Sunday, 8 July 2018

😴 *शांती की तलाश में ...!*
            *डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
             मो.न. ९३७०९८४१३८

अशांती
हिंसा का जागर
खुदगर्जीता
यही जिंदगी बसर कर
हम चल पडे
विकास भारत (?) की ओर ...!
वही
उस मोड पर देखा
ना प्रेम है
ना अपनापन है
बस अपनी ही धुंद है
आगे आगे बढने की ...!
यह देखकर
मै थकसा गया हुँ
संघर्ष भी करे
पर किस विरोध में ?
यहाँ तो हर कोई
सिकंदर बन गया है ...!
बुध्द
युं ही नही कहते
दु:ख है
दु:ख का कारण है
दु:ख का निदान है
दु:ख का निवारण भी है ...!!!
क्या हम
इस द्वंद्व अराजकता में
हमारे अपने जिंदगी को
खुशयाली, हरियाली की ओर
ले जाने मे सफल हुये है ?
बस, केवल एक ही सत्य पथ है
बुध्द पथ ...!!!
चले ...
हम निकल पडे
उस दिशा में
एक नयी चाह लेकर
दुर ... बहुत दुर
सम्यक मार्ग की ओर
शांती की तलाश में ...!!!!!

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