👌 *चले हम बुध्द के संग ...!*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य', नागपुर*
मो.न.९३७०९८४१३८,९२२५२२६९२२
हे मेरे निल दिपकली, तु ही मेरा सच्चा प्यार हो
चले हम बुध्द के संग, यही हमारा मिशन हो ...
निल अंबर उस छाया में, तुम जब खिलती हो
स्मित देकर तुम मुझे, अपनी ओर बुलाती हो
छुकर वो स्पर्श तुम्हारा, स्व: अहसास कराती हो
मेरे अनमोल प्यार को, संगित साज सजाती हो ...
वर्षा का आना भी, आनंद जगत हमे ले जाता हो
मेरे अंदर के दर्द को, तुम प्यार से भुलाती हो
हरियाली वादियों मे, तुम घुमाने युं ले जाती हो
जीवन का नया गीत, लिखने को मुझे कहती हो ...
हे तितली युं आते ही, जब तुम साथ बैठते हो
गले तुम्हे लगाते ही, मुझे मेरा रूप दिखाती हो
संसार युं चले बार बार, अपनी ही वो यादें हो
जीवन का वह शुध्द गण, बुध्द का एक सार हो ...
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*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य', नागपुर*
मो.न.९३७०९८४१३८,९२२५२२६९२२
हे मेरे निल दिपकली, तु ही मेरा सच्चा प्यार हो
चले हम बुध्द के संग, यही हमारा मिशन हो ...
निल अंबर उस छाया में, तुम जब खिलती हो
स्मित देकर तुम मुझे, अपनी ओर बुलाती हो
छुकर वो स्पर्श तुम्हारा, स्व: अहसास कराती हो
मेरे अनमोल प्यार को, संगित साज सजाती हो ...
वर्षा का आना भी, आनंद जगत हमे ले जाता हो
मेरे अंदर के दर्द को, तुम प्यार से भुलाती हो
हरियाली वादियों मे, तुम घुमाने युं ले जाती हो
जीवन का नया गीत, लिखने को मुझे कहती हो ...
हे तितली युं आते ही, जब तुम साथ बैठते हो
गले तुम्हे लगाते ही, मुझे मेरा रूप दिखाती हो
संसार युं चले बार बार, अपनी ही वो यादें हो
जीवन का वह शुध्द गण, बुध्द का एक सार हो ...
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