➰ *पुंजीवादी अमेरिका टेरीफ वार राजनीति ने वैश्विक बाज़ार में मंदी की छाया !* (भारतीय अर्थव्यवस्था खस्ताहाली में बेरोजगारी संकट )
*डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य',* नागपुर १७
राष्ट्रिय अध्यक्ष, सिव्हिल राईट्स प्रोटेक्शन सेल
एक्स व्हिजिटिंग प्रोफेसर, डॉ बी आर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ महु म प्र
मो. न. ९३७०९८४१३८, ९२२५२२६९२२
अमेरिका में पुंजीवादी - *डोनाल्ड ट्रम्प* इनका, राष्ट्राध्यक्ष इस पद पर, विराजमान हो जाना, वही विश्व का सबसे अमिर शख्स तथा अमेरिका के अध्यक्ष का सबसे वरिष्ठ सल्लागार *मि. एलेन मस्क* इनका प्रभाव बढ जाने पर, समस्त विश्व में *"पुंजीवाद"* (Capitalism) की निरंकुश सत्ता का बिगुल फुक गया. और डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व के कुछ देश - *"कॅनडा / मेक्सिको / चायना / भारत"* आदी देशों पर, *"टेरिफ"* (अतिरिक्त आयात शुल्क) लगाने की घोषणा की. भारत प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* इन्होने, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प इनको उत्तर देने की हिम्मत नहीं की. वही *"रशिया - युक्रेन युद्ध"* तथा *"खाडी युध्द"* चल रहा है. और अमेरिका ने रशिया से मित्रता (चायना से निपटने हेतु) का हाथ बढाने से, *डोनाल्ड ट्रम्प* इन्होने ने युक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष *मि. झेलेन्की* को, सभी के सामने *"युध्द बंद करने"* को कहा है. तब झेलेन्की ने डोनाल्ड ट्रम्प इनको जो जबाब दिया है, वह तो काबिले-ए-तारिफ है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दा. मोदी को एक सबक भी है. *"युध्द बंदी घोषणा"* यह कभी भी, एक पक्ष द्वारा नहीं की जाती. दोनो पक्षों के बीच करार हौता है. यहां तो अमेरिका दादागिरी कर रहा है. और भारत खामोश है. अमेरिका को *"कॅनडा / मेक्सिको / चायना"* इन्होने तो उत्तर दिया है. चायना ने तो *"ट्रेड वार"*(व्यापार युद्ध) से लेकरं, कोई भी *"युध्द"* (Any War) के लिये तैयार है, यह खुली चेतावणी दी है. विश्व के बहुत से देश, ये चायना के साथ खडे है. इस कारणवश, डोनाल्ड ट्रम्प *"टेरिफ"* लागु करने का अवधी, आगे बढाते जा रहा है. डोनाल्ड ट्रम्प के इस घोषणा का असर, *"अमेरिका अर्थव्यवस्था / अमेरिका बाजार"* पर गिर पडा. *"शेअर्स"* निचे गिरते जा रहे है. और अमेरिका में *"मंदी का दौर"* सुरू हो गया. उसका बूरा असर *"विश्व के अर्थव्यवस्था"* पर हो जाना, बहुत लाजमी है. और भारत इससे अछूता नहीं है. भारत का *"शेअर बाजार"* पिछले छ: माह से, गिरते जा रहा है. निवेशकों के करोडों रुपये डुबे है. महंगाई / बेरोजगारी बहुत चरम पर है. और हम *"होली और रमझान विवाद"* में मदमस्त है.
अमेरिका तो *"पुंजीवादी अर्थव्यवस्था देश"* है. वहां का पुंजीवाद (Capitalism) किस पुंजीवाद में करवट लेगा, यह भी गुढ प्रश्न है. जैसे - शुध्द पुंजीवाद (Pure Capitalism) / कठोर पुंजीवाद (Hard Capitalism) / नरम पुंजीवाद (Soft Capitalism) / नग्न पुंजीवाद (Naked Capitalism) / निगराणी पुंजीवाद (Surveillance Capitalism) / सहचर पुंजीवाद (Crony Capitalism ), पुंजीवादी *एलेन मस्क* इन्होने तो, अमेरिका की मंदी अर्थव्यवस्था दौर में एक बडा बयाण दिया कि, *"हम सरकारी खर्चो पर कटौती करेंगे."* परंतु बाकी मनमानी खर्चों का क्या ? और अमेरिका *"सहचर पुंजीवाद"* (Crony Capitalism) की ओर बढते हुये नज़र आ रहा है. वही *"वैश्विकरण"* (Globalization) यह समस्त देशों पर लादनेवाला, पुंजीवाद प्रभावी अमेरिका अब *"वि-वैश्विकरण वा भुमंडलीकरण"* (Deglobalization) की बात कर रहा है. अर्थात यह एक ऐसी प्रक्रिया है कि, जहां दुनिया भर के देशों के बीच पहले से ही मौजुद *"आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक एकीकरण"* में कमी आने लगती है. परंतु क्या *"पुंजीवादी व्यवस्था"* में वैश्विकरण इस भाव से भुमंडलीकरण में जाना, उचित पर्याय हो सकता है ? यह अहं सवाल है. यही समान ही आर्थिक स्थिती भारत की है. *नरेंद्र मोदी* भाजपा सरकार ने, समस्त *"सरकारी उपक्रम"* (PSU) निजी कंपनीयों (Private Company) के हाथो में बेचना शुरु किया. अगर *"सरकारीकरण"* का *"निजिकरण"*.हुआ तो, *संसद* यह किस पर सत्ता / शासन करेगी ? *"प्रजातंत्र"* यह बचा कहा है ? पुंजीवादी प्रतिनिधी बगैर IAS परिक्षा दिये, केंद्र सरकार में *"सचिव"* बने है. भारत की *"न्याय व्यवस्था"* खामोश है. जब की *"संविधान"* की कस्टोडियन *"सर्वोच्च न्यायालय"* है. वह *"वॉच डॉग"* है. क्यौं कि न्याय व्यवस्था में, *"लायक मेरिट न्यायाधीश"* कहां नियुक्त होते है. वे भी तो *"कोलोजियम सिस्टिम"* द्वारा पिछले दरवाजे से आते है. UPSC समान *"न्यायाधीश नियुक्ती आयोग"* गठण होना जरुरी है. *"भारत का संविधान "* यह केवल एक किताब बन रह गया.
अभी अभी अमेरीकी उद्योगपती *एलेन मस्क* इस की कंपनी *"स्टार लिंक"* ने, भारतीय इंटरनेट कंपनी *"एयरटेल"* से, दिनांक ११ मार्च २०२५ को *"जाईंट व्हेंचर"* करार किया है. वही रिलायन्स *"जीओ"* ने भी दिनांक १२ मार्च २०२५ को करार किया है. हमे यह समझना होगा कि, एलेन मस्क की कंपनी *"स्पेसएक्स"* यह तो सैटलाईट इंटरनेट से जुडी कंपनी है. अभी हमारे मोबाईल की कमान *"अमेरिका"* के ही हाथों होगी. एलेन मस्क की कपंनी *"युक्रेन"* को भी इंटरनेट सेवा दे रही है. *युक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष* झेलेन्की इनका डोनाल्ड ट्रम्प से विवाद हो गया. *एलेन मस्क* ने युक्रेन को धमकी है कि, *"अगर अमेरिका की बात नहीं मानी तो, युक्रेन की इंटरनेट सेवा बंद करेंगे."* बगैर इंटरनेट सेवा से देश की व्यवस्था चलाई नहीं जा सकती. नरेंद्र मोदी सरकार ने *"BSNL इस नफेवाली"* सरकारी कंपनी को, अंबानी के *"जियो"* को लाभ करने के लिये, BSNL घाटे में लाकर मृतप्राय किया था. आज तक तो रिलायन्स के *"शेअर"* भी ढलान पर थे. वही एलेन मस्क की *"टेस्ला कंपनी"* भी, कुछ दिनों में भारत में लॉन्च होगी. अमेरिका में *"टेस्ला कंपनी"* के शेअर ढलान पर होने पर, डोनाल्ड ट्रम्प ने टेस्ला कार खरेदने की पेशकश की. दुसरी अमेरिका कंपनी *"ब्लॅक रॉक तथा ब्लॅक स्टोन"* इन्होने भारतीय उद्योगपती *"अडानी - अंबानी"* इनसे भी करार करने की चर्चा है. साथ ही *अडानी* इन्होने ब्लॅक रॉक कंपनी से, *"७५ करोड डॉलर कर्ज"* लेने की भी चर्चा है. *अडानी* इन्होने भारतीय बॅंको को चुना लगाया है. नरेंद्र मोदी ने *२२ उद्योपती वर्ग* के *"१६,००० लाख करोड"* कर्ज माफ करने की चर्चा है. यह पैसा तो *"भारतीय लोगों के टॅक्स"* का पैसा है. *एयरटेल* के अमेरिका कंपनी से भागिदारी ने, *"टाटा मोटर्स एवं रिलायन्स जियो"* में फायनान्स भागिदारी हुयी है. और स्टार लिंक से करार नहीं हुआ होता तो, *"जियो का हाल"* यह BSNL समान होना तय था. *चायना* ने एक लाख चिप वाला *सुपर कॉम्प्युटर"* बनाने की चर्चा है. और २०२५ मे, और उस में *"एक लाख चीप"* लगाने का लक्ष है. *"भारत को तो १०,००० चीप भी नज़र नहीं आ रही है."* अर्थात चायना यह *"अमेरिका"* को टक्कर दे रहा है. अर्थव्यवस्था को भी मजबुत कर रहा है. अमेरिका का अगला कदम *"क्रिप्टो करंसी"* होगा. अमेरिकी *"डॉलर"* की तुलना में, भारत का *"रूपया"* मुल्य डाऊन है. *"क्रिप्टो करंसी "* के आने पर *"रुपया"* का और गिरनार तय है. यह स्थिती होने पर भी, भारत *"विश्व गुरु"* बनने का बडा दंभ भर रहा है. अगर भारत की सभी की सभी स्थिती (भारत की संपत्ती से लेकरं), अमेरिका के हाथो गयी तो, भारत की *"तिसरी गुलामी'* पास नज़र आ रही है. अर्थात *"पुंजीवाद का शासन."* भारत के *"प्रजातंत्र की कबर,"* अब बहुत पास दिखाई देती है. वही अमेरिकी *"टेरिफ वार"* (टेरिफ युध्द) ने, विश्व में *"तिसरा महायुध्द"* की जंग छेड दी है. तब भारत की आर्थिक स्थिती यह, *"पाकिस्तान / श्रीलंका / बांगला देश"* समान होना तय है.
विश्व के बहुसंख्य देश यह *"कर्ज में डुबे"* हुये है. भारत पर *"विदेशी कर्ज"* के बारें में, क्या कहे ? *" वर्ल्ड ट्रेड आर्गनायझेशन"* (WTO) यह महत्वपूर्ण व्यापारी - वाणिज्यक संघटन है. अमेरिका ने ही उसके नियम बनाने की चर्चा है. अमेरिका ने *"WTO को मृतप्राय अवस्था"* में लाकर खडा किया है. वही अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने आशियाई संघटन *"BRICS"* मरने का बयाण दिया है. *"NATO"* देश भी अमेरिका को ललकार रहे है. क्या भविष्य में *"नाटो हो या ब्रिक्स"* यह आंतरराष्ट्रीय संघटन खत्म होगा ? यह प्रश्न है. *डोनाल्ड ट्रम्प* की मनमानी से, अमेरिका की *"घरेलु अर्थव्यवस्था"* भी चरमरा गयी है. वही स्थिती विश्व के अन्य देशों की है. अमेरिका यह *"मंदी के दौर"* से भी गुजर रहा है. भारत में *नरेंद्र मोदी की पुंजीवादी पॉलिसी* ने, देश को *"बदतर स्थिती"* में लाया है. भारतीय अर्थव्यवस्था / शेअर बाजार / घरेलु बाजार *"मंदी"* से गुजर रहा है. बेरोजगारी - बेकारी - भुखमरी का दुःखी आलम है. भारत के *"मंदिर अर्थनीति"* का, *"देश के विकास"* में योगदान क्या ? भारत आर्थिक संकट में है. फिर भी, नरेंद्र मोदी *"मंदिरो का राष्ट्रियकरण,"* क्यौं नहीं कर पा रहे है ? तत्कालीन पंतप्रधान *इंदिरा गांधी* इन्होने *बॅंको का राष्ट्रियकरणं"* कराकर, *"पुंजीवाद व्यवस्था "* की जडे कमजोर की थी. और सामान्य लोगों के *"विकास रास्ते"* खुले किये थे. *जवाहरलाल नेहरू* इनकी विदेश नीति कुछ गलत भी रही. जैसे - *"तिब्बत"* की स्वतंत्रता. तिब्बत को चायना के अधिन करना. *डॉ बाबासाहेब आंबेडकर* इन्होने नेहरू के इस नीति का विरोध किया था. परंतु आजादी के बाद, नेहरू की *"अर्थनीति"* को दोष देना उचित नहीं है. अगले हप्ते ओमान खाडी के *"चाबहार बंदरगाह"* में, चायना - रूस यह दो प्रभावी देश, *"नौसेनिक अभ्यास"* करने जा रहे है. और तो और छ: देश - युनायटेड अरब अमिरात (UAE) / मिडल इस्ट के कतार / इराक / पाकिस्तान / श्रीलंका इन देशों को निमंत्रित भी किया है. *भारत* को निमंत्रित नहीं किया गया. भारत का कोई पडोसी देश *"खास मित्र"* नहीं रहा. *"उत्तर कोरिया"* भी चायना के साथ ही है. सवाल यहां तो *"दक्षिण कोरिया"* का है. *"जापान"* के भी अर्थव्यवस्था पर फरक पडा है. *"चायना के साथ साथ ही जापान"* ने भी, *"डॉलर"* बेचने की बडी चर्चा है. अर्थात *अमेरिका* को यह एक बडी चेतावणी है. वही *"फ्रांस और जर्मनी"* को भी एक बडा संदेश है. वह *"तिसरे महायुध्द"* की एक ललकार है. देश के विकास में *"करंसी मुल्य / टेक्नॉलॉजी / इंटरनेट सेवा"* बहुत मायने रखती है. हमारे पास हमारा अपना अब क्या बचा है ? यहाँ सवाल भारत का भी है. भारत खामोश है. नरेंद्र मोदी भी खामोश है. भारत का भविष्य ???
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▪️ *डॉ मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
नागपुर दिनांक १२ मार्च २०२५
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