंतु दुर्गा ने लगातार नव दिन

राजा महिषासुर के साथ

कामभोग शय्या करते हुये

लालच में उसकी हत्या कर दी

फिर व्यवस्था ने उसे देवी दुर्गा बना डाला

और तुम आज भी नगरवधु हो ...!

हे आम्रे, तुम्हारा बुध्द को शरण जाना

प्रिय आम्रवन बुध्द को दान में देना

अपने सर्वस्व का त्याग करना

यह भारत का इतिहास बना है

आम्रे, तुम गद्दार नही हो, लालची नही हो

तुम भोग विलासी‌ भी नही हो

और धोका देनेवाली नारी भी नही हो

तुम प्यार का, देश भक्ति का प्रतिक हो

मुझे नाझ़ है तुम्हारे गुणों पर

बस, मन की एक ही ईच्छा रही है

हे आम्रे, काश तु मेरा प्रेम होती...!!!


* * * * * * * * * * * * * * * *

Saturday, 1 October 2022

 👌 *३ अक्तूबर को नागपुर मे आयोजित - आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद (?) कहे या उसे अ-नाम फेम नाचाओं का अ-विवेकी लोकल मेला कहे ...?*

   *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* नागपुर १७

* अध्यक्ष, जागतिक बौध्द परिषद २००६ (नागपुर)

* राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल

* मो. न. ९३७०९८४१३८, ९२२५२२६९२२


      नागपुर में ३ अक्तुंबर २०२२ को विवाद आयोजित *"आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद,"* यह आयोंजकों द्वारा नैतिकता का पालन हो रहा है या नही ? इस पर अब ना बोलना ही ठिक है. पर धम्म पद के पाप वग्गो में, बुध्द उपदेश बहुत ही महत्वपुर्ण है. वह यह कि - 

*पापञ्चे पुरिसो कयिरा न‌ तं कयिरा पुनप्पुनं |*

*न तम्हि छन्दं कयिराथ दुक्खो पापस्स उच्चयो ||*

(अर्थात :- मनुष्य से यदी पाप हो जाए तो उसे बार बार ना करे. उस में रत न हो. क्यौं कि पाप का संचय दु:खदायक होता है.)

    उसी पाप वग्गो में बुध्द का उपदेश और भी है, वह यह कि -

*पुञ्ञेञ्च पुरिसो कयिरा कयिराथेतं पुनप्पुनं |*

*तम्हि छन्दं कयिराथ सुखो पुञ्ञस्स उच्चयो ||*

(अर्थात :- व्यक्ति पुण्य कर्म करे, उस फिर फिर करे, उस मे रत रहे. संचित पुण्य सुख का कारण बनता है.)

   जब व्यक्तिद्वारा पाप कर्म बहुत बढ जाते है, उस संदर्भ में बुध्द का यह कहा उपदेश समझना, हमे बहुत आवश्यक है. वह यह है कि -

*पापोपि पस्सति भद्रं याव पापं न पच्चति |*

*यदा च पच्चति पापं अथ पापो   पापानि पस्सति ||*

(अर्थात :- जब तक पाप का दुष्परिणाम सामने नही आता, तब तक पाप भी अच्छा लगता है. जब पाप का दुष्परिणाम देना शुरू करेगा, तब पापी को समझ में आवेगा कि, मैने यह क्या कर दिया ?)

    धम्म पद के दण्ड वग्गो में बुध्द का यह उपदेश बहुत महत्वपुर्ण है. वे इस प्रकार है -

*अथ पापानि कम्मानि करं बालो न बुज्झति |*

*सेहि कम्मेहि‌ दुम्मेधो अग्गिदड्ढोव तप्पति ||*

(अर्थात :- पाप करता हुआ पृथग्जन यह नही जानता कि, वो पाप कर रहा है.‌ दुर्बुध्दि अपने कृत कर्मो के कारण आग में जलते हुये की तरह, वो तपता है.)

      बुध्द ने धार्मिक वस्त्र पहनने का सही अधिकारी कौन‌ है, इस संदर्भ में भी बताया है. अर्थात इस धम्म परिषद में *सहभागी मान्यवर / अध्यक्ष आदी, क्या बुध्द के इस गुण पर खरे उतरते है ?* क्या धम्म परिषद के लिए, बुध्द विचारविदों की कमी थी ? जो आयोजकों ने बुध्द विचारविदों के जगह, किसी *"बुध्द विचार अज्ञानी गधे"* को, आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद के, खुटे में बांध दिया है. जो रा.तु.म. नागपुर विद्यापीठ के उपकुलपती *डॉ. सुभाष चौधरी* इनका नाम, *"आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त"* होने का, अभी अभी शासन समिती अहवाल में है. बस, परिषदी सहभागी आयोजक तथा प्राध्यापकों की, यह कोई *"झेलागिरी"* तो नही है ? बुध्द उपदेश इस प्रकार है -

*ये च वन्तकसावस्स सीलेसु सुसमाहितो |*

*उपेतो दमसच्चेन स वे कासावमरहति ||*

(अर्थात :- जिस व्यक्ति ने मन के मैल को दुर कर दिया है, वो शीलवान है, सदाचारी है, संयमशील और सत्यवादी है, वह व्यक्ति ही काषाय वस्त्र (धार्मिक वस्त्र) पहनने का सही उत्तराधिकारी है.

    बुध्द ने धम्म समझने के लिए, कुछ मुख्य मापदंड भी बतायें है. वे मापदंड है -

*सहस्समपि चे वाचा अनत्थ अनत्थपदसंहिता |*

*एक अत्थपदं सेय्यो यं सुत्वा उपसम्मति ||*

(अर्थात :- मनुष्य बहोत से ग्रंथ का वाचन कर सकता है. परंतु वह उसे समझा ही नही गया तो, वह वाचन निष्प्रयोजन है. व्यर्थ विषयों के हजार श्लोक पढने के बदले, केवल एक ही श्लोक वह समझ गया है, वह उमग गया है, उस नुसार आचरण करता हो तो, उसे मोक्ष मार्ग कहना चाहिये.)

   हमारे दोनो ही मित्र एवं आयोजक *गगन मलिक* हो या नागपुर विद्यापीठ के माजी कुलसचिव *डॉ. पुरणचंद्र मेश्राम* हो, उन्होने बुध्द धम्म को कितना पढा ? आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद के सही आयोजन का कितना अभ्यास है ? या बुध्द के सर्वोत्तम शिष्य *"सारिपुत्र"* के समान, वे दोनो ही आयोजक - *"आंबेडकरी मिशन के सारिपुत्र"* है या नही ? इस विषय पर भी, मै कुछ भी टिप्पणी नही कहुंगा. परंतु *अनाथपिंडिक* द्वारा "जेतवन बुध्द विहार" दान देने के अवसर पर, एक ब्राम्हण दारा बुध्द को, अगला सेनापती कौन है ? इस प्रश्न का उत्तर देते हुये, बुध्द ने जो कुछ कहां है, वह हम सभी को, समझने की बहुत आवश्यकता है. क्या *गगन मलिक / पुरणचंद्र मेश्राम* स्वयं को आंबेडकरी मिशन के, सारिपुत्त तो नही समझ रहे है ? यह भी प्रश्न है. बुध्द का उत्तर इस प्रकार था -

*मया पवत्तितं चक्कं धम्मचक्कं अनुत्तरं |*

*सारिपुत्तो अनुवत्तेति अनजातो तथागतं ||*

(अर्थात :- मैने प्रस्थापित किया हुआ कार्य, सारिपुत्त चला रहा है.‌ तथागत इनके पिछे पिछे आनेवाला, वह एक शिष्य है.)

    तथागत ने *"तिन बंदर"* बतायें थे. जो विदेश के बुध्द विहार में शीला पर अंकित है. जो बाद में *"गांधी के तिन बंदर"* नाम से प्रचलित हुये है. वह तिन बंदर *मोहनदास गांधी की चोरी* है या, मिडिया का झुटा प्रचार था ? यह संशोधन का विषय है. पर वह तिन बंदर दर्शाते थे कि - *"बुरा मत बोलो / बुरा मत देखों / बुरा मत सुनों !"* परंतु अभी के यह तिन बंदर, जो एक अदृश्य तिसरा भी एक बंदर है, महाठग *नितिन गजभीये,* जो गगन मलिक द्वारा विदेशों से, *"मुफ्त में जो धातु (मेटल) की बुध्द मुर्तीयां लायी जाती है, वह अवैध रूप सें भारत में बेचने का, एक बडा दलाल है."* और कुछ जगहों पर, उस बंदरों ने जो नौ इंच की *"प्लास्टर ऑफ पेरिस"* (धातु की नही) की, थोडी सी बुध्द मुर्तीया बांटकर, मिडिया से वाहवा ले रहे है. अर्थात *"दुनिया झुकती है, केवल झुकानेवाला चाहिये."* यह उन तिन बंदरों का मंत्र है. जो इस प्रकार है - *"झुट बोलो / झुटा काम करो / और झुट ही देखो."*

    *"झुट के तिन बंदरों"* का "आंतरराष्ट्रिय बौध्द परिषद" के *आयोजन झुटगिरी* भी अजोबो गरिब है. लोकमत दिनांक ११ अक्तूबर २०२२ के अंक मे, मुख्यमंत्री / उपमुख्यमंत्री से लेकर भाजपा / कांग्रेस / रिपब्लीकन नेताओं को निमंत्रित करने की तथा वह कार्यक्रम *"कविवर्य सुरेश भट"* इस दो हजार लोगों के कैपेसिटी का, सभी सुविधा युक्त *वातानुकुलित सभागृह* में आयोजित किया गया था. परंतु लोगों का भारी विरोध होने से, दो हजार लोग आना असंभवसा देखकर, वर्षा के कारण वहां सुविधा देना असंभव बताकर, पहला झुट बोला गया. दुसरा झुट - किसी राजनीतिक नेताओं को नही निमंत्रित किया गया, यह था. तिसरा झुट - उन्हे कोई बौध्द विचारविद ना मिलना दिखाई देता है.‌ अर्थात वे तिन बंदर आयोजक बहुत बडे विचारविद हो. चवथा झुट - नागपुर विद्यापीठ का वह कार्यक्रम होने से, प्रोटोकाल के अनुसार  उपकुलपती *डा सुभाष चौधरी* इस अबौध्द को परिषद का अध्यक्ष बनाना है. जब की वह कार्यक्रम गगन मलिक फाऊंडेशन का है. नागपुर विद्यापीठ का नही है. नागपुर विद्यापीठ के किस सभा में, सदर आयोजन का मंजुरी दी तथा बजेट में क्या कोई प्रावधान ना बताना, यह पाचवा सफेद झुट है. *"होटल सेंटर पाईंट"* मे केवल ३०० - ४०० लोगों की व्यवस्था करना संभव है. इस तरह अपने झुट को छुपाना, और परिषद में इज्जत का फालुदा ना हो, इस तरह का प्रयोजन किया गया है.

      अब सवाल यह है कि, क्या हमारा *"भिक्खुसंघ एवं बौध्द संघटनाएं,"* इस झुटगिरी के विरोध में, आवाज उठायेंगे...? महत्वपुर्ण विषय यह कि, सदर परिषद के विरोध में, जो प्रश्न उठायें गये थे, उस का उत्तर किसी भी आयोजकों ने, जनता के सामने नही रखा है. बस, केवल मुजोरी है. क्या हम उन तिन बंदरों के मुजोरी को, युं ही झेलना चाहिये. यह भी प्रश्न है. और इस *"चाटुगिरी परिषद"* का भी समाचार लिया जाएगा ...? इस आप के प्रतिक्रिया में...!


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🌹 *इंदुताई फुलेकर शिक्षण संस्था की ओर से शिक्षक सत्कार समारोह का सफल आयोजन तुमसर में संपन्न...!*


    इंदुताई शिक्षण संस्था की ओर से इंदुताई मेमोरिअल हायस्कुल तथा महाविद्यालय परिसर तुमसर में, *"शिक्षक सत्कार समारोह"* का आयोजन "धम्म चक्र प्रवर्तन दिन" के उपलक्ष में, शनिवार दिनांक १ अक्तूबर २०२२ को आयोजित किया गया. सदर समारोह का उदघाटन - नगर परिषद तुमसर के मुख्याधिकारी *मा. सिध्दार्थ मेश्राम* इनके हाथों तथा *डा. सच्चिदानंद फुलेकर* इनकी अध्यक्षता में संपन्न हुआ. उस अवसर पर *माजी सांसद - मधुकर कुकडे* / *विधायक - बाबुलाल वाघमारे* / इंदुताई संस्था की अध्यक्षा - *मा. विद्याताई फुलेकर* (माजी नगरसेविका, तुमसर) / *डा. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* (राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल) / *डा.‌ एम.‌ एस. राजन* (डायरेक्टर तथा प्राचार्य, सेंट्रल लॉ कॉलेज) / *पत्रकार - प्रभाकर दुपारे* / *श्रीमती करुणा मेश्राम* आदी मान्यवर,  उस अवसर पर उपस्थित थे. उस अवसर पर बहुत सारे शिक्षक, कर्मचारी तथा विद्यार्थी वर्ग की उपस्थिती थी. और वह समारोह बहुत सफल रहा है.