👌 *धम्मवादी - इंजी. विजय मेश्राम - डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' इनकी राजगृह बंगले पर धम्म चर्चा!*
*इंजी. विजय मेश्राम* (IRRS) - Retd. Addl. Member of Railway Board & Additional Secretary to Government of India, Indian Railway (Retd.) एवं जागतिक बौद्ध परिषद के अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इन दोनों धम्म क्षेत्र में कार्यरत विचारवंत, आज दिनांक १६ अप्रेल २०१९ को इंजी. मेश्राम इनके टी पाईंट, नागपुर स्थित "राजगृह" बंगले पर, धम्म संदर्भ में बहुत सारी चर्चा की. तथा बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर इनके द्वारा स्थापित *"दि बुध्दीस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया*" के एकीकरण - सशक्तीकरण - दिशाकरण आदी पर भी अच्छी चर्चा की. इंजी. मेश्राम जी ने *"दि बुध्दा एंड हिज धम्मा"* यह ग्रंथ ए-फोर साईज और बुध्द के जीवन पर कलर फोटोग्राफ डालकर, ७२४ पेज का धम्मग्रंथ, जिसका बाजार मुल्य २५०० - ३५००/- आसपास होगी, वह बुध्द विहार को विनामुल्य देते है. और आज तक ४५० विहारो़ को वे दे चुके है. इतना ही नही साधारण साईज मे भी "दि बुध्दा एंड हिज धम्मा" यह ग्रंथ मोफत देते है. वही उन्होने मेरे द्वारा किये जा रहे "मोफत धम्म ग्रंथ वितरण" की उन्होने प्रशंसा की. साथ ही मेरे नेतृत्व में आयोजित *"जागतिक बौद्ध परिषद "* के बारें में अधिक जानकारी ली. बाद में उनके बंगले के लॉन में स्थापित तथागत को अभिवादन कर, वे बाहर निकल पडे.
*इंजी. विजय मेश्राम* (IRRS) - Retd. Addl. Member of Railway Board & Additional Secretary to Government of India, Indian Railway (Retd.) एवं जागतिक बौद्ध परिषद के अध्यक्ष *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'* इन दोनों धम्म क्षेत्र में कार्यरत विचारवंत, आज दिनांक १६ अप्रेल २०१९ को इंजी. मेश्राम इनके टी पाईंट, नागपुर स्थित "राजगृह" बंगले पर, धम्म संदर्भ में बहुत सारी चर्चा की. तथा बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर इनके द्वारा स्थापित *"दि बुध्दीस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया*" के एकीकरण - सशक्तीकरण - दिशाकरण आदी पर भी अच्छी चर्चा की. इंजी. मेश्राम जी ने *"दि बुध्दा एंड हिज धम्मा"* यह ग्रंथ ए-फोर साईज और बुध्द के जीवन पर कलर फोटोग्राफ डालकर, ७२४ पेज का धम्मग्रंथ, जिसका बाजार मुल्य २५०० - ३५००/- आसपास होगी, वह बुध्द विहार को विनामुल्य देते है. और आज तक ४५० विहारो़ को वे दे चुके है. इतना ही नही साधारण साईज मे भी "दि बुध्दा एंड हिज धम्मा" यह ग्रंथ मोफत देते है. वही उन्होने मेरे द्वारा किये जा रहे "मोफत धम्म ग्रंथ वितरण" की उन्होने प्रशंसा की. साथ ही मेरे नेतृत्व में आयोजित *"जागतिक बौद्ध परिषद "* के बारें में अधिक जानकारी ली. बाद में उनके बंगले के लॉन में स्थापित तथागत को अभिवादन कर, वे बाहर निकल पडे.
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