Monday, 28 January 2019

👌 *बुद्ध की यहां धुन है...!*
       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
         मो. न. ९३७०९८४१३८

हे यहां धुम धुम है
बुद्ध की यहाँ धुन है
बुद्धं सरणं गच्छामी
धम्मं सरणं गच्छामी
संघ सरणं गच्छामी...

तन यहां बुध्द का है
मन यहां बुध्द का है
घोष यहां बुध्द का है
राज यहां बुध्द का है
यहां सब बुध्द का है...

शील यहां बुध्द का है
रुप यहां बुध्द का है
वाद यहां बुध्द का है
साज यहां बुध्द का है
यहां धम्म बुध्द का है...

घर यहां बुध्द का है
दार यहां बुध्द का है
वार यहां बुध्द का है
सार यहां बुध्द का है
यहां जग बुध्द का है...

* * * * * * * * * * * * * *

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