Wednesday, 23 January 2019

🤝 *अगर हम साथ होते....!*
              *डॉ. मिलिन्द जीवने शाक्य'*
               मो. न. ९३७०९८४१३८

अगर हम साथ होते, वो राज पथ पर
निल भीम निशान होता, शान से दिल वाला...

ये दिल युं ही तोडे, हम ऐसे बिखर कर
ना कोई गम बचा हो, जो हमे युं जोड पाला
सत्ता खाने तुकडों पर, वो भीख लाचारी ने
अब्रू को युं ही बेचकर, बना ये कोठे वाला...

लालच की नशा में, हम युं ही धुत होकर
हमारे स्वयं सत्व को, ऐसे ही युं बेच डाला
वो रुढीं वस्त्रहरण मे, दाव युं लगा कर
अपनों को बेच कर, ना रहा तु भीम वाला...

ये संसार जन मन भी, बुद्ध के पथ पर
अागे ओर वो बढता, दिखता युं सुख वाला
तुम गंदगी भावों का, युं दामन थाम कर
वो विशाल भारत को, तुकडों मे बेच डाला...

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     ( *भारत राष्ट्रवाद की याद में...!*)

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