Sunday, 25 January 2026

 🇮🇳  *प्रजासत्ताक भारत ...?*

        *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*

        मो. न. ९३७०९८४१३८


२६ जनवरी १९५०

प्रजासत्ताक भारत ?

केवल भारत देश ही हुआ 

भारत की आम प्रजा नहीं

तो प्रजा का शासन

यह बहुत दुर की कवडी है

प्राचिन भारत की गुलामी

पहले ब्राह्मणशाही की थी

फिर मुस्लिम आंक्रांताओं की

गोरे अंग्रेज आदि शासन की 

फिर से काले अंग्रेजो की

अर्थात ब्राह्मणशाही की

अब काले अंग्रेजो के साथ साथ

पुंजीवादी व्यवस्था की

भारत पर गुलामी चल रही है 

भारत की प्रजा खामोश है

बुद्ध शासन काल का सवर्ण युग

अशोक आदी चक्रवर्ती सम्राट 

आज भारत में ढुंड रहे है

हमने वो दिन अब देखे ही नहीं ...

१५ अगस्त १९४७

गुलाम भारत देश

सचमुच पुरा आझाद हुआ है

या वह सत्ता का हस्तांतरण था ?

यह प्रश्न हमेशा का रहा है 

यहां प्रेम करने का भी

प्रजासत्ताक शेष नहीं है

लव्ह जिहाद के नाम पर

कटनी दिखाई देती है

गरिबी बेकारी भुखमरी वेश्यापन

इन वेदनागत समस्याओं की

खुली दुकानदारी लगी है

ग्राहक यहां इंतजार में है...

२६ नवंबर १९४९

भारत का संविधान दिन

संविधान सभा अंतिम दिन में

बाबासाहेब डॉ आंबेडकर 

हमें चेतावणी दे गये है 

बुद्ध प्रजातंत्र शासन इतिहास 

देश को वो बता गये है 

एवं पुनश्च भारत गुलाम होने का

इशारा भी हमें दे चुके है 

तब संविधान सभा खामोश थी

चिंतित थी भविष्य के बारे में

आज बाबासाहेब की चेतावणी

सही होते दिख रही है 

कांग्रेस पितामह मोहनदास गांधी 

प्राचिन विचारविद भर्तृहरी 

तत्कालीन संघवादी के सुदर्शन 

कालातित इनके खुले शब्दों में 

भारत की सत्ता व्यवस्था 

यह वेश्यालय बनी हुयी है

अब सत्ताधारी या विपक्षी दल

तमाम भारतीय नेताओं को 

कालातित उन तिन नेताओं के 

खास शब्दों में हम क्या कहे ?

वेश्या दलाल या और कुछ ???


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नागपुर दिनांक २५ जनवरी २०२६

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