💧 *मै तेरे एक बूंद को तरसा हुं...!*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य', नागपूर*
मो. न. ९३७०९८४१३८
ये कुदरत को हम युं कुचल चले
अरे मै तेरे एक बूंद को तरसा हुं....
ये नदी झरनों को युं ही तु रोक दिया
तेरा वो गुस्सा भी ना कभी नाजायज था
हम ने भी कहां तुम से सही वफा कि
तेरे दिलदारी को युं ही ठुकरा दिया....
ये सत्ता ने भी तुम से गंदा खेल खेला
उसे रोकना ना मेरे अधिकार में था
बस सहते चले युं ही गलतियों को
आज तेरे उस शक्ती का अंदाज मिला....
ये करुणा सागर बुध्द को भुल चले
युं हिंसा तांडवो का अधम नाच किया
आज सही तेरे वो प्यार की याद आई
युं तुम लौटकर आयें तो दिल खिले....
* * * * * * * * * * * * * * * * * * * *
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य', नागपूर*
मो. न. ९३७०९८४१३८
ये कुदरत को हम युं कुचल चले
अरे मै तेरे एक बूंद को तरसा हुं....
ये नदी झरनों को युं ही तु रोक दिया
तेरा वो गुस्सा भी ना कभी नाजायज था
हम ने भी कहां तुम से सही वफा कि
तेरे दिलदारी को युं ही ठुकरा दिया....
ये सत्ता ने भी तुम से गंदा खेल खेला
उसे रोकना ना मेरे अधिकार में था
बस सहते चले युं ही गलतियों को
आज तेरे उस शक्ती का अंदाज मिला....
ये करुणा सागर बुध्द को भुल चले
युं हिंसा तांडवो का अधम नाच किया
आज सही तेरे वो प्यार की याद आई
युं तुम लौटकर आयें तो दिल खिले....
* * * * * * * * * * * * * * * * * * * *
No comments:
Post a Comment