🌹 *वो बुद्ध तराना है....!*
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो. न. ९३७०९८४१३८
पतझड़ मौसम, एक बहाना है
नव जीवन का, वो बुध्द तराना है...
इन हवा के झोकों से, युं गिरना है
पत्तियों के समुंदर में, खो जाना है
उस में चलने से, आवाज होना है
मेरे प्यार का संदेश, युं दे आना है...
तितली के संग, युं गुंज करना है
इन फूलों के गंधों मे, रम जाना हैै
प्यार के सावन पर, युं बुलाना है
हे चले जाकर, नया लुक देना है...
इन जन मन का, वो गीत गाना है
आसुं के समुंदर से, उठ आना है
तेरे अस्तित्व के बिना, ये तो सुना है
हे जग मां सृष्टि, वां ये खुब बाना है...
* * * * * * * * * * * * * * * * * * *
*डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य'*
मो. न. ९३७०९८४१३८
पतझड़ मौसम, एक बहाना है
नव जीवन का, वो बुध्द तराना है...
इन हवा के झोकों से, युं गिरना है
पत्तियों के समुंदर में, खो जाना है
उस में चलने से, आवाज होना है
मेरे प्यार का संदेश, युं दे आना है...
तितली के संग, युं गुंज करना है
इन फूलों के गंधों मे, रम जाना हैै
प्यार के सावन पर, युं बुलाना है
हे चले जाकर, नया लुक देना है...
इन जन मन का, वो गीत गाना है
आसुं के समुंदर से, उठ आना है
तेरे अस्तित्व के बिना, ये तो सुना है
हे जग मां सृष्टि, वां ये खुब बाना है...
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