Sunday, 20 January 2019

🌹 *बुद्ध का अहसास हो जाए....!*
              *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
               मो. न. ९३७०९८४१३८

ये जरुरी नहीं की, प्यार में ये बरबाद हो जाए
हां यह जरुरी है कि, बुद्ध का अहसास हो जाए...

जब कोई अपनी मंज़िल, खोजे निकल पडे हो
वो कोई आसान नही कि, सहजता से मिल जाए
तुम्हे जलना है उस में हीं, आग के वो दोस्ती पर
सुरज को भी तुम्हे अपना, एक दोस्त बनाना है...

हां यह भी सही है कि, वफादारों की कमी है यहां
पर उसे डरना ही क्यौं, यारों का यार बन कर
दिवाली के उस अंधेरे मे, भीम रोशनी उजाले का
भारत के आवाम को, एक नया दामन देना है...

सिध्दार्थ तो घर छोड चले, बुद्ध बनने की ओर
देवदत्त का धरती पर आना भी, युं ही नही था
मंजिल को आसानी से पार करें, ये क्या जिंदगी है
विशाल पाषाणों से लढना ही, भीम का वो लहु है...

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