Thursday, 14 March 2019

🦋 *माय लव्ह बर्ड....!*
       *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
        मो. न. ९३७०९८४१३८

वो सुंदरसा
छोटासा
प्यारासा
नटखट वो पंछी
मेरे बगिचें में
अकसर
केवल एक ही
फुल पौंधे पर
बैठे दिखते रहता है...
वो उन फुलों का
आनंद लेता है
वफा भी उसी से
करते दिखता है
ना उसे छोडता है
बस, रोज की
अपनी जिम्मेदारी
वह निभाते जाता है
यही कारण
मै उसे "माय लव्ह बर्ड"
कहता हुं....!
वही ये आदमी
देववाद में पागल होकर
जानवर के लिए
आदमी को हत्या
कर जाता है
बुद्ध के प्रेम संज्ञा को
वो भुल जाता है
ना वफा है
ना इमानदारी
बस, यह सब मेरा है
इन विचार भावना में बहकर
माय लव्ह बर्ड का
शिकार कर जाता है...!
वही मै दुसरे दिन
उसी फुल पौंधे के पास
देखने जाता हूं
वो "माय लव्ह बर्ड"
मुझे दिखाई पडता है
शायद पुष्यमित्र के
उस कु-षडयंत्र का असर
किसी पिढी को नष्ट करने में
असफल दिखाई देता है
फिर ये विचारवादी मानव
सत्तावाद में गुलाम क्यों...???
इस प्रश्न का उत्तर
अाज भी.....!!!!!

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